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इंदौर में स्टूडेंट्स के सपनों को हकीकत से जोड़ने वाला मंच बना 'माफिया इंक चैंपियनशिप और आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026'




 


- स्टूडेंट्स को मिला स्टार्टअप इकोसिस्टम, बिज़नेस सोच और लीडरशिप को करीब से समझने का मौका
- 5 कॉलेजों के 700 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने मैनेजमेंट गेम के जरिए खुद को आजमाया
- 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, पेड इंटर्नशिप और रियल इंडस्ट्री एक्सपोज़र
- इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स एक ही छत के नीचे 

इंदौर, फरवरी, 2026: इंदौर में आयोजित आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 उन स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा मंच बनकर सामने आया, जो पढ़ाई के साथ-साथ कुछ नया करने का सपना देखते हैं। यह सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं थी, बल्कि स्टूडेंट्स को यह समझाने की एक कोशिश थी कि आज के दौर में करियर के रास्ते सिर्फ नौकरी से होकर ही नहीं जाते हैं। इसी सोच के साथ माफिया इंक चैंपियनशिप और इंदौर स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप कॉन्फ्रेंस-2026 (आईएसईसी-2026) का आयोजन किया गया। यह आयोजन इंदौर स्थित आईपीएस एकेडमी में आयोजित किया गया, जहाँ सुबह से ही स्टूडेंट्स की भारी उपस्थिति और उत्साह देखने को मिला। 'भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का विकास और छात्र आंत्रप्रेन्योरशिप पर उसका असर; थीम पर आधारित उक्त समिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का छात्र सिर्फ नौकरी की तलाश में नहीं है, बल्कि वह खुद कुछ नया शुरू करना चाहता है। सबसे विशेष बात, यह इंदौर में इस तरह का पहला आयोजन है।

माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति सौरभ राठौर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत कार्यक्रम के दौरान कई दिग्गज उपस्थित रहे, जिन्होंने स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन किया तथा मध्यप्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप पर बात रखी, जिनमें हेमंत राजोरिया, क्लाइंट सक्सेस पार्टनर, स्टार्टअप बैंकिंग, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक; संजय कुमार शर्मा, डिविज़नल मैनेजर, एलआईसी; रोहित प्रसाद, प्रोडक्ट मैनेजर, एलआईसी; नेहा गौर, सीईओ, पीआर 24x7; तथा स्टार्ट अप इकोसिस्टम से किंजल्क पंचोली के नाम शामिल हैं। इस आयोजन में डॉ. मोहित दुबे, प्रो वाइस चांसलर, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी, सुंदर रामकृष्णन समेत कई जाने-माने स्टार्टअप लीडर्स और इकोसिस्टम बिल्डर्स मौजूद रहे। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि आज छोटे शहरों से भी बड़े स्टार्टअप्स निकल रहे हैं। जरुरत है, तो सिर्फ सही समय पर सही एक्सपोज़र और सही गाइडेंस की। साथ ही, स्टूडेंट्स को स्टार्टअप स्किल्स के तहत प्रॉब्लम को समझने और उसका सर्वश्रेष्ठ हल निकालने पर प्रकाश डाला। 

पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा माफिया इंक चैंपियनशिप, जो एक स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट गेम है। जनवरी 2026 से लेकर 6 फरवरी, 2026 तक यह टूर्नामेंट चला। इस संस्करण में माफिया इंक चैंपियनशिप के जरिए इंदौर के 5 कॉलेजों के करीब 700 स्टूडेंट्स जुड़े। कैंपस राउंड में 100 स्टूडेंट्स का चयन किया गया, जिनमें से आगे बढ़ते हुए इन कॉलेजों ने सिटी क्वालिफायर में हिस्सा लिया और अंततः 30 छात्र फाइनल्स में पहुँचे। फिनाले के दौरान स्टेज पर लाइव गेम खेला गया, जिसमें स्टूडेंट्स को कम समय में फैसले लेने, टीम को साथ लेकर चलने और दबाव में सही डिसीजन लेने की चुनौती दी गई। लब्धि नाहर, पहल जैन, माधवी धुदानी, लक्ष्मी चौधरी, रवि ठाकुर, भावेश निकुम्बे और शीतल सोमानी विनर्स रहे, जिन्हें कुल 1 लाख रुपए के नकद पुरस्कार समेत पेड इंटर्नशिप का मौका भी मिलेगा, जिससे वे रियल वर्क कल्चर को करीब से समझ सकें।

अगला चरण मई से अगस्त के बीच आयोजित किए जाने की योजना है। इस दौरान, 27 कॉलेजों के करीब 5,000 से 6,000 स्टूडेंट्स को इस स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजक तथा माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति के सम्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आज का छात्र सिर्फ डिग्री नहीं चाहता, वह रियल लाइफ स्किल्स सीखना चाहता है। इसी सोच के साथ इस पूरे प्लेटफॉर्म को तैयार किया गया है, ताकि छात्र क्लासरूम से बाहर निकलकर असली दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें। 

कार्यक्रम के दौरान हुए थिंक टैंक सेशन में इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स ने स्टूडेंट्स से खुलकर बातचीत की। यहाँ कोई फॉर्मल लेक्चर नहीं था, बल्कि असली ज़िंदगी के एक्सपीरियंस, गलत फैसले, असफलताएँ और उनसे मिली सीख पर खुली चर्चा हुई। स्टूडेंट्स के लिए यही सेशंस सबसे ज्यादा कनेक्टिंग साबित हुए।

समस्त वक्ताओं ने कहा कि यदि स्टूडेंट्स को सही प्लेटफॉर्म और सही माहौल मिले, तो इंदौर जैसे शहर भी बड़े स्टार्टअप हब बन सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सौरभ राठौर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी- माफिया इंक ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक दिन का इवेंट नहीं है। आने वाले महीनों में इस चैंपियनशिप से जुड़े गेम्स और मोमेंट्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जाएगा, ताकि और भी ज्यादा स्टूडेंट्स इससे प्रेरणा ले सकें।

यह आयोजन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा सह-प्रस्तुत किया गया। इसके साथ इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन, लक्ष्य एनजीओ, पीआर 24x7, नेक्सस इंदौर और आईपीएस एकेडमी सहयोगी संस्थाओं के रूप में जुड़े रहे। 

आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि इंदौर का स्टूडेंट अब सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि आगे बढ़कर करने वाला बनना चाहता है। ऐसे में, यह मंच उन युवाओं के लिए एक मजबूत शुरुआत साबित हुआ, जो पढ़ाई के साथ-साथ अपने आइडियाज़ को उड़ान देना चाहते हैं।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक: लाल चौक पर ऐतिहासिक भगवा ध्वज के साथ 'शतक' ध्वज यात्रा की सफल शुरुआत




 


  मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों पर आधारित फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ के प्रचार हेतु निकाली गई 'शतक' ध्वज यात्रा ने श्रीनगर से पंजाब तक अपना पहला चरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इस यात्रा ने श्रीनगर, जम्मू और लुधियाना में लोगों को एक सूत्र में बाँधते हुए एकता, राष्ट्रभाव की भावना को सशक्त किया।

  यात्रा की शुरुआत श्रीनगर के प्रसिद्ध लाल चौक से हुई, जहाँ स्वतंत्रता के बाद पहली बार भगवा ध्वज गर्व के साथ लहराया गया। इस अवसर पर ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों ने वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। बड़ी संख्या में नागरिक यात्रा में शामिल हुए और यह क्षण सामूहिक एकता का सशक्त प्रतीक बन गया।

  जम्मू में शतक ध्वज यात्रा का जनता द्वारा दिल खोलकर स्वागत किया गया। यहाँ यात्रा ने सेवा, अनुशासन और एकता के उस भाव को आगे बढ़ाया, जो संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवारजी और गुरुजी गोलवलकर के विचारों से प्रेरित है। 

  यात्रा का पहला चरण लुधियाना में आकर संपन्न हुआ, जहाँ पारंपरिक ढोल की गूंज, लोगों की बड़ी भागीदारी और संघ के 100 वर्षों के प्रतीक के रूप में 100 बाइक्स की रैली ने पूरे शहर को उत्साह और गर्व से भर दिया। इसके बाद समाज के लिए निःस्वार्थ सेवा करने वाले सेवकों को सम्मानित करने हेतु एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।

 इस अवसर पर आरएसएस के कार्यकर्ता और निर्माता वीर कपूर ने कहा, “लाल चौक से शतक ध्वज यात्रा की शुरुआत होना, जहाँ स्वतंत्रता के बाद एक बार फिर भगवा ध्वज लहराया गया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे गूँजे। यह मेरे लिए बहुत गर्व और भावनाओं से भरा क्षण था। शतक: द फिल्म और इस यात्रा के माध्यम से हम संघ के सौ वर्षों की सेवा और उस एकता का उत्सव मना रहे हैं, जो हमारे देश को एक सूत्र में बाँधती है।”

 वीर कपूर द्वारा पैनोरमा स्टूडियो के सहयोग से निर्मित, आशिष तिवारी द्वारा सह-निर्मित और आशिष मल्ल द्वारा निर्देशित फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ 19 फरवरी, 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है।

422 किलों के नाम से साकार हुआ शिवछत्रपति महाराज का ऐतिहासिक आविष्कारक चित्र

Shivaji Maharaj 422 Forts Names Portrait



 

  कल्याण/ महाराष्ट्र । 19 फरवरी छत्रपति शिव जयंती के अवसर पर प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता आनंदश्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए 422 ऐतिहासिक किलों के नामों से निर्मित शिवछत्रपति महाराज का एक अद्वितीय और आविष्कारक चित्र तैयार कर इतिहास, कला और शोध का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। यह चित्र न केवल एक कलाकृति है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण सबक और जीवंत प्रेरणा भी समाहित किए हुए है।
   इस प्रेरणादायक कृति की सोच उन्हें पिछले वर्ष उस समय मिली, जब छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 ऐतिहासिक किलों को यूनेस्को द्वारा ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ का दर्जा प्रदान किया गया। उसी क्षण प्रो. डॉ. गुप्ता ने यह संकल्प लिया कि शिवाजी महाराज के पराक्रम, रणनीति और राष्ट्रनिर्माण की भावना को एक ऐसे चित्र में ढाला जाए, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ सके।
   इस पूरे पोर्ट्रेट को साकार करने में डॉ. गुप्ता को लगातार दो दिन का समय लगा। इस रचना का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण पक्ष रहा—
   सभी 422 किलों पर गहन शोध, उनके सही नाम, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और फिर उन्हें अत्यंत सूक्ष्म कलात्मक शैली में शिवाजी महाराज के चेहरे और तेजस्वी व्यक्तित्व में रूपांतरित करना।
यह चित्र केवल एक दृश्य कला नहीं, बल्कि—शिवाजी महाराज के शौर्य और नेतृत्व का ऐतिहासिक दस्तावेज, भारतीय संस्कृति और इतिहास के गौरव का दृश्य रूप तथा राष्ट्रप्रेरणा और आत्मगौरव का सशक्त प्रतीक है।
   विशेष उल्लेखनीय है कि प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता आनंदश्री इससे पूर्व भी अपनी आविष्कारक कला के माध्यम से छह बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उनका मानना है कि “पुरस्कार मिले या न मिले, आविष्कार की प्रक्रिया हर दिन चलती रहनी चाहिए।”
  उनका यह चित्र आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देता है कि इतिहास को केवल पढ़ा ही नहीं, बल्कि रचनात्मकता, शोध और समर्पण के साथ जिया भी जा सकता है। प्रो. डॉ. गुप्ता का यह प्रयास कला को साधना और इतिहास को प्रेरणा में बदलने वाला एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

ऑपरेशन वाइल्ड्लाइफ ट्रैप-2 मे वन विभाग ने एक तेंदुआ शावक का सफल रेस्क्यू किया

"Leopard cub rescue Operation Wildlife Trap-2"



 

  Dhar। वन मण्डल धार मे दिनांक 05/02/2026 को ग्रामीणों द्वारा सूचना दी गई की दो तेंदुआ शावक पेड़ के ऊपर चड़े हुए है तत्काल वन विभाग का रेस्क्यू दल वनमण्डलअधिकारी धार विजयआनंदम टी आर के मार्गदर्शन मे मौका स्थल पर पहुच कर ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर किया पश्चात दो शावकों की पुष्टि की गई। भीड़ के हटते ही एक शावक जंगल की और भाग गया लेकिन दूसरा शावक जो लगभग 5-6 माह का था जख्मी लग रहा था और नीचे उतरते ही गिर गया। स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया की कुत्तों द्वारा शावक को घायल कर दिया गया था । रेस्क्यू उपकरणों के सहयोग से वन स्टाफ द्वारा घायल शावक को तत्काल कुक्षी मे रेंजर कार्यालय लाकर वेटेनरी डॉक्टर की टीम से प्राथमिक उपचार कराया । डॉक्टर रीना द्वारा शावक को जिला अस्पताल बड़वानी रिफर किया । डॉक्टर महेंद्र बघेल, बड़वानी द्वारा परीक्षण उपरांत शावक की गंभीर हालत के बारे मे बताया एवं तत्काल महू वेटेरनरी अस्पताल मे ले जाने की सलाह दी । डीएफओ धार द्वारा मुख्यालय भोपाल से शावक के इलाज हेतु विशेष अनुमति ली गई । महू मे डॉ. परिहार एवं टीम द्वारा रात्री 12 से 3 बजे तक घायल शावक की सर्जरी एवं आवश्यक उपचार किया एवं 15 घंटे विशेष निगरानी मे रखा । शावक को गले, पसलीयो एवं पिछले पैरों मे गंभीर चोटे आई थी । निगरानी उपरांत आगामी 10 दिवस तक विशेष चिकित्सीय एवं विभागीय निगरानी की सलाह दी गई । शावक को वन विहार राष्ट्रीय पार्क मे विशेष वाहन से ले जाया गया जहा एक्सपर्ट की निगरानी मे शावक की आगमी देखभाल की जाएगी । डीएफओ धार द्वारा गंभीर घायल शावक हेतु सभी आवश्यक प्रयास किए एवं सूचना प्राप्त होने से मात्र 40 घंटे मे सभी संभव प्रयास कर वन विहार भोपाल मे सुरक्षित भिजवाया । सम्पूर्ण कार्यवाही मे टीम का नेतृत्व डॉ शैलेन्द्र सोलंकी रेंजर कुक्षी द्वारा किया गया एवं वन स्टाफ के राकेश तंवर, अलपेन्द्र जाधव, कपिल गोस्वामी (वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट), वाहन चालकों द्वारा सम्पूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन मे उल्लेखनीय प्रयास किए । वन स्टाफ द्वारा सभी वन क्षेत्र एवं राजस्व क्षेत्र मे सघन गश्त की जा रही है एवं लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी एवं वन्यप्राणियों को किसी भी प्रकार से छेड़खानी न करने एवं दूर रहने की हिदायत दी गई ।  

परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी के अनमोल सुझाव और पूरी बातचीत का सार....

PM Modi Pariksha Pe Charcha 2026 Tips for Students



 

  नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज 9वें 'परीक्षा पे चर्चा' (PPC 2026) के दौरान छात्रों के साथ एक ऐतिहासिक और अनौपचारिक संवाद किया। उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर छात्रों के साथ समय बिताया और उनके जीवन, करियर और परीक्षाओं से जुड़े हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब दिया।

 यहाँ प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सभी प्रमुख बिंदु और पूरी बातचीत विस्तार से दी गई है:

प्रमुख मंत्र: एक नजर में

  • स्वयं के प्रति सच्चे रहें: सबकी सलाह सुनें, लेकिन बदलाव तभी करें जब आप चाहें।

  • लक्ष्य की परिभाषा: लक्ष्य पहुंच के भीतर होने चाहिए, लेकिन आसानी से हासिल होने वाले नहीं।

  • सीखने का क्रम: पहले मन विकसित करें, फिर उसे जोड़ें और फिर विषयों को व्यवस्थित करें।

  • संतुलन ही कुंजी है: पढ़ाई, कौशल, आराम और शौक के बीच तालमेल बिठाएं।

  • वर्तमान में जिएं: वर्तमान ईश्वर का 'उपहार' (Present) है; यहीं और अभी जीना सीखें।

  • सपना देखना: सपना न देखना अपराध है, हमेशा बड़े सपने देखें और कम डरें।

बातचीत के मुख्य अंश (विस्तार से)

1. आपकी शैली, आपकी गति

  गुजरात के एक छात्र के भ्रम को दूर करते हुए पीएम ने कहा कि जिस तरह हर किसी के खाने का तरीका अलग होता है, वैसे ही पढ़ने की अपनी लय होती है। उन्होंने जोर दिया कि अपनी पद्धति पर भरोसा रखें। सुझावों को सुनें, लेकिन सुधार अपने व्यक्तिगत अनुभव से करें।

2. शिक्षकों के लिए 'एक कदम आगे' की नीति

  पीएम ने कहा कि शिक्षकों को अपनी गति छात्रों से बस एक कदम आगे रखनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अध्यायों की घोषणा पहले से कर दें ताकि छात्रों में जिज्ञासा पैदा हो। जब छात्र पहले से थोड़ा पढ़कर आएंगे, तो उनकी समझ गहरी होगी और वे कभी पीछे नहीं छूटेंगे।

3. कौशल बनाम अंक (Skill vs Marks)

  प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और कौशल जुड़वां भाई-बहन हैं। व्यावसायिक कौशल के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है। उन्होंने उदाहरण दिया कि केवल किताबों से कोई डॉक्टर नहीं बनता, वास्तविक कौशल रोगियों के साथ काम करने से आता है।

4. अंकों के बोझ से मुक्ति

  मणिपुर के एक छात्र के सवाल पर पीएम ने कहा कि अंक अंतिम लक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने पूछा—"क्या आपको पिछले साल के टॉपर का नाम याद है?" जब जवाब 'नहीं' मिला, तो उन्होंने समझाया कि अंकों का महत्व बहुत कम समय के लिए होता है, जबकि सर्वांगीण विकास जीवन भर काम आता है।

5. गेमिंग और रचनात्मकता

  गेमिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को पीएम ने प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कथाओं (पंचतंत्र आदि) पर आधारित गेम बनाएं। उन्होंने गेमिंग में जुए के प्रति आगाह किया और इसे एक रचनात्मक कौशल के रूप में अपनाने की सलाह दी।

6. समय और आत्मविश्वास का प्रबंधन

  • समय का सदुपयोग: सोने से पहले डायरी में अगले दिन के काम लिखें। इससे तनाव और थकान दूर होती है।

  • आत्मविश्वास: यह आंतरिक सत्य से आता है। जब आप अपनी खूबियों का जश्न मनाते हैं, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।

  • परीक्षा का तनाव: प्रश्नपत्र शुरू करने से पहले 30 सेकंड का विराम लें और गहरी सांसें लें।

7. शोर और मुश्किलों के बीच पढ़ाई

   शोर के बीच पढ़ने की चुनौती पर पीएम ने संघर्ष की कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि आराम से जीवन को आकार नहीं मिलता, बल्कि मुश्किल परिस्थितियाँ ही हमें मजबूत बनाती हैं।

विकसित भारत 2047: युवाओं का संकल्प

प्रधानमंत्री ने छात्रों को 2047 के 'विकसित भारत' का सारथी बताया। उन्होंने 5 प्रमुख कार्यों पर जोर दिया:

  1. स्वदेशी अपनाएं: घर की विदेशी वस्तुओं को भारतीय विकल्पों से बदलें।

  2. स्वच्छता: इसे अपना कर्तव्य समझें और कूड़ा न फैलाने का संकल्प लें।

  3. स्वास्थ्य: अपनी फिटनेस का ध्यान रखना भी राष्ट्र सेवा है।

  4. एआई (AI) का सही उपयोग: एआई को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान बढ़ाने का जरिया बनाएं।

  5. कर्तव्य पालन: समय की पाबंदी और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं।

समापन संदेश

  प्रधानमंत्री ने छात्रों द्वारा भेंट की गई जैविक चाय, बांसुरी वादन और कविताओं की सराहना की। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परीक्षाएं त्योहार हैं, इनका उत्सव मनाएं।

विशेष सूचना: अगला एपिसोड 9 फरवरी, 2026 को सुबह 10 बजे प्रसारित होगा।