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खरमोर अभयारण्य में 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन पर सख्त कार्रवाई की बजाय सिर्फ पंचनामा—महज औपचारिकता!




 



भूमिगत के बाद भी ओवरहेड टावर पर वन विभाग की चुप्पी क्यों?

 मोहन सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाते वन विभाग के अधिकारी! 

   सरदारपुर, धार। खरमोर अभयारण्य में 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन को भूमिगत करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक गलती के कारण इसे ओवरहेड कर दिया गया। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 80वीं बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अभयारण्य क्षेत्र में लाइन भूमिगत होगी, लेकिन मध्यप्रदेश वन विभाग की एक त्रुटि के चलते आदेश की प्रतिलिपि में "ओवरहेड" शब्द जुड़ गया, जिससे किसानों और प्रशासन में भ्रम की स्थिति बन गई।  

   बताया जा रहा है कि किसानों का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के निजी एजेंसी ने उनके खेतों में चूना डालकर जबरन निर्माण कार्य शुरू कर दिया। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि एजेंसी ने उन्हें गुमराह कर वन विभाग का गलत आदेश दिखाया और सहमति लेने की कोशिश की।  

   बुधवार को मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने पंचनामा तैयार किया और ओवरहेड लाइन के टावरों की तस्वीरें व वीडियो रिकॉर्ड किए। वन विभाग के डिप्टी रेंजर अमन सिंह टेगौर और वनरक्षक रमेश मेड़ा ने निरीक्षण किया और बताया कि आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार होगी।  

  अब सवाल यह उठता है कि जब प्रशासनिक गलती स्पष्ट हो चुकी है, तो वन विभाग ने इसे सुधारने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? किसानों की शिकायतों के बावजूद ओवरहेड निर्माण को रोका क्यों नहीं गया?  

  सूत्रों के अनुसार, यदि इस गलती को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया और भूमिगत ट्रांसमिशन लाइन की अनुमति के अनुसार कार्यवाही नहीं हुई, तो किसान उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का रुख कर सकते हैं।

Honest Vikky: प्रसिद्ध YouTuber की यात्रा, छोटी मानसिकता से ध्यान या व्यवसाय तक ! (Vikky Kumar)



ईमानदार विक्की एक प्रसिद्ध प्रभावशाली यूट्यूबर, निवेशक, व्यवसायी हैं जो अपने नेतृत्व कोचिंग, प्रेरक सामग्री और उद्यमशीलता की भावना के लिए जाने जाते हैं। YouTube चैनलों पर हज़ारों सब्सक्राइबर के साथ, Bsc से लेकर Bsc बनने तक का उनका सफ़र असाधारण से कम नहीं है।

विक्की का जन्म 17 मार्च 2004 को मुंबई में एक सुशिक्षित परिवार में हुआ था। उनके जीवन की शुरुआत आसान नहीं थी। एक मोटे बच्चे होने के बावजूद, 16 साल की उम्र तक, उन्होंने कई सर्जरी करवाई थीं। इन शुरुआती चुनौतियों ने उनके भीतर आत्म-सुधार की इच्छा जगाई और उन्हें एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस बदलाव ने न केवल उनकी शारीरिक बनावट को बदल दिया, बल्कि फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उनके जुनून को भी जगाया।

वे एक मध्यम वर्ग के परिवार से आते हैं, उनके पिता कुंदन मंडल एक नौकरीपेशा हैं और उनकी माँ रूनी देवी एक गृहिणी हैं। रणवीर ने एक अलग रास्ता अपनाया उन्होंने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। 2020 में एक इंजीनियर के रूप में Bsc करने के बाद, उन्होंने अपना YouTube चैनल, ईमानदार विक्की (लाइफ कोच) लॉन्च किया। शुरुआत में, यह उनके मोटिवेशन स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक मंच था। हालाँकि, एक निरीक्षण चैनल के रूप में शुरू हुआ यह जल्दी ही कुछ अधिक प्रभावशाली बन गया। उन्होंने जल्द ही उद्यमिता, मानसिक स्वास्थ्य और यहाँ तक कि रहस्यों सहित कई विषयों को कवर करने के लिए अपनी सामग्री का विस्तार किया।

आज तक, ईमानदार विक्की की कुल संपत्ति $1 मिलियन आंकी गई है, और उनकी वार्षिक आय ₹1 करोड़ से अधिक है। फिर भी, अपनी सफलता के बावजूद, वे विनम्र बने हुए हैं और अपने बड़े मिशन पर ध्यान केंद्रित करते हैं और दूसरों को उनकी क्षमता का एहसास कराने में मदद करते हैं। ईमानदार विक्की की कहानी परिवर्तन, लचीलापन और आत्म-खोज की कहानी है।

आज, वे लाखों लोगों के लिए आशा के प्रतीक के रूप में खड़े हैं, यह साबित करते हुए कि कम यात्रा की गई सड़क असाधारण स्थानों तक ले जा सकती है। उनकी यात्रा जुनून की शक्ति, मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और इस अटूट विश्वास का प्रमाण है कि कोई भी व्यक्ति अपने सपनों का जीवन बना सकता है यदि वे पर्याप्त मेहनत करें। जैसा कि विक्की खुद अक्सर कहते हैं, आपके पास कुछ बनने की शक्ति है, आपको बस विश्वास करना है।

उनका पूरा सोशल मीडिया यूजर नाम: HonestVikky लेकिन असली नाम विक्की कुमार है जिसे honestvikky (@honestvikky) के नाम से भी जाना जाता है

उनका हैंडल: Instagram - Vikky Kumar

शिक्षा में उत्कृष्टता का दशक : टाटा ClassEdge क्लासरूम चैंपियनशिप ने 10 साल की शानदार यात्रा पूरी की


 मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत

प्रतिष्ठित टाटा ClassEdge क्लासरूम चैंपियनशिप (CCC) का दसवां संस्करण 5 मार्च 2025 को समाप्त हुआ। इस अवसर पर बॉम्बे हाउस में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उन शिक्षकों को सम्मानित किया गया जिन्होंने देश भर के क्लासरूम में टैकनोलजी को एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग के साथ शानदार तरीके से जोड़ा। यह वार्षिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता, टाटा ClassEdge लिमिटेड (TCE) की एक प्रमुख पहल है, जो भारत के बेहतरीन शिक्षकों को एक मंच पर लाती है। यह टाटा ग्रुप की 150 साल पुरानी विरासत है। जो उत्कृष्टता, ईमानदारी और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

टाटा इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और TCE के चेयरमैन श्री के.आर.एस. जामवाल ने पुरस्कार समारोह के दौरान कहा, "पिछले एक दशक से, ClassEdge क्लासरूम चैंपियनशिप शिक्षा-उत्कृष्टता के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण रहा है। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसने भारत के लगभग 19,000 शिक्षकों और 3400 स्कूलों के जीवन को प्रभावित किया है।"


इस चैंपियनशिप में देश भर के शिक्षकों ने शानदार प्रदर्शन किया। चेन्नई के SBOA स्कूल एंड जूनियर कॉलेज से पवित्रा आर. और दिल्ली के अहलकॉन पब्लिक स्कूल से नीरज आनंद ने अपनी-अपनी श्रेणियों में पहला स्थान हासिल किया। दिल्ली के सेंट मार्क्स सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल की दिशा कपूर और बेंगलुरु के सिंधी हाई स्कूल की नेहा शर्मा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि भोपाल के सागर पब्लिक स्कूल, गांधीनगर की हर्षा चंदवानी को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शीर्ष विजेताओं के अलावा 110 से अधिक शिक्षकों को प्रतियोगिता के विभिन्न स्तरों पर उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों की इनोवेटिव शिक्षण पद्धतियों ने दिखाया कि डिजिटल टूल्स पारंपरिक क्लासरूम को कैसे एक जीवंत लर्निंग स्पेस में बदल सकते हैं, जो जिज्ञासा और महत्वपूर्ण सोच को बढ़ावा देते है।

 
शिक्षा में इनोवेशन की विरासत
2011 में शुरू होने के बाद से, टाटा ClassEdge ने भारत के शैक्षिक परिदृश्य में क्रांति लाई है जो 1.25 लाख से अधिक शिक्षकों और 15 लाख छात्रों के लिए डिजिटल साथी बन गया है। ClassEdge प्लैटिनम, ClassEdge प्राइम, क्रिस्टल लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, KG शिक्षा के लिए EarlyEdge और ThinkEdge लैब्स जैसे कंपनी के सॉल्यूशंस शैक्षिक टैकनोलजी में उच्चतम उपलब्धि हैं, जो मानवता को ऊंचा उठाने वाले समाधान बनाते हैं व टाटा की विचारधारा को सम्मान देते हैं ।

टाटा ClassEdge के CEO तरुण भोजवानी ने कहा, "टाटा नाम हमेशा से उद्देश्य के साथ उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। हम जो भी इनोवेशन लाते हैं, वह सिर्फ शिक्षा को डिजिटाइज़ करने के लिए नहीं, बल्कि इसे बदलने के लिए डिज़ाइन किया जाता है-लर्निंग को और अधिक रोचक, समावेशी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नए भारत के विज़न के अनुरूप बनाना हमारा लक्ष्य है।"

भविष्य के शिक्षा ईको-सिस्टम का निर्माण
टाटा ClassEdge का समग्र दृष्टिकोण क्लासरूम टैकनोलजी से आगे तक है। प्रिंसिपल लीडरशिप प्रोग्राम (PLP) और टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम (TEP) जैसी पहलों के साथ कंपनी शैक्षिक नेतृत्व को बढ़ावा देती है जो 21वीं सदी की शिक्षा की जटिल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकें।

ClassEdge क्लासरूम चैंपियनशिप इस विचारधारा का प्रतीक है जो एक मंच के साथ-साथ एक राष्ट्रव्यापी कम्युनिटी ऑफ प्रैक्टिस के रूप में काम करता है जहां इनोवेटिव शिक्षण पद्धतियों को साझा किया जाता है, परिष्कृत किया जाता है व ऊंचा उठाया जाता है। यह प्रतियोगिता प्रभावी डिजिटल पेडागॉजी को बढ़ावा देती है, शिक्षण-अधिगम प्रथाओं को बेहतर बनाती है और छात्रों के लिए रोचक व इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव प्रदान करती है। 

 नई राह: उत्कृष्टता का अगला दशक
टाटा ClassEdge भविष्य की ओर बढ़ते हुए अपने मूल दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध है - टैकनोलजी का उपयोग करके अर्थपूर्ण शैक्षिक अनुभव बनाना, जो छात्रों को तेज़ी से बदलते विश्व के लिए तैयार करे।

ClassEdge क्लासरूम चैंपियनशिप का अगला संस्करण व्यापक भागीदारी, उभरती शैक्षिक टैकनोलजी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ गहरे जुड़ाव और शिक्षण उत्कृष्टता के निरंतर उत्थान का वादा करता है, जो भारत की शैक्षिक विरासत का आधार रहा है।

टाटा ClassEdge के बारे में
टाटा ग्रुप के दृष्टिकोण और मूल्यों से प्रेरित टाटा ClassEdge 2011 से अपने व्यापक अकादमिक डिजिटल सॉल्यूशंस के साथ भारतीय शिक्षा को बदल रहा है। 25 साल के अंतरराष्ट्रीय ई-लर्निंग अनुभव के आधार पर TCE के पेडागॉजी, टैकनोलजी और कंटेंट में इनोवेशन ने CBSE, ICSE और विभिन्न स्टेट बोर्ड स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों के जीवन को प्रभावित किया है। देश भर में सेवा विशेषज्ञों के मजबूत नेटवर्क के समर्थन से टाटा ClassEdge अपने सॉल्यूशंस को स्कूलों के लिए आसान बनाता है। अपनी ClassEdge एकेडमी के माध्यम से कंपनी प्रिंसिपल लीडरशिप प्रोग्राम और टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम आयोजित करती है जो भारत भर में शैक्षिक नेतृत्व और शिक्षण उत्कृष्टता को बढ़ाते हैं।


टाटा ClassEdge भारत में शिक्षा के भविष्य को कैसे नया रूप दे रहा है, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए www.tataclassedge.com पर जाएं या 022-61227000 पर संपर्क करें।

भारत और नेपाल का रोटी बेटी का संबंध है, किसी की हैसियत नहीं जो इसे तोड़ सके | पूर्णगुरू श्री करौली शंकर महादेव

कुशीनगर, गोरखपुर क्षेत्र – उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में शंकर सेना यूपी द्वारा आयोजित शिव महिमा कथा के अवसर पर पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव (Shree Karauli Shankar Mahadev) ने ऐतिहासिक घोषणाएँ कीं। इस तीन दिवसीय अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और श्री करौली शंकर महादेव के मुखारविंद से शिव तत्त्व, तंत्र विद्या, गुरु परंपरा और सनातन संस्कृति पर गहन प्रवचन सुना। इस दौरान नेपाल में विश्व सनातन महासम्मेलन के आयोजन की घोषणा की गई, जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।


गोरखनाथ मठ में भव्य स्वागत

इस आयोजन से पूर्व, पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव ने शिवावतार महायोगी श्री गुरु गोरखनाथ के दर्शन किए जहां उन्होंने अपनी आगामी नेपाल यात्रा के लिए अनुमति मांगी तथा विश्व सनातन महासम्मेलन की सफलता की कामना की  । वहां उनका स्वागत मुख्य पुजारी श्री कमल नाथ जी व मंदिर के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं संतों द्वारा किया गया। 


नेपाल में विश्व सनातन महासम्मेलन की घोषणा

शिव महिमा कथा के उपरांत, पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव ने नेपाल में होने वाले विश्व सनातन महासम्मेलन की घोषणा की। इस सम्मेलन में हिंदू जागरण मंच और अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। नेपालवासियों में इस आयोजन को लेकर विशेष जोश और उल्लास देखा जा रहा है।


गुरु परंपरा और भारत-नेपाल का आध्यात्मिक संबंध

कथा प्रवचन में, पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव ने भारत-नेपाल के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा, "भारत और नेपाल का संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक भी है। गुरु गोरखनाथ की परंपरा दोनों देशों को जोड़ती है। रोटी-बेटी का संबंध तोड़ना किसी के बस की बात नहीं है।"


शिव उपासना और आत्मज्ञान का संदेश

पूर्णगुरु जी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि " स्वयं को समझे बिना न परिवार को समझा जा सकता है, न समाज को ।" सुख-दुख के चक्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि " स्थायी सुख का मार्ग केवल आत्मबोध और आध्यात्मिक साधना में है।"


संकल्प और प्रार्थना का परिणाम

कथा के दौरान पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव ने सभी श्रद्धालुओं को संकल्प करवाया। कथा में उपस्थित जितने भी लोग थे, उन्होंने संकल्प किया और श्री करौली शंकर महादेव के दरबार से प्रार्थना की कि उनके कष्ट दूर हों। इसके बाद उन्होंने महसूस किया कि उनके जीवन में व्याप्त कष्ट समाप्त हो गए हैं।

वृद्ध लोग जो चलने-फिरने में असमर्थ थे, वे सहजता से चलने लगे।

शराबी लोगों ने अनुभव किया कि उन्हें शराब पीने की इच्छा नहीं हो रही।

बच्चों में पढ़ाई के प्रति आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ गया।

संपूर्ण वातावरण गुरु गोरखनाथ और श्री करौली शंकर महादेव की कृपा से ऊर्जावान हो गया।

यह दिव्य अनुभव सभी श्रद्धालुओं के लिए अध्यात्मिक, शारीरिक, मानसिक रूप से प्रेरणादायक रहा।


बलि प्रथा पर कड़ा संदेश

पूर्णगुरु श्री करौली शंकर महादेव ने बलि प्रथा पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे अमानवीय परंपरा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "माँ किसी की हत्या नहीं चाहती, वह अपने सभी बच्चों को समान प्रेम करती है।" उन्होंने कामाख्या मंदिर सहित सभी स्थानों पर बलि प्रथा समाप्त करने के लिए कहा अन्यथा उस स्थान को भी  माँ का प्रकोप झेलना पड़ेगा ।


परिवार और समाज में संतुलन का महत्व

परिवार को समाज की सबसे मजबूत इकाई बताते हुए पूर्णगुरु जी ने कहा कि "अगर परिवार में प्रेम और सामंजस्य है, तो समाज में भी शांति बनी रहेगी। परिवार से सुंदर कोई स्थान नहीं।"


आगामी आयोजन: भागलपुर में भव्य दरबार समागम

कथा के समापन पर घोषणा की गई कि तीन और चार मई को बिहार के भागलपुर में एक भव्य दरबार समागम का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी दरबार के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराई जाएगी।


निष्कर्ष

इस शिव महिमा कथा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नयन और आत्मचिंतन का अवसर प्रदान किया। कथा प्रवचन ने शिव भक्ति, गुरु परंपरा, आत्मज्ञान, पारिवारिक संतुलन और सनातन संस्कृति की व्यापकता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया। नेपाल में आगामी विश्व सनातन महासम्मेलन को लेकर भी श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।


KHF संगठन में बड़ी नियुक्तियाँ: राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल की सहमति से तहसील, जिला एवं प्रदेश कार्यकारिणी गठित

            



                   
 

    KHF संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल की सहमती से संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी तहसील जिला एवं प्रदेश कार्यकारिणी समिति गठित की एवं नव नियुक्त तहसील जिला एवं प्रदेश पदाधिकारीयों को बड़ी जिम्मेदारी सौपी।

   KHF संगठन की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल की सहमती से संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी तहसील जिला एवं प्रदेश कार्यकारिणी समिति गठित की एवं नव नियुक्त सक्रिय सदस्य, तहसील, जिला, एवं प्रदेश पदाधिकारीयों को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
महेंद्र सिंह लोधी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, संदीप कुमार प्रदेश संयोजक उत्तर प्रदेश,  लोधी दीपक राजपूत प्रदेश संरक्षक उत्तर प्रदेश, कलीम शेख ए एस प्रदेश कोषाध्यक्ष मध्यप्रदेश, भरत सिंह जिला अध्यक्ष पन्ना,  मोहन कुमार लोधी जिला अध्यक्ष शिवपुरी,  संजय सिंह राजपूत जिला अध्यक्ष बहराइच, जागेश्वर सिंह लोधी जिला अध्यक्ष दमोह, जितेंद्र कुमार जिला अध्यक्ष फर्रुखाबाद,  गौरव राजपूत जिला उपाध्यक्ष फर्रुखाबाद,  शिवम बाबू जिला संयोजक फर्रुखाबाद,  अंतर्यामी कुशवाह जिला सह संयोजक फर्रुखाबाद, रामू राजपूत जिला मीडिया प्रभारी फर्रुखाबाद,  विवेक कुमार जिला महासचिव फर्रुखाबाद,  बबलू कुमार जिला सचिव फर्रुखाबाद,  रमन सिंह जिला सहसचिव फर्रुखाबाद,  अंशुल लोधी राजपूत जिला महामंत्री फर्रुखाबाद,  प्रवीण राजपूत जिला संरक्षक फर्रुखाबाद, करुणेश सिंह जिला सलाहकार फर्रुखाबाद, अनमोल जिला सूचना मंत्री फर्रुखाबाद, लखन जिला व्यवस्था मंत्री फर्रुखाबाद,  अतर सिंह जिला कोषाध्यक्ष फर्रुखाबाद, रक्षपाल जिला संगठन मंत्री फर्रुखाबाद , आलोक कुमार तहसील अध्यक्ष शाहाबाद, विमलेश कुमार तहसील अध्यक्ष सिहोरा, कुशवाह तहसील अध्यक्ष कैलारस, पवन कुमार पटेल तहसील अध्यक्ष गुनौर,महिला मोर्चा सदस्य कीर्ति सिंगरौल सक्रिय सदस्य,  अल्का पटेल सक्रिय सदस्य , रोहिनी सक्रिय सदस्य,  गोविंद लोधी सक्रिय सदस्य,  हरिकेश सक्रिय सदस्य,  विजय कुमार यादव सक्रिय सदस्य,  शहजाद सक्रिय सदस्य, इमरत सिंगरौल सक्रिय सदस्य , धर्मेंद्र सिंह यादव सक्रिय सदस्य,  प्रहलाद सिंगरौल सक्रिय सदस्य,  संजू राजा बुंदेला सक्रिय सदस्य,  सतेंद्र
  कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन (KHF NGO) KHF संगठन के उद्देशय शिक्षा और साक्षरता संगठन गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है।
 स्वास्थ्य और चिकित्सा: संगठन स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर सकता है, गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है, और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाता है।
  पर्यावरण संरक्षण: संगठन वृक्षारोपण अभियान चलाता है, जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है, और पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाता है।
  महिला और बाल विकास: संगठन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, बाल विकास कार्यक्रम चला सकता है, और महिला और बाल अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है।
  आपदा राहत और पुनर्वास: संगठन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचा सकता है, पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, और आपदा प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करता है।
  गरीबी उन्मूलन: संगठन गरीबों को रोजगार के अवसर प्रदान कर सकता है, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, और गरीबों को सामाजिक और आर्थिक सहायता प्रदान करता है।
  वृद्ध और विकलांग जनों की देखभाल: संगठन वृद्ध और विकलांग जनों के लिए देखभाल केंद्र स्थापित कर सकता है, उन्हें चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर सकता है, और उनके जीवन को सुधारने के लिए काम करता है।

1. शिक्षा और साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करना।


2. गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना।


3. स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना।


4. गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना।


5. पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।


6. वृक्षारोपण अभियान चलाना।


7. जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।


8. महिला और बाल विकास कार्यक्रम आयोजित करना।


9. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना।


10. बाल विकास कार्यक्रम आयोजित करना।


11. आपदा राहत और पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित करना।


12. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम आयोजित करना।


13. वृद्ध और विकलांग जनों की देखभाल करना।


14. अनाथालयों में बच्चों की देखभाल करना।


15. विद्यालयों में मुफ्त भोजन योजना चलाना।


16. सामाजिक न्याय और समानता के लिए काम करना।


17. मानवाधिकारों की रक्षा करना।


18. पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ काम करना।


19. स्वच्छता अभियान चलाना।


20. स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाना।



21. शिक्षा जागरूकता अभियान चलाना।



22. महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित करना।



23. बाल सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित करना।



24. वृद्ध जनों के लिए देखभाल केंद्र स्थापित करना।



25. विकलांग जनों के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित करना।



26. आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाना।



27. गरीबों को रोजगार के अवसर प्रदान करना।



28. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रम आयोजित करना।



29. सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम आयोजित करना।



30. खेल और युवा विकास कार्यक्रम आयोजित करना।



31. पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करना।



32. स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करना।



33. महिला और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित करना।



34. वृद्ध और विकलांग जनों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।



35. आपदा प्रबंधन और पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित करना।



36. सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण आयोजित करना।



37. सामाजिक और आर्थिक विकास योजनाएं तैयार करना।



38. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों का मूल्यांकन करना।



39. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों का प्रबंधन करना।



40. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए धन जुटाना।

41. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए साझेदारी करना।

42. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए जागरूकता फैलाना।

43. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना।

44. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए अनुसंधान करना।


45. सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए नीतियां तैयार करना आदि कार्य करना


  कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन (KHF NGO) KHF संगठन का मुख्य कार्यालय पवई जिला पन्ना मध्य प्रदेश में स्थित है

जन्मदिवस पर विशेष - "जल पुरुष" डॉ. मोहन यादव का संकल्प हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना,सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां

News.Madhya Pradesh,Dr. Mohan Yadav​,मध्यप्रदेश​,डॉ. मोहन यादव,डॉ. मोहन यादव की उपलब्धियां




  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के देश की धरती को "शस्य श्यामला" बनाने के संकल्प से ही जुड़ा हुआ है मुख्यमंत्री डॉ. यादव का "संकल्प "हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना" जिससे हर खेत में सुनहरी फसलें लहलहाएं और किसान समृद्धशाली बने। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वे निरंतर जुटे हुए हैं और इसके परिणाम स्वरुप प्रदेश ने गत 1 वर्ष में सिंचाई के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं।

 पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउण्ड वॉटर रीचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना "ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना" का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि "ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाऱाष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।"

 केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। रूपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे। सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।

 संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल अन्तर्राज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केन्द्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केन्द्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रूपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चत की जायेगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्यप्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवहमान बने और सिहंस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रूपये की लागत की "कान्ह डयवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना'' के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आंरभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जायेगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है।

 मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "अटल भू-जल योजना" प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अन्तर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्त्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में "डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल" गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत की जावेगी। इसके लिये विश्व बैंक के सहयोग से 551 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्राप्त की जा चुकी है।

खरमोर अभयारण्य पर संकट: वन विभाग की चूक से किसानों और पक्षियों दोनों का भविष्य खतरे में




 

 पावर ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण में नियमों की अनदेखी, किसानों ने की तत्काल रोक लगाने की मांग

   धार, सरदारपुर: खरमोर अभयारण्य का अस्तित्व अब खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। न खरमोर बचे, न मोर—इनकी उड़ान वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों की नीतियों और गलतियों ने छीन ली है। कभी पक्षियों की किलकारियों से गूंजने वाला यह क्षेत्र अब एक गहरे सन्नाटे में डूबता जा रहा है। बीते 41 वर्षों से विसंगतियों का दंश झेल रहे इस अभयारण्य में न केवल पक्षियों के संरक्षण में विफलता मिली है, बल्कि यहां के किसानों और स्थानीय ग्रामीणों को भी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

   सरकार जहां वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रयासरत है, वहीं मध्य प्रदेश वन विभाग की लापरवाही संरक्षण के इन प्रयासों पर पानी फेर रही है। धार जिले की सरदारपुर तहसील में स्थित यह अभयारण्य 348.12 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, और इसके साथ 250 मीटर का इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) अधिसूचित है। इस संरक्षित क्षेत्र में 14 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, लेकिन इसका सीधा असर वहां रहने वाले किसानों और स्थानीय निवासियों पर पड़ा है। वे अपनी निजी भूमि का क्रय-विक्रय नहीं कर सकते, रजिस्ट्री और नामांतरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  सबसे गंभीर बात यह है कि संरक्षित क्षेत्र में 14 ग्राम पंचायतों  पिछले 16 वर्षों में खरमोर पक्षी विलुप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। वास्तविकता यह है कि अभयारण्य के अंदर भी इन पक्षियों को उचित संरक्षण नहीं मिल सका।

वन विभाग की बड़ी गलती: ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन की अनुमति

  अब इस अभयारण्य के अस्तित्व पर एक और खतरा मंडरा रहा है। ग्राम अमोदिया (धुलेट फोरलेन के पास) में स्थापित 400/220 kV पावर ग्रिड सबस्टेशन के लिए कोई पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) नहीं किया गया। यह संरक्षित क्षेत्र से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन न तो वन विभाग से, न ही पर्यावरण मंत्रालय से कोई औपचारिक अनुमति ली गई।

  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पावर ग्रिड के दस्तावेजों में इसे "राजगढ़ (धुलेट)" के नाम से दर्शाया गया है, जिससे संदेह की स्थिति बन गई है। यह ग्रिड गुजरात और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को बिजली आपूर्ति करता है ।

  इसी पावर ग्रिड से 220 kV की ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जा रही है, जिसमें भी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की 80वीं बैठक में साफ निर्देश दिए गए थे कि खरमोर अभयारण्य और उसके पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) में ट्रांसमिशन लाइन भूमिगत (Underground) होगी, जबकि अभयारण्य क्षेत्र से बाहर इसे ओवरहेड (Overhead) रखने की अनुमति दी गई थी।

  लेकिन, मध्यप्रदेश वन विभाग की एक प्रशासनिक त्रुटि के कारण आदेश की प्रतिलिपि में "ओवरहेड" शब्द जोड़ दिया गया, जिससे जिला वन विभाग, प्रशासन और किसानों के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। यह गलती न केवल सरकारी आदेशों की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि किसानों और स्थानीय अधिकारियों के लिए अव्यवस्था और अन्याय की स्थिति भी उत्पन्न कर रही है।

किसानों ने किया विरोध,कार्य पर रोक लगाने की मांग

  इस प्रशासनिक लापरवाही से नाराज किसानों ने एसडीएम और वन विभाग को ज्ञापन सौंपकर इस त्रुटि को सुधारने की मांग की। किसानों का कहना है कि जब तक इस गलती को दुरुस्त नहीं किया जाता और निर्धारित शर्तों के अनुसार कार्य नहीं किया जाता,तब तक इस परियोजना पर अविलंब रोक लगाई जाए।

  इस दौरान ग्राम अमोदिया के सोहन चोयल, संतोष सोलंकी, भानु सोलंकी और राजगढ़ के बाबुलाल कुशवाह सहित कई पीड़ित किसान ज्ञापन सौंपने पहुंचे। वे कल कलेक्टर और एसपी को भी ज्ञापन देंगे।

   किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन और वन विभाग जल्द से जल्द इस गलती को नहीं सुधारते हैं, तो यदि कार्यवाही नहीं हुई, तो न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।