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मोबाइल की रील नहीं,राम नाम की रील घुमाइए,चकला-बेलन चलाते हुए भी पाएँ परमात्मा का सान्निध्य -






 


  आत्मा और मन के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय: ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज


    राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पांडाल में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के छठवें दिन ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान के मार्ग से परिचित कराया। कथा के प्रारंभ में यजमानों द्वारा मंच पूजन किया गया, जिसके बाद मधुर भजनों की प्रस्तुति पर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।

   व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य का स्वभाव उसकी संगत पर निर्भर करता है। उन्होंने संसार की तुलना एक गंदे नाले से और कथा की तुलना मां गंगा से करते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा का सान्निध्य पतित को भी पावन कर देता है, उसी प्रकार कथा और सत्संग हमारे दूषित विचारों को शुद्ध कर देते हैं। उन्होंने जीवन में 'प्रतिस्पर्धा' (कंपटीशन) के बढ़ते चलन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भौतिक वस्तुओं की होड़ हमें दुख देती है, जबकि भक्ति के मार्ग में की गई प्रतिस्पर्धा आनंद प्रदान करती है।

     ज्योतिषाचार्य जी ने परिवार और संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि बेटा अगर अहंकार का रूप है, तो बेटी प्रेम और दया का स्वरूप है। उन्होंने वर्तमान समय में मोबाइल के बढ़ते प्रभाव के बीच गृहणियों को एक अनोखा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि रसोई में भोजन बनाते समय चकला-बेलन चलाने के साथ-साथ भगवान का नाम लेना चाहिए। जिस प्रकार झूला आगे-पीछे होने पर आनंद आता है, उसी प्रकार बेलन की गति के साथ 'हरे राम-हरे कृष्ण' का जाप करने से भोजन भी प्रसाद बन जाता है।कथा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शरीर के रोगों के लिए अस्पताल जाना जरूरी है,लेकिन आत्मा, मन और बुद्धि के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय है। यहाँ मिलने वाली 'राम नाम' की टेबलेट मनुष्य के जीवन को तनावमुक्त और निर्मल बनाती है। कथा के अंत में भगवान की महाआरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
   
   स्थानीय सोसायटी ग्राउंड में भक्ति की बयार के बीच शनिवार से 'मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम नाम जप महायज्ञ' का भव्य शुभारंभ हुआ, जो 12 मई तक अनवरत चलेगा। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक राम नाम जप किया जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है।
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   आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने बताया कि 12 मई को कथा के समापन के पश्चात, 13 मई बुधवार को विशाल 'नगर चौरासी' और सर्व समाज के 'निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन' का ऐतिहासिक आयोजन होगा। इस सम्मेलन में 108 जोड़ों के विवाह का पावन लक्ष्य रखा गया है, जिसकी तैयारियाँ युद्ध स्तर पर जारी हैं। दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक चलने वाली इस कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु वातानुकूलित पांडाल में महाप्रसादी का लाभ ले रहे हैं।

मध्यप्रदेश बना गिद्ध संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र,हलाली डैम से उज्बेकिस्तान तक 3000 किलोमीटर से अधिक की भरी उड़ान




 

  
  Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश  (Madhya Pradesh) वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश एक अंतर्राष्ट्रीय हब के रूप में उभर रहा है। हाल ही में मध्यप्रदेश से जुड़े एक सिनेरियस गिद्ध की प्रेरणादायी यात्रा ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

  दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध का रेस्क्यू 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से किया गया था। घायल एवं कमजोर अवस्था में मिले इस गिद्ध का उपचार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल एवं बीएनएचएस के संयुक्त तत्वावधान में संचालित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर, केरवा में विशेषज्ञों द्वारा किया गया। स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे रायसेन जिले के हलाली डैम स्थित प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। मुक्त किए जाने के बाद यह गिद्ध लगभग एक माह तक हलाली डैम क्षेत्र में रहा और प्राकृतिक वातावरण में स्वयं को पुनः अनुकूलित करता रहा।

  WWF-India एवं BNHS के सहयोग से वन विहार द्वारा इसकी जीपीएस ट्रैकिंग प्रारंभ की गई। इससे गिद्ध की गतिविधियों एवं प्रवास की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है। ट्रैकिंग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस गिद्ध ने 10 अप्रैल 2026 को हलाली डैम से अपनी लंबी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रारंभ की। राजस्थान से होते हुए यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाएं पार कर 4 मई 2026 को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान इसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

  यह अद्भुत यात्रा गिद्धों की असाधारण नेविगेशन क्षमता, सहनशीलता एवं जीवटता का जीवंत उदाहरण है। साथ ही यह मध्यप्रदेश सरकार की वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे सतत प्रयासों, आधुनिक उपचार सुविधाओं, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से मध्यप्रदेश आज देश के साथ ही वैश्विक वन एवं वन्यजीव संरक्षण समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। प्रदेश गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।

विशेष लेख - मध्यप्रदेश में आम उत्पादन की बढ़ती संभावनाएँ और “मैंगो फेस्टिवल 2026 - अनिल वशिष्ठ







 

    भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान रखता है। फलों, फूलों और सब्जियों के उत्पादन के माध्यम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। विशेष रूप से फल उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। भारतवर्ष में कुल लगभग 1176 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन उत्पादन मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत, अनुकूल जलवायु और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रतिफल है।

   फल उत्पादन की दृष्टि से यदि किसी एक फल की लोकप्रियता और आर्थिक महत्व की चर्चा की जाए तो आम का नाम सबसे पहले आता है। आम को 'फलों का राजा' कहा जाता है, मध्यप्रदेश में इसका उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन करें तो प्रदेश में आम उत्पादन में लगभग 72 हजार मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों, विशेषकर आम उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

   मध्यप्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियाँ आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल सिद्ध हो रही हैं। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अलग-अलग किस्मों के आम का उत्पादन किसानों को बेहतर आय उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि राज्य सरकार द्वारा आम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।

   इसी दिशा में 13 जून 2026 को प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'मैंगो फेस्टिवल 2026' अर्थात 'आम महोत्सव' आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी या उत्सव नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के आम उत्पादक किसानों, उद्यानिकी विशेषज्ञों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच संवाद और विपणन का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। महोत्सव के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न किस्मों के आमों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

   इस वर्ष प्रदेश के प्रमुख जिलों — अलीराजपुर, रीवा, शहडोल, सीधी, सतना, नर्मदापुरम, अनूपपुर और नरसिंहपुर में लगभग 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में आम उत्पादन विस्तार की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह योजना किसानों को उद्यानिकी आधारित खेती की ओर प्रेरित करेगी और प्रदेश में आम उत्पादन का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।

   प्रदेश के लिए गौरव का विषय यह भी है कि सुंदरजा आम को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है। रीवा जिले के प्रसिद्ध सुंदरजा आम को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने से न केवल इसकी विशिष्टता को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि इससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। सुंदरजा आम अपनी मिठास, सुगंध और विशिष्ट स्वाद के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय हो रहा है।

   भारत सरकार की प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर नकदी फसलों, फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन की ओर प्रोत्साहित करना है। उद्यानिकी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि इनकी बाजार में मांग निरंतर बनी रहती है और उत्पादन से अपेक्षाकृत अधिक लाभ प्राप्त होता है। आम जैसी फसलें किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकती हैं।

   राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय भी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम है। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे, तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधाएँ और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों का विश्वास और उत्साह बढ़ा है।

   आज आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आम उत्पादन को और अधिक बढ़ावा दिया जाए। यदि किसानों को प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यात सुविधाओं और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आम उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

   'मैंगो फेस्टिवल' 2026” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। यह आयोजन न केवल प्रदेश की उद्यानिकी क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी मील का पत्थर साबित होगा। मध्यप्रदेश में आम उत्पादन के प्रति बढ़ता रुझान यह दर्शाता है कि आने वाले समय में प्रदेश उद्यानिकी क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा और 'फलों के राजा' आम के माध्यम से किसानों की समृद्धि का नया अध्याय लिखा जाएगा।


   (लेखक जनसंपर्क विभाग में सहायक जनसंपर्क अधिकारी है।)

बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन: शुभेंदु अधिकारी ने संभाली राज्य की कमान,ब्रिगेड मैदान में उमड़ा जनसैलाब








 



 

  कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में आज एक नए सूर्य का उदय हुआ है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य और विशाल समारोह में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मंच पर मौजूद रहे। यह समारोह न केवल एक शपथ ग्रहण था, बल्कि बंगाल में 15 साल के टीएमसी शासन के अंत और भाजपा की पहली सरकार के आगमन का महापर्व बन गया।

भवानीपुर के विजेता बने बंगाल के नए सारथी

शुभेंदु अधिकारी की यह जीत ऐतिहासिक रही है। उन्होंने भवानीपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर अपनी राजनीतिक शक्ति का परिचय दिया था। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। 8 मई को गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु ने राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया जनता का अभिवादन

  जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिगेड मैदान के विशाल मंच पर पहुंचे, वहां मौजूद लाखों लोगों ने नारों के साथ उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर और अत्यंत विनम्रता के साथ जनता के इस अपार प्रेम और उत्साह का अभिवादन स्वीकार किया। हालांकि प्रधानमंत्री ने इस औपचारिक कार्यक्रम में कोई भाषण नहीं दिया, लेकिन उनकी मौजूदगी ने राज्य में 'डबल इंजन' सरकार के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत कर दिया।

अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा

  इस समारोह ने देश के राजनीतिक मानचित्र की एकजुटता को भी प्रदर्शित किया। मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ देश के अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय गौरव का स्वरूप दे दिया। इसके अलावा, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथी का विशेष सम्मान

  कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत गरिमामयी और भावुक क्षण तब दिखा जब 97 वर्षीय माखनलाल सरकार को मंच पर विशेष स्थान दिया गया। माखनलाल जी जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस ऐतिहासिक कश्मीर दौरे के साथी रहे थे। प्रधानमंत्री द्वारा उनका अभिनंदन किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत था कि नई सरकार अपनी विचारधारा की जड़ों और संघर्षों को सर्वोच्च सम्मान देती है।

नई कैबिनेट में दिखा विविधता का रंग

राज्यपाल आर.एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी के साथ-साथ दिलीप घोष,अग्निमित्रा पॉल,निसिथ प्रामाणिक और अशोक कीर्तनिया को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई। वहीं, खुदीराम टुडू ने अपनी पारंपरिक क्षेत्रीय भाषा में शपथ लेकर बंगाल की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।

लोक संस्कृति और उत्सव का माहौल

  चूँकि आज 25 वैशाख यानी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है, इसलिए पूरा आयोजन एक सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया। मैदान में रायबेशे नृत्य, छाऊ नाच और बाऊल संगीत की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम स्थल को बंगाल के प्रसिद्ध मदन मोहन मंदिर और ऐतिहासिक पलाशी गेट जैसी कलाकृतियों से सजाया गया था। उपस्थित लोगों के लिए पारंपरिक बंगाली मिठाइयों और झालमुड़ी के विशेष स्टॉल लगाए गए थे, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और आत्मीय बन गया।
  इस शपथ ग्रहण के साथ ही पश्चिम बंगाल में शांति,सुरक्षा और विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है।


कथनी और करनी की समानता से ही जीवन में आती है सार्थकता: श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज







 



   राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पंडाल में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के पांचवें दिन  ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। व्यासपीठ से प्रवचन देते हुए उन्होंने मनुष्य के जीवन में नम्रता और आचरण की शुद्धता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और स्तुति में आनंद तभी संभव है जब हमारे शब्दों की नम्रता हमारे चेहरे और देह से भी प्रकट हो। केवल मुख से ईश्वर का नाम लेना और भीतर अहंकार पालना भक्ति की श्रेणी में नहीं आता।

    श्री भारद्वाज ने प्रकृति का उदाहरण देते हुए समझाया कि धरती माँ वही फसल देती है जिसका बीज बोया जाता है, वह कभी अपना फैसला नहीं बदलती। इसके विपरीत, आज का मनुष्य शब्दों में कुछ और तथा व्यवहार में कुछ और होता है। उन्होंने रावण और श्री राम के चरित्र की तुलना करते हुए बताया कि रावण धर्म की व्याख्या करने में तो निपुण था, लेकिन आचरण में विफल रहा, जबकि भगवान श्री राम ने अपने सरल, शील और सुंदर स्वभाव से समस्त अयोध्या को जीत लिया था। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि धर्म को केवल व्याख्याओं तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारें। यदि हमारे शब्द और व्यवहार एक समान होंगे, तभी जीवन में राम नाम का बीज फलदायी होगा।

   8 मई शनिवार से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम नाम जप महा यज्ञ भी आरंभ हो गया जो 12 मई तक चलेगा। सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन व नगर चौरासी 13 मई बुधवार को आयोजन होगा

निर्देशन की नई मिसाल: निर्देशक Exhan Khan लेकर आ रहे हैं भावनाओं से लबरेज फिल्म 'समर्पित फादर्स लव'!


भारतीय सिनेमा के क्षितिज पर एक नई रचनात्मक शक्ति के रूप में उभर रहे निर्देशक एक्सहान खान (Exhan Khan) अपनी आगामी फिल्म 'समर्पित फादर्स लव (Samarpit: A Father’s Love)' के साथ दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हाल ही में मुंबई के 'इंडियन मोशन प्रिंसिपल्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' (IMPPA), अंधेरी में नायशा फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का भव्य पोस्टर लॉन्च संपन्न हुआ, जिसने फिल्म जगत में खासी चर्चा बटोरी है।

एक लेखक और निर्देशक के तौर पर एक्सहान (Exhan Khan) का सफर उनकी कड़ी मेहनत और कला के प्रति अटूट समर्पण की कहानी है। फिल्म 'समर्पित (Samarpit: A Father’s Love )' उनके विजन का वह हिस्सा है जो समाज के उस अनकहे संघर्ष को सामने लाता है जिसे अक्सर पर्दे पर जगह नहीं मिलती—एक पिता का मूक बलिदान। इस फिल्म के जरिए एक्सहान ने एक ऐसी मर्मस्पर्शी कहानी को पिरोया है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि पिता और पुत्र के पवित्र रिश्ते की गहराई को भी छूती है।

एक्सहान खान (Exhan Khan) ने इस फिल्म के निर्देशन के साथ-साथ इसकी पटकथा और संवाद लेखन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि वास्तविक सिनेमा वही है जो जीवन की सच्चाइयों को ईमानदारी से पेश करे। झांसी, मध्य प्रदेश और मुंबई की खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माई गई यह फिल्म तकनीकी और भावनात्मक, दोनों मोर्चों पर उनकी काबिलियत का प्रमाण है। पोस्टर लॉन्च के मौके पर एक्सहान के काम की काफी सराहना हुई, और इसी मंच से उन्होंने अपनी अगली फिल्म 'ऑरा' की भी आधिकारिक घोषणा कर दी।

निर्देशक एक्सहान खान (Exhan Khan) ने कहा  "एक निर्देशक और लेखक के तौर पर हमारा उद्देश्य ऐसी कहानी पेश करना था जो भावनाओं से भरपूर हो और वास्तविकता के करीब हो। 'समर्पित' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हर उस पिता को मेरा सलाम है जो अपनी खुशियों को बच्चों के लिए कुर्बान कर देता है। हमें उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों की सोच में बदलाव लाएगी।

यह फिल्म एक नेक सामाजिक मकसद से भी जुड़ी है। मेकर्स ने घोषणा की है कि फिल्म की कमाई का 50% हिस्सा कैंसर पीड़ितों के इलाज के लिए दान किया जाएगा। फिल्म में अंकित यादव मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जबकि जया भट्टाचार्य, जावेद हैदर, प्रशिका शर्मा, देव व्यास और मीत वर्मा जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा है।

एक्सहान खान (Exhan Khan) का यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि वे न केवल एक कुशल निर्देशक हैं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील एक जागरूक रचनाकार भी हैं। 'समर्पित: फादर्स लव (Samarpit: A Father’s Love)' आगामी 19 जून को देशभर के 300 सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

सोमनाथ और भारत की अदम्य आत्मशक्ति: पीएम मोदी का भावुक संदेश | 75वीं वर्षगांठ पर बोले –‘जय सोमनाथ’






 



जय सोमनाथ !

  वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।





 

   सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।

  हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है: प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्। अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है! जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।

  यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की। महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।








 
  1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, ‘’इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।’’ उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।








 

  दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर उनका प्रभाव निरंतर महसूस किया जाता रहा है। उनके विजन को के.एम. मुंशी ने आगे बढ़ाया, जिन्हें नवानगर के जामसाहेब का समर्थन मिला। 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा होने पर राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के विरोध के बावजूद, डॉ. प्रसाद ने समारोह में हिस्सा लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।








  

  मुझे अक्टूबर 2001 का वह समय आज भी अच्छे से याद है, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। 31 अक्टूबर 2001 को, सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ का भव्य आयोजन किया। इसी समय सरदार पटेल की 125वीं जयंती भी मनाई जा रही थी। इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और तत्कालीन गृहमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी की मौजूदगी ने इसे और भी गरिमापूर्ण बना दिया।

  11 मई 1951 को अपने भाषण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर दुनिया को यह संदेश देता है कि अद्वितीय श्रद्धा और विश्वास को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशा व्यक्त की, कि यह मंदिर सदैव लोगों के हृदय में बसा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल का सपना साकार हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सरदार पटेल की भावनाओं के अनुरूप लोगों के जीवन में समृद्धि भी लानी होगी। इसको लेकर उनके संदेश अत्यंत प्रेरणादायी रहे हैं।

  पिछले एक दशक से हम इसी मार्ग पर चल रहे हैं। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन और त्रयंबकेश्वर से श्रीशैलम तक, हमने अपने आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। इसके साथ ही उनकी पारंपरिक पहचान को भी बनाए रखा है। आज बेहतर कनेक्टिविटी से ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आ पा रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है, आजीविका सुरक्षित हो रही है, साथ ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और सशक्त हो रही है।

  सोमनाथ की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान किया, उनका संघर्ष हम कभी नहीं भुला सकते। भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने इसकी भव्यता और दिव्यता को लौटाने में अपना अद्भुत योगदान दिया। उनकी ऐसी ही आस्था पूरे भारतवर्ष को लेकर भी थी। वे एकता की ऐसी अद्भुत डोर से बंधे थे, जिसे जमीनी सीमाओं में नहीं बांटा जा सकता। आज की विभाजित दुनिया में, सोमनाथ से मिलने वाली एकता की यह सीख पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। सोमनाथ अपनी गौरवशाली परंपरा के साथ हमेशा खड़ा रहेगा, क्योंकि यह हमारी साझा सभ्यता का प्रतीक है। इसी गौरव को नमन करते हुए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति में और दानवीरों की उदारता को याद करते हुए अगले एक हजार दिनों तक यहां विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। यह देखकर बहुत प्रसन्नता हो रही है कि बड़ी संख्या में लोग इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं।

  सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि जब कोई समाज अपनी आस्था, अपनी संस्कृति और अपनी एकता से जुड़ा रहता है, तब उसे लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। आज भी हमारी सबसे बड़ी शक्ति यही साझा चेतना है, यही एकात्म भाव है। यही भावना हमें विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में साथ चलने की प्रेरणा देती है।







  
  मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि इस पावन अवसर पर पवित्र सोमनाथ धाम की यात्रा करें और इसकी भव्यता के साक्षात दर्शन करें। जब आप सोमनाथ के तट पर खड़े होंगे, तब उसकी प्राचीन प्रतिध्वनियों को अपने भीतर महसूस करेंगे। वहां आपको केवल भक्ति का अनुभव नहीं होगा, बल्कि उस सभ्यतागत चेतना की सशक्त धड़कन भी सुनाई देगी, जो कभी रुकी नहीं, जिसकी तीव्रता कभी कम नहीं हुई। वहां आप भारत की उस अपराजित आत्मा का अनुभव करेंगे, जिसने हर आघात के बावजूद अपनी पहचान और अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखा। आप समझ पाएंगे कि इतने प्रयासों के बाद भी क्यों हमारी सभ्यता मिट नहीं सकी। वहां आपको चिर विजय के उस दर्शन का अनुभव होगा, जो सदियों से भारत की शक्ति बना हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके लिए यह एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

जय सोमनाथ।

(नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं)