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कृष्णगढ़ में कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ने बिखेरे सेवा के रंग: जरूरतमंदों के संग मनाई खुशियों वाली होली






 



    पवई। पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कृष्णगढ़ में इस वर्ष होली का पर्व केवल पारंपरिक रंगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सेवा, संवेदना और सामाजिक समरसता के एक अनूठे संगम के रूप में सामने आया। कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन (KHF) द्वारा आयोजित 'विशेष होली सेवा अभियान' के तहत संस्था ने समस्त ग्रामवासियों के साथ मिलकर त्योहार की खुशियाँ बांटीं।

    इस सेवा अभियान के दौरान फाउंडेशन द्वारा गांव के बच्चों, माताओं, बहनों और बुजुर्गों सहित सभी जरूरतमंद परिवारों के बीच मिठाई, पिचकारी, रंग, गुलाल, मास्क और गुब्बारों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान जब छोटे-छोटे बच्चों के चेहरों पर खिलखिलाहट आई और बुजुर्गों ने स्नेहपूर्ण आशीर्वाद दिया, तो पूरा वातावरण आत्मीयता से भर गया। संस्था के सदस्यों का मानना है कि माताओं-बहनों की आंखों में झलकी यही खुशी इस अभियान की वास्तविक सफलता है।

  कार्यक्रम का सफल नेतृत्व समाज सेविका और KHF की संस्थापक अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि त्योहार मनाने का असली अर्थ तभी सार्थक होता है, जब हम अपनी खुशियों में समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित वर्ग को शामिल करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है।

  यह आयोजन न केवल एक सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र में यह संदेश भी प्रसारित किया है कि 'सेवा ही सच्चा उत्सव है'। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता की एक प्रेरणादायक मिसाल बताया।

संघ संस्थापकों ने की थी राष्ट्र सर्वोपरि के भाव को सशक्त करने और भविष्य के बेहतर भारत की कल्पना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव,राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पबद्ध प्रत्येक नागरिक देखे फिल्म शतक

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    भोपाल :  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पबद्ध प्रत्येक नागरिक को फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" देखना चाहिए। यह एक प्रेरक फिल्म है जो राष्ट्र के लिए कर्म प्रधान भूमिका का आहवान करती है। भारत के इतिहास के अध्ययन और अतीत से अवगत होकर संघ संस्थापकों और पदाधिकारियों ने राष्ट्र सर्वोपरि के भाव को सशक्त बनाने और भविष्य को बेहतर बनाने की कल्पना कर ली थी। संघ के माध्यम से बाहरी शक्तियों के कृत्यों के विरुद्ध मजबूती से मुहीम चलाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, श्री राहुल कोठारी, श्री रविंद्र यति सहित जनप्रतिनिधियों के साथ फिल्म देखने के बाद ये विचार व्यक्त किये।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को भोपाल के डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नगर स्थित दृष्टि कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गठन 1925 से लेकर पूर्ण हुई एक शताब्दी की सेवा और समर्पण भरी यात्रा पर केंद्रित फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" के प्रदर्शन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फिल्म "शतक" को मध्यप्रदेश शासन द्वारा टैक्स फ्री घोषित किया गया है। फिल्म का कथानक, समाजोपयोगी संदेश और सांस्कृतिक उत्थान के महत्व को रेखांकित करने के कारण प्रदेश में फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" कर मुक्त रहेगी। 

   फिल्म शतक के निर्देशक श्री आशीष मल्ल हैं। फिल्म की विशेषता यह भी है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत ग्राफिक्स का उपयोग कर स्वातंत्र्य वीर सावरकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर्दे पर जीवंत किए गए हैं। फिल्म में अभिनेता अजय देवगन ने स्वर दिया है। फिल्म निर्माता वीर कपूर हैं। फिल्म के महत्व को देखते हुए मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्य सरकारों ने भी इसे टैक्स फ्री कर दिया है ताकि अधिक से अधिक युवा इसे देख सकें।

धार जिले के राजगढ़ नगर मण्डल की नई कार्यकारिणी घोषित

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  राजगढ़ (धार)। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को गति देते हुए भाजपा जिला धार के जिला अध्यक्ष निलेश भारती की सहमति से राजगढ़ नगर मण्डल की नई मण्डल समिति की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 196 के अंतर्गत आने वाले राजगढ़ नगर मण्डल के अध्यक्ष सोहन पटेल ने प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार इस नई कार्यकारिणी की सूची जारी की है। इस नई समिति में अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण पदों पर स्थान दिया गया है ताकि मण्डल स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

 मण्डल अध्यक्ष सोहन पटेल द्वारा जारी सूची के अनुसार, संगठन की मजबूती के लिए पदाधिकारियों का चयन क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है। घोषित कार्यकारिणी में मोहन प्रजापत, पंकज बारोड, प्रविण कटारा, अमरसिंह चौधरी, महेश शर्मा और श्रीमती कला कनु ठाकुर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन के महत्वपूर्ण दायित्वों के लिए निलेश शर्मा और प्रीतम ठाकुर को महामंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि मंत्री के रूप में पिडु बारीया, तोलसिंह पटेल, हरिराम सोंलकी, उदयसिंह भुरा, महेश राठौड़ और श्रीमती प्रीतिबाला अजय चौहान को जिम्मेदारी दी गई है।

   वित्तीय व्यवस्थाओं के लिए श्रीमती अरूणा धर्मेन्द्र कुमावत को कोषाध्यक्ष और अंतिम ठाकुर को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह कार्यालय के कार्यों के लिए गोविन्द चौधरी को मन्त्री और घनश्याम सिंगार को सह मन्त्री नियुक्त किया गया है। आधुनिक प्रचार-प्रसार और तकनीकी संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु धर्मेन्द्र भंडारी को मीडिया प्रभारी, आकाश झुंझे को सोशल मीडिया प्रभारी, दीपेश ठाकुर को आईटी सेल प्रभारी और गौरव भण्डारी को मन की बात प्रभारी बनाया गया है। इन सभी विभागों में सहयोग के लिए सह-प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है। इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल संवाद के लिए श्रीमती माया कन्हैयालाल खराडी और हेमराज भाबर को प्रमुख दायित्व सौंपे गए हैं। इस नई टीम की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।

मेरी व्यथा… – डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)





 



  दफ्तर की खामोशी बहुत कुछ कहती है। दिनभर की चहल-पहल के बाद जब कुर्सियाँ खाली हो जाती हैं, कंप्यूटर स्क्रीन्स बंद हो जाती हैं और बालकनी में सन्नाटा फैल जाता है, तब एक उद्योगपति का मन अक्सर सवालों से भर जाता है। क्या यह वही सपना है, जिसे कभी शून्य से शुरू किया था? क्या यह वही संस्थान है, जिसे अपने खून-पसीने से सींचा था? और क्या यह वही टीम है, जिसे साथ लेकर भविष्य की इमारत खड़ी करने का संकल्प लिया था?
   यह केवल मेरी नहीं, उन तमाम उद्योगपतियों की व्यथा है, जिन्होंने एक विचार से शुरुआत की। जिनके पास शुरुआत में पूँजी कम थी, पर हौसला बड़ा था। एक छोटी-सी मेज, सीमित संसाधन, अनिश्चित भविष्य लेकिन एक स्पष्ट लक्ष्य। उस समय हर कर्मचारी, हर सहयोगी, हर साझेदार को यह एहसास था कि यदि आज हमने पूरी ताकत नहीं लगाई, तो कल शायद यह अवसर न बचे। तब संस्थान 'किसी एक का' नहीं था; वह संघर्ष सबका था।
   समय बदला, संस्थान बढ़ा, संरचना मजबूत हुई। छोटे दफ्तर की जगह बड़ी बिल्डिंग ने ले ली। कुछ कर्मचारी प्रबंधक बने, कुछ प्रशिक्षु विशेषज्ञ बने। कारोबार स्थिर हुआ, ब्रांड बना, बाजार में पहचान बनी। पर इसी विकास के साथ एक बदलाव भी आया, अपनापन धीरे-धीरे जिम्मेदारी में बदल गया, और जिम्मेदारी धीरे-धीरे औपचारिकता में। एक उद्योगपति की व्यथा यहीं से शुरू होती है।
   वह देखता है कि शाम पाँच बजते ही घड़ियाँ देखने की आदत बढ़ गई है। प्रोजेक्ट 'मेरे हिस्से का' और 'तुम्हारे हिस्से का' बन गए हैं। ग्राहक की समस्या अब व्यक्तिगत चुनौती नहीं, विभागीय फाइल बन गई है। वेतन की तारीख याद रहती है, पर लक्ष्य की तारीख धुंधली हो जाती है। संस्थान, जो कभी साझा सपना था, अब कई लोगों के लिए सिर्फ नौकरी का स्थान बनकर रह गया है।
   एक बॉस के रूप में वह शिकायत नहीं करता। उसे मालूम है कि नेतृत्व की जिम्मेदारी उसी ने चुनी है। बैंक का कर्ज, निवेशकों का भरोसा, ग्राहकों की अपेक्षाएँ और कर्मचारियों के परिवारों की सुरक्षा, इन सबका भार अंततः उसी के कंधों पर आता है। जब बाकी लोग घर लौटते हैं, वह अगले महीने की रणनीति बनाता है। जब टीम छुट्टी पर होती है, वह संभावित जोखिमों की गणना करता है। यह उसका कर्तव्य है, और वह उससे पीछे नहीं हटता। पर उसकी व्यथा यह नहीं कि उसे अधिक काम करना पड़ता है। उसकी व्यथा यह है कि वह अकेला महसूस करने लगता है, उस यात्रा में, जो कभी सामूहिक थी।
   हर उद्योगपति चाहता है कि उसकी टीम उसे 'सर' या 'मालिक' भर न माने, बल्कि एक सहभागी समझे। वह चाहता है कि कर्मचारी यह महसूस करें कि जिस कुर्सी पर वे बैठे हैं, जिस वेतन से उनका घर चलता है, जिस पहचान से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, वह सब एक साझा प्रयास का परिणाम है। कंपनी केवल पूँजी से नहीं बनती; वह विश्वास, समर्पण और स्वामित्व की भावना से बनती है।
   समस्या यह नहीं कि आज के कर्मचारी सक्षम नहीं हैं। वे प्रतिभाशाली हैं, शिक्षित हैं, तकनीकी रूप से दक्ष हैं। समस्या यह है कि संस्थान से भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। जब संगठन छोटा था, हर निर्णय जीवन-मरण जैसा लगता था। आज संरचना बड़ी है, प्रक्रियाएँ जटिल हैं, और व्यक्तिगत योगदान का प्रभाव दिखाई कम देता है। परिणामस्वरूप, 'यह मेरा भी है' वाली भावना धुंधली पड़ने लगती है।
   यह व्यथा केवल उद्योगपति की ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की उस भूमिका की है जो समझती है कि संस्थान एक जीवित इकाई है। वह मशीन नहीं, जिसे एक बार चालू कर दिया जाए और वह स्वयं चलती रहे। उसे हर दिन विचारों की, प्रतिबद्धता की और विश्वास की ऊर्जा चाहिए।
   सच्चाई यह है कि अधिकतर कर्मचारी ईमानदार होते हैं। वे मेहनत करते हैं, सीखना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं। पर उन्हें बार-बार यह याद दिलाने की आवश्यकता होती है कि वे केवल वेतनभोगी नहीं, बल्कि निर्माता भी हैं। उद्योगपति की सबसे बड़ी चुनौती यही है 'सपने को साझा सपना बनाए रखना'।
  एक उद्योगपति की व्यथा का निचोड़ यही है कि वह अपनी कंपनी को अगली ऊँचाई पर ले जाना चाहता है, पर अकेले नहीं। वह चाहता है कि टीम लक्ष्य को 'कंपनी का लक्ष्य' नहीं, 'अपना लक्ष्य' माने। वह चाहता है कि कर्मचारी केवल कार्य-घंटों की गणना न करें, बल्कि योगदान की गुणवत्ता को भी मापें। वह चाहता है कि संस्थान पर गर्व केवल बोर्डरूम तक सीमित न रहे, बल्कि हर डेस्क तक पहुँचे।
   पर इसके साथ ही उद्योगपति को भी आत्ममंथन करना होता है। क्या उसने संवाद कम कर दिया? क्या उसने विकास की कहानी साझा करना छोड़ दिया? क्या उसने यह मान लिया कि लोग स्वतः समझ रहे हैं? नेतृत्व का अर्थ केवल दिशा देना नहीं, बल्कि निरंतर संवाद बनाए रखना भी है।
  आज आवश्यकता किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि पुनः जागृत विश्वास की है। जब कर्मचारी संस्थान को अपना मानते हैं, तो वे केवल काम नहीं करते, वे निर्माण करते हैं। और जब उद्योगपति अपनी टीम को सहभागी मानता है, तो वह केवल प्रबंधन नहीं करता, बल्कि प्रेरित करता है।
  'मेरी व्यथा…' दरअसल एक पुकार है, साझेदारी की, स्वामित्व की और उस सामूहिक संकल्प की, जिसने कभी एक छोटे से विचार को बड़े संस्थान में बदला था। यदि यह भावना फिर से जीवित हो जाए, तो कोई भी कंपनी केवल बाजार में नहीं, इतिहास में भी अपनी पहचान बना सकती है।

राजगढ़ में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ प्रभु के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक पर 'ऋषभ नाद' का भव्य आयोजन 11 मार्च को





 



    राजगढ़/धार। राजगढ़ नगर में आगामी 11 मार्च  को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के पावन अवसर पर 'ऋषभ नाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जाएगा। चारथुई श्रीसंघ और श्री ऋषभदेव मोतीलाल पेढ़ी ट्रस्ट, राजगढ़ के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव के अंतर्गत दिन भर विभिन्न मांगलिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7 बजे भव्य संगीतमय शक्रस्तव अभिषेक के साथ होगी, जिसमें मुंबई के प्रसिद्ध संगीतकार वैभव भाई दोषी अपनी मधुर प्रस्तुतियों से भक्ति रस घोलेंगे। इसके पश्चात प्रातः 11 बजे से ओसवाल धर्मशाला में सकल श्रीसंघ का स्वामीवात्सल्य आयोजित किया जाएगा। दोपहर 1 बजे नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। महोत्सव का समापन संध्या काल में श्री आदेश्वरजी मंदिर में आयोजित भव्य संध्या भक्ति के साथ होगा, जो शाम 7 बजे से प्रारंभ होगी।

राजगढ़ (धार): मैन चौपाटी 'भगवा चौक' में दिखा अद्भुत नज़ारा,घूमती हुई झांकी ने मोह लिया सबका मन!





 


    राजगढ़ (धार): मध्य प्रदेश के धार जिले के राजगढ़ नगर में इस बार होली का पर्व भक्ति और आकर्षण का अनूठा संगम रहा। नगर के विभिन्न चौराहों पर होलिका दहन का पारंपरिक आयोजन किया गया, लेकिन सबकी निगाहें मेन चौपाटी स्थित 'भगवा चौक' पर टिकी रहीं।

  होलिका और भक्त प्रहलाद की लाइव झांकी भगवा चौक पर इस वर्ष होलिका और भक्त प्रहलाद की एक विशेष झांकी सजाई गई थी। इस झांकी की सबसे बड़ी खासियत इसका घूमता हुआ स्वरूप था,जो लोगों के लिए कौतूहल और श्रद्धा का विषय बना रहा। धुएं और रोशनी के बीच झिलमिलाती यह झांकी रात के अंधेरे में बेहद भव्य नजर आ रही थी।

  इस आकर्षक झांकी को देखने के लिए नगरवासियों का आना  जाना बड़ी संख्या में देखने को मिला। वही झांकी की भव्यता और इसकी अनूठी बनावट को देखते हुए लोग अपनी सेल्फी लेने से खुद को रोक नहीं पाए। 


राजगढ़ में शांति समिति की बैठक : कानफोड़ू डीजे पर रहेगा प्रतिबंध,हुड़दंगियों पर होगी पुलिस की पैनी नजर




 



   राजगढ़/धार। आगामी त्योहारों को उल्लास और शांति के साथ मनाने के उद्देश्य से नगर परिषद सभाकक्ष में शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि उत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसडीओपी विश्वदीप परिहार ने सख्त लहजे में कहा कि नगर में 'कानफोड़ू' डीजे बजाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि 60-70 डेसिबल से अधिक शोर न केवल सेहत के लिए हानिकारक है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।

   बैठक में थाना प्रभारी समीर पाटीदार,नप उपाध्यक्ष दीपक जैन, नगर परिषद लेखापाल रघुनाथ वसुनिया, तहसील पटवारी और विद्युत मंडल के मनीष भामरे सहित पार्षदगण, पत्रकार और विभिन्न आयोजन समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी साझा न करने की अपील करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग मांगा। विशेष रूप से होली और रंगपंचमी के दौरान 'रोको-टोको' अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नशे में तेज रफ्तार बाइक चलाने वालों को न केवल समझाइश दी जाएगी, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर चालानी कार्रवाई भी की जाएगी।

  नगर परिषद सभाकक्ष उपाध्यक्ष दीपक जैन द्वारा जानकारी दी गई कि रंगपंचमी का मुख्य आयोजन नए बस स्टैंड पर सुबह 11 बजे से होगा,जहाँ पानी की फुहारों के बीच सामूहिक उत्सव मनाया जाएगा। यहाँ महिला और पुरुष वर्ग के लिए पृथक व्यवस्थाएं और स्वल्पाहार का प्रबंध रहेगा। बैठक के दौरान नगरवासियों ने प्रेशर हॉर्न के विरुद्ध कार्रवाई और आवारा पशुओं की समस्या को प्रमुखता से उठाया। हाट बाजार में गोवंश के अवैध व्यापार और पशु क्रूरता की सूचना तत्काल पुलिस को देने की बात कही गई। साथ ही, नगर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक और उनकी नसबंदी का मुद्दा भी गरमाया,जिस पर यह तथ्य सामने आया कि फिलहाल कोई एजेंसी कुत्तों की नसबंदी के लिए तैयार नहीं हो रही है।