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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुप्तप्राय प्रजातियों के 5 गिद्धों को हलाली डेम जल क्षेत्र में किया मुक्त





 




पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ यादव

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से निरंतर बढ़ रही गिद्ध संख्या
  

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्ध को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम है। मध्यप्रदेश में सभी प्रांतों से अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। पारस्थितिकी तंत्र में इन पक्षियों का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध पक्षी संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।

  इस अवसर पर बताया गया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देख-रेख में हुई है। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।

गिद्ध संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण के प्रयास

 पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भू-दृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भू-दृश्य स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी।

मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है

  भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।

व्यापार के साथ आरोग्य की सेवा: राजगढ़ के सराफा व्यवसायी कमलेश सोनी के योग का दुनिया में असर




 

 
  राजगढ़ (धार)। मध्य प्रदेश के एक छोटे से जिले राजगढ़ की मिट्टी से उपजी योग की शक्ति आज अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघ चुकी है। पेशे से सराफा व्यापारी लेकिन सेवा से योग साधक कमलेश सोनी आज केवल राजगढ़ ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना चुके हैं। उनके योग कौशल की चर्चा अब भारत के विभिन्न राज्यों से लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक पहुँच चुकी है, जहाँ असाध्य रोगों से जूझ रहे लोग उनके मार्गदर्शन में नया जीवन पा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया से अमरावती तक: योग बना वैश्विक ढाल

   कमलेश सोनी की ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात समुंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली छाया बंधु,जो थर्ड स्टेज के ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, उन्हें कमलेश सोनी के योग परामर्श से अभूतपूर्व लाभ मिला। इसी तरह महाराष्ट्र के अमरावती के वासुदेव नसूड़े भी उनके योग विज्ञान के मुरीद हैं।

  मध्य प्रदेश के हृदय स्थल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.पी. सिंह के मामले ने तो चिकित्सा जगत को भी अचंभित कर दिया है। कैंसर से पीड़ित होने के बाद कमलेश सोनी के बताए गए योग को अपनाकर डॉ. सिंह ने वह रिकवरी दिखाई कि उन्हें कीमोथेरेपी जैसी जटिल प्रक्रिया तक नहीं लेनी पड़ी। यह इस बात का प्रमाण है कि कमलेश जी का योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण उपचार पद्धति बन चुका है।

मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में फैला सेवा का नेटवर्क

  राजगढ़ के सोनी धर्मशाला से शुरू हुई यह मुहिम आज एक विशाल वटवृक्ष बन गई है। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान,महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी लोग अपनी शारीरिक और मानसिक व्याधियों के समाधान के लिए कमलेश सोनी से संपर्क करते हैं। विशेषकर मोहनखेड़ा तीर्थ में प्रवास के दौरान उन्होंने कई जैन संतों और साध्वियों को योग की बारीकियां सिखाईं, जिससे उनके स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार आए।

संघर्ष की भट्टी में तपकर निखरा व्यक्तित्व

  कमलेश सोनी के इस सफर की शुरुआत स्वयं के दुखों से हुई थी। 47 वर्षीय कमलेश सोनी कभी माइग्रेन,पाइल्स और टॉन्सिल जैसी बीमारियों से लड़ रहे थे। जिम, तैराकी, स्केटिंग और साइकिलिंग जैसे हर संभव प्रयास विफल होने के बाद उन्होंने योग को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाया। स्वामी रामदेव जी के योग सूत्रों को आत्मसात कर उन्होंने न केवल खुद को निरोगी किया, बल्कि इसे अपने जीवन का मिशन बना लिया।

डिजिटल योग और आयुष मंत्रालय का सम्मान

  कोरोना काल में कमलेश सोनी ने मोबाइल व वीडियो कॉल के जरिए मरीजों को योग कराकर स्वस्थ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस सेवा के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। हरिद्वार में योग निरीक्षकों के साक्षात्कार के बाद उन्हें आधिकारिक योग शिक्षक का प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ।

समर्पित टीम: निरंतरता ही सफलता की कुंजी

  कमलेश सोनी की सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी वह टीम है जो उनकी अनुपस्थिति में भी सेवा की इस मशाल को जलाए रखती है। रितेश अम्बोर, राहुल माली और नितिन धारीवाल जैसे समर्पित सहयोगी प्रतिदिन सुबह 5:30 से 7:25 बजे तक योग कक्षाएं संचालित करते हैं। आज सोनी धर्मशाला में 30 से अधिक महिला-पुरुषों का समूह नियमित रूप से योग साधना कर रहा है।




उल्लास का उत्सव भगोरिया मेला - क्रांतिदीप अलूने




 


  भगोरिया मेला प्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर आलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी और धार के भील, भिलाला और बारेला जनजाति द्वारा होली से सात दिन पहले मनाया जाने वाला सात दिवसीय प्रसिद्ध जनजातीय उत्सव है। फसल कटाई का जश्न होली के सात दिन पहले शुरू होने वाला यह मेला, फसल कटाई के बाद जनजातीय समुदाय द्वारा उल्लास के साथ मनाए जाने वाला का त्यौहार है। भगोरिया में पारम्परिक रूप से जीवन साथी चुनने, रंग-गुलाल लगाने, नृत्य-संगीत और खरीदारी करने की उदात्त भावनाएँ मुखरता से प्रदर्शित होती है।

  फागुन महीने में जब चारों ओर प्रकृति में नया उल्लास होता हैं तब पश्चिम निमाड़ से झाबुआ तक के जनजातीय क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट बाजार भगोरिया के रंग में रंगे होते हैं। मेले में हर तरफ फागुन और इन्द्रधनुषी प्रेम के रंग नज़र आते हैं। इन मेलों में मुख्य रूप से होली के लिए खरीददारी करने के लिए लोग आते हैं। गैर जनजातीय समुदाय के लिए भी भगौरिया के साप्ताहिक हाट बाजार विशिष्ट होते हैं। इसका सभी व्यापारियों को भी इंतजार रहता है। इसमें दुकानदार साल भर की कमाई, भगोरिया के साप्ताहिक बाजार से कर लेते हैं। भगोरिया हाट (बाजार) में जरूरत की वस्तुएं, मिठाइयाँ और पारंपरिक आभूषण बिकते हैं।

  भगोरिया मेले में बड़े-बड़े ढोल और मांदल की थाप पर पारंपरिक आदिवासी नृत्य किया जाता है, जिसमें विभिन्न दल ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होने वाले विभिन्न दल एक ही रंग के वस्त्रों में अपनी अलग पहचान के साथ छटा बिखेरते हैं। महिलाओं के साथ पुरूष भी चांदी के आभूषणों से सज्जित होकर पारम्परिक वाद्य यंत्रों की ताल पर थिरकते हैं। चांदी के आभूषण भील जनजाति में समृद्धि के प्रतीक हैं।

  भगोरिया मेल-मिलाप, आनंद और उल्लास का उत्सव है। माना जाता है कि इसमें युवा अपनी पसंद के साथी को गुलाल लगाकर या पान खिलाकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। भगोरिया में मनपसंद के साथी के साथ भागकर विवाह करने की मान्यता भी प्रचलित है।

  भगोरिया पर्व होली के सात दिन पहले से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों के विभिन्न गाँवों में साप्ताहिक बाजार के दिन आयोजित होता है। भगोरिया मेला आदिवासी संस्कृति, उमंग और जीवन को करीब से जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

वालपुर का प्रसिद्ध भगोरिया

 आलीराजपुर जिले के वालपुर का भगोरिया मेला अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता, आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों और अनूठी पारंपरिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

 किंवदंती है कि इस मेले की शुरुआत राजा भोज के समय में भील राजाओं द्वारा की गई थी। आलीराजपुर जिले के वालपुर में तीन प्रांतों की जनजातीय संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं। यह स्थान तीन प्रांतों (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के निकट) की सांस्कृतिक संस्कृति का संगम स्थल होने के कारण भी विशेष जाना जाता है। वालपुर का मेला आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का एक अद्भुत मिश्रण है, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों के साथ, ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी युवा थिरकते हैं।

भगोरिया प्रदेश में राजकीय उत्सव

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 मार्च 2025 को 'भगोरिया पर्व' को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनजातीय देवलोक महोत्सव में राजकीय उत्सव किया। उन्होंने कहा कि भगोरिया उल्लास का पर्व है। यह फागुन के रंगों से सराबोर प्रकृति की खुशबू में कुछ पल थम जाने और इसी में रम जाने का पर्व है। हमारी सरकार भगोरिया का उल्लास बरकरार रखेगी।

  वर्ष 2026 में भगोरिया महोत्सव 24 फरवरी मंगलवार से प्रारंभ होगा। यह 2 मार्च सोमवार तक चलेगा। बड़वानी जिले में सोमवार 2 मार्च को निवाली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगोरिया महोत्सव में शामिल होंगे।

 (लेखक उप संचालक जनसम्पर्क हैं)


"मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव




 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ किया मन की बात कार्यक्रम का श्रवण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम का श्रवण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस लाइन स्टेडियम,नेहरू नगर भोपाल में किया।

प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं

  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म है। देश में मैदानी स्तर पर घटित होने वाली सूक्ष्मतम गतिविधियों का वे ध्यान रखते हैं और उन्हें देशवासियों से साझा करते हैं। किसानों द्वारा एक ही स्थान पर विविध फसलें लेने के लिए किया गया नवाचार हो या केरल में बच्चे के अंगदान का मामला हो मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिलनाडु की पूर्व प्रधानमंत्री  जयललिता को याद करना देश की विविधता को अभिव्यक्ति देने के समान है। प्रधानमंत्री मोदी के विचारों में समग्रता और सबके विकास की सोच प्रकट होती है। प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम की यह विशेषता है कि इस संवाद में कभी राजनैतिक विषय नहीं आते, वे सदैव देश हित को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका यह विजन हम सबके लिए प्रेरणादायी है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी अन्नदाता, युवा, महिला, गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश के कोने-कोने में विकास, जनकल्याण के लिए हो रहे नवाचारों और पहल का ध्यान रखना और उन्हें देशवासियों से नियमित तौर पर साझा करना सराहनीय है। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई एम्पैक्ट समिट-2026 के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिट में प्रदेश के कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही पहल को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश के हित में एआई का किस प्रकार अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सकता है, इस पर विचार करना ही हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्र मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ




 


 
 मध्यप्रदेश उभर रहा है दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांग कह कर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले निशक्तजनों की इच्छा शक्ति को किया प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं। दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। 

मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है। उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है। इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है। 

 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया। पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं।

इंदौर में 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ; जनजातीय रंग,सुर और स्वाद से सराबोर हुआ गांधी हॉल परिसर




 



   इंदौर। शहर के ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में आज 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध से पूरा परिसर ऊर्जा व उल्लास से भर गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर शनि साधक पूज्य गुरुजी दादू महाराज, सांसद शंकर लालवानी, नगर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा नगर उपाध्यक्ष भरत पारख एवं स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को दीपक जैन के द्वारा पिछड़ा वर्ग एवं आदिवासी समाज के उत्थान हेतु निरंतर कार्यरत रहने के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर आयोजन का विधिवत शुभारम्भ किया और जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।

  जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन की थीम इस वर्ष 'पारंपरिक रंग, सुर और स्वाद' रखी गई है। पहले दिन प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिनमें भगोरिया और मांदल गीतों की गूंज ने वातावरण को जीवंत कर दिया। भगोरिया पर्व पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। धार, झाबुआ और अलीराजपुर अंचल की प्रसिद्ध पिथोरा कला को भी इस बार विशेष स्थान दिया गया है। ट्राइबल फाउंडेशन द्वारा स्थापित पिथोरा आर्ट गैलरी में 25 से अधिक चुनिंदा पिथोरा पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें आदिवासी जीवन, आस्था, प्रकृति और उत्सवों की झलक सजीव रूप में दिखाई दे रही है।

  समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने उद्घाटन समारोह के पश्चात कहा, "आज 'जात्रा–2026' का शुभारम्भ जिस उत्साह और जनसहभागिता के साथ हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत संतोष और गर्व का विषय है। पहले ही दिन शहरवासियों ने जिस प्रकार जनजातीय कला, पिथोरा चित्रकला, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों में रुचि दिखाई, उससे यह स्पष्ट है कि समाज अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है। हमारा उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी जीवन के मूल्यों प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। हमें विश्वास है कि आगामी दो दिनों में भी इंदौरवासी बड़ी संख्या में आकर इस सांस्कृतिक महोत्सव को सफल बनाएंगे।"

  इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी और पूज्य गुरुजी दादू महाराज ने संयुक्त रूप से कहा,"हाल ही में हुई बारिश के बावजूद जिस उत्कृष्ट व्यवस्था और भव्यता के साथ 'जात्रा–2026' का आयोजन किया गया है, वह आयोजन समिति की प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है। पूरे आदिवासी अंचल की संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर लाना अपने आप में सराहनीय प्रयास है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है। हम आयोजन समिति को इस सफल शुरुआत के लिए बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि यह उत्सव आने वाले दिनों में और भी अधिक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा।"

  कार्यक्रम संयोजक गिरीश चव्हाण ने उद्घाटन के बाद कहा,"आज जात्रा–2026 के पहले दिन जिस तरह जनप्रतिनिधियों, संतजनों और शहरवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, उससे आयोजन की भव्यता और उद्देश्य दोनों स्पष्ट हुए हैं। जनजातीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बना दिया। हमारा प्रयास था कि यह आयोजन इंदौर और जनजातीय अंचलों के बीच संवाद का सशक्त सेतु बने, और पहले ही दिन मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में यह उत्सव और अधिक ऊर्जावान रूप लेगा।"

   सह-संयोजक आशीष गुप्ता ने कहा,"उद्घाटन के साथ ही हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर शहरवासियों की अच्छी सहभागिता देखने को मिली। लोगों ने न केवल जनजातीय शिल्पकृतियों में रुचि दिखाई, बल्कि कलाकारों से सीधे संवाद भी किया। हमारा उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच और बाजार दोनों उपलब्ध कराना है। पहले दिन की सफलता से उत्साहित होकर हम आगामी दो दिनों में और बेहतर अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

  गांधी हॉल परिसर को मालवा-निमाड़ की पारंपरिक शैली में सजाया गया है। दीवार सज्जा, अलंकरण और मंच व्यवस्था में जनजातीय सौंदर्यबोध की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है। तीन दिवसीय 'जात्रा–2026' इंदौरवासियों के लिए जनजातीय संस्कृति, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और लोकधरोहर को करीब से जानने का अनूठा अवसर है। उल्लेखनीय है कि 20 से 22 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन का मीडिया पार्टनर पीआर 24x7 है। आयोजन समिति ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता की अपील की है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में की इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सहभागिता




 

तकनीक तभी सार्थक जब वह मानव हित में हो, हम एआई को सुशासन और सबके विकास के लिए अपनाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


निर्भय होकर एआई से प्रदेश के विकास की सभी संभावनाओं पर करेंगे काम

प्रदेश में एआई बेस्ड डेटा सेंटर की स्थापना के लिए निवेशक आमंत्रित

मध्यप्रदेश जल्द लांच करेगा स्टेट एआई मिशन

कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सुशासन में एआई का करेंगे उपयोग


  भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के समापन सत्र में सहभागिता की। उन्होंने भारत मंडपम् स्थित भोपाल मीडिया सेंटर में नेशनल मीडिया करेस्पांडेंट्स से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के भविष्य और इसके इस्तेमाल पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एआई से निर्भय होकर देश के हित में काम करने पर जोर दिया है। हमारी सरकार प्रदेश की समृद्धि के लिए सभी चुनौतियों से उबरकर तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें मध्यप्रदेश भी अपनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश, भारत का 5वां बड़ा राज्य है। राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एआई की मदद से सही समय पर बीमारियों की पहचान और उनका निदान एवं सुदूर अंचलों तक बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। 


मध्यप्रदेश में एआई का एक पूरा नया ईको सिस्टम तैयार किया जाएगा

  प्रदेश के बड़े और छोटे शहरों में आईटी पार्क बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में एआई का एक पूरा नया ईको सिस्टम तैयार किया जाएगा। इस मजबूत ईको सिस्टम के पांच मुख्य हिस्से होंगे। पहला कम्प्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर- इसमें साझा जीपीयू और डेटा सेंटर होगा। दूसरा टैलेंट डेवलपमेंट- इसमें कॉलेजों में एआई की पढ़ाई और इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन किया जाएगा। तीसरा स्टार्ट-अप सपोर्ट- इसमें फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन की सुविधा दी जाएगी। चौथा इंडस्ट्री में उपयोग- इसके तहत एआई अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। पांचवां रिसर्च एंड इनोवेशन- इसमें इंडस्ट्री से जुड़े रिसर्च सेंटर्स और नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिर्फ एआई का उपयोग ही नहीं करेंगे, बल्कि एआई बनाने की क्षमता भी विकसित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है। हमारे पास पर्याप्त लैंड बैंक है। इसलिए प्रदेश में एआई आधारित एक बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस डेटा सेंटर की स्थापना के लिए हमने बड़े निवेशकों और कम्पनियों को भी आमंत्रित किया है। 


वैश्विक टेक कंपनियों से किया वन-टू-वन संवाद

  एआई समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न अग्रणी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं के साथ वन-टू-वन संवाद किया। एनवीडिया की उपाध्यक्ष (ग्लोबल एआई इनिशिएटिव्स) सुश्री कैलिस्टा रेडमंड से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की स्थापना, स्टार्टअप्स को सब्सिडी दरों पर जीपीयू उपलब्ध कराने, स्थानीय साझेदारों को सशक्त बनाने के लिए सहयोग तंत्र विकसित करने और तकनीकी टूल्स, संसाधन और लाइब्रेरी उपलब्ध कराने पर चर्चा की। साथ ही एलएलएम मॉडल, सॉवरेन एआई की दिशा में सहयोग और एनवीडिया के फ्लैगशिप कार्यक्रम में आमंत्रण पर भी विचार-विमर्श किया गया। एनवीडिया अमेरिका स्थित एक वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो जीपीयू, एआई कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर समाधान तथा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अग्रणी है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेनस्पार्क एआई के वैश्विक जीटीएम प्रमुख श्री ब्रेनो मेलो से वन-टू-वन बैठक कर राज्य में समाधान प्रदाता के रूप में उनकी भूमिका, उपलब्ध तकनीकी समाधानों के उपयोग और एमओयू के अनुरूप पायलट प्रोग्राम प्रारंभ करने पर चर्चा की।

  सर्वम एआई के सह-संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार से वन-टू-वन बैठक में फुल-स्टैक सॉवरेन एआई मॉडल विकसित करने, स्टार्टअप्स और डेवलपर्स के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर चर्चा की। सर्वम एआई बेंगलुरु स्थित एक भारतीय एआई स्टार्टअप है, जो भारतीय भाषाओं के लिए सॉवरेन जनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म और बड़े भाषा मॉडल विकसित करता है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने के-जन एआई की सुश्री श्रुति वर्मा से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में क्षमता निर्माण, गेम जैम आयोजन, गेम डेवलपमेंट और एआई में अपस्किलिंग, मध्यप्रदेश के अटल प्रोजेक्ट से कनेक्टिविटी और इंदौर में स्टूडियो स्थापना के विषय पर चर्चा की। के-जन एआई बेंगलुरु स्थित एआई-सक्षम गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म है।

  गूगल प्ले के निदेशक श्री कुणाल सोनी से गेमिंग स्टार्टअप्स एवं विद्यार्थियों को सहयोग, एआई स्किलिंग और प्रशिक्षण, अपस्किलिंग, प्रमाणन एवं पाठ्यक्रम विकास, गेमिंग पार्टनरशिप और एक्सेलरेटर कार्यक्रमों पर चर्चा की। इंदौर और भोपाल में गूगल प्ले इवेंट आयोजित करने, कंटेंट एक्सपोर्ट और पब्लिशिंग सपोर्ट प्रदान करने और उज्जैन सिंहस्थ 2028 के अवसर पर संभावित सहयोग पर भी विचार किया गया। गूगल प्ले वैश्विक डिजिटल ऐप एवं गेम वितरण प्लेटफ़ॉर्म है।

 सबमर टेक्नोलॉजीज (भारत) के अध्यक्ष श्री देव त्यागी के साथ कम जल उपयोग वाली इमर्सिव कूलिंग तकनीक, बिजली खपत में 40 प्रतिशत तक कमी, सतत एआई डेटा सेंटरों के विकास पर चर्चा की। सबमर टेक्नोलॉजीज, बार्सिलोना (स्पेन) स्थित वैश्विक डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो लिक्विड इमर्शन कूलिंग समाधान विकसित करती है।

 इनविसिड एआई के संस्थापक एवं मुख्य कार्यवाही अधिकारी श्री कपिल जैन से फिजिक्स-आधारित एआई समाधान विकसित करने, मध्यप्रदेश के डेटा सेंटरों के उन्नयन और रूपांतरण, डिजिटल ट्विन सिमुलेशन, ऊर्जा खपत प्रबंधन और प्रदेश में 8 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन वृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा की। इनविसिड एआई अमेरिका स्थित उन्नत फिजिक्स-इन्फॉर्म्ड एआई कंपनी है, जो इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्मार्ट समाधान विकसित करती है।

विभिन्न कंपनियों के साथ हुए एओयू

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से राज्य के एआई मिशन के प्रमुख स्तंभों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए 3 महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इन एमओयू में जेनस्पार्क एआई इंक. के साथ एआई इन्फॉस्ट्रक्चर के अनुकूलन, सृजनात्मक एआई आधारित शासन समाधानों के विकास और नवाचार परीक्षण मंच की स्थापना पर सहमति बनी। इनविसिड एआई कंपनी के साथ राज्य डेटा केंद्र में एआई संचालित डिजिटल प्रतिरूप (डिजिटल ट्विन) की तैनाती के लिए सहयोग किया जाएगा। वहीं सर्वम एआई (एक्सोनवाइज प्रा. लि.) के साथ सॉवरेन एआई अवसंरचना के निर्माण और एआई-सक्षम सार्वजनिक सेवाओं के विकास के लिए सहभागिता सुनिश्चित की गई है।इसके अतिरिक्त, सबमर टेक्नोलॉजीज़ एस.एल. को ऊर्जा-कुशल, द्रव-शीतित एवं एआई-तत्पर डेटा केंद्र अवसंरचना के विकास तथा भविष्य में एक गीगावाट तक एआई-अनुकूलित क्षमता निर्माण के उद्देश्य से आशय पत्र जारी किया गया।

गूगल पेवेलियन का किया आवलोकन

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गूगल पेवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने कंट्री डायरेक्टर श्री आशीष वाटल एवं कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय संवाद किया। एआई, संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) सहित मानचित्र-आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से मध्यप्रदेश में पर्यटन नवाचार को सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। 

म.प्र. पेवेलियन का किया भ्रमण

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण कर अवलोकन किया। पेवेलियन में विभिन्न नवप्रवर्तनशील उद्यमों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों के अत्याधुनिक एआई समाधान का अवलोकन किया।