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प्रदेश में "खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार" तक विकसित की जा रही है संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

`CM Dr. Mohan Yadav ne kaha MP mein 'Khet se Karkhane aur Karkhane se Bazar' tak sampurn krishi arthavyavastha viksit ki ja rahi hai. Kisan Kalyan Varsh 2026 ki ghoshna.`






 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से किया राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ
प्रदेश के सभी 55 जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक होंगे अनेक आयोजन और होंगी खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां
किसान कल्याण वर्ष के तहत प्रदेशव्यापी अभियान में 16 विभागों के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने का रोडमैप तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेती के हित और किसानों के कल्याण के लिये की अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं

 इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है। इस उद्देश्य से कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, राजस्व, ऊर्जा सहित 16 विभागों को एक साथ लाकर किसानों के समग्र विकास का अभियान प्रारंभ किया गया है और किसानों की आय बढ़ाने के लिये रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान है, जो अब पूरे प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक अनेक आयोजन होंगे और खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि देश के इन चार वर्गों का विकास सुनिश्चित हो जाता है तो भारत की उन्नति स्वतः सुनिश्चित हो जाएगी। किसान इन चारों वर्गों के केंद्र में है, इसलिए सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने उद्योग एवं रोजगार वर्ष मनाया था, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश धरातल पर उतर रहे हैं। अब उसी प्रकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा रहा है।

  इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक श्री मधु वर्मा, श्रीमती मालिनी गौड़, श्री गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, श्री श्रवण चावड़ा, श्री कपिल यार्दें सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

  शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रदेश की 250 से अधिक नदियाँ लाखों लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी के जल का समुचित उपयोग नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी परियोजनाओं को नई गति मिली। अनेक योजनाओं ने मालवा अंचल को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया तथा प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1956 से लेकर 2003 तक प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि हमारी सरकारों ने इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया है। आगामी वर्षों में सिंचित क्षेत्र को और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की समृद्धि का आधार पानी, बिजली और सड़क है। इन तीनों क्षेत्रों में सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को अब रात्रि के बजाय दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और खेती करना अधिक सुविधाजनक होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की गई। इसी प्रकार सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों को छोड़कर अन्य पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को न उचित मूल्य मिलता था और न ही समर्थन मूल्य पर व्यवस्थित खरीदी होती थी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसानों को हर छह माह में ऋण नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान यदि जून में ऋण लेते हैं तो अगले वर्ष जून में ही राशि जमा कर सकेंगे। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

नदी जोड़ों परियोजनाओं से मिलेगा 13 जिलों को लाभ

  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय परिकल्पित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना मध्यप्रदेश के जल इतिहास को बदल देंगी। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच, मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई एवं पेयजल का लाभ मिलेगा। इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश और मालवा क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि "खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार" तक संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रदेश में तेजी से फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं। हाल ही में उज्जैन में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई प्रदेश के 32 जिलों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। इसी प्रकार इंदौर, आगर, उज्जैन सहित अनेक जिलों में कृषि आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।

  ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन के लिए शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना

  उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना प्रारंभ की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 12 प्रतिशत योगदान देता है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है। उन्होंने घोषणा की कि 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर सरकार 10 लाख रुपये का अनुदान देगी, जिससे युवाओं और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर गौशालाओं का संचालन कर रही है। गौशाला संचालकों को प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन अनुदान दिया जाएगा। साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना लागू की जा रही है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ हुए समझौते के बाद किसानों को दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की अतिरिक्त आय मिल रही है। उन्होंने एक किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में प्रतिदिन हजारों रुपये की वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की जीडीपी का लगभग 43 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र से प्राप्त हो रहा है। मध्यप्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। मोटे अनाज, बाजरा, धनिया, लहसुन, संतरा, सोयाबीन, गेहूं, दलहन एवं तिलहन उत्पादन में प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। फूलों की खेती में भी मध्यप्रदेश देश में दूसरा स्थान रखता है।

  उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए धार जिले में प्रधानमंत्री मित्र टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। इससे कपास से धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट तक का संपूर्ण औद्योगिक तंत्र विकसित होगा तथा किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। बलराम कृषि महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बलराम की पूजा-अर्चना करते हुए कहा कि हल भारतीय कृषि संस्कृति, श्रम और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने किसानों से किसान कल्याण वर्ष को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं—

• इंदौर की वर्तमान कृषि उपज मंडी को स्थानांतरित कर आधुनिक एवं विशाल कृषि उपज मंडी विकसित की जाएगी।

• संबंधित क्षेत्र में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

• मंडी क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की घोषणा।

• किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की जाएगी।

• 40 लाख रुपये तक की डेयरी स्थापना पर 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

• गौशाला संचालन के लिए प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन अनुदान जारी रहेगा।

• किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्योगों का व्यापक विस्तार किया जाएगा।

• फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के प्रबंधन के लिए विशेष योजना लागू होगी। हेलिकॉप्टर से नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के नियंत्रण की योजना बनेगी।

  महोत्सव में किसानों को मिली एक ही मंच पर सभी विभागों की जानकारी

  बलराम कृषि महोत्सव में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, ऊर्जा, राजस्व सहित विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, ड्रोन तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, उद्यानिकी, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि ऋण, बीमा, विपणन, मूल्य संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को विभागीय विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने तथा विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने का अवसर भी उपलब्ध कराया गया।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ठ किसान, किसानों के परिवारों के विद्यार्थियों एवं खेती-किसानी की बेहतरी के लिये लगे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का सम्मान भी किया।

 नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक खेती और ऑर्गेनिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि खेती में नई तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

   मंत्री श्री विजयवर्गीय ने किसानों के हित में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले किसानों को कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जबकि प्रदेश सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई है।

  उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज किसानों के खातों में केंद्र सरकार की ओर से 6 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 6 हजार रुपये, कुल 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष सीधे हस्तांतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं और किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  इस अवसर पर संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांव, मातृशक्ति, युवा शक्ति तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के समग्र विकास के लिए हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार वर्ष के सभी 365 दिन किसानों के विकास, प्रगति और समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी सोच और निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में किसानों के हित में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों के विकास, उन्नति और समृद्धि के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक और उन्नत खेती के साथ जोड़ा जा रहा है। आदर्श खेती की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

इंदौर को मिली जिला अस्पताल का 300 बिस्तरीय नवनिर्मित भवन सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

`CM Dr Mohan Yadav ne Indore ko 83.13 crore ki lagat se bane 300 bed wale aadhunik jila aspatal ki saugat di. Dhar Road par MRI, CT Scan ki suvidha.





 


भवनों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 52 तक पहुँचाने का लक्ष्य, मेधावी विद्यार्थियों की मेडिकल शिक्षा का खर्च उठाएगी सरकार
मध्यप्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता

   इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सभी क्षेत्रों में विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। आमजन के लिए अनेक प्रकार की सुविधाओं का विस्तार हो रहा हैं। भवनों का निर्माण भी निरंतर किया जा रहा है। भवनों के निर्माण में गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जिला अस्पताल का नवनिर्मित भवन भी इंदौर को प्राप्त ऐसी ही नई सौगात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को इंदौरवासियों को स्वास्थ्य क्षेत्र की एक बड़ी सौगात देते हुए मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा लगभग 83.13 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 300 बिस्तरीय अत्याधुनिक जिला अस्पताल भवन का लोकार्पण किया। धार रोड स्थित लगभग 3.40 एकड़ भूमि पर निर्मित यह जी+4 मंजिला अस्पताल भवन लगभग 2 लाख वर्गफीट क्षेत्रफल में विकसित किया गया है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह अस्पताल इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर आगे है हमारा प्रदेश

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर का भारत हर क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 वर्ष की अवधि में सभी क्षेत्रों में बेमिसाल कार्य कर दिखाया है। हमारी अर्थव्यवस्था नए आयाम प्राप्त कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में नागरिकों को अनेक सुविधाएं दी जा रही हैं। नागरिकों को बड़ी संख्या में उपचार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मध्यप्रदेश में 2003 तक सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे, इसके पूर्व के 55 वर्ष में इतनी ही प्रगति हो पाई थी। सीटों की संख्या भी मात्र 500 थी। वर्तमान में प्रदेश में साढ़े पांच हजार सीट्स और 33 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। प्रदेश में शीघ्र ही मेडिकल कॉलेज की संख्या 52 हो जाएगी। मध्यप्रदेश एकमात्र राज्य है जो ऐसे विद्यार्थियों जो नीट परीक्षा में क्लियर होने के बाद शासकीय मेडिकल कॉलेज के अलावा निजी मेडिकल कॉलेज या समकक्ष संस्था में जाना चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार शिक्षण शुल्क प्रदान करेगी।

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल

  चार मंजिला आधुनिक अस्पताल भवन में मरीजों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा एवं डायग्नोस्टिक सुविधाएँ विकसित की गई हैं। अस्पताल में ओपीडी के साथ-साथ मेडिसिन एवं सर्जिकल विभाग, गायनिक वार्ड एवं ऑपरेशन थिएटर, पीडियाट्रिक क्षेत्र, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक नर्सिंग कॉल सिस्टम, पैथोलॉजी लैब, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई एवं सोनोग्राफी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। वर्तमान में गायनिक सेवाएँ, एमआरआई, सीटी स्कैन तथा एक्स-रे सेवाएँ प्रारंभ भी हो चुकी हैं।

चन्दन नगर से एयरपोर्ट रोड़ के निर्माण को मिली स्वीकृति

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर का जिला अस्पताल आम जनता के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की नगरी इंदौर में सेवा और सुशासन का एक नया मंदिर बनेगा। नगर के वर्तमान स्वास्थ्य क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति में यह अस्पताल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य, कल्याण एवं समृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हैं। सभी नागरिकों के निरोगी रहने और कल्याण की भावना के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चन्दन नगर से एयरपोर्ट रोड के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर से अबूधाबी की फ्लाइट शुरू होना, प्रदेश में विमानन सुविधाओं के विस्तार का उदाहरण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के आशीर्वाद से इंदौर और संपूर्ण मध्यप्रदेश सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

  विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया को बढ़ाया जायेगा आगे

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के पूर्व व्यापक जनसंवाद किया जायेगा। विशेष समिति के गठन के बाद 10 लाख से ज्यादा सुझाव सभी 55 जिलों से समिति को मिले। सभी राजनीतिक दलों, धर्मों और समुदायों से सुझाव प्राप्त किए गए।सर्वसम्मति से यह व्यवस्था लागू होगी। विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर यू.सी.सी. लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य भी शीघ्र होने जा रहा है। सभी नागरिकों के लिए समान नियमों और कानून का पालन करना आवश्यक है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के हित में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से हाल ही में टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 आयोजित की गई।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में 300 बिस्तर वाले जिला अस्पताल का लोकार्पण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के सामूहिक गायन से हुआ। एमवाय अस्पताल के बाद इंदौर में सबसे बड़े जिला अस्पताल की सौगात मिलने पर बड़ी संख्या में उपस्थित जन समुदाय ने भी हर्ष व्यक्त किया।

 कार्यक्रम को नगरीय विकास और आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने भी संबोधित किया।

साक्षात्कार: पूजा शांति चौबे — "जज़्बात जो कविता बन गए"







 



  राजस्थान उच्च न्यायालय की अधिवक्ता, लेखिका एवं समाज सेविका पूजा शांति चौबे से उनके नवीनतम काव्य संग्रह "जज़्बात जो कविता बन गए" पर विशेष बातचीत

  पूजा शांति चौबे एक ऐसा नाम है जो कानून, साहित्य और समाजसेवा — तीनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय है। राजस्थान उच्च न्यायालय की अधिवक्ता होने के साथ साथ वे एक संवेदनशील लेखिका हैं। उनका पहला अंग्रेज़ी उपन्यास "What's Your Surname" लगभग 450 पृष्ठों का, दो भागों में प्रकाशित हो चुका है, जिस पर वेब सीरीज़ बनने की संभावना है। अब उनका दूसरा लेखन — हिंदी काव्य संग्रह "जज़्बात जो कविता बन गए" — पाठकों के बीच आ चुका है। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

शीर्षक की प्रेरणा: जब भावनाएँ स्वयं कविता बन जाएँ

प्रश्न: "जज़्बात जो कविता बन गए" शीर्षक के पीछे क्या विचार था?

  पूजा जी बताती हैं — "यह शीर्षक उन भावनाओं और आत्मा की अभिव्यक्ति को समेटे हुए है, जहाँ जीवन के विभिन्न पहलुओं को कविता में ढालना था। जीवन में कुछ भाव हमें इतनी गहराई से महसूस होते हैं कि वे अपने आप कविता का स्वरूप लेने लग जाते हैं। वहीं से इस टाइटल की प्रेरणा मिली — आखिर में वो जज़्बात ही थे जो कविता बन गए।"

 व्यक्तिगत या सामाजिक? — अनुभवों की सीमा को पार करती कविता

 प्रश्न: क्या इस पुस्तक की कविताएँ आपके व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित हैं या समाज के अनुभवों से?

 इस पर वे कहती हैं — "मेरा मानना है कि चाहे अनुभव व्यक्तिगत हों या सामाजिक, वे हमें किसी न किसी स्वरूप में ढालते हैं। कई बार बहुत सारी बातें मिलकर ऐसी भावनाएँ बन जाती हैं कि हम अंतर ही नहीं कर पाते कि कौन सा भाव कहाँ से उत्पन्न हुआ।"

 वे आगे कहती हैं — "यह कहना गलत होगा कि सम्पूर्ण भावनाएँ मेरी ही हैं। और न ही यह पूर्णतः सामाजिक हैं। ये कविताएँ मेरे व्यक्तिगत या सामाजिक अनुभवों से ऊपर उठकर वे सारे भाव हैं, जो मैंने कहीं देखे, सुने, मेरे अंतर्मन में प्रकट हुए और जिन्हें मैंने गहराई से महसूस किया।"

'बियॉन्ड लाइफ' — दो अध्याय जो सबसे करीब हैं

 प्रश्न: क्या इस पुस्तक का कोई ऐसा अध्याय है जो आपके सबसे अधिक करीब है?

 पूजा जी का जवाब — "अगर एक या दो चुनने हों, तो पहला — 'मृत्यु एक अंत नहीं, अल्पविराम है' और दूसरा — 'अधूरी मोहब्बत'।"

  वे समझाती हैं — "बाकी अध्याय वर्तमान जीवन की बात करते हैं, लेकिन मृत्यु वाला अध्याय एक अलग जीवन की संभावना की बात करता है — आत्मा अविनाशी है, वह दोबारा कहीं और जन्म लेगी। यानी एक अंत के बाद भी एक संभावना है। और 'अधूरी मोहब्बत' में विभिन्न कविताओं के माध्यम से एक प्रेमी जोड़े के उस वादे को व्यक्त किया गया है, जहाँ वे अगले जन्म में मिलने की बात करते हैं। क्योंकि वे इस जन्म में किसी कारणवश नहीं मिल पाए। इन दोनों अध्यायों में 'बियॉन्ड लाइफ' जैसी गहराई है।"

कविता: साहित्य या आत्मा की अभिव्यक्ति?

 प्रश्न: आपके अनुसार कविता केवल साहित्य है या आत्मा की अभिव्यक्ति?

 उनका उत्तर स्पष्ट है — "मेरे लिए तो आत्मा की अभिव्यक्ति है। और वही आत्मा की अभिव्यक्ति आगे चलकर साहित्य का रूप ले लेती है।"

अधूरापन और पूर्णता का द्वंद्व

प्रश्न: क्या अधूरापन भी इंसान को पूर्ण बना सकता है?

 इस गहन प्रश्न पर वे कहती हैं — "जब आप दुनिया के बहुत सारे लोगों से बात करते हैं, तो पाते हैं कि हर इंसान किसी न किसी प्रकार से अधूरा है। लेकिन फिर भी उनमें पूर्णता है — वे एक जगह रुके नहीं हैं, वे चल रहे हैं, लड़ रहे हैं।"

  वे आगे बताती हैं — "किसी ख्वाहिश का पूरा न होना नई ख्वाहिशों को जन्म देता है, किसी इंसान का न मिलना नए इंसानों से मिलवाता है, और किसी सपने का टूटना नई अपॉर्च्युनिटीज़ और नए सपने लेकर आता है। अधूरापन तो है, क्योंकि जो नहीं मिल पाया उसका मलाल रहेगा — लेकिन जो उसकी वजह से मिल गया, वह भी तो कहीं न कहीं पूर्णता ला ही रहा है।"

  लेखन की प्रक्रिया: भावनाओं के साथ जीने का समय

 प्रश्न: क्या आप नियमित रूप से लिखती हैं या भावनाएँ आने पर?

 पूजा जी बताती हैं — "नहीं, मैं नियमित रूप से नहीं लिखती। मुझे लिखने के लिए उस 'स्टेट ऑफ माइंड' में जाना पड़ता है — थोड़ा आइसोलेट करना पड़ता है, क्योंकि किसी भी बात को लिखने के लिए मुझे उस भाव में डूबना पड़ता है।"

 वे कहती हैं — "बहुत सारे दिनों में से कुछ ही दिन ऐसे होते हैं जब मैं किसी एक भाव को लेकर बैठ जाती हूँ। वह रोज़ नहीं होता, क्योंकि रोज़ किसी एक भाव के साथ जीवन नहीं चल सकता।"

 लेखन या जीवन — किसने किसको बदला?

प्रश्न: क्या लेखन ने आपको बदला है?

 उनका जवाब — "लेखन ने मुझे नहीं बदला। जीवन ने मुझे बहुत प्रकार से बदला है, और उसी वजह से लेखन है, और लेखन में विविधता भी है।"

 वे कहती हैं — "कई बार लोगों के लिए आश्चर्य होता है कि कोई इंसान इतने अलग अलग विषयों पर कैसे लिख सकता है। लेकिन जीवन ने मुझे विभिन्न प्रकार से बदला है। और मैं एक संवेदनशील इंसान हूँ — किसी भी बात को बहुत गहराई से महसूस करती हूँ, इसलिए अलग अलग विषयों पर लिखना मेरे लिए आसान हो जाता है।"

लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

 प्रश्न: आपके अनुसार एक लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या होती है?

 पूजा जी कहती हैं — "एक लेखक की जिम्मेदारी यह होती है कि वह ऐसा लेखन करे जिसमें पाठक डूब पाए — लेकिन साथ ही अपनी किताब को ऐसी रूपरेखा दे कि जब पाठक पढ़कर बाहर निकले, तो उस विषय से संबंधित उसकी समझ पहले से बेहतर हो चुकी हो। वह किसी भँवर में न रह जाए, बल्कि वहाँ से कुछ सीखकर और समझकर जीवन में आगे बढ़े।"

पाठकों के लिए संदेश: "मरने से पहले जी लेना चाहिए"

 प्रश्न: "जज़्बात जो कविता बन गए" पढ़ने के लिए आप पाठकों से क्या कहना चाहेंगी?

 अपने पाठकों से बातचीत के अंत में पूजा जी का संदेश अत्यंत मार्मिक है —

 "मरने से पहले हमें जी लेना चाहिए। सारी अधूरी बातों को पूरा कर लेना चाहिए। कभी किसी से कुछ कहना था, तो कह देना चाहिए। कोई इकरार था, तो कर देना चाहिए। कब, कैसे और किस विषय पर क्या महसूस किया, वह भी बता देना चाहिए।"

 "दुनिया की भीड़ से कभी हटकर खुद को भी ढूँढ़ना चाहिए। और जो लोग आज हमारे पास हैं, उनकी अहमियत समय रहते समझ लेनी चाहिए।"

 पूजा शांति चौबे का यह साक्षात्कार केवल एक किताब की चर्चा नहीं है — यह जीवन, मृत्यु, प्रेम, वियोग, अधूरापन और पूर्णता के दार्शनिक पक्षों को उजागर करता है। उनकी कविताएँ, उनके शब्द और उनका दृष्टिकोण यह सिखाता है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों को समझने और जीवन को बेहतर ढंग से जीने का एक माध्यम है।

"जज़्बात जो कविता बन गए" सिर्फ एक किताब नहीं — यह उन सभी भावनाओं का आईना है, जिन्हें हम अक्सर जीते तो हैं, पर कभी कह नहीं पाते।

प्राण वायु का स्थाई प्रबंध है एक पेड़ मां के नाम अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव







 


वृक्ष जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी
इन्दौर में हुई 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना के महाभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने अपनी माताश्री की स्मृति में संतरे का पौधा लगाकर किया महाभियान का शुभारंभ
पौधरोपण एवं जल बचाने में सहयोगी पृथ्वी संस्था और नक्सल उन्मूलन में सेवाएं दे चुके बीएसएफ के 2 जवानों को दिए जाएंगे 2-2 लाख रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में हुए शामिल



 इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हमें जीवन दें, सद्मार्ग पर ले जाए, वह सदैव वंदनीय है। हमारे लिए प्रकृति ही परमेश्वर के स्वरूप है, क्योंकि यह हमें जीवन देती है, हमारा उदर-पोषण करती है। इसलिए हम सबको प्रकृतिपूजक बनकर इसकी वंदना करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी। वृक्ष ऋषि मुनियों के समान एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। यह हमारी नकारात्मक ऊर्जा को स्वयं ग्रहण कर हमें सकारात्मक ऊर्जा (प्राण वायु) देने वाले उदार साधक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर भूमि को हरियाली की चादर ओढ़ाना प्रकृति माता को हरी चुनरी ओढ़ाने जैसा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर चलाया जा रहा है 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान कोई शासकीय कार्यक्रम नहीं, ये जीवन के लिए सांसों का स्थायी प्रबंध करने का अभियान है। जल, जंगल, जमीन और जानवर जिनसे हमारा पारिस्थितिकीय-तंत्र तैयार होता है, यह अभियान इनकी सुरक्षा का मिशन है।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर जिले के ग्राम बुढ़ानिया स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) परिसर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां अपनी पूजनीय माता स्व. श्रीमती लीला बाई यादव की स्मृति में संतरे का फलदार पौधा लगाकर इन्दौर में 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना (निर्माण) कार्य के महाभियान का दीप प्रज्ज्‍वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पंच महाभूतों का मान्यता मिली है। इसमें सबसे प्रमुख है जल। जल से ही हमारा जीवन है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान तथा जल, जंगल एवं पर्यावरण बचाने के पुनीत महाभियान में पूरे समाज की सहभागिता बेहद सराहनीय है। हम सबको मिलकर इस दिशा में आगे आना ही चाहिए।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधरोपण एवं जल संचयन में सरकार और समाज की सहयोगी सामाजिक संस्था पृथ्वी को प्रोत्साहन स्वरूप 2 लाख रुपये और प्रदेश में चलाए गए नक्सल उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले बीएसएफ के दो जवानों को मंच से सम्मानित कर 2-2 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

इंदौर ने दिखाई जल संरक्षण में बेहतर करने की दिशा

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां अहिल्या की नगरी इंदौर अतीत के उस गौरवशाली पृष्ठ के रूप में जानी जाती है, जिसने सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित किया। देवी अहिल्या माता ने अपने शासनकाल में अपने मूल उत्तरदायित्व के साथ-साथ प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर कुंए और बावड़ियां बनाई। उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में नदी, तालाब, कुंए, बावड़ियों की सफ़ाई और इनके पुनर्निर्माण का अभियान चलाया है। इंदौर में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण का काम हुआ। इंदौर ने देश को जल संरक्षण की दिशा दिखाई है। इससे देश में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अलनीनो जैसी जलवायु से जुड़ी चुनौती हमारे सामने हैं। ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण ही सबसे प्रभावी उपाय है। 'एक पेड़ - मां के नाम' अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर जब भी कुछ करता है, रिकार्ड ही बनाता है। जल हो या जंगल, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इन्दौर में बहुत अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण अभियान में 8 से 10 फिट के पौधे लगाए जा रहे हैं, जो जल्दी ही बड़े होकर फल देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह इस अभियान तीसरा साल है और हर साल इसमें समाज की सहभागिता बढ़ती ही जा रही है। अगले तीन दिनों में यहां 1 लाख से अधिक वन प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस अमृत हरित महोत्सव-2026 में इन्दौर जिले में 21 लाख पौधे लगाने का संकल्प लेने के लिए जिलेवासियों को बधाई दी।

  वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि इन्दौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय कर रहा है। 'एक पेड़ - मां के नाम' के तहत 21 लाख पौधे लगाने के संकल्प का महाभियान नि:संदेह बेहद सराहनीय है।

  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि धरती माता ने हमें जल, जंगल, जैव संपदा और खनिजों का अमूल्य आर्शीवाद दिया है। हमारा मध्यप्रदेश प्रकृति पुत्र है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए पूरा इंदौर जुट गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आहृवान पर यह अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है।

 इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि हम राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान को और गति दे रहे हैं। हम 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयां बनाने के लक्ष्य की दिशा में अब तक 8 हजार 500 जल इकाइयां बना चुके हैं। इंदौर में जल संवर्धन को हमने जन क्रांति का रूप दे दिया है।

 कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, वरिष्ठ समाजसेवी श्री अजय जामवाल, वरिष्ठ नेता श्री कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री रमेश मेंदोला, विधायक श्री गोलू शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीना सतीश मालवीय, श्री श्रवण चावड़ा, श्री विशाल पटेल, श्री सुमित मिश्रा, पूर्व विधायक श्री आकाश विजयवर्गीय सहित बीएसएफ के आईजी श्री सिंधु, पौधारोपण और जलसंरक्षण को जन आंदोलन बनाने वाली सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्वंयसेवी संस्थाओं के स्वंयसेवक तथा बड़ी संख्या में बीएसएफ के जवान उपस्थित थे।

ईमानदारी की मिसाल बने प्रतीक कुमार जैन: सड़क पर मिला महंगा मोबाइल मालिक तक सुरक्षित पहुँचाया








 





  राजगढ़ (धार) – आज के दौर में जहाँ भौतिकता ने मानवीय मूल्यों को कहीं पीछे छोड़ दिया है, वहीं राजगढ़ निवासी प्रोफेसर आर.के. जैन के पुत्र प्रतीक कुमार जैन ने अपनी सजगता, संवेदनशीलता और ईमानदारी से एक मिसाल कायम की है।

  हाल ही में प्रतीक कुमार जैन अपने परिवार के साथ मोहनखेड़ा जैन तीर्थ के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी का अत्याधुनिक एवं महंगा मोबाइल पड़ा हुआ मिला। बिना किसी लालच या झिझक के उन्होंने तुरंत अपनी कार रोकी, मोबाइल सुरक्षित उठाया और निर्णय लिया कि इसे बिना किसी देरी के उसके असली मालिक तक पहुँचाया जाएगा।

   इस संबंध में प्रतीक जैन ने तत्काल सरदारपुर एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार को पूरी स्थिति से अवगत कराया और मोबाइल के हालिया कॉल विवरण के आधार पर मालिक के पुत्र से संपर्क स्थापित किया। उस समय तक परिवार मोहनखेड़ा से काफी आगे झाबुआ तक पहुँच चुका था। सूचना पाकर वे तुरंत वापस लौटे।

  बाद में पता चला कि यह मोबाइल संजेली (जिला दाहोद, गुजरात) निवासी ललित कुमार बाबूलाल जैन की धर्मपत्नी विमला जैन का था।

  प्रतीक कुमार जैन ने अपने निजी निवास पर एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार की उपस्थिति में यह मोबाइल उसके वास्तविक स्वामियों को सुरक्षित और सकुशल सौंप दिया। इस परिवार ने मोबाइल वापस पाकर प्रतीक जैन के इस सराहनीय कृत्य के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा उनकी निष्ठा व मानवीय दृष्टिकोण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

  प्रोफेसर आर.के. जैन के पुत्र के इस कार्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि ईमानदारी, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी आज भी जीवित हैं। एक छोटी-सी सजगता न केवल किसी की बड़ी परेशानी दूर कर सकती है, बल्कि समाज में विश्वास को भी पुनर्स्थापित करती है।

  इस उत्कृष्ट कार्य की जानकारी मिलने पर राजगढ़ थाना प्रभारी समीर पाटीदार ने भी प्रतीक कुमार जैन को उनकी इस अनुकरणीय पहल,जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पण के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

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धार में कलेक्टर का सख्त फरमान: 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' अभियान शुरू,6 सितंबर तक रहेगा प्रभावी








 





   धार। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही निरंतर वृद्धि और उनमें होने वाली जनहानि को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत कठोर कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री राजीव रंजन मीना ने भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए जिले में 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। अब जिले की राजस्व सीमा के भीतर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129 के अनुसार दोपहिया चालकों के लिए आई.एस.आई. मार्का हेलमेट पहनना अनिवार्य है। यह प्रतिबंध 10 जुलाई 2026 से प्रभावी होकर 06 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। आदेश के अनुसार, केवल चिकित्सा संबंधी आपातकालीन स्थितियों (Medical Emergency) में ही इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। यदि कोई पेट्रोल पंप संचालक बिना हेलमेट वाले चालकों को ईंधन देता है या आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

   इस अभियान को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए जिला दंडाधिकारी ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है और इसके लिए विशेष औचक निरीक्षण टीमों का गठन किया गया है। जिले के प्रत्येक अनुभाग में अनुविभागीय दंडाधिकारियों (SDM) के नेतृत्व में तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों, पटवारियों, पुलिस और खाद्य विभाग के अधिकारियों की टीमें तैनात की गई हैं, जो नियमित रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करेंगी।

   अभियान की निगरानी हेतु धार और पीथमपुर के लिए श्रीमती अंकिता प्रजापति, बदनावर के लिए श्रीमती प्रियंका जिमरोट, सरदारपुर के लिए श्रीमती सलोनी अग्रवाल, मनावर/गंधवानी व धरमपुरी के लिए श्री प्रमोद गुर्जर तथा कुक्षी/डही के लिए श्री विशाल धाकड़ को प्रभार सौंपा गया है। जिला प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को चेतावनी दी है कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा उन्हें कठोर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे सड़क सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण निर्णय में सहयोग करें और स्वयं की सुरक्षा के लिए हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

पौधा आप लगाए,पेड़ हम बनाएंगे": डॉ.बलबहादुरसिंह राठौड़







 



  राजगढ़ (धार)। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से आज श्री खेड़ापति हनुमानजी मंदिर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नेता डॉ बलबहादुरसिंह राठौड़ एवम डॉक्टर एसोसिएशन के द्वारा वरिष्ठ डॉक्टर श्री एमएल जैन के मुख्य आतिथ्य में किया गया।भाजपा नेता डॉ बलबहादुरसिंह ने कहाँ की पौधा आप लगाए पेड़ हम बनाएँगे एक अभियान का रूप ले चुका है।उनके द्वारा इस वर्षाकाल में क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर 1008 पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है और उन्हें पौधे से पेड़ बनाने तक देखरेख करने का उद्देश्य भी है।

 कार्यक्रम में भाजपा नेता निलेश सोनी भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक डॉ आशीष वैद्य ,डॉ जेपी कोठारी,डा नंदन वैद्य,डॉ सुमित जैन,डॉ प्रणेता जायसवाल,डॉ सीमा कटारा भाजयुमो के महेंद्र राजपूत,ओम यादव सहित पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।मुख्य अतिथि डॉ. एमएल जैन ने पौधारोपण को समय की मांग बताते हुए कहा कि डॉक्टर होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम स्वस्थ समाज के साथ-साथ स्वस्थ पर्यावरण के लिए भी काम करें। एक पेड़ सैकड़ों लोगों को जीवन देता है।

 कार्यक्रम में सभी ने मिलकर पौधा लगाया और उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया। उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण बचाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।