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क़ासिम हैदर क़ासिम के पॉडकास्ट में दिग्गज फ़िल्मकार ने फ़िल्म इंडस्ट्री के बदलते हालात और संघर्षों पर खुलकर की बात

 

प्रसिद्ध फ़िल्मकार Mustafa Engineer हाल ही में Qaseem Haider Qaseem के आने वाले पॉडकास्ट में नज़र आए, जहाँ उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री की सच्चाइयों पर खुलकर बात की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि आज के दौर में प्रतिभाशाली फ़िल्मकारों के लिए इंडस्ट्री में टिके रहना कितना मुश्किल होता जा रहा है। यह पॉडकास्ट 10 फरवरी को रिलीज़ होने वाला है।

बातचीत के दौरान मुस्तफ़ा इंजीनियर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले फ़िल्मों में कहानी और रचनात्मकता को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती थी, लेकिन अब हालात काफ़ी बदल चुके हैं। आज किसी फ़िल्म की सफलता काफी हद तक फंडिंग, मार्केट स्ट्रैटेजी और बिज़नेस प्रेशर पर निर्भर हो गई है। उन्होंने कहा कि बेहतरीन सोच और हुनर होने के बावजूद भी आज के समय में प्रोड्यूसर या निवेशक मिलना बेहद कठिन हो गया है।

मुस्तफ़ा इंजीनियर, जो Kuchh Kaha Aapne और Chand Ke Paar Chalo जैसी फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं, ने यह भी बताया कि आज के निवेशक ज़्यादातर उन्हीं फ़िल्मों में पैसा लगाना चाहते हैं जिनसे जल्दी मुनाफ़ा हो सके। ऐसे में भावनात्मक, सामाजिक या अर्थपूर्ण कहानियों के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है और कई अच्छी कहानियाँ सिर्फ़ काग़ज़ों तक ही सीमित रह जाती हैं।

पॉडकास्ट में उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और बदलती दर्शक पसंद पर भी बात की। मुस्तफ़ा के अनुसार, आज के फ़िल्मकारों को नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक फ़िल्ममेकिंग तकनीकों और दर्शकों की बदलती उम्मीदों के साथ खुद को लगातार ढालना पड़ता है, जो अनुभवी लोगों के लिए भी आसान नहीं है।

उन्होंने यह भी माना कि फ़िल्ममेकिंग की चुनौतियाँ सिर्फ़ प्रोफेशनल नहीं बल्कि भावनात्मक भी होती हैं। किसी फ़िल्म को बनाने में सालों की मेहनत, धैर्य और समर्पण लगता है, लेकिन फंडिंग, अप्रूवल और रिलीज़ को लेकर बनी अनिश्चितता कई बार मनोबल तोड़ देती है। इसके बावजूद, सिनेमा के प्रति उनका प्यार आज भी बरकरार है।

यह आने वाला पॉडकास्ट फ़िल्म इंडस्ट्री की असलियत को बेहद ईमानदारी से सामने रखता है। मुस्तफ़ा इंजीनियर के अनुभव यह दिखाते हैं कि फ़िल्मों की दुनिया सिर्फ़ जुनून और रचनात्मकता से नहीं चलती, बल्कि इसमें कड़ी प्रतिस्पर्धा, आर्थिक संघर्ष और लगातार बदलते हालातों से जूझना भी शामिल है।

सॉस लैब्स ने एआई-ड्रिवन टेस्ट ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में खोला आरएंडडी (R&D) हब

दिल्ली, भारत

निरंतर सॉफ्टवेयर गुणवत्ता समाधानों की अग्रणी प्रदाता, सॉस लैब्स (Sauce Labs Inc.) ने आज दिल्ली, भारत में अपने नए कार्यालय के उद्घाटन की घोषणा की। यह विस्तार नई पीढ़ी की एआई-ड्रिवन सॉफ्टवेयर गुणवत्ता के लिए बेहतरीन प्रतिभाओं का उपयोग करने की कंपनी की वैश्विक रणनीति की एक प्रमुख आधारशिला है।





दिल्ली कार्यालय का नेतृत्व अनुपम जैन करेंगे जो इस लोकेशन के विकास और सॉस लैब्स के वैश्विक इंजीनियरिंग प्रयासों में इसके एकीकरण की देखरेख करेंगे। एक हाई-इम्पैक्ट आरएंडडी (R&D) कार्यालय के रूप में स्थापित इस केंद्र को विशेष रूप से सॉस लैब्स की एआई-आधारित 'ऑटोनॉमस टेस्ट ऑथरिंग' और इंटेलिजेंस क्षमताओं को आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक ग्राहकों को बेहतर सेवा दी जा सके।

सॉस लैब्स के सीईओ, प्रिंस कोहली ने कहा, "दिल्ली में हमारी उपस्थिति हमारे प्लेटफॉर्म में इनोवेशन के प्रति एक रणनीतिक प्रतिबद्धता है। अपने करियर में मैंने पाया है कि सबसे जटिल समस्याएं सप्ताह में 80 घंटे स्क्रीन को घूरने से हल नहीं होती हैं - वे तब हल होती हैं जब आप बेहतरीन लोगों को काम पर रखते हैं और उन्हें अपने विचारों को इकट्ठा करने की आज़ादी देते हैं। हमारी दिल्ली टीम सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और ऐप क्रिएटर्स पर से टेस्ट क्रिएशन, टेस्ट निष्पादन, टेस्ट रखरखाव और रिलीज ऑटोमेशन के भारी बोझ को खत्म करने के हमारे विजन की सह-निर्माता होगी।"

दिल्ली आरएंडडी हब वैश्विक ब्रांडों को आधुनिक, एआई-जनित कोड की जटिलताओं को प्रबंधित करने में मदद करने के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और डेटा साइंस में प्रमुख प्रतिभाओं की भर्ती पहले ही कर रहा है। यह कदम पेशेवर परिणामों के बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए कोहली के "इंसानियत बनाए रखने" की विचारधारा को रेखांकित करता है।

कोहली ने आगे कहा, "सॉस लैब्स में हम जानते हैं कि बड़ी इनोवेशन के लिए कड़ी मेहनत और बड़ा सोचने के लिए मानसिक आज़ादी दोनों की आवश्यकता होती है। भारत में इसे स्थापित करके हम उद्योग के कुछ सबसे प्रतिभाशाली दिमागों को एक साथ ला रहे हैं। मैं यहां विश्वास और स्वायत्तता (autonomy) पर आधारित एक संस्कृति बनाने के लिए उत्साहित हूं - जहां हमारी टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ काम करने और एआई-ड्रिवन टेस्टिंग में नेतृत्व करने की स्वतंत्रता हो।"

आप सॉस एआई (Sauce AI) के सबसे हालिया नवाचारों के बारे में अधिक जानकारी यहां देख सकते हैं: saucelabs.com/solutions/ai

सॉस लैब्स (Sauce Labs) के बारे में

सॉस लैब्स निरंतर गुणवत्ता के लिए अग्रणी मंच है, जिस पर वॉलमार्ट (Walmart), बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) और इनडीड (Indeed) जैसे दुनिया के शीर्ष उद्यम भरोसा करते हैं। सॉस लैब्स प्लेटफॉर्म पर अरबों टेस्ट चलते हैं, और सैकड़ों-हजारों उपयोगकर्ता उच्चतम गुणवत्ता वाले सॉफ्टवेयर अनुभव प्रदान करने के लिए सॉस लैब्स पर निर्भर हैं। हमारा एकीकृत प्लेटफॉर्म एसडीएलसी (SDLC) में निरंतर गुणवत्ता को शक्ति प्रदान करता है - जो विकास से लेकर उत्पादन तक प्रमुख गुणवत्ता संकेतों की पहचान करने के लिए एआई-ड्रिवन एनालिटिक्स का उपयोग करता है। एक दशक से अधिक की विशेषज्ञता और सेलेनियम (Selenium) व एपियम (Appium) ओपन-सोर्स समुदायों में गहरी जड़ों के साथ, सॉस लैब्स टीमों को हजारों विभिन्न उपकरणों, ब्राउज़रों और ऑपरेटिंग सिस्टम पर - कहीं भी, कभी भी और किसी भी पैमाने पर परीक्षण करने में मदद करता है।

 

अधिक जानकारी के लिए, कृपया saucelabs.com पर जाएं।


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(737) 234-0936
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देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित करने मांग,राज्यसभा सांसद डांगी ने सदन में उठाया मुद्दा,बताया अद्वितीय स्थापत्य कला




 

   राजस्थान । राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मंगलवार (3 फरवरी 2026) को यह मुद्दा उठाया। इस दौरान सांसद डांगी ने बताया कि राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित ये मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के अनुपम उदाहरण हैं।

11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था निर्माण

  कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य डांगी ने सदन को देलवाड़ा जैन मंदिरों के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इनका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां 5 श्वेतांबर जैन मंदिर हैं, जिनमें 'विमलवसहि' और 'लूणवसहि' विशेष रूप से कलात्मक और विशिष्ट हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर शामिल हैं।

 हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते है मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार, वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों ने 14 वर्षों के अथक प्रयासों से इन मंदिरों का निर्माण किया था। श्वेत संगमरमर से निर्मित इन मंदिरों पर 18.53 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इनकी छतों, गुंबदों और तोरणद्वारों पर की गई अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।

  जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में है मूर्तियां स्थापित डांगी ने बताया कि मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मीजी, अंबाजी के साथ नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैय्या की मूर्तियां भी शामिल हैं। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की लोक संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला के अद्भुत और चित्ताकर्षक शिल्प-चित्र भी अंकित हैं।

  सांसद डांगी ने शिल्प सौंदर्य की सूक्ष्मता, कोमलता और अलंकरण की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुंबदों की छतों पर स्फटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु, पक्षियों, वृक्षों, लताओं तथा पुष्पों की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यहां की वास्तुकला और शिल्प कौशल अद्वितीय हैं, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं नहीं मिलती।

  साहित्यकार डॉ दिलीप धींग ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा देलवाड़ा मंदिर पर 14 अक्टूबर 2009 को बहुरंगी स्मारक डाक टिकट पाँच रुपए के मूल्य वर्ग का जारी हुआ है । राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने सांसद सदस्य डांगी के इस प्रयास का स्वागत करते हुए उन्हें जैन समाज की और से धन्यवाद ज्ञापित किया।

यूएन में गूंजा 'सबका साथ-सबका विकास' का मंत्र; सावित्री ठाकुर ने पेश किया 'विकसित भारत 2047' का विजन




 

 न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: भारत ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (CSocD) के 64वें सत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने "समन्वित, न्यायसंगत और समावेशी नीतियों के माध्यम से सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने" पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया।

 सामाजिक न्याय और संवैधानिक गारंटी मंत्री सावित्री ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय और सामाजिक संरक्षण संवैधानिक गारंटियों पर आधारित हैं। यह देश के दीर्घकालिक दृष्टिकोण "विकसित भारत 2047" के अनुरूप है। उन्होंने भारत के अधिकार-आधारित और समग्र समाज-केंद्रित 'सबका साथ-सबका विकास' दृष्टिकोण का उल्लेख किया, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास की दौड़ में कोई भी पीछे न छूटे।

भारत की प्रमुख उपलब्धियां और पहल:

  श्रीमती ठाकुर ने उन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की जो अंतिम छोर तक वितरण (Last Mile Delivery) को प्रदर्शित करती हैं:

  1. शिक्षा में समानता: दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर स्कूल बुनियादी ढांचे और आवासीय शिक्षा के माध्यम से बालक-बालिकाओं की समान भागीदारी।

  2. बुनियादी सेवाओं का विस्तार: पाइप द्वारा पेयजल, स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा और स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार, जिससे महिलाओं और कमजोर समुदायों को सीधा लाभ मिला है।

  3. वित्तीय समावेशन: करोड़ों बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय क्रांति लाई गई है, जिसमें महिलाएं उद्यमिता और ऋण योजनाओं की प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरी हैं।

  4. सुरक्षा और सहायता: समर्पित हेल्पलाइन और एकीकृत सेवा केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी सुरक्षा तंत्र।

  5. स्वास्थ्य एवं पोषण: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम वर्तमान में 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच रहे हैं।

  6. समावेशी कल्याण: बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, असंगठित श्रमिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विस्तारित सामाजिक सुरक्षा और लक्षित योजनाएं।

  डिजिटल क्रांति और वैश्विक सहयोग भारत ने सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। इसके साथ ही, भारत ने सामाजिक विकास मॉडलों पर प्रगति में तेजी लाने के लिए मजबूत बहुपक्षीय सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

 सत्र की अध्यक्षता इस 64वें सत्र की अध्यक्षता यूक्रेन की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत क्रिस्टीना हायोविशन ने की। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव सुश्री अमीना जे मोहम्मद और नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत लोकबहादुर थापा सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

"कहीं मशीन अटक न जाए": मोहनखेड़ा में हाइड्रोलिक सिंहासन पर बैठकर बोले जब बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री,चिलगाड़ी छोड़ चारपहिया वाहन से पहुँचे मोहनखेड़ा




 
मोहनखेड़ा तीर्थ से अक्षय भंडारी की रिपोर्ट

  राजगढ़ (धार): मालवा के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा में आज उस समय हँसी के फव्वारे छूट पड़े,जब बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच पर लगे विशेष हाइड्रोलिक सिंहासन पर बैठकर चुटकी ली। गुरुजी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा, "भैया, इस मशीन पर बैठकर हमें ये डर लग रहा था कि कहीं ये बीच में ही न रुक जाए। अगर मशीन अटक जाती तो न्यूज़ वाले खबर चलाते कि दुनिया का पर्चा खोलने वाले का खुद का पर्चा अटक गया।" उनके इस चुटीले अंदाज ने हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।





इंदौर से चारपहिया वाहन द्वारा पहुँचे मोहनखेड़ा,जैन संतों से की भेंट

  विशेष बात यह रही कि गुरुजी हेलीकॉप्टर (चिलगाड़ी) के बजाय इंदौर से सड़क मार्ग यानी चारपहिया वाहन द्वारा मोहनखेड़ा पहुँचे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जो हेलीकॉप्टर ठीक से पंखा न चलाए,उससे हमें डर लगता है। तीर्थ में प्रवेश करते ही उन्होंने सबसे पहले भगवान आदिनाथ के चरणों में शीश नवाया और वहां मौजूद जैन साधु-साध्वियों से आत्मीय भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आदिनाथ प्रभु के दर्शन कर उनका मन अह्लादित हो गया है और यह पावन भूमि ऊर्जा का केंद्र है।

रमेश गोवाणी की पितृ-भक्ति और संतों का महाकुंभ

   यह दिव्य आयोजन मुंबई के प्रसिद्ध व्यवसायी रमेश चंद्र गोवाणी द्वारा अपने माता-पिता, स्वर्गीय घमंडीराम गोवाणी और स्वर्गीय अंकी बाई गोवाणी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया था। गुरुजी ने रमेश गोवाणी की सराहना करते हुए कहा कि पिता के धर्म से ही पुत्र बढ़ते हैं और गोवाणी परिवार ने पितरों के सम्मान में संतों का यह समागम कर बड़ी मिसाल पेश की है। मंच पर हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत राजूदास जी महाराज, मलूक पीठ के आचार्य रोहित रिछारिया और बटुक जी महाराज सहित देशभर के अन्य संत भी शामिल हुए।





पाकिस्तान वाली टिप्पणी और भव्य स्वागत

  मंच पर पहुँचते ही गुरुजी का स्वागत जोरदार आतिशबाजी से हुआ, जिस पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि इतने पटाखे अगर बॉर्डर पर चला देते तो पाकिस्तान भी हिल जाता। कार्यक्रम में गायक बृजेश शांडिल्य और भजन गायक अमित धुर्वे की प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। गुरुजी ने क्षेत्र में गौ-सेवा की अलख जगाने वाले संत कमल किशोर नागर जी महाराज का भी विशेष उल्लेख किया।

प्रशासनिक सतर्कता और हाईटेक व्यवस्था

  आयोजन की भव्यता को देखते हुए 1500 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात रहे। श्रद्धालुओं के लिए हजारों स्क्वायर फीट का विशाल पांडाल, 8 बड़ी एलईडी स्क्रीन्स और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई थी। पूरे आयोजन के दौरान नगर परिषद राजगढ़ और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मुस्तैद रही ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।


मीडिया से चर्चा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा:

  "आज हमें मोहनखेड़ा आने का सौभाग्य मिला। दादा दयालु जी और हनुमान जी के इस पावन क्षेत्र में स्थित जैन तीर्थ में हमने भगवान आदिनाथ ऋषभदेव जी के दर्शन किए और पूज्य संतों को प्रणाम किया। हम पूरे देश में सिर्फ एक ही बात चाहते हैं कि सनातनी आपस में 'तनातनी' न करें और आपस में बिल्कुल न लड़ें। संत भी एकजुट रहें और सनातनी भी एकजुट रहें।

  जैन और हिंदू दोनों एक ही हैं; यदि वास्तव में कोई कट्टर हिंदू है, तो वह जैन है। रही बात धर्मांतरण की, तो देश में लैंड जिहाद, लव जिहाद या लालच देकर किया जाने वाला मतांतरण नहीं होना चाहिए। इसके विरुद्ध हम लगातार अपनी कोशिशें कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से हम जगह-जगह कथाएं, भंडारा, शिक्षा और स्वास्थ्य के कार्य कर रहे हैं। साथ ही, आगामी 15 फरवरी को बागेश्वर धाम पर होने वाले विशाल कन्या विवाह महोत्सव के लिए भी हमने यहाँ आमंत्रण दिया है। हमारा संकल्प है कि भारत भव्य और दिव्य बनेगा।"


 





 मोहनखेड़ा में बरसी सुरों की गंगा: अनुराधा पौडवाल ने अपनी टीम के साथ दी भक्ति की प्रस्तुति 

 प्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा में आयोजित  शाम को भक्ति और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका और भजन सम्राट अनुराधा पौडवाल ने अपनी पूरी टीम के साथ भजनों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी ।



मोहनखेड़ा में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ: बागेश्वर सरकार की मौजूदगी में होगा भव्य आध्यात्मिक समागम

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दिग्गज संतों और नामचीन गायकों के संगम में 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी' परिवार करा रहा दिव्य आयोजन; अभेद्य सुरक्षा के बीच जुटेगा संभावित 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब

   राजगढ़ (धार)। मालवा की पावन धरा पर स्थित सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा कल एक ऐसे आध्यात्मिक महासंगम का गवाह बनने जा रहा है, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई देगी। 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी' परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समागम में आस्था, भक्ति और सुरों का ऐसा त्रिवेणी संगम होगा, जो श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहेगा। आयोजन की गरिमा का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ सनातन संस्कृति के प्रखर प्रवक्ता पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) के साथ-साथ देशभर के प्रख्यात संत एक ही मंच पर नज़र आएंगे।

प्रातः 10 बजे से प्रारंभ होगा भक्ति का सिलसिला

  आयोजन की विशालता और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कार्यक्रम की शुरुआत कल 2 फरवरी, सोमवार प्रातः 10 बजे से हो जाएगी। इस दिव्य आयोजन को लेकर जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही हैं, राजगढ़ और आसपास के पूरे अंचल में उत्साह का माहौल चरम पर पहुँच गया है।

संतों का महासमागम और भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

   इस आयोजन की भव्यता का मुख्य केंद्र यहाँ होने वाला संतों का समागम है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी अयोध्या के पूज्य महंत श्री राजू दासजी महाराज, मलूक पीठ बागेश्वरधाम वृंदावन के आचार्य रोहित रिछारिया, राजेश्वरम परिवार पचोखराधाम के पूज्य महंत गुरुप्रसाद जी महाराज और पूज्य अंकित कृष्ण भटुक जी सहित देशभर से कई गणमान्य संत पधार रहे हैं। यह दिव्य आयोजन श्री घमंडीराम गोवाणी एवं श्रीमती अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सुरों की दुनिया की दिग्गज गायिका अनुराधा पौडवाल की मखमली आवाज़ और प्रसिद्ध गायक बृजेश शांडिल्य के भजनों पर कल भक्त झूमते नज़र आएंगे। और साथ ही भजन गायक अमित धुर्वे भी अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा और प्रशासनिक मुस्तैदी

  आयोजन की विशालता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई है, जबकि चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से पैनी नज़र रखी जा रही है। व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ निजी सुरक्षा कंपनी के वालंटियर्स भी तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं के बैठने से लेकर भोजन तक की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

हाईटेक सुविधाएं और सुगम यातायात

   श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए इंदौर, झाबुआ, राणापुर और बदनावर मार्ग पर चार अलग-अलग पार्किंग जोन बनाए गए हैं। आयोजन स्थल के समीप हजारों स्क्वायर फीट में विशाल वॉटरप्रूफ पंडाल और मुख्य मंच तैयार किया गया है। पूरे परिसर में कई विशाल एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि अंतिम पंक्ति में बैठा श्रद्धालु भी स्पष्ट दर्शन कर सके। कल सुबह से ही मोहनखेड़ा की ओर जाने वाले रास्ते भक्ति के हाईवे में तब्दील हो जाएंगे।


मोहनखेड़ा तीर्थ पर सजेगा बागेश्वर सरकार का दिव्य दरबार: सुर और भक्ति के संगम के साथ तैयारियाँ अंतिम चरण में

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जैन तीर्थ में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ,दिग्गज संतों और प्रसिद्ध गायकों की मौजूदगी में जैन तीर्थ में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ,दिग्गज संतों और प्रसिद्ध गायकों की मौजूदगी में कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी द्वारा भव्य आयोजन

  

  राजगढ़ (धार): मालवा के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा में आगामी 2 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक संगम होने जा रहा है। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) की विशाल कथा और आगमन को लेकर पूरे मालवा अंचल में उत्साह चरम पर है। शनिवार सुबह से ही राजगढ़ में सरगर्मी तेज हो गई है और आसपास के थानों सहित अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचना शुरू हो चुका है। यह भव्य आयोजन प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होकर देर रात तक चलेगा, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा।

देशभर के प्रतिष्ठित संतों का होगा महासमागम

इस आयोजन की भव्यता का मुख्य केंद्र यहाँ होने वाला संतों का समागम है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी अयोध्या के पूज्य महंत श्री राजू दासजी महाराज, मलूक पीठ बागेश्वरधाम वृंदावन के आचार्य रोहित रिछारिया, राजेश्वरम परिवार पचोखराधाम के पूज्य महंत गुरुप्रसाद जी महाराज और पूज्य अंकित कृष्ण भटुक जी सहित देशभर से कई गणमान्य संत पधार रहे हैं। यह दिव्य आयोजन मुंबई निवासी रमेश गोवाणी द्वारा अपने माता-पिता स्वर्गीय घमंडीराम व अंकीबाई की पुण्य स्मृति में 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी ट्रस्ट' के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आकर्षण

आयोजन में प्रवचनों के साथ-साथ सुरीली प्रस्तुतियों का भी विशेष समावेश किया गया है। सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेंगी, वहीं 'बन्नो तेरा स्वैगर' फेम प्रसिद्ध गायक बृजेश शांडिल्य और भजन गायक अमित धुर्वे भी अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे। यह सांस्कृतिक संगम आयोजन को और भी गरिमामयी बनाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त भक्ति रस का आनंद लेंगे।

प्रशासनिक सतर्कता और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

आयोजन की विशालता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शनिवार को एसपी मयंक अवस्थी और अपर कलेक्टर संजीव केशव पांडेय ने स्वयं कथा स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर पांडेय ने श्रद्धालुओं के बैठने और भोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, वहीं एसपी अवस्थी ने हेलिपैड से लेकर पार्किंग और सुरक्षा घेरे को लेकर सूक्ष्म जानकारी ली। सुरक्षा के लिहाज से आयोजन स्थल पर 1500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। साथ ही, निजी सुरक्षा कंपनी के वालंटियर भी व्यवस्था संभालने में सहयोग करेंगे।

सुगम यातायात और हाईटेक सुविधाएं

श्रद्धालुओं को आवागमन में असुविधा न हो, इसके लिए पार्किंग को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। झाबुआ, राणापुर, पेटलावद, इंदौर और बदनावर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए पृथक-पृथक पार्किंग सुनिश्चित की गई है। आयोजन स्थल यानी 108 धर्मशाला के समीप हजारों स्क्वायर फीट में विशाल पांडाल का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के लिए 2400 स्क्वायर फीट का मुख्य मंच तैयार किया गया है। पूरे परिसर में 8 विशाल एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि अंतिम पंक्ति में बैठा श्रद्धालु भी स्पष्ट दर्शन कर सके। सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद राजगढ़ को सौंपी गई है।

निरीक्षण के दौरान एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम सलोनी अग्रवाल, एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार, तहसीलदार मुकेश बामनिया, राजगढ़ टीआई समीर पाटीदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और मोहनखेड़ा तीर्थ के मैनेजिंग सुजानमल जैन उपस्थित रहे।