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राजगढ़ में पेयजल संकट: पार्षदों ने सुधार के लिए सौंपा ज्ञापन







 



  राजगढ़ (धार) नगर परिषद क्षेत्र में पेयजल की बदहाल व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने मुख्य पालिका अधिकारी श्रीमती ज्योति सुनारिया को ज्ञापन सौंपा है। पार्षदों में रितु निलेश सोनी, कंकुबाई शंभू परवार, नितिन जैन (चिंटू), पंकज बारोड़, मुकेश खि्मुर, रमेशसिंह राजपूत और अंजली अजय जायसवाल ने संयुक्त रूप से नगर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार की मांग की है।
  जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर में पानी की आपूर्ति को नियमित किया जाए और घोषित समय-सारणी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो। पार्षदों ने शिकायत की है कि नलों के माध्यम से मिलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है, इसलिए इसे तत्काल सुधार कर नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि पानी की कमी को पूरा करने के लिए नगर के उचित स्थानों पर नए ट्यूबवेल खुदवाए जाएं और जब तक जलापूर्ति की व्यवस्था सामान्य नहीं हो जाती, तब तक नगर में टैंकरों के जरिए नागरिकों को पीने का पानी वितरित किया जाए। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर धार और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सरदारपुर को भी भेजा है ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई हो सके।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान,धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ






 


 DHAR : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

 इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया।








धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

 देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।

धार में राज्य सरकार बनायेगी भव्य सरस्वती लोक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव






 

राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना भी की जाएगी
भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों के परिजन को दिये जायेंगे 5-5 लाख रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा
भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन-अर्चन कर जल गंगा सर्वधन अभियान के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव
गंगा दशहरा पर हुए जल संरक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने
88.04 करोड़ रुपये के 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन कर धार जिलेवासियों को दी सौगात
धार में अब बहेगी विकास की नई धारा
धार के आसपास करायेंगे सभी प्रकार के विकास कार्य

 DHAR : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार स्थित भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक बनायेगी, यहॉ राजा भोज संस्थान की स्थापना भी की जायेगी। ऐतिहासिक भोजशाला पर माननीय उच्च न्यायालय ने जो निर्णय दिया है, राज्य सरकार इस न्यायिक आदेश का अक्षरश: पालन कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोजपाल द्वारा स्थापित यह भोजशाला सदियों तक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केन्द्र रहा है। यह हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा का अटूट प्रतीक है। यहाँ दूर-दूर से छात्र और विद्वान ज्ञान अर्जित करने और शास्त्रों पर विमर्श करने आते थे। राज्य सरकार भोजशाला के उसी गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करेगी। राजा भोज की इस पुण्य धरा (धार) में अब चहुंमुखी विकास की नई धारा बहेगी। धार के आसपास पुरात्व विभाग से समन्वय कर सभी प्रकार के विकास कार्य किए जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज जल संरक्षण के अग्रदूत थे। उनके द्वारा निर्मित विशाल जलाशय, तालाब और जल प्रबंधन की व्यवस्थाएं आज भी उनकी अद्भुत दूरदर्शिता एवं जल नियोजन का प्रमाण हैं। धार को किसी समय तालाबों की नगरी कहा जाता था। राजा भोज ने इस शहर में जलापूर्ति के लिए यहां साढ़े बारह तालाबों का निर्माण कराया गया था और इन्हें आपस में इस तरह से जोड़ा गया था कि एक तालाब भरने पर उसका अतिरिक्त पानी दूसरे तालाब में स्वत: चला जाता था। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से प्रदेश में जल संवर्धन की नई क्रांति आएगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में खण्डवा, बड़वानी, अशोकनगर, राजगढ़ और डिंडौरी के बाद धार जिला छठवें स्थान पर है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में जल संरक्षण के 5 हजार से अधिक काम पूर्ण किये गये है, इसी तरह धार नगरपालिका क्षेत्र में 64 प्राचीन बावड़ियों एवं तालाबों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को धार में जल गंगा संवर्धन अभियान के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गंगा दशहरा पर सोमवार को प्रदेशव्यापी जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार में हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी के सम्मान में धार में भव्य सरस्वती लोक बनायें जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राजा भोज की कर्मस्थली है, इसीलिए धार में राजा भोज शोध संस्थान की भी स्थापना की जायेगी। भोपाल में भी राजा भोज का संग्रहालय बनाया जा रहा है।

 इस अवसर पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास व आवास एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, धार की विधायिका श्रीमती नीनाविक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां 88.04 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन कर जिलेवासियों को सौगात दी। इसमें 27.21 करोड़ रुपये की लागत से चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर फोरलेन उच्च स्तरीय पुल निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों स्व. श्री बनसिंह, स्व. श्री अंतरसिंह एवं स्व. श्री लक्म्ंण सिंह के निकटतम परिजन को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान तीनों शहीदों के सम्मान में मौन रखकर इन्हें श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न शासकीय योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को मंच से हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन कर विधि विधान से पूजन-अर्चन किया और वाग्देवी से प्रदेश की सुख-समृद्धि और नागरिकों की खुशहाली की कामना की।

धार में बनेगा भव्य सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय से 750 वर्ष का संषर्घ सफल हुआ है। धार में नए युग की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए। प्रदेश की जनता को बधाई दी। धार अब प्रदेश में औद्योगिक श्रेणी में सबसे अग्रणी जिला बनकर उभरा है। राज्य सरकार मां वाग्देवी के आशीर्वाद से विकास के क्रम में आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। यहां भव्य माता सरस्वती लोक का निर्माण किया जाएगा। धार में राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाएगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भोज ने जल संरक्षण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। गंगा दशमी पर्व राजा भोज की धरती पर मनाना हम सभी के लिए गौरवशाली क्षण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश इस मामले में देश में प्रथम स्थान पर है, यह प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। प्रदेश के नागरिकों की सहभागिता से जल संरक्षण के लिए 2 लाख 42 हजार 188 कार्य करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत प्रदेशभर में 2500 करोड़ रुपए लागत के कार्य प्रगति पर हैं। प्रदेश में 89 हजार 772 कुओं को रिचार्ज किया गया है, 55 हजार से अधिक खेत तालाब बनाए गए और अब तक 105 अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है। अब तक लाखों जलदूत बनाए गए हैं। प्रदेश के नगरीय निकायों ने 2 हजार 224 कार्य करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक 9 हजार 630 काम पूरे कर लिए गये है, जो निकायों के लक्ष्य का 433 गुना अधिक है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण गतिविधियों में नंबर वन है। प्रदेश में खंडवा, बड़वानी, अशोकनगर, राजगढ़, डिंडोरी और धार में बेहतर काम हुए हैं। जल संरक्षण की दिशा में वाटरशेड, डगवेल रीचार्ज, सिंचाई संरचना आदि काम किए जा रहे हैं।
 
 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज के द्वारा संरक्षित पुरातत्व के महत्व के अनेक स्थान और भोजपत्र हमारी धरोहर हैं। उन्होंने भोपाल के पास भोजपुर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का निर्माण कराया। भोपाल के बड़े तालाब की निर्माण तकनीक देखकर दुनिया के बड़े-बड़े विद्वान अचंभित रह जाते हैं। राजा भोज ने 45 फीट लंबे लौह स्तंभ का भी निर्माण कराया, जिसके संदर्भ में अरब के इतिहासकार अलबलूनी ने कहा कि विश्व में ऐसा स्तंभ नहीं देखा, जिस लौह स्तंभ पर कभी जंग नहीं लगी। यह मालवा की धरोहर है। राजा भोज ने कवियों का सम्मेलन कराया और उनकी एक-एक रचना के लिए सोने की ईंट देकर पुरस्कृत किया। आज भी राजा भोज के अतीत की घटनाएं हम सभी को गौरवान्वित करती हैं। उन्होंने वीरता, धीरता, पराक्रमशीलता और गंभीरता के पैमाने पर उनका समवर्ती कोई राजा आसपास नजर नहीं आता है। दक्षिण में तमिलनाडु के पास भी एक भोज मंदिर देखने को मिलता है।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के एक प्रचलित मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की दिशा में राज्य सरकार ने त्वरित निर्णय लिया। आज सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस निर्णय की सराहना की है। न्यायालय निर्णय करता है और राज्य सरकार इसे अक्षरश: लागू कराती है। विकास के मामले में मध्यप्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। कार्यक्रम को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी संबोधित किया।


विधायक प्रताप ग्रेवाल ने राजगढ नगर मे पेयजल संकट को लेकर ली बैठक,राजगढ नगर मे पेयजल संकट का समाधान हमारी प्राथमिकता है - विधायक ग्रेवाल





 



 राजगढ़। राजगढ नगर मे पेयजल संकट को लेंकर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने शनिवार को नगर पालिका सभाकक्ष मे जनप्रतिनिधीयो एवं नगर परिषद् अधिकारी-कर्मचारियो की बैठक ली। बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सलोनी अग्रवाल एवं नगर परिषद् अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल ने की। बैठक मे पार्षदो द्वारा नगर मे नियमित रूप से जल प्रदाय नही होने की समस्या बताई। 

   विधायक प्रताप ग्रेवाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राजगढ नगर मे पेयजल संकट का समाधान करना हमारी प्राथमिकता है नगर की जनता को नियमित रूप से पानी मिले यह हम जनप्रतिनिधीयो का कर्तव्य है। बैठक के दौरान पूर्व नगर परिषद् अध्यक्ष भंवरसिंह बारोड द्वारा पूर्व परिषद् के समय गोविन्दपुरा जलाशय से डाली गई पाईप लाईन चालु करने का सुझाव दिया गया। साथ ही पार्षदगणो द्वारा द्वारा भी पेयजल संकट को दूर करने के लिए नगर मे नवीन ट्युबवेल खनन करने, वार्ड क्र.11 मैला मैदान क्षैत्र मे प्राचीन बावडी की सफाई कर पेयजल स्त्रोत के रूप मे उपयोग करने, निजी ट्युबवेल का अधिग्रहण करने के सुझाव दिए गए। विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पेयजल संकट को दूर करने के लिए विधायक निधी से 5 पानी टैंकर देने की बात कही। बैठक के पश्चात विधायक प्रताप ग्रेवाल, एसडीएम सलोनी अग्रवाल एवं नगर परिषद् अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल द्वारा प्राचीन बावडी का निरीक्षण कर मुख्य नगर परिषद् अधिकारी को बावडी की शीघ्र ही सफाई करवाने हेतु निर्देशित किया गया।

  आयोजित बैठक मे मुख्य नगर परिषद् अधिकारी ज्योति सुनारिया, पीएचई विभाग के ब्लाक समन्वयक बाबुलाल परवार, अध्यक्ष प्रतिनिधी महेश जायसवाल, पार्षद रमेश राजपूत, चिन्टु चैहान, पार्षद प्रतिनिधी निलेश सिंगार, बलराम मकवाना, भारत सिंगार, प्रवीण जैन, निलेश सोनी, शंभुलाल परवार, अजय जायसवाल, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष रतनलाल पडियार, शहर कांग्रेस अध्यक्ष जीवनसिंह सिसौदिया, युवक कांग्रेस शहर अध्यक्ष आकर्ष शर्मा, पूर्व पार्षद धीरज गौराना, मांगीलाल डामर आदि नगर परिषद् के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

स्वर्गीय राजा प्रेमसिंह दत्तीगांव की स्मृति में भव्य अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन, कवि मुकेश मोलवा ने धार भोजशाला पर कहा - 'पूजा की थाल ले शुक्रवार आया'






 


   राजगढ़ (धार) । राजगढ़ नगर स्वर्गीय राजा श्री प्रेमसिंह जी दत्तीगांव (पूर्व विधायक, बदनावर) की 24वीं पुण्यतिथि के गरिमामय अवसर पर न्यू बस स्टैंड पर एक भव्य अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। शुक्रवार, 22 मई को आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात लगभग 3 बजे तक पूरी ऊर्जा के साथ चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के रसिक श्रोताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा स्वर्गीय राजा श्री प्रेमसिंह दत्तीगांव के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर राजमाता कुसुम सिंह दत्तीगांव, पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और पूर्व मंडी अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह दत्तीगांव विशेष रूप से उपस्थित रहे।








  मंच से अपनी बात रखते हुए पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने कुछ पंक्तियों के माध्यम से स्वर्गीय राजा साहब के व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने बेहद ओजस्वी स्वर में कहा: "मैंने अमलतास के पेड़ नहीं,लोहे के पेड़ उगाए हैं। जब-जब मैंने उनको देखा लोहा देखा, लोहा देखा। लोहे की तरह तपते देखा,लोहे की तरह गलते देखा,लोहे की तरह ढलते देखा। जब-जब मैंने उनको देखा लोहा देखा, लोहा देखा। वक्त पड़ा तो मैंने उन्हें गोली की तरह चलते देखा।" उन्होंने आगे भावुक होते हुए कहा कि वे जीवन पर्यंत सेवा भाव के इस मार्ग पर निरंतर प्रयास करते रहेंगे और जनता की सेवा में जो भी बन पड़ेगा, उसे पूरी निष्ठा से समर्पित करेंगे।

  इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। इंदौर से आए सुप्रसिद्ध कवि मुकेश मोलवा ने 'मैं संघ शताब्दी बोल रहा हूँ' कविता का पाठ किया और धार भोजशाला के वर्तमान संदर्भों को जोड़ते हुए जब "पूजा की थाल ले शुक्रवार आया" की ओजस्वी पंक्तियां सुनाईं, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, नाथद्वारा से आए हास्य कवि कानू पंडित ने ग्रामीण परिवेश की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि अपने गांव के बरगद, नीम और अंबुआ की छांव जरूरी है, इसीलिए इस हिंदुस्तान में गांव जरूरी है। कटनी से पधारीं कवयित्री प्रियंका मिश्रा ने मोहब्बत पर अपनी सुरीली रचनाओं से श्रोताओं को सराबोर कर दिया, तो दूसरी ओर लाफ्टर चैंपियन फेम आगरा के प्रताप फौजदार और देवास के कुलदीप रंगीला ने तीखे हास्य-व्यंग्य के बाणों से सबको लोटपोट कर दिया।

  काव्य पाठ के इसी सिलसिले में कवयित्री शशि श्रेया ने भाग्य से सताए गए और प्रेम में रुलाए गए लोगों पर केंद्रित भावुक काव्य पाठ कर खूब वाहवाही लूटी। सोशल मीडिया पर अपने अनूठे अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले कवि डॉ. आदित्य जैन ने अलग-अलग पैरोडियों के माध्यम से वर्तमान में चल रहे 'मेलोनी और पीएम मोदी' के सोशल मीडिया मीम्स पर मजेदार प्रस्तुतियां दीं, जिसे युवाओं ने बेहद पसंद किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डूंगरपुर से आए कवि विपुल विद्रोही ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में किया। जबकि कार्यक्रम का  संचालन निलेश शर्मा ने  किया।

 इस सफल और भव्य आयोजन को साकार करने में आयोजन समिति के सदस्य अशोक भंडारी, संदीप खजांची, राजेश देवड़ा, रमेश रामजी, सोनू भंडारी, भोजराज कमेडिया, मांगीलाल यादव, प्रितेश सराफ, रमेश राजपूत, दीपांशु ठाकर, हितेश परमार, जितेन्द्र (नानु), आयुष सेठी, हेमंत रोकड़िया और अल्पेश लछेटा ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए सभी आमंत्रित अतिथियों एवं कवियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी नागरिकों और रचनाकारों के प्रति आजाद भंडारी ने आभार व्यक्त किया।

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस विशेष: राजगढ़ में लगभग 200 वर्ष प्राचीन वटवृक्ष का अनोखा रहस्य; तने में नहीं, सीधे 'जड़ों' से समाहित है यह प्राचीन प्रतिमा !







 



विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: अक्षय भंडारी, राजगढ़ (धार)

  राजगढ़ (धार)। आज 22 मई को देश और दुनिया में 'अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस' मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर, धार जिले का राजगढ़ नगर एक ऐसी विस्मयकारी और ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाता है, जो प्राचीन इतिहास और पर्यावरण के बेजोड़ तालमेल का जीवंत उदाहरण है। नगर के वार्ड क्रमांक 9 में स्थित परिसर में एक विशालकाय वटवृक्ष (बरगद का पेड़) पिछले दो सौ से अधिक वर्षों से इतिहास का मूक गवाह बनकर खड़ा है, जो अपनी अनोखी बनावट और एक अनसुलझे रहस्य के कारण पूरे अंचल में गहरी जिज्ञासा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

वटवृक्ष के भीतर का गहरा राज: जड़ों से ही एकाकार है प्राचीन विग्रह

  इस ऐतिहासिक स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का कौतूहल पैदा करने वाला स्वरूप है। लगभग 200 वर्ष से भी अधिक पुराने इस विशाल वटवृक्ष के मुख्य हिस्से में एक प्राचीन सिंदूरी प्रतिमा मौजूद है, जो सदियों से अंचल के नागरिकों के लिए भगवान श्री शनिदेव के स्वरूप में पूजनीय और अगाध श्रद्धा का केंद्र है।
  स्थानीय जानकारों और मंदिर परंपरा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह प्राचीन प्रतिमा किसी बाहरी माध्यम से लाकर यहाँ स्थापित नहीं की गई है, बल्कि यह शुरू से ही इस विशाल पेड़ के भीतर बसी हुई है। विस्मय की बात यह है कि इस विग्रह का आधार सीधे वटवृक्ष की मुख्य जड़ों के साथ अंदर तक गहराई से जुड़ा हुआ है। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए यह आज भी एक अनसुलझा सवाल है कि प्राचीन काल में यह विशिष्ट प्रतिमा मूल रूप से किसकी स्वरूप में प्रकट हुई थी और यह सदियों पुराने जीवित पेड़ के साथ इस कदर कैसे समाहित हो गई। बिना किसी इंसानी छेड़छाड़ के, पेड़ और इस विग्रह का यह प्राकृतिक जुड़ाव वनस्पति शास्त्रियों और पुरातत्व के जानकारों के लिए भी बेहद दिलचस्प विषय है।

जैव विविधता का मूक प्रहरी

  यह विशालकाय बरगद का पेड़ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ दो सदियों से अधिक समय से इस क्षेत्र की माटी को निरंतर प्राणवायु (ऑक्सीजन) दे रहा है। आज अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर, धर्म और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाती यह अनूठी धरोहर राजगढ़ की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान को और मजबूत करती है।




स्व.श्री दत्तीगाँवजी की पुण्यतिथि सेवा दिवस के रूप में मनाई गई







 


  राजगढ़(धार) बदनावर के पूर्व विधायक मध्यप्रदेश के लोकप्रिय नेता रहे स्व राजा श्री प्रेमसिंहजी दत्तीगांव की पुण्यतिथि सेवा दिवस के रूप में मनाई गई।

  दत्तीगाँव सोश्यल ग्रुप अध्यक्ष निलेश सोनी ने बताया कि 22 मई को पुण्यतिथि के अवसर पर राजगढ़ कृषि उपज मंडी स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।कार्यक्रम में भाजपा नेता डॉ बलबहादुरसिंह राठौर,भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ सहसंयोजक डॉ आशीष वैद्य,जनपद अध्यक्ष प्रति.देवा सिंगार,पार्षद पंकज बारोड,पार्षद प्रति.शंभु परवार,भाजपा नेता निलेश परमार,मुन्ना कामदार,मुन्ना मारू,अजय श्रीवास्तव,प्रकाश पंडित,ओंकार मिस्त्री,भेरू सेप्टा,महेंद्र राजपूत,लक्ष्मण डामेचा,कैलाश मारू,डॉ कुमावत भानगढ़,कान्हा सिंदडा,श्रीराम मारू,अजय बलसारा,विक्रमसिंह पंवार,धर्मेंद्र उपाध्याय,रमेश निनामा,लक्ष्मणसिंह चौहाण,पानसिंह माछलिया,बाबू पूर्व सरपंच करनावद सहित सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

नगर परिषद राजगढ़ के स्मृति वन में पौधारोपण किया गया

  गौशाला में गौ माता की सेवा की गई। कंचन हॉस्पिटल में मरीजों को दूध,बिस्किट आदि सामग्री का वितरण डॉ एमएल जैन के मार्गदर्शन में किया गया।