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डॉ.प्रीति अदाणी का स्वाभिमान विज़न मध्य प्रदेश पहुंचा, 1,500 महिलाओं को मिलेगा सहयोग












  बदरवास, मध्य प्रदेश : बदरवास, मध्य प्रदेश (एमपी) में अब स्थायी आय की तलाश कर रही महिलाओं को कमाई और आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिलेगी। इसी दिशा में, अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और विकास इकाई, अदाणी फाउंडेशन ने शिवपुरी जिले के बदरवास में अदाणी विकास केंद्र शुरू किया है, जिससे महिलाओं के लिए घर के पास ही व्यवस्थित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

   अदाणी फाउंडेशन के स्वाभिमान कार्यक्रम का अखिल भारत में 10 लाख महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। इसका फोकस महिलाओं को असंगठित और अनियमित काम से निकालकर बाजार से जुड़े स्थायी आय के अवसरों तक पहुँचाने पर है।

   करीब 48,000 वर्ग फुट में फैला यह केंद्र अपनी पूरी क्षमता पर 600 आधुनिक सिलाई मशीनों के साथ काम करेगा और इसे ट्रेनिंग और प्रोडक्शन दोनों के लिए तैयार किया गया है। यहाँ महिलाओं को व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएँगे और नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। जैसे-जैसे यह केंद्र अपना विस्तार करेगा, लगभग 1,500 महिलाओं को स्थायी आय मिलने की उम्मीद है, जिससे वे अपने परिवारों को अधिक आत्मविश्वास के साथ सहयोग कर सकेंगी।

   इस केंद्र का उद्घाटन संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) के केंद्रीय मंत्री और गुना लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। इस कार्यक्रम में आसपास के गाँवों की 5,000 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया, जो स्थानीय भागीदारी और आजीविका के अवसरों की मजबूत माँग को दर्शाता है।
  
   इस मौके पर श्री सिंधिया ने कहा, “बदरवास में जो हम देख रहे हैं, वह सपनों को साकार होते देखने की ताकत है। मैं अदाणी ग्रुप के चेयरमैन श्री गौतम अदाणी और अदाणी फाउंडेशन को बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसा मंच बनाया है, जहाँ कौशल वैश्विक बाजारों तक पहुँच सकता है। मेरी प्यारी दीदियों की आखों में उनका संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी उम्मीदें और सपने अब सार्थक आजीविका के जरिए साकार हो रहे हैं। यह केंद्र सशक्तिकरण का एक सच्चा इंजन है और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले पाँच वर्षों में बदरवास के उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाएँगे।”

  अदाणी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अभिषेक लख्ताकिया ने कहा, “हमारी चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी के इस विश्वास से प्रेरित होकर कि महिलाओं का सशक्तिकरण सम्मानजनक आय से शुरू होता है, स्वाभिमान कार्यक्रम कौशल को स्थायी आय में बदलने पर काम करता है। महिलाओं को वास्तविक काम और बाजार से जोड़कर हम उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार व समाज में मजबूत भूमिका निभाने के लिए सक्षम बना रहे हैं।”

  बदरवास में इस पहल से परिवारों की आय बढ़ने, अनौपचारिक काम पर निर्भरता घटने और पलायन की जरूरत कम होने की उम्मीद है, साथ ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।
    इन्फ्रास्ट्रक्चर, कौशल और बाजार तक पहुँच में निवेश करके अदाणी फाउंडेशन यह सुनिश्चित कर रहा है कि महिलाएँ नियमित आय कमा सकें और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकें।

   अदाणी फाउंडेशन इस वर्ष 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा, जो भारत के कोने-कोने में समावेशी विकास के प्रति तीन दशकों की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अदाणी फाउंडेशन के बारे में जानकारी

   सन् 1996 से अदाणी फाउंडेशन, अदाणी ग्रुप की सामाजिक कल्याण और विकास इकाई के रूप में, अखिल भारत में स्थायी परिणामों के लिए रणनीतिक सामाजिक निवेश करता आ रहा है और लगातार सक्रिय व प्रतिबद्ध रहा है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, स्थायी आजीविका, जलवायु कार्रवाई और सामुदायिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों के जीवन को सशक्त और समृद्ध बना रहा है। फाउंडेशन की रणनीतियाँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,247 गाँवों और शहरी वार्ड्स में काम कर रहा है और 1.33 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
ज्यादा जानकारी के लॉगिन करें : www.adanifoundation.org
मीडिया संपर्क -roy.paul@adani.com

27 अप्रैल को पूरे भारत में मनाया जाएगा शासन स्थापना दिवस,नवरत्न परिवार ने राजगढ़ सहित कई क्षेत्रों में किया किट का वितरण








 



  राजगढ़/धार। पूरे भारत में आगामी 27 अप्रैल 2026, सोमवार को प्रातः सुबह की वेला में शासन स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सभी समाजजनों से अपने-अपने निकटतम मंदिर एवं उपाश्रय में जाकर अनिवार्य रूप से जिन शासन ध्वज लहराने की अपील की गई है। इस आयोजन की जानकारी देते हुए नवरत्न परिवार के प्रदेश संगठन मंत्री नितिन जैन चिंटू चौहान ने बताया कि इस दिन सभी को मिलकर शासन की शोभा बढ़ानी है।

    इसी उपलक्ष्य में नवरत्न परिवार द्वारा धार जिले के कालीदेवी, सरदारपुर, अमीझरा तीर्थ,भोपावर तीर्थ,श्री आदेश्वर जी मंदिर,हेमकमल शत्रुंजय धाम,सारंगी,राणापुर और अन्य निकटतम मंदिरों एवं उपाश्रयों में विशेष किट का वितरण किया गया। राजगढ़ के राजेंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में नवरत्न परिवार द्वारा किट भेंट की गई,जहाँ वीरेन्द्र जैन,अशोक भंडारी, संदीप खजांची,राकेश राजावत,अनिक सराफ,रोहन जैन सेंडी MR,सोनू भंडारी,गौरव नाना सेठ,अक्षय भंडारी,नितेश कांग्रेसा,कल्पेश जैन,हर्षित जैन,नितेश जैन फर्शी वाला और अभिषेक पारख उपस्थित थे। 

 नवरत्न परिवार ने सभी से निवेदन किया है कि 27 अप्रैल को शासन का ध्वज लहरा कर इस गौरवशाली दिवस को गरिमापूर्ण तरीके से मनाएं।

खुशखबरी: सरदारपुर की सूखी धरती पर कल-कल बही नर्मदा, कमल यादव बोले- लगभग 30 हजार हेक्टेयर में आएगी अब खुशहाली

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  धार जिले की सरदारपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मिंडा में आज खुशियों का नया सवेरा हुआ है। नर्मदा माही लिंक परियोजना का पावन जल माही नदी के उद्गम स्थल पर पहुँचने से पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिछले कई दशकों से इस ऐतिहासिक दिन की प्रतीक्षा कर रहे किसानों और ग्रामीणों के लिए यह पल एक बड़ी उपलब्धि की तरह है। जैसे ही मां नर्मदा की पावन जलधारा ने मिंडा की धरती को छुआ, पूरा क्षेत्र भक्ति के भाव में सराबोर हो गया। इस परियोजना के सफल होने से अब क्षेत्र के हज़ारों किसानों का वर्षों पुराना सपना धरातल पर साकार हो गया है।

  इस विशेष अवसर पर ग्राम मिंडा में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। परम पूज्य गुरुदेव सुभाष त्रिवेदी के सानिध्य में पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ मां नर्मदा का पूजन अर्चन संपन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने जल की आरती उतारी और पुष्प अर्पित कर इस सौगात के लिए कृतज्ञता प्रकट की। किसानों का मानना है कि इस जल के आगमन से अब उनके खेतों की प्यास बुझेगी और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

  कार्यक्रम के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य व भाजपा जिला महामंत्री कमल यादव ने इस सफलता को क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का नया अध्याय बताया। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि सरदारपुर विधानसभा के करीब 66 गाँवों की 25 से 30 हज़ार हेक्टेयर कृषि भूमि को इस परियोजना से सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध होगा। श्री यादव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2014 से लगातार प्रयास और मांग की जा रही थी, जिसे 2017 में सरकार द्वारा औपचारिक मंजूरी दी गई थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में यह बड़ा संकल्प सिद्ध हुआ है।

  पूर्व जिला पंचायत सदस्य व जिला महामंत्री कमल यादव ने परियोजना को सफल बनाने में जुटे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और पूरी तकनीकी टीम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाग के यशराज, चंद्रकांत और आनंद जैसे अधिकारियों की कार्यकुशलता का ही नतीजा है कि आज पानी सफलतापूर्वक यहाँ तक पहुँच सका है। नर्मदा जल के पहुँचने से अब सरदारपुर क्षेत्र के किसानों की फसलों को नई संजीवनी मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। क्षेत्र के लोगों ने इस ऐतिहासिक सौगात के लिए प्रदेश सरकार और प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

नए स्टार्टअप्स की डिजिटल पहचान मजबूत करने में जुटे युवा उद्यमी Pradum Shukla

भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा उद्यमी नए विचारों और नवाचारों के साथ सामने आ रहे हैं। लेकिन किसी भी नए स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल एक अच्छा आइडिया बनाना नहीं होती, बल्कि अपनी पहचान बनाना और लोगों तक पहुँचना भी होता है। शुरुआती दौर में कई स्टार्टअप्स को अपनी कंपनी के बारे में जानकारी फैलाने और सही दर्शकों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
Pradum Shukla Founder of Desh Crux


इसी चुनौती को समझते हुए युवा उद्यमी Pradum Shukla ने एक डिजिटल पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य नए स्टार्टअप्स और कंपनियों को ऑनलाइन दुनिया में बेहतर पहचान दिलाने में मदद करना है।

Desh Crux के पीछे की सोच

Pradum Shukla ने Desh Crux नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है, जो स्टार्टअप्स और कंपनियों को अपनी जानकारी साझा करने और डिजिटल पहचान बनाने का अवसर देता है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर कंपनियाँ अपनी प्रोफ़ाइल बनाकर अपने फाउंडर्स, सेवाओं, उद्देश्य और अपने काम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लोगों तक पहुँचा सकती हैं।

आज के समय में जब इंटरनेट किसी भी व्यवसाय की पहचान बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म स्टार्टअप्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। Desh Crux का उद्देश्य यही है कि नए और उभरते स्टार्टअप्स को एक ऐसा डिजिटल
मंच मिले जहाँ वे अपने विचार और काम को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

पढ़ाई के साथ उद्यमिता की यात्रा

Pradum Shukla का जन्म 24 जून 2006 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। कम उम्र में ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स और उद्यमिता से जुड़े विचारों पर काम करना शुरू कर दिया।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा Chandraprabha Public School से पूरी की और बाद में Divine Sainik School से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वे Greater Noida स्थित IIMT Group of Colleges में B.Tech की पढ़ाई कर रहे हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता पर काम करना आज कई युवाओं के बीच एक नई सोच बन चुकी है, और Pradum Shukla भी उन्हीं युवाओं में से एक हैं जो शिक्षा के साथ अपने विचारों को वास्तविक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

लेखन के माध्यम से प्रेरणा

उद्यमिता के अलावा Pradum Shukla ने लेखन के क्षेत्र में भी कदम रखा है। उन्होंने “The Power to Outgrow” नाम की एक मोटिवेशनल किताब लिखी है, जो व्यक्तिगत विकास, अनुशासन और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर आधारित है।

इस पुस्तक के माध्यम से वे लोगों को अपने जीवन में निरंतर सीखने, खुद को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

आगे की राह

भारत में स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही ऐसे प्लेटफ़ॉर्म्स की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है जो नए व्यवसायों को पहचान बनाने में मदद कर सकें।

Desh Crux जैसी पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। युवा उद्यमियों के ऐसे प्रयास यह दिखाते हैं कि नई पीढ़ी केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसर बनाने की कोशिश कर रही है।

डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा—समृद्ध किसान ही विकसित भारत की नींव, ‘किसान कल्याण वर्ष’ में अन्नदाताओं को बड़ी सौगातें

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  भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। राज्य सरकार ने इस वर्ष को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और किसानों के जीवन में खुशहाली लाना है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में "सच्चा वादा और पक्का काम" के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से किया हर वादा प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

गेहूं उपार्जन के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि और नई व्यवस्थाएं

  किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि प्रदेश में गेहूं उत्पादन के रिकॉर्ड को देखते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की बड़ी बढ़ोत्तरी किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए अब गेहूं की खरीदी सप्ताह में 6 दिन की जाएगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा। स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर अब 9 मई तक कर दिया गया है, जिससे अंतिम छोर का किसान भी अपनी फसल आसानी से बेच सके।

भू-अर्जन पर 4 गुना मुआवजा और फसलों पर विशेष बोनस

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक और ऐतिहासिक कदम की जानकारी दी। अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, जो उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा फैसला है। केवल इतना ही नहीं, सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीदी पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। सरसों के उत्पादन में भी भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन से किसानों को बाजार में एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं।

सिंचाई के लिए दिन में बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर

  प्रदेश के अन्नदाताओं को रात की परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार अब रात के बजाय दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिए जा रहे हैं। साथ ही, कृषक मित्र योजना के माध्यम से किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश का किसान बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और खेती की लागत में भी कमी आएगी।

मध्यप्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' बनाने का लक्ष्य

  खेती के साथ-साथ पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई 1752 दुग्ध समितियों के गठन के बाद प्रतिदिन का दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम के पार पहुंच गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अब प्रति किलो 8 से 10 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके फलस्वरूप अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह क्रांति न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और आधुनिक वितरण प्रणाली

  वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए खाद और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसानों को बिना लंबी कतारों में लगे, उनके मनचाहे स्थान से खाद मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनका परिवार है और वे हर परिस्थिति में आखिरी दम तक किसानों के साथ खड़े रहेंगे।

माही नदी की दुर्दशा देख छलका पार्षद रितु सोनी का दर्द,नागरिकों से स्वच्छता बनाए रखने की भावुक अपील








 



 राजगढ़ /धार। नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 10 की पार्षद श्रीमती रितु नीलेश सोनी ने माही नदी के तट पर फैली गंदगी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों से नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने का आह्वान किया है। हाल ही में नदी क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचीं पार्षद ने पाया कि पूर्व में चलाए गए सफाई अभियानों के बावजूद तटों पर पुनः कचरे का अंबार लग गया है, जो न केवल पर्यावरण के लिए घातक है बल्कि हमारी धार्मिक आस्थाओं को भी ठेस पहुँचाता है।
   पार्षद श्रीमती सोनी ने इस स्थिति पर दुःख प्रकट करते हुए कहा कि कुछ समय पूर्व ही 'वाइब्रेंट वूमेन ' समूह द्वारा 'जय माँ माही स्वच्छता अभियान' के माध्यम से यहाँ व्यापक सफाई की गई थी। लेकिन यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिस नदी को हम माँ का दर्जा देते हैं और जिसकी पूजा करते हैं, उसी के आंचल को हम कचरे से दूषित कर रहे हैं। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों और क्षेत्रीय नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा जगह-जगह कूड़ेदान (डस्टबिन) की व्यवस्था की गई है, अतः यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है कि वे कचरा इधर-उधर न फेंक कर निर्धारित स्थान पर ही डालें।

















   आगामी वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले का संदर्भ देते हुए पार्षद ने कहा कि मध्य प्रदेश की पहचान यहाँ की पवित्र नदियों से है। उन्होंने अपील की कि शिप्रा, नर्मदा और गंगा की तरह माही नदी की पवित्रता को अक्षुण्ण रखना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। सिंहस्थ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के समक्ष हमें अपनी नदियों और नगर की एक स्वच्छ छवि प्रस्तुत करनी चाहिए।
श्रीमती सोनी ने अंत में कहा कि स्वच्छता केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह जन-भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने 'गंगा, नर्मदा, शिप्रा या माही, सबकी स्वच्छता और पवित्रता हमारी जिम्मेदारी' का संकल्प दोहराते हुए विश्वास जताया कि राजगढ़ और सरदारपुर क्षेत्र के जागरूक नागरिक इस दिशा में सकारात्मक सहयोग करेंगे और माही तट को पुनः स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे।

कंसाई नेरोलैक ने अपने पेंट को भारतीय इतिहास के सबसे कठिन टेस्ट से पार किया

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

कुछ लोग सिर्फ दावे करते हैं और कुछ लोग दावे साबित करते हैं। कंसाई नेरोलैक (Kansai Nerolac) ने मुश्किल रास्ता चुना।

 
भारतीय पेंट उद्योग में अपनी तरह के पहले वैज्ञानिक प्रमाणीकरण (scientific validation) में भारत के प्रतिष्ठित और सबसे भरोसेमंद पेंट ब्रांडों में से एक, कंसाई नेरोलैक ने पृथ्वी से 86,000 फीट ऊपर एक स्ट्रैटोस्फेरिक गुब्बारा (stratospheric balloon) लॉन्च किया। अपनी एक्सटीरियर रेंज की गुणवत्ता को प्रदर्शित करने के लिए इस गुब्बारे में कंसाई नेरोलैक के 'एक्सेल एवरलास्ट' (Excel Everlast) पेंट से रंगा हुआ एक पेलोड (payload) भेजा गया था। उस ऊंचाई पर जहाँ तापमान -64°C से भी नीचे चला जाता है, यूवी रेडिएशन (UV radiation) पूरी तरह से अनफिल्टर्ड होता है और वायुमंडलीय दबाव समुद्र तल पर मौजूद दबाव का एक छोटा सा अंश मात्र होता है। ऐसी स्थितियां अधिकांश सतहों को नष्ट कर सकती हैं। यह पेंट न केवल इन चरम स्थितियों में बचने में सफल रहा; बल्कि यह बिना किसी खरोंच या दाग के वापस आ गया।

इस पहल को क्रिएटिव एजेंसी 'उल्का' (ULKA) द्वारा तैयार किया गया था जिसने लैब सिमुलेशन (lab simulation) या नियंत्रित वातावरण से परे जाकर इस पेंट परीक्षण की परिकल्पना की। यह कैंपेन फिल्म एक ऐसे वास्तविक पेलोड का दस्तावेजीकरण करती है जो स्ट्रैटोस्फीयर (समताप मंडल) में गया और बिल्कुल सुरक्षित (intact) वापस आ गया। यह एक ऐसा प्रमाण है जिसे किसी 'डिस्क्लेमर' की आवश्यकता नहीं है।


#OutofThisWorld अभियान कंसाई नेरोलैक की विरासत के शिखर को दर्शाता है: एक ऐसा पेंट जिसे प्रकृति की सबसे कठोर परिस्थितियों में भी टिके रहने के लिए इंजीनियर किया गया है। यह अभियान उस वादे का प्रमाण है, जिसे उस पैमाने पर अंजाम दिया गया है जिसका विज्ञापन की दुनिया में 'होम पेंट्स' के लिए पहले कभी प्रयास नहीं किया गया था।

 

कंसाई नेरोलैक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, रामकृष्ण नाइक ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “एक्सेल एवरलास्ट रेंज हमेशा से एक ही बात के लिए जानी जाती है, वह पेंट जो हार मानने से इंकार कर देता है। जब हमने जापानी तकनीक के साथ भारत का पहला सेल्फ-क्लीनिंग पेंट, 'एवरलास्ट 14' लॉन्च किया, तो हम वहीं नहीं रुके बल्कि वास्तव में हमने नैनो-सिलिका तकनीक द्वारा संचालित 'बुलेट प्रूफ प्रोटेक्शन' के साथ 'एक्सेल एवरलास्ट 20' विकसित किया। इसमें 30% अधिक कठोरता और क्रैक-ब्रिजिंग क्षमता है जो किसी भी प्रतिस्पर्धी को पीछे छोड़ देती है। यह वह पेंट है जिसने भारत की पहली 20-वर्षीय वारंटी हासिल की है। इसे स्ट्रैटोस्फीयर में भेजना दुनिया के सामने इसे पेश करने का एकमात्र उपयुक्त तरीका लगा। क्योंकि इतना बेजोड़ उत्पाद एक ऐसे ही असाधारण मंच का हकदार था।”

 इस प्रयोग के पीछे के विचार पर बोलते हुए, ULKA के चीफ क्रिएटिव एक्सपीरियंस ऑफिसर राकेश मेनन ने कहा, “यह विचार भरोसे के साथ आया है: यदि कोई एक्सटीरियर पेंट अंतरिक्ष में टिक सकता है, तो वह पृथ्वी पर किसी भी स्थिति में टिक सकता है। हमारे लिए जो बात मायने रखती थी, वह इसे सच में करना था। कोई सिमुलेशन नहीं, कोई शॉर्टकट नहीं। बस उत्पाद को अंतिम और सबसे कड़े परीक्षण से गुजारना।”

 क्रेडिट्स (Credits)

बिजनेस: कुलविंदर अहलूवालिया, वंदना जोशी, अभिमन्यु जुनेजा, रिकी बारेटो, शिवम दवे

क्रिएटिव: राकेश मेनन, विशाल निकोलस, सागर परब, पार्थ पंड्या, खुशी बागरी, परेश जाधव, क्षितिजा राउत, साहिल देसाई, ओंकार म्हासकर, अरिजीत बनर्जी, कार्तिकेय तिवारी

स्ट्रेटेजी : मनीषा सुदर्शन, अखिल वदान

 
कंसाई नेरोलैक पेंट्स लिमिटेड के बारे में

अपने 106वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी, कंसाई नेरोलैक पेंट्स उच्च गुणवत्ता वाले पेंट्स की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करते हुए पेंट निर्माण में सबसे आगे रही है। कंसाई नेरोलैक भारत की अग्रणी पेंट कंपनियों में से एक है और इंडस्ट्रियल पेंट्स में मार्केट लीडर है। कंपनी के पास पूरे भारत में रणनीतिक रूप से स्थित आठ मैनुफेक्चरिंग इकाइयां और देश भर में एक मजबूत डीलर नेटवर्क है। कंपनी घरों, कार्यालयों, अस्पतालों और होटलों के लिए सजावटी पेंट्स कोटिंग्स से लेकर अधिकांश उद्योगों के लिए परिष्कृत औद्योगिक कोटिंग्स तक विविध उत्पादों का निर्माण करती है।

 
अधिक जानकारी के लिए कृपया www.nerolac.com पर जाएं।