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उल्लास का उत्सव भगोरिया मेला - क्रांतिदीप अलूने




 


  भगोरिया मेला प्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर आलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी और धार के भील, भिलाला और बारेला जनजाति द्वारा होली से सात दिन पहले मनाया जाने वाला सात दिवसीय प्रसिद्ध जनजातीय उत्सव है। फसल कटाई का जश्न होली के सात दिन पहले शुरू होने वाला यह मेला, फसल कटाई के बाद जनजातीय समुदाय द्वारा उल्लास के साथ मनाए जाने वाला का त्यौहार है। भगोरिया में पारम्परिक रूप से जीवन साथी चुनने, रंग-गुलाल लगाने, नृत्य-संगीत और खरीदारी करने की उदात्त भावनाएँ मुखरता से प्रदर्शित होती है।

  फागुन महीने में जब चारों ओर प्रकृति में नया उल्लास होता हैं तब पश्चिम निमाड़ से झाबुआ तक के जनजातीय क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट बाजार भगोरिया के रंग में रंगे होते हैं। मेले में हर तरफ फागुन और इन्द्रधनुषी प्रेम के रंग नज़र आते हैं। इन मेलों में मुख्य रूप से होली के लिए खरीददारी करने के लिए लोग आते हैं। गैर जनजातीय समुदाय के लिए भी भगौरिया के साप्ताहिक हाट बाजार विशिष्ट होते हैं। इसका सभी व्यापारियों को भी इंतजार रहता है। इसमें दुकानदार साल भर की कमाई, भगोरिया के साप्ताहिक बाजार से कर लेते हैं। भगोरिया हाट (बाजार) में जरूरत की वस्तुएं, मिठाइयाँ और पारंपरिक आभूषण बिकते हैं।

  भगोरिया मेले में बड़े-बड़े ढोल और मांदल की थाप पर पारंपरिक आदिवासी नृत्य किया जाता है, जिसमें विभिन्न दल ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होने वाले विभिन्न दल एक ही रंग के वस्त्रों में अपनी अलग पहचान के साथ छटा बिखेरते हैं। महिलाओं के साथ पुरूष भी चांदी के आभूषणों से सज्जित होकर पारम्परिक वाद्य यंत्रों की ताल पर थिरकते हैं। चांदी के आभूषण भील जनजाति में समृद्धि के प्रतीक हैं।

  भगोरिया मेल-मिलाप, आनंद और उल्लास का उत्सव है। माना जाता है कि इसमें युवा अपनी पसंद के साथी को गुलाल लगाकर या पान खिलाकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। भगोरिया में मनपसंद के साथी के साथ भागकर विवाह करने की मान्यता भी प्रचलित है।

  भगोरिया पर्व होली के सात दिन पहले से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों के विभिन्न गाँवों में साप्ताहिक बाजार के दिन आयोजित होता है। भगोरिया मेला आदिवासी संस्कृति, उमंग और जीवन को करीब से जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

वालपुर का प्रसिद्ध भगोरिया

 आलीराजपुर जिले के वालपुर का भगोरिया मेला अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता, आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों और अनूठी पारंपरिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

 किंवदंती है कि इस मेले की शुरुआत राजा भोज के समय में भील राजाओं द्वारा की गई थी। आलीराजपुर जिले के वालपुर में तीन प्रांतों की जनजातीय संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं। यह स्थान तीन प्रांतों (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के निकट) की सांस्कृतिक संस्कृति का संगम स्थल होने के कारण भी विशेष जाना जाता है। वालपुर का मेला आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का एक अद्भुत मिश्रण है, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों के साथ, ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी युवा थिरकते हैं।

भगोरिया प्रदेश में राजकीय उत्सव

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 मार्च 2025 को 'भगोरिया पर्व' को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनजातीय देवलोक महोत्सव में राजकीय उत्सव किया। उन्होंने कहा कि भगोरिया उल्लास का पर्व है। यह फागुन के रंगों से सराबोर प्रकृति की खुशबू में कुछ पल थम जाने और इसी में रम जाने का पर्व है। हमारी सरकार भगोरिया का उल्लास बरकरार रखेगी।

  वर्ष 2026 में भगोरिया महोत्सव 24 फरवरी मंगलवार से प्रारंभ होगा। यह 2 मार्च सोमवार तक चलेगा। बड़वानी जिले में सोमवार 2 मार्च को निवाली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगोरिया महोत्सव में शामिल होंगे।

 (लेखक उप संचालक जनसम्पर्क हैं)


"मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव




 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ किया मन की बात कार्यक्रम का श्रवण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम का श्रवण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस लाइन स्टेडियम,नेहरू नगर भोपाल में किया।

प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं

  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म है। देश में मैदानी स्तर पर घटित होने वाली सूक्ष्मतम गतिविधियों का वे ध्यान रखते हैं और उन्हें देशवासियों से साझा करते हैं। किसानों द्वारा एक ही स्थान पर विविध फसलें लेने के लिए किया गया नवाचार हो या केरल में बच्चे के अंगदान का मामला हो मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिलनाडु की पूर्व प्रधानमंत्री  जयललिता को याद करना देश की विविधता को अभिव्यक्ति देने के समान है। प्रधानमंत्री मोदी के विचारों में समग्रता और सबके विकास की सोच प्रकट होती है। प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम की यह विशेषता है कि इस संवाद में कभी राजनैतिक विषय नहीं आते, वे सदैव देश हित को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका यह विजन हम सबके लिए प्रेरणादायी है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी अन्नदाता, युवा, महिला, गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश के कोने-कोने में विकास, जनकल्याण के लिए हो रहे नवाचारों और पहल का ध्यान रखना और उन्हें देशवासियों से नियमित तौर पर साझा करना सराहनीय है। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई एम्पैक्ट समिट-2026 के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिट में प्रदेश के कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही पहल को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश के हित में एआई का किस प्रकार अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सकता है, इस पर विचार करना ही हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्र मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ




 


 
 मध्यप्रदेश उभर रहा है दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांग कह कर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले निशक्तजनों की इच्छा शक्ति को किया प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं। दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। 

मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है। उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है। इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है। 

 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया। पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं।

इंदौर में 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ; जनजातीय रंग,सुर और स्वाद से सराबोर हुआ गांधी हॉल परिसर




 



   इंदौर। शहर के ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में आज 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध से पूरा परिसर ऊर्जा व उल्लास से भर गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर शनि साधक पूज्य गुरुजी दादू महाराज, सांसद शंकर लालवानी, नगर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा नगर उपाध्यक्ष भरत पारख एवं स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को दीपक जैन के द्वारा पिछड़ा वर्ग एवं आदिवासी समाज के उत्थान हेतु निरंतर कार्यरत रहने के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर आयोजन का विधिवत शुभारम्भ किया और जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।

  जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन की थीम इस वर्ष 'पारंपरिक रंग, सुर और स्वाद' रखी गई है। पहले दिन प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिनमें भगोरिया और मांदल गीतों की गूंज ने वातावरण को जीवंत कर दिया। भगोरिया पर्व पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। धार, झाबुआ और अलीराजपुर अंचल की प्रसिद्ध पिथोरा कला को भी इस बार विशेष स्थान दिया गया है। ट्राइबल फाउंडेशन द्वारा स्थापित पिथोरा आर्ट गैलरी में 25 से अधिक चुनिंदा पिथोरा पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें आदिवासी जीवन, आस्था, प्रकृति और उत्सवों की झलक सजीव रूप में दिखाई दे रही है।

  समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने उद्घाटन समारोह के पश्चात कहा, "आज 'जात्रा–2026' का शुभारम्भ जिस उत्साह और जनसहभागिता के साथ हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत संतोष और गर्व का विषय है। पहले ही दिन शहरवासियों ने जिस प्रकार जनजातीय कला, पिथोरा चित्रकला, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों में रुचि दिखाई, उससे यह स्पष्ट है कि समाज अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है। हमारा उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी जीवन के मूल्यों प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। हमें विश्वास है कि आगामी दो दिनों में भी इंदौरवासी बड़ी संख्या में आकर इस सांस्कृतिक महोत्सव को सफल बनाएंगे।"

  इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी और पूज्य गुरुजी दादू महाराज ने संयुक्त रूप से कहा,"हाल ही में हुई बारिश के बावजूद जिस उत्कृष्ट व्यवस्था और भव्यता के साथ 'जात्रा–2026' का आयोजन किया गया है, वह आयोजन समिति की प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है। पूरे आदिवासी अंचल की संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर लाना अपने आप में सराहनीय प्रयास है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है। हम आयोजन समिति को इस सफल शुरुआत के लिए बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि यह उत्सव आने वाले दिनों में और भी अधिक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा।"

  कार्यक्रम संयोजक गिरीश चव्हाण ने उद्घाटन के बाद कहा,"आज जात्रा–2026 के पहले दिन जिस तरह जनप्रतिनिधियों, संतजनों और शहरवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, उससे आयोजन की भव्यता और उद्देश्य दोनों स्पष्ट हुए हैं। जनजातीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बना दिया। हमारा प्रयास था कि यह आयोजन इंदौर और जनजातीय अंचलों के बीच संवाद का सशक्त सेतु बने, और पहले ही दिन मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में यह उत्सव और अधिक ऊर्जावान रूप लेगा।"

   सह-संयोजक आशीष गुप्ता ने कहा,"उद्घाटन के साथ ही हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर शहरवासियों की अच्छी सहभागिता देखने को मिली। लोगों ने न केवल जनजातीय शिल्पकृतियों में रुचि दिखाई, बल्कि कलाकारों से सीधे संवाद भी किया। हमारा उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच और बाजार दोनों उपलब्ध कराना है। पहले दिन की सफलता से उत्साहित होकर हम आगामी दो दिनों में और बेहतर अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

  गांधी हॉल परिसर को मालवा-निमाड़ की पारंपरिक शैली में सजाया गया है। दीवार सज्जा, अलंकरण और मंच व्यवस्था में जनजातीय सौंदर्यबोध की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है। तीन दिवसीय 'जात्रा–2026' इंदौरवासियों के लिए जनजातीय संस्कृति, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और लोकधरोहर को करीब से जानने का अनूठा अवसर है। उल्लेखनीय है कि 20 से 22 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन का मीडिया पार्टनर पीआर 24x7 है। आयोजन समिति ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता की अपील की है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में की इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सहभागिता




 

तकनीक तभी सार्थक जब वह मानव हित में हो, हम एआई को सुशासन और सबके विकास के लिए अपनाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


निर्भय होकर एआई से प्रदेश के विकास की सभी संभावनाओं पर करेंगे काम

प्रदेश में एआई बेस्ड डेटा सेंटर की स्थापना के लिए निवेशक आमंत्रित

मध्यप्रदेश जल्द लांच करेगा स्टेट एआई मिशन

कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सुशासन में एआई का करेंगे उपयोग


  भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के समापन सत्र में सहभागिता की। उन्होंने भारत मंडपम् स्थित भोपाल मीडिया सेंटर में नेशनल मीडिया करेस्पांडेंट्स से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के भविष्य और इसके इस्तेमाल पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एआई से निर्भय होकर देश के हित में काम करने पर जोर दिया है। हमारी सरकार प्रदेश की समृद्धि के लिए सभी चुनौतियों से उबरकर तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें मध्यप्रदेश भी अपनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश, भारत का 5वां बड़ा राज्य है। राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एआई की मदद से सही समय पर बीमारियों की पहचान और उनका निदान एवं सुदूर अंचलों तक बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। 


मध्यप्रदेश में एआई का एक पूरा नया ईको सिस्टम तैयार किया जाएगा

  प्रदेश के बड़े और छोटे शहरों में आईटी पार्क बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में एआई का एक पूरा नया ईको सिस्टम तैयार किया जाएगा। इस मजबूत ईको सिस्टम के पांच मुख्य हिस्से होंगे। पहला कम्प्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर- इसमें साझा जीपीयू और डेटा सेंटर होगा। दूसरा टैलेंट डेवलपमेंट- इसमें कॉलेजों में एआई की पढ़ाई और इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन किया जाएगा। तीसरा स्टार्ट-अप सपोर्ट- इसमें फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन की सुविधा दी जाएगी। चौथा इंडस्ट्री में उपयोग- इसके तहत एआई अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। पांचवां रिसर्च एंड इनोवेशन- इसमें इंडस्ट्री से जुड़े रिसर्च सेंटर्स और नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिर्फ एआई का उपयोग ही नहीं करेंगे, बल्कि एआई बनाने की क्षमता भी विकसित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है। हमारे पास पर्याप्त लैंड बैंक है। इसलिए प्रदेश में एआई आधारित एक बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस डेटा सेंटर की स्थापना के लिए हमने बड़े निवेशकों और कम्पनियों को भी आमंत्रित किया है। 


वैश्विक टेक कंपनियों से किया वन-टू-वन संवाद

  एआई समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न अग्रणी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं के साथ वन-टू-वन संवाद किया। एनवीडिया की उपाध्यक्ष (ग्लोबल एआई इनिशिएटिव्स) सुश्री कैलिस्टा रेडमंड से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की स्थापना, स्टार्टअप्स को सब्सिडी दरों पर जीपीयू उपलब्ध कराने, स्थानीय साझेदारों को सशक्त बनाने के लिए सहयोग तंत्र विकसित करने और तकनीकी टूल्स, संसाधन और लाइब्रेरी उपलब्ध कराने पर चर्चा की। साथ ही एलएलएम मॉडल, सॉवरेन एआई की दिशा में सहयोग और एनवीडिया के फ्लैगशिप कार्यक्रम में आमंत्रण पर भी विचार-विमर्श किया गया। एनवीडिया अमेरिका स्थित एक वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो जीपीयू, एआई कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर समाधान तथा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अग्रणी है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेनस्पार्क एआई के वैश्विक जीटीएम प्रमुख श्री ब्रेनो मेलो से वन-टू-वन बैठक कर राज्य में समाधान प्रदाता के रूप में उनकी भूमिका, उपलब्ध तकनीकी समाधानों के उपयोग और एमओयू के अनुरूप पायलट प्रोग्राम प्रारंभ करने पर चर्चा की।

  सर्वम एआई के सह-संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार से वन-टू-वन बैठक में फुल-स्टैक सॉवरेन एआई मॉडल विकसित करने, स्टार्टअप्स और डेवलपर्स के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर चर्चा की। सर्वम एआई बेंगलुरु स्थित एक भारतीय एआई स्टार्टअप है, जो भारतीय भाषाओं के लिए सॉवरेन जनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म और बड़े भाषा मॉडल विकसित करता है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने के-जन एआई की सुश्री श्रुति वर्मा से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में क्षमता निर्माण, गेम जैम आयोजन, गेम डेवलपमेंट और एआई में अपस्किलिंग, मध्यप्रदेश के अटल प्रोजेक्ट से कनेक्टिविटी और इंदौर में स्टूडियो स्थापना के विषय पर चर्चा की। के-जन एआई बेंगलुरु स्थित एआई-सक्षम गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म है।

  गूगल प्ले के निदेशक श्री कुणाल सोनी से गेमिंग स्टार्टअप्स एवं विद्यार्थियों को सहयोग, एआई स्किलिंग और प्रशिक्षण, अपस्किलिंग, प्रमाणन एवं पाठ्यक्रम विकास, गेमिंग पार्टनरशिप और एक्सेलरेटर कार्यक्रमों पर चर्चा की। इंदौर और भोपाल में गूगल प्ले इवेंट आयोजित करने, कंटेंट एक्सपोर्ट और पब्लिशिंग सपोर्ट प्रदान करने और उज्जैन सिंहस्थ 2028 के अवसर पर संभावित सहयोग पर भी विचार किया गया। गूगल प्ले वैश्विक डिजिटल ऐप एवं गेम वितरण प्लेटफ़ॉर्म है।

 सबमर टेक्नोलॉजीज (भारत) के अध्यक्ष श्री देव त्यागी के साथ कम जल उपयोग वाली इमर्सिव कूलिंग तकनीक, बिजली खपत में 40 प्रतिशत तक कमी, सतत एआई डेटा सेंटरों के विकास पर चर्चा की। सबमर टेक्नोलॉजीज, बार्सिलोना (स्पेन) स्थित वैश्विक डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो लिक्विड इमर्शन कूलिंग समाधान विकसित करती है।

 इनविसिड एआई के संस्थापक एवं मुख्य कार्यवाही अधिकारी श्री कपिल जैन से फिजिक्स-आधारित एआई समाधान विकसित करने, मध्यप्रदेश के डेटा सेंटरों के उन्नयन और रूपांतरण, डिजिटल ट्विन सिमुलेशन, ऊर्जा खपत प्रबंधन और प्रदेश में 8 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन वृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा की। इनविसिड एआई अमेरिका स्थित उन्नत फिजिक्स-इन्फॉर्म्ड एआई कंपनी है, जो इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्मार्ट समाधान विकसित करती है।

विभिन्न कंपनियों के साथ हुए एओयू

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से राज्य के एआई मिशन के प्रमुख स्तंभों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए 3 महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इन एमओयू में जेनस्पार्क एआई इंक. के साथ एआई इन्फॉस्ट्रक्चर के अनुकूलन, सृजनात्मक एआई आधारित शासन समाधानों के विकास और नवाचार परीक्षण मंच की स्थापना पर सहमति बनी। इनविसिड एआई कंपनी के साथ राज्य डेटा केंद्र में एआई संचालित डिजिटल प्रतिरूप (डिजिटल ट्विन) की तैनाती के लिए सहयोग किया जाएगा। वहीं सर्वम एआई (एक्सोनवाइज प्रा. लि.) के साथ सॉवरेन एआई अवसंरचना के निर्माण और एआई-सक्षम सार्वजनिक सेवाओं के विकास के लिए सहभागिता सुनिश्चित की गई है।इसके अतिरिक्त, सबमर टेक्नोलॉजीज़ एस.एल. को ऊर्जा-कुशल, द्रव-शीतित एवं एआई-तत्पर डेटा केंद्र अवसंरचना के विकास तथा भविष्य में एक गीगावाट तक एआई-अनुकूलित क्षमता निर्माण के उद्देश्य से आशय पत्र जारी किया गया।

गूगल पेवेलियन का किया आवलोकन

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गूगल पेवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने कंट्री डायरेक्टर श्री आशीष वाटल एवं कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय संवाद किया। एआई, संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) सहित मानचित्र-आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से मध्यप्रदेश में पर्यटन नवाचार को सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। 

म.प्र. पेवेलियन का किया भ्रमण

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण कर अवलोकन किया। पेवेलियन में विभिन्न नवप्रवर्तनशील उद्यमों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों के अत्याधुनिक एआई समाधान का अवलोकन किया।

 

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की तर्ज पर भारत के पहले एआई फेस्ट की मेजबानी

चंडीगढ़, भारत
  • इंडिया एआई मिशन को मजबूती देने के लिए सीयू एआई मिशन लॉन्च करने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी बनी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
  • ‘एआई आपकी नौकरियां नहीं लेगा, इसे कोई ऐसा इंसान लेगा जो एआई का इस्तेमाल आपसे बेहतर कर सकेगा: वेबवेदा के फाउंडर और सोशल इन्फ्लुएंसर अंकूर वारिकू
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई एम्पैक्ट समिट 2026 की तर्ज पर भारत के पहले तीन दिवसीय एआई फैस्ट-2026 की शुरुआत की। यह एआई फैस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को न इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और इनक्लूसिव नेशनल डेवलपमेंट के प्रमुख आधार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारत को इस क्षेत्र में मजबूत बनाएगा। इस फैस्ट का मुख्य मकसद युवा इनोवेटर्स, एआई स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत करना, बोल्ड और स्केलेबल आइडियाज को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशन में बदलकर विकसित भारत का विजन को साकार करना है।

एमपी सतनाम सिंह संधू, एडुटेक एंटरप्रेन्योर रोनी स्क्रूवाला और सोशल इन्फ्लुएंसर अंकुर वारिकू के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में भारत के पहले एआई फेस्ट का उद्घाटन करते हुए

इस बड़ी पहल ने ग्लोबल एंटरप्रेन्योर्स, पॉलिसीमेकर्स, एआई लीडर्स, कॉर्पोरेट्स, एकेडेमिया, रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और स्टूडेंट इनोवेटर्स को टेक्नोलॉजी, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेटिव आइडियाज के एक पावरफुल मेल में एक साथ लाया। चर्चाओं में चार बड़े थीम शामिल थे। इसमें इवॉल्विंग एआई विद इवॉल्विंग ह्यूमन्स, एआई इंजीनियर्ड रियलिटी, एआई पॉलिसी गवर्नेंस एंड स्ट्रक्चरिंग, और टेक्निकल फ्रंटियर्स, जो एआई-ड्रिवन इनोवेशन और इनक्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ को एक्सप्लोर करने के लिए एक डायनामिक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं।
 
फैस्ट की शुरुआत वेबवेदा, इंडियाजिनियसचैलेंज के फाउंडर अंकुर वारिकू और अपग्रैड के चेयरपर्सन और एजुकेशन-टेक पायनियर रोनी स्क्रूवाला के साथ-साथ एमपी और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू और जाने-माने ग्लोबल एआई लीडर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में हुई।
 
इंडिया एआई मिशन के साथ मिलकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है, जिसने सीयू एआई मिशन लॉन्च किया है। यह एक बड़ा इंस्टीट्यूशनल रोडमैप है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कें रिसर्च और डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने, एआई पर आधारित एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और सभी एकेडमिक डिसिप्लिन में एआई लिटरेसी देने पर फोकस करता है। इस मिशन का मकसद 1.5 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन में एआई नॉलेज को बढ़ाना है, जिससे इंडिया का डेमोग्राफिक डिविडेंड एक ग्लोबली कॉम्पिटिटिव एआई-र्स्ट वर्कफोर्स में बदल जाएगा।
 
एआई से चलने वाले स्टार्टअप और एंटरप्रेन्यर टैलेंट के लिए एक नेशनल लॉन्चपैड के तौर पर सोचे गए। एआई फैस्ट 2026 में तीन खास प्लेटफॉर्म हैं। इसमें पहला सीयू इनोवफैस्ट 2026, कैंपस टैंक और सैंडबॉक्स हैं। इन्हें आइडिया जेनरेशन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट-रेडी सॉल्यूशंस के बीच के गैप को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस फेस्ट में अलग-अलग एआई और नई टेक्नोलॉजी के डोमेन में 35 से ज्यादा कॉम्पिटिशन करवाए जा रहे हैं, जिसमें 1,000 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसमें 200 से ज्यादा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के 10000 से ज्यादा स्टूडेंट हिस्सा ले रहे हैं और अपनी क्रिएटिविटी, टेक्निकल एक्सपर्टीज और प्रॉब्लम-सॉल्विंग कैपेबिलिटी दिखा रहे हैं। 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्राइज पूल के साथ, जीतने वाली टीमों को कैश अवॉर्ड और एक्सीलेंस के सर्टिफिकेट मिलेंगे। पार्टिसिपेंट्स को ग्लोबल एनालिटिक्स लीडर एसएएस इंस्टीट्यूट से दुनिया भर में जाने-माने सर्टिफिकेशन भी मिलेंगे, जिनके सर्टिफिकेशन बेनिफिट्स 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं।
 
इस मौके संबोधित करते हुए, वेबवेदा इंडियाजीनियसचैलेंज के फाउंडर, अंकुर वारिकू ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि एआई ऐसी चीज़ नहीं है जिससे डरना चाहिए। आपकी नौकरी एआई नहीं छीनेगा, यह कोई ऐसा व्यक्ति छीनेगा जो एआई का इस्तेमाल आपसे बेहतर जानता हो। भविष्य उनका है जो टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं, लगातार सीखते हैं और बदलाव से भागने के बजाय उसके हिसाब से ढल जाते हैं।

मुझे खुशी है कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे इंस्टीट्यूशन ऐसे प्लेटफॉर्म बना रहे हैं जहाँ एआई के बारे में बातचीत ज़मीनी स्तर पर हो रही है। स्टूडेंट्स के तौर पर, आपको बस सुनना है, जिज्ञासु बने रहना है और ज़िंदगी भर सीखने वाले बने रहना है, क्योंकि जब आप ज़िंदगी भर के लिए स्टूडेंट बन जाते हैं, तो आप कभी भी आगे बढ़ना बंद नहीं करते। आज, टेक्नोलॉजी ने न सीखने के सभी बहाने खत्म कर दिए हैं। एआई टूल्स से, कोई भी कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर बना सकता है, नई भाषाएँ सीख सकता है, आइडिया बना सकता है और बेहतर फैसले ले सकता है।

वारिकू ने कहा कि मैं हमेशा स्टूडेंट्स को कॉलेज के दौरान ही कुछ शुरू करने की सलाह देता हूँ। काम करने से आपको फेलियर, हिम्मत और क्लैरिटी के बारे में पता चलता है। लोग क्या कहेंगे, इस डर से अपने रास्ते पर चलने से न रुकें। लोगों की हमेशा अपनी राय होगी, लेकिन आपकी ज़िंदगी आपके अपने मकसद और दिशा से चलनी चाहिए। सफलता का मतलब सब कुछ जल्दी हासिल करना नहीं है, यह लगातार सही दिशा में आगे बढ़ना है। जब आप एआई का इस्तेमाल करें, तो इसका इस्तेमाल सिर्फ़ जवाब पाने के लिए न करें। इसका इस्तेमाल अपनी सोच को बेहतर बनाने के लिए करें।
 
इस मौके संबोधित करते हुए सांसद (राज्यसभा) और चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत का अगला ट्रिलियन-डॉलर ग्रोथ इंजन बनकर उभरेगा। भारत के पहले सीयू एआई मिशन और एआई फेस्ट के लॉन्च के साथ, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एआई को विकसित भारत का एक बड़ा आधार बनाने के विज़न को पूरा करने के अपने कमिटमेंट को फिर से पक्का करते हैं।
 
सीयू एआई मिशन के लॉन्च के साथ, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने इंडिया एआई मिशन के साथ एक डेडिकेटेड एआई मिशन शुरू किया है और भारत में एआई बनाने और भारत के लिए एआई को काम करने के विज़न से प्रेरित होकर हमने एक फ्यूचर-रेडी इनोवेशन इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जो कटिंग-एज रिसर्च को आगे बढ़ाने, एआई -ड्रिवन एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और सभी सब्जेक्ट्स में एआई लिटरेसी को मजबूत करने पर फोकस है ताकि भारत को एक ग्लोबल एआई लीडर के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सके। मेरा मानना ​​है कि यूनिवर्सिटीज़ को रिसर्च-ड्रिवन लर्निंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और मजबूत ग्लोबल कोलेबोरेशन को बढ़ावा देकर नेशनल इनोवेशन और टैलेंट हब के रूप में विकसित होना चाहिए। इनोवेटर्स और युवा चेंजमेकर्स को बढ़ावा देकर जो भारत के एआई-ड्रिवन भविष्य को आकार देंगे, हम एक पावरफुल इकोसिस्टम बना रहे हैं जो टेक से होने वाली इकोनॉमिक ग्रोथ को तेज़ करेगा, स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देगा।
 
अपग्रेड के चेयरपर्सन और एजुकेशन-टेक पायनियर रॉनी स्क्रूवाला ने कहा कि "हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी, खासकर एआई हमारे सीखने, काम करने और करियर बनाने के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। लेकिन मैं चाहता हूँ कि युवा लोग एक बात साफ तौर पर समझें कि एआई आपकी जगह लेने के लिए नहीं है, यह आपको बेहतर बनाने के लिए है। असली फर्क हमेशा वे लोग लाएंगे जो टेक्नोलॉजी का क्रिएटिव और ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना जानते हैं। एआई एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह क्यूरियोसिटी, इमैजिनेशन, एंपैथी या रेजिलिएंस की जगह नहीं ले सकता। ये इंसानी क्वालिटीज़ ही सच्ची सफलता को तय करती रहेंगी।
 
मेरा मानना ​​है कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ़ जवाब या शॉर्टकट पाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसे अपनी ताकत समझने, नए आइडिया खोजने और अपनी सोच को बेहतर बनाने के लिए खुद को जानने के एक टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भविष्य उनका नहीं होगा जो सिर्फ़ तय करियर के रास्ते या पुरानी सोच को फॉलो करते हैं। यह उनका होगा जो फुर्तीले, ढलने वाले और लगातार सीखने के लिए तैयार हैं। आज की पीढ़ी के पास एक साथ कई करियर बनाने, एंटरप्रेन्योरशिप के साथ एक्सपेरिमेंट करने, कंटेंट बनाने, इन्वेस्ट करने और इनोवेशन करने का मौका है। अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह फ्लेक्सिबिलिटी बहुत बड़ा फायदा है।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने क्वांटम रिसर्च, ट्रेनिंग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल क्वांटम मिशन के तहत क्यूपीएआई, क्यूकऋषि और सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के साथ बोस-आइंस्टीन क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस लॉन्च किया। इसके साथ, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस बनाया है, जो एजुकेशन, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप में लीडरशिप के लिए नेशनल क्वांटम क्रायोजेनिक टेस्टिंग फैसिलिटी के तौर पर काम करेगा।

स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट फैसिलिटी के लॉन्च पर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर, दीप इंदर सिंह संधू ने कहा कि कटिंग-एज क्वांटम रिसर्च को आगे बढ़ाने, स्पेशल ट्रेनिंग को मज़बूत करने और उभरती टेक्नोलॉजी में स्टार्टअप इनक्यूबेशन में तेज़ी लाने के लिए, बोस-आइंस्टीन क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने क्वांटम स्टार्टअप क्यूपीएआई ( क्यूपीड फ़ोर्स) और क्यूऋषि के साथ-साथ सीएसआईआर-एनपीएल (नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी) के साथ मिलकर लॉन्च किया है। यह नेशनल क्वांटम मिशन के तहत स्टूडेंट्स और नए एंटरप्रेन्योर्स के लिए सर्टिफिकेट कोर्स के साथ स्टार्टअप्स की ट्रेनिंग, रिसर्च और इनक्यूबेशन के लिए है। डेडिकेटेड सर्टिफिकेट प्रोग्राम, एडवांस्ड रिसर्च इनिशिएटिव और स्टूडेंट्स और नए एंटरप्रेन्योर्स के लिए इनक्यूबेशन सपोर्ट के साथ, सेंटर का मकसद एक मज़बूत क्वांटम इनोवेशन इकोसिस्टम बनाना और यूनिवर्सिटी को क्वांटम एजुकेशन, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप में एक नेशनल लीडर के तौर पर स्थापित करना है, जिससे यह भारत की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन जाएगी जिसने एक कॉम्प्रिहेंसिव क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया है।

टेक्निकल फ्रंटियर्स पर 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़' थीम के तहत एक हाई-लेवल पैनल ने इंडस्ट्री और इनोवेशन के भविष्य को बनाने में क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड रिसर्च और नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजीज़ की बदलाव लाने वाली भूमिका पर चर्चा की। पैनल में भारत सरकार के सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के डायरेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) वेणु गोपाल अचंता शामिल थे, जिन्होंने क्वांटम साइंस और प्रिसिजन टेक्नोलॉजीज़ में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर बात की और आईबीएम क्वांटम इंडिया लीड और आईबीएम में मास्टर इन्वेंटर एल वेकाटा सुब्रमण्यम ने बढ़ते क्वांटम इकोसिस्टम, एंटरप्राइज एडॉप्शन और क्वांटम कंप्यूटिंग के भविष्य के असर पर अपनी राय शेयर की। फ्यूचर एंड एआई के फाउंडर निवेदन राठी द्वारा मॉडरेट की गई इस चर्चा में भारत को उभरती टेक्नोलॉजीज़ में सबसे आगे रखने के लिए एकेडेमिया-इंडस्ट्री कोलेबोरेशन, रिसर्च-ड्रिवन इनोवेशन और डीप-टेक टैलेंट डेवलपमेंट के महत्व पर ज़ोर दिया गया।
 
कैंपस टैंक, भारत का पहला यूनिवर्सिटी-लेड स्टार्ट-अप लॉन्चपैड है जिसे अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। इसका ग्रैंड फिनाले 21 फरवरी को होगा।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर का सैंडबॉक्स प्लेटफॉर्म, स्टूडेंट्स, स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल्स और इंडिपेंडेंट इनोवेटर्स को डीप-टेक और एआई-ड्रिवन प्रोडक्ट्स दिखाने के लिए एक ओपन इनोवेशन इकोसिस्टम दे रहा है। सैंडबॉक्स फाइनल 20 फरवरी को होगा और टॉप 10 टीमों को एक स्पेशलाइज्ड डीप-टेक और एआई ग्रुप में शामिल किया जाएगा।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने नारी शक्ति के साथ मिलकर ’नारी’ स्कीम (नर्चिंग एआई रेजोल्यूशन फाॅर इंक्लयूजन-वुमेन इन टेक) भी लाॅन्च की, जिसे पीएम नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के चार पिलर्स में से एक माना है। इस पहल का मकसद एआई और टेक्नोलाॅजी अपस्किलिंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और एंटरप्रेन्योरियल सपोर्ट, हेल्थ और वेलनेस आउटरीच और सभी सेक्टर्स में लीडरशिप डेवलपमेंट के जरिए महिलाओं को मजबूत बनाना है।
 
एआई एथिक्स, ट्रस्ट और गवर्नेंस पर एक हाई-इम्पैक्ट पैनल ने ’नारी’-नर्चिंग एआई रेवोल्यूशन फाॅर इंकल्यूजनः वुमैन लिडिंग फ्रंट्स’ थीम के तहत एक जिम्मेदार, सबको साथ लेकर चलने वाले और भरोसेमंद एआई इकोसिस्टम बनाने पर बातचीत की। इस सेशन में विमेनलिफ्ट हेल्थ की आयशा चौधरी, वरिजा लाइफस्टाइल्स की एंटरप्रेन्योर वरिजा बजाज और वाणी प्रकाशन ग्रुप की पब्लिशिंग लीडर अदिति माहेश्वरी ने अपने विचार रखे। इसे गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर नव्या शर्मा ने मॉडरेट किया। इस चर्चा में एथिकल एआई फ्रेमवर्क, जिम्मेदार गवर्नेंस मॉडल, एआई लीडरशिप में डायवर्सिटी और उभरती टेक्नोलॉजी तक सबके लिए बराबर पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर बात हुई। पैनल ने ह्यूमन-सेंट्रिक एआई इनोवेशन को आकार देने में महिलाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया और एआई से होने वाली तरक्की से समाज के सभी वर्गों को फायदा हो, यह पक्का करने के लिए मजबूत पॉलिसी सपोर्ट, सबको साथ लेकर चलने वाले स्किलिंग और मिलकर काम करने वाले इकोसिस्टम की मांग की।
 
About Chandigarh University
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एक NAAC A+ ग्रेड और क्यूएस वर्ल्ड (QS World) रैंक धारक यूनिवर्सिटी है। यूजीसी द्वारा मान्य यह स्वायत्त शैक्षणिक संस्थान पंजाब राज्य में चंडीगढ़ के पास स्थित है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की सबसे यंगेस्ट तथा पंजाब की एकमात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जिसे NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) द्वारा A+ ग्रेड से सम्मानित किया गया है। यूनिवर्सिटी विभिन्न क्षेत्रों में 109 से अधिक अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम प्रदान करती है, जिनमें इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ, आर्किटेक्चर, जर्नालिज्म, एनीमेशन, होटल मैनेजमेंट, और कॉमर्स शामिल हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने सर्वश्रेष्ठ प्लेसमेंट रिकॉर्ड बना कर वर्ल्ड कंसल्टिंग एंड रिसर्च कारपोरेशन (डब्ल्यूसीआरसी) द्वारा पुरस्कारित ''यूनिवर्सिटी विद बेस्ट प्लेसमेंट'' अवार्ड को भी अपने नाम किया है।
 
Website: www.cuchd.in.

क्या ‘द वार्डरोब में दिव्या अग्रवाल निभा रही हैं भूत का किरदार? फर्स्ट लुक से बढ़ी अटकलें






 

  मनोरजंन। राज गवली प्रोडक्शन ने अपनी आगामी सुपरनैचुरल थ्रिलर The Wardrobe का दिलचस्प फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी कर दिया है, और फैंस अब यह सवाल पूछ रहे हैं — क्या Divya Agarwal इस फिल्म में भूत का किरदार निभा रही हैं?

  सौरभ चौबे के निर्देशन में बनी इस हॉरर थ्रिलर में Rajniesh Duggall भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। पोस्टर में एक रहस्यमयी महिला को पुराने, आधे खुले लकड़ी के वार्डरोब से बाहर निकलते हुए दिखाया गया है, जिस पर लताएं लिपटी हुई हैं। खून से सने सफेद गाउन में और धुएं व अंधेरे से घिरे माहौल के बीच दिव्या का डरावना अंदाज़ उनके किरदार को लेकर कई सवाल खड़े करता है।

   वार्डरोब के भीतर से आती लाल रोशनी फिल्म के सुपरनैचुरल टोन को और गहरा करती है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि मेकर्स ने कहानी के अहम पहलुओं को अभी गोपनीय रखा है, लेकिन पोस्टर ने इस बात की अटकलों को हवा दे दी है कि दिव्या किसी बेचैन आत्मा की भूमिका में हो सकती हैं।

  Bigg Boss OTT और MTV Ace of Space की विनर रह चुकी दिव्या अग्रवाल इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। फिल्म का निर्माण ज्योति राज गवली ने किया है और सह-निर्माता राज गवली हैं।

  24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही The Wardrobe सस्पेंस, साइकोलॉजिकल ट्विस्ट और सुपरनैचुरल रोमांच से भरपूर होने का वादा करती है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है — क्या दिव्या अग्रवाल सच में भूत का किरदार निभा रही हैं, या कहानी में कोई और गहरा रहस्य छिपा है?