BREAKING NEWS
latest



 

News
News

राज्य

राज्य/block-5

आपके शहर की खबर

आपके शहर की खबर/block-3

राजनीति

राजनीति/block-6

मनोरंजन

मनोरंजन/block-6

धर्म

धर्म/block-3

"खेल"

खेल/block-3

"लेख"

लेख/block-3

ख़बरें जरा हटके

ख़बरें जरा हटके/block-10

स्टोरी

स्टोरी/block-7

आपकी बायोग्राफी

आपकी बायोग्राफी/block-11

बिज़नेस

बिज़नेस/block-10

Latest Articles

"क्रिएटेड फॉर ईज़": इकोवैक्स (ECOVACS) का ब्रांड अभियान APAC क्षेत्र में 'केयरगिवर्स' को कर रहा है सम्मानित

सिंगापुर

होम सर्विस रोबोटिक्स में वैश्विक अग्रणी, इकोवैक्स रोबोटिक्स (ECOVACS Robotics), अपने वैश्विक ब्रांड विचार "इकोवैक्स, क्रिएटेड फॉर ईज़" को एक स्थानीय विशेषता के साथ "ऑलवेज इन योर कॉर्नर" के साथ APAC क्षेत्र में ला रहा है। इसके साथ, इकोवैक्स APAC क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझने और उन्हें पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित कर रहा है।


"इकोवैक्स, क्रिएटेड फॉर ईज़" उपयोगकर्ताओं को घरेलू कार्यों से मुक्त करके उनके लिए आसानी (ease) की दुनिया बनाने के लिए सर्विस रोबोटिक्स का लाभ उठाने की ब्रांड की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। APAC क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं के लिए, इकोवैक्स जानता है कि "ईज़" (सुगमता) का मतलब केवल कम काम करना नहीं है। इसका अर्थ है मन को शांत करना और मानसिक बोझ को दूर करना। APAC उपयोगकर्ताओं को यह सहूलियत देने के लिए, तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो ध्यान न मांगे। इसे "ऑलवेज इन योर कॉर्नर" (हमेशा आपके साथ) होना चाहिए - जो उपयोगकर्ताओं को उनके दैनिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने में चुपचाप मदद करे।

 
APAC के Unsung Heroes के लिए "ऑलवेज इन योर कॉर्नर"

"ऑलवेज इन योर कॉर्नर" यह दर्शाता है कि इकोवैक्स का विविध 'फुल-सिनेरियो होम सर्विस रोबोटिक्स इकोसिस्टम' किस प्रकार APAC क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं के बोझ को कम करने और उन्हें अधिक सहज आधुनिक जीवन शैली का आनंद लेने के लिए सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उदाहरण के लिए, APAC क्षेत्र में कई लोग तथाकथित "सैंडविच पीढ़ी" (sandwich generation) का हिस्सा हैं।

वे अपने घरों की शांत रीढ़ हैं, जो बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करते हुए करियर की मांगों को संतुलित करते हैं। चाहे वह किसी बच्चे को उसके होमवर्क में मदद करना हो या पिता को डॉक्टर के पास ले जाना हो, ये रोज़मर्रा के नायक हमेशा किसी न किसी के साथ (in someone's corner) खड़े होते हैं। इकोवैक्स का मानना ​​है कि वे भी इस बात के हकदार हैं कि कोई उनके साथ खड़ा हो, जो उनके बोझ को कम करने में मदद करे।

पिछले 20 वर्षों से, इकोवैक्स जटिल चुनौतियों को हल करने और उपयोगकर्ता अनुभव को लगातार उन्नत करने के लिए नवाचार (innovation) की निडर भावना से प्रेरित है। इकोवैक्स डीबॉट (ECOVACS DEEBOT) रोबोटिक वैक्यूम और विनबॉट (WINBOT) रोबोटिक विंडो क्लीनर में अग्रणी इंटेलिजेंट तकनीकें, जैसे ओमनी स्टेशन (OMNI Station), ओज़्मो रोलर (OZMO ROLLER) तकनीक और पावरबूस्ट (PowerBoost) तकनीक ने नए उद्योग मानदंड स्थापित किए हैं और हर घर के लिए छिपे हुए नायक बन गए हैं, जिन्हें उपयोगकर्ताओं को न्यूनतम प्रयास के साथ अपने घर के हर कोने को साफ करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सिंगापुर में 'इनेबलिंग विलेज' (Enabling Village) के साथ साझेदारी

अब इकोवैक्स APAC क्षेत्र में देखभाल करने वालों (caregivers) के बोझ को कम करने में मदद करने के लिए इनोवेशन की यही भावना ला रहा है। अपने ब्रांड अभियान के हिस्से के रूप में, इकोवैक्स पूरे क्षेत्र में समान विचारधारा वाले स्थानीय भागीदारों, जैसे सिंगापुर में 'इनेबलिंग विलेज', के साथ सहयोग करने की योजना बना रहा है। इनेबलिंग विलेज एक एकीकृत सामुदायिक स्थान है जिसका उद्देश्य विकलांग लोगों की देखभाल करने वालों को उनकी ज़िम्मेदारियों का प्रबंधन करने और उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए संसाधन प्रदान करके सशक्त बनाना है। इकोवैक्स इनेबलिंग विलेज में देखभाल करने वालों को डीबॉट (DEEBOT) रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर प्रदान करेगा ताकि उनके बोझ को कम करने में मदद मिल सके और वे अपने लिए अधिक समय निकाल सकें।

यवेट वांग (Yvette Wang) कहती हैं, "विशेष ज़रूरतों वाले बच्चे की देखभाल के लिए बहुत समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। और ऐसे क्षण खोजना चुनौतीपूर्ण हो सकता है जब मैं खुद पर ध्यान केंद्रित कर सकूं। मैं देखभाल करने वालों की सहायता करने के इकोवैक्स और उनके प्रयासों की आभारी हूँ। उनके डीबॉट रोबोटिक वैक्यूम के साथ अब मेरे पास प्रबंधित करने के लिए एक काम कम है, क्योंकि मैं अपने फर्श और खुद की देखभाल करने के लिए डीबॉट पर निर्भर रह सकती हूँ।"

अपनी साझेदारी का जश्न मनाने के लिए, इकोवैक्स और इनेबलिंग विलेज ने यवेट के बेटे, कलाकार @Eli_lailai को कुछ विशेष मर्चेंडाइज (merchandise) डिज़ाइन करने के लिए आमंत्रित किया है। यह सहयोग SG Enable की एक पहल I'mable Collective के माध्यम से संभव हुआ, जो रचनात्मक क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करके विकलांग व्यक्तियों का समर्थन और सशक्तिकरण करता है।

एक इकोसिस्टम जो 'ईज़' (सहूलियत) को सशक्त बनाता है

सर्विस रोबोटिक्स में अपने नेतृत्व को लगातार मजबूत करने के इकोवैक्स के प्रयास उपयोगकर्ताओं की ज़रूरतों की गहरी समझ में निहित हैं। इसका क्षेत्रीय रूप से तैयार किया गया ब्रांड विचार "क्रिएटेड फॉर ईज़ - ऑलवेज इन योर कॉर्नर" 'रोबोटिक्स फॉर ऑल' (Robotics for All) मिशन के प्रति ब्रांड की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य APAC क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं के लिए उन रोबोटों के साथ एक बेहतर भविष्य को आकार देना है जो हर जगह, हर घर की निर्बाध रूप से सेवा कर सकें।

इकोवैक्स द्वारा शुरू की गई उद्योग-अग्रणी सफाई प्रौद्योगिकियां मानवीय प्रयासों को कम करने के साथ-साथ सफाई की सटीकता और दक्षता को अधिकतम करने के प्रति इसके समर्पण को प्रदर्शित करती हैं, जिसका उद्देश्य आज के घरों की जरूरतों के अनुरूप भरोसेमंद सफाई अनुभव प्रदान करना है। इकोवैक्स के सर्विस रोबोट उपयोगकर्ताओं के घर के हर कोने में कुशल, सहज सफाई लाकर उन्हें अधिक सहूलियत प्रदान करते हैं।

"ऑलवेज इन योर कॉर्नर" यह दर्शाता है कि कैसे इकोवैक्स का होम सर्विस रोबोटिक्स इकोसिस्टम APAC क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है - फर्श से लेकर खिड़कियों तक, उनके पूरे घर के परिदृश्यों (full-home scenarios) का समर्थन करने के लिए। इकोवैक्स डीबॉट रोबोटिक वैक्यूम और विनबॉट रोबोटिक विंडो क्लीनर को उन कार्यों को संभालने के लिए बनाया गया है जो किए जाने चाहिए — चुपचाप, लगातार और बुद्धिमानी से। वे सिर्फ सफाई नहीं करते, वे उपयोगकर्ताओं के प्रबंधन के काम को कम करते हैं।

 देखभाल (Care) के संदेश का विस्तार

इकोवैक्स इस ब्रांड अभियान के प्रभाव को प्रमुख APAC बाज़ारों में कई टचप्वाइंट्स तक विस्तारित करेगा, जिनमें सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, भारत, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया शामिल हैं। स्थानीय साझेदारियों, एकीकृत ब्रांड स्टोरीटेलिंग और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से, इकोवैक्स का लक्ष्य देखभाल करने वालों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में उन लोगों को सम्मानित करना है जो कम तनावपूर्ण और अधिक संतुलित जीवन की तलाश में हैं।

 इंटेलिजेंट। इनोवेटिव। इंट्यूटिव। (Intelligent. Innovative. Intuitive.)

रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर के अपने डीबॉट (DEEBOT) परिवार से लेकर रोबोटिक विंडो क्लीनर के अपने विनबॉट (WINBOT) परिवार तक, इकोवैक्स के सभी नवाचार इसकी अच्छी तरह से स्थापित वर्टिकली इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन (vertically integrated supply chain) और बैटरी, एआई (AI), मोटर्स, ट्रांसमिशन घटकों तथा बहुत कुछ तक फैली स्वतंत्र रूप से विकसित तकनीकों द्वारा समर्थित हैं।

आज, इकोवैक्स दुनिया भर में लगभग 180 बाज़ारों में 38 मिलियन (3.8 करोड़) से अधिक घरों में सेवा प्रदान करता है। इसका मिशन - "रोबोटिक्स फॉर ऑल" - बुद्धिमान सर्विस रोबोटिक्स को सुलभ, विश्वसनीय और रोज़मर्रा के जीवन में सहजता से एकीकृत करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

"क्रिएटेड फॉर ईज़" केवल बेहतर सफाई के बारे में नहीं है। यह हल्का जीवन जीने और आपके ध्यान की आवश्यकता वाली चीज़ों को कम करने के बारे में है - ताकि आप उस पर ध्यान केंद्रित कर सकें जो वास्तव में मायने रखता है। और ऐसा करने में, इकोवैक्स हमेशा आपके साथ (always in your corner) है।

 
इकोवैक्स रोबोटिक्स (ECOVACS ROBOTICS) के बारे में

2006 में स्थापित, इकोवैक्स रोबोटिक्स होम सर्विस रोबोटिक्स में एक वैश्विक लीडर है, जिसके पास उत्पादों का एक विविध पोर्टफोलियो है जिसमें रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर और रोबोटिक विंडो क्लीनर शामिल हैं। रोबोटिक लॉन मोवर (robotic lawn mowers), कमर्शियल क्लीनिंग रोबोट और रोबोटिक पूल क्लीनर में अपने विस्तार के साथ, इकोवैक्स ने होम सर्विस रोबोटिक्स में एक मल्टी-कैटेगरी लीडर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।

"रोबोटिक्स फॉर ऑल" के मिशन से निर्देशित, इकोवैक्स दुनिया भर के उपभोक्ताओं के लिए जीवन को अधिक स्मार्ट और अधिक स्टाइलिश बनाने के लिए लगातार प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ा रहा है और उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ा रहा है। जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और सिंगापुर में बिक्री सहायक कंपनियों के साथ, इकोवैक्स उत्पाद लगभग 180 प्रमुख बाज़ारों तक पहुँचते हैं और विश्व स्तर पर 38 मिलियन से अधिक घरों में सेवा प्रदान करते हैं।
 

 

भारत में कामकाज की स्थिति 2026: भारत का युवा कार्यबल बढ़ रहा है और पहले से ज़्यादा शिक्षा हासिल कर रहा है

यह रिपोर्ट उच्च शिक्षा तक बढ़ रही पहुँच और शिक्षा से रोज़गार की ओर बढ़ने की प्रक्रिया में युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को पेश करती है

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत
भारत में कामकाज की स्थिति 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने युवाओं (15 से 29 उम्र) के लिए उच्च शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने में काफ़ी सफलता हासिल की है। इसके साथ ही, कृषि से उद्योग व सेवा क्षेत्रों में काम करने के लिए श्रमिकों के स्थानांतर को सुनिश्चित करने और लिंग व जाति की वजह से होने वाले भेदभावों को कम करने में काफ़ी प्रगति की है। इसके बावजूद, कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। शिक्षित और आकांक्षी युवाओं की बढ़ती संख्या को किस तरह से बाज़ार में शामिल किया जा सकता है, इसी से तय होगा कि भारत की मेहनत करने लायक बढ़ती हुई बड़ी जनसांख्यिकीय की ताकत को आर्थिक विकास का माध्यम बनाया जा सकता है या नहीं।

बाएं से दाएं: अमित बसोले, रोज़ा अब्राहम, और तमोघना हलदर - अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय से

अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालयों की प्रेसिडेंट, इंदु प्रसाद ने कहा है, “आज पहले से ज़्यादा युवा शिक्षित, जागरूक और कुछ करने के इच्छुक हैं। ये असल हासिल है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।
 
इस रिपोर्ट में पिछले चालीस वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट में शिक्षा और रोज़गार में युवाओं की भागीदारी में हुए बदलावों, हम अपने जनसंख्या के बढ़ने का कितना अच्छी तरह से इस्तेमाल कर पाए हैं आदि को समझने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट से समझा जा सकता है कि हमने अपने लोगों को कार्यबल यानी वर्कफ़ोर्स में शामिल करने की प्रक्रिया में किन चुनौतियों का सामना किया है और इससे कौन-से अवसर सामने आते हैं।   
 
इस रिपोर्ट की मुख्य लेखिका और अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय में अर्थशास्त्र की असोसिएट प्रोफ़ेसर रोज़ा अब्राहम ने कहा है, “यह रिपोर्ट किसी युवा के शिक्षा से लेकर रोज़गार की तलाश से होते हुए, रोज़गार पाने तक के सफ़र को दिखाती है। रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि पिछले चालीस वर्षों में यह बदलाव किस तरह होता आ रहा है। हमें उम्मीद है कि यह रिपोर्ट इस बदलाव से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने वाले कुछ बुनियादी पहलुओं को समाने रखेगी। साथ ही यह रिपोर्ट सभी को साथ मिलाकर एक ही नीति बनाने को भी आसान बनाने में कारगर साबित होगी।

मुख्य बिंदु
  • जनसांख्यिकीय फायदों का वक्त पूरा होने वाला है: भारत में काम या श्रम करने की उम्र वाली आबादी का अनुपात 2030 के बाद धीरे-धीरे कम होना शुरु हो जाएगा। इन हालातों में काम कर सकने वाली जनसंख्या से होने वाले फ़ायदों को आर्थिक विकास में बदलने के लिए तेज़ और ज़रूरत के मुताबिक रोज़गार देना बेहद ज़रूरी होगा।
  • शिक्षा का बढ़ता स्तर: पिछले चालीस वर्षों में युवाओं की शैक्षणिक उपलब्धियों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। ख़ासतौर पर महिलाओं ने इस दौरान काफ़ी कुछ हासिल किया है। भारत में उच्च शिक्षा में नामांकन दर (28%) उन देशों के बराबर है, जिनकी प्रति व्यक्ति आय भारत के बराबरी के स्तर की है।  
  • पुरुषों के उच्च शिक्षा में नामांकन में गिरावट: युवाओं में पुरुषों का शिक्षा में नामांकन वर्ष 2017 में 38% था, जो 2024 के आख़िर तक घटकर 34% रह गया। युवाओं ने बड़े पैमाने पर पढ़ाई छोड़ दी, इसकी वजह घर की आमदनी में आर्थिक सहयोग करने की आवश्यकता को बताया गया।
  • उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ोतरी: 2010 में युवाओं की प्रति लाख आबादी पर 29 कॉलेज मौजूद थे, जो 2021 में बढ़कर 45 हो गए। इस बढ़ोतरी में मुख्य रूप से निजी संस्थानों की भूमिका रही है। हालाँकि, कई क्षेत्रों के बीच असमानताएँ अब भी काफ़ी बड़ी हैं।
  • शिक्षकों की कमी: विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के मुताबिक शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ पाई है। All India Council for Technical Education के मानकों के अनुसार एक शिक्षक पर 15–20 विद्यार्थियों का अनुपात होना चाहिए। लेकिन, निजी कॉलेजों में यह औसतन 28 और सरकारी कॉलेजों में 47 तक पहुँच जाता है। इसलिए शिक्षकों की नियुक्ति करना और रिक्त पदों को जल्द-से-जल्द भरना ज़रूरी है, ताकि संसाधनों की कमी की वजह से सीखने के परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों का तेज़ी से विस्तार: 2010 के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) की संख्या में लगभग 300% की बढ़ोतरी हुई। इसकी सबसे प्रमुख वजह निजी संस्थाओं की तेज़ी से बढ़ोतरी रही है। हालाँकि, संस्थानों की गुणवत्ता में भी गिरावट देखी गई हैं, ख़ासतौर पर निजी आईटीआई संस्थानों की गुणवत्ता में गिरावट देखी जा सकती है।  
  • उच्च शिक्षा में लोकतांत्रीकरण बढ़ा है, लेकिन आर्थिक दिक्कतें अब भी मौजूद हैं: 2007 में उच्च शिक्षा में नामांकित विद्यार्थियों में बेहद गरीब परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों का हिस्सा 8 प्रतिशत था, जो 2017 तक बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया। हालाँकि, आर्थिक संसाधनों की कमी अब भी कई युवाओं के लिए उच्च शिक्षा पाने में एक अड़चन बनी हुई है।
  • पेशेवर शिक्षा हासिल करने में आर्थिक दिक्कतें: दूसरे आम परिवारों के मुकाबले, कुछ ज़्यादा अमीर परिवारों के विद्यार्थी के इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने की संभावना ज़्यादा है। इसकी वजह साफ़ है, इन डिग्रियों को पाने की कीमत अक्सर गरीब परिवारों के सालाना प्रति व्यक्ति खर्च से भी ज़्यादा होती है।
  • शिक्षा से रोज़गार तक का मुश्किल सफ़र: 15 से 29 साल के युवा स्नातकों में बेरोज़गारी का स्तर अब भी ऊँचा बना हुआ है। 15 से 25 वर्ष के युवाओं में यह लगभग 40% और 25 से 29 वर्ष के युवाओं में लगभग 20% है। इसके अलावा, स्नातक होने के एक साल के भीतर कुछ ही युवाओं को ही टिकाऊ रोज़गार मिल पाता है।
  • स्नातकों के लिए बेहतर वेतन: रोज़गार की शुरुआत में स्नातक युवाओं की आमदनी आमतौर पर स्नातकों की पढ़ाई न किए हुए के मुकाबले में लगभग दोगुनी होती है। समय के साथ उनके करियर में यह आमदनी का फ़र्क और भी बढ़ता जाता है।
  • पुरुष स्नातकों की आमदनी में ठहराव: 2011 के बाद से युवा पुरुष स्नातकों के शुरुआती वेतन की बढ़ोतरी धीमी पड़ गई है, जबकि स्नातकों की आमदनी में लैंगिक अंतर कुछ हद तक कम हुआ है।
  • कृषि से अन्य क्षेत्रों की ओर रुझान: बड़ी उम्र के श्रमिकों की तुलना में युवा कामगार कृषि क्षेत्र को अधिक तेज़ी से छोड़कर विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। युवा महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से आईटी, ऑटोमोबाइल विनिर्माण और व्यावसायिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बढ़ रही है।
  • जाति और लिंग आधारित पेशागत विभाजन में कमी: नई पीढ़ी के युवाओं का पारंपरिक रूप से उनकी जाति या लिंग से जुड़े पेशों में सिमटना पहले की तुलना में काफ़ी कम हुआ है।
  • श्रम बाज़ार की मांग की वजह से माइग्रेशन: युवाओं का माइग्रेशन उनके इलाके में मौजूद असमानताओं को संतुलित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे कम विकसित राज्य और अपेक्षाकृत युवा आबादी वाले राज्य श्रम के प्रमुख स्रोत बने रहते हैं, जबकि अपेक्षाकृत समृद्ध और ज़्यादा उम्र वाली आबादी वाले राज्य बढ़ती हुई मात्रा में माइग्रेटेड युवाओं के श्रम पर निर्भर होते जा रहे हैं।
मीडिया संबंधी जानकारी के लिए संपर्क करें:
रोज़ा अब्राहम
ई-मेल: rosa.abraham@apu.edu.in
मोबाइल: +91-9901957009
 
सोनी शेट्टी
ई-मेल: sony.shetty@azimpremjifoundation.org
मोबाइल: +919820900036
 
सुमित जैन
ई-मेल: sumit.jain@k2communications.in
मोबाइल: +91 9886021715
 
अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय के बारे में
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलूरु की स्थापना कर्नाटक सरकार के ‘अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी एक्ट 2010’ द्वारा की गई है। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल की स्थापना ‘मध्य प्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2022’ तहत की गई है। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, राँची की स्थापना झारखण्ड सरकार द्वारा अधिनियमित ‘अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2022’ के तहत की जा रही है।
 
अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन इन तीनों विश्वविद्यालयों की प्रायोजक संस्था है। फ़ाउण्डेशन सामाजिक हित और न्यायपूर्ण, समानता, मानवता और सस्टेनेबल समाज बनाने के मकसद से विश्वविद्यालयों की स्थापना कर रहा है।

Moscow Fashion Week में दुनिया भर के टैलेंट और भारतीय-प्रेरणा वाले कलेक्शन पेश किए गए

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत

Moscow एक बार फ़िर दुनिया के अग्रणी फ़ैशन सेंटर्स में अपनी भूमिका निभा रहा है, और दुनिया भर के डिज़ाइनर्स की मेज़बानी कर रहा है — जिनमें चीन, तुर्की, स्पेन, आर्मेनिया, और रूस के टैलेंट शामिल हैं। 19 मार्च तक चलने वाली, Moscow Fashion Week बेहतरीन ब्रांड्स और उभरते डिज़ाइनर्स को एक साथ लाती है, नई खोजों के लिए एक मंच तैयार करती है और ग्लोबल फ़ैशन लैंडस्केप के भविष्य को आकार देती है।

इस सीज़न Moscow Fashion Week में रूसी डिज़ाइनर्स के कई कलेक्शन्स ने मीडिया का काफ़ी ध्यान आकर्षित किया है और फ़ैशन इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स की दिलचस्पी पैदा की है।  ब्रांड Koss ने अपने नए कलेक्शन में टेक्सचर के खेल और कंट्रास्टिंग पैलेट पर फ़ोकस किया, क्लासिक नए लुक से प्रेरित सिल्हूट को हवादार शिफ़ॉन और शानदार वेलवेट के साथ मिलाया। Capparel के डिज़ाइनर्स ने फ़िज़िकल मौजूदगी और मटेरियल मेमोरी का आईडिया खोजा, शरीर की गति की परतों और निशानों को कलेक्शन की आर्किटेक्चरल स्ट्रक्चर के मुख्य तत्वों में बदल दिया। ब्रांड MME ने एक ऐसा कलेक्शन पेश किया जो सटीकता और स्कल्पचरल स्ट्रक्चर को कोमलता के साथ खूबसूरत तरीके से मिलाता है, आज की महिला की अंदर की ताकत और सादगी भरी खूबसूरती की दर्शाता है।  XakaMa - Lena Makashova का फ़ैशन हाउस, जिसने अपनी 35वीं वर्षगांठ मनाई, ने मॉडर्न डिटेल्स से भरा कलेक्शन दिखाया - पेचीदा स्ट्रैप्स, अलग-अलग लेयर वाले फ़ोल्ड्स, वेस्ट के साथ वाली ड्रेसेज़, बेहद बड़े एक्सेंट ट्राउज़र्स और पॉकेट्स के मेल के साथ।  Ammonit कलेक्शन में बहते हुए सिल्हूट और मुलायम फ़ैब्रिक्स शामिल थे जो मॉडर्न शहर की रिदम में आराम और आत्मविश्वास देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

 
इवेंट की वैश्विक भावना स्पैनिश लेबल Madame & Mister Sibarita की भागीदारी में दिखाई दी। डिज़ाइनर Patricia Emma Fernandez Ortiz ने भारतीय सुंदरता से प्रेरणा लेकर, इसके जीवंत रंगों और शानदार शिल्प परंपराओं को ब्रांड के कलेक्शन में शामिल किया।

 
"हमारा ब्रांड कुछ वाकई अलग पेश करता है: संस्कृतियों और खूबसूरती का फ़्यूज़न।  Madame & Mister Sibarita भारत की समृद्ध टेक्सटाइल परंपराओं को एक मॉडर्न पश्चिमी विज़न के साथ जोड़ता है, ऐसे पीस बनाता है जो न सिर्फ़ शानदार हैं बल्कि यूनीक और व्यक्तित्व से भरे हुए हैं।  रूसी बाज़ार ख़ास तौर से व्यक्तित्व, कारीगरी और कहानी बयान वाले फ़ैशन को पसंद करता है।  हमारे लिए, यह एक अहम मौका है अपने अलग-अलग दृष्टिकोण पेश करने का, जबकि स्पैनिश फ़ैशन इंडस्ट्री के लिए, यह एक नए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर क्रिएटिविटी, क्वालिटी और इनोवेशन दिखाने के दरवाज़े खोलता है,"  Patricia Emma Fernandez Ortiz ने कहा।

 
Moscow Fashion Week लंबे समय से उभरते ब्रांड्स के विकास के लिए एक सबसे प्रभावी मंच रही है, जो उभरते डिज़ाइनर्स के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रवेश करने के दरवाज़े खोलती है। इसका एक बढ़िया उदाहरण Moscow Fashion Week में नियमित भागीदार, रूसी लेबल Hatsibana है, जिसने गर्व से पिछले अक्टूबर में भारत में Lakmé Fashion Week में अपना कलेक्शन पेश किया।

 
"यह ट्रिप मेरे लिए सिर्फ़ एक रनवे शो से कहीं ज़्यादा थी --- यह संस्कृतियों का एक सच्चा संवाद बन गया, एक ऐसा पल जब Caucasus की विरासत को दुनिया भर में समझी जाने वाली भाषा में व्यक्त किया गया।  हमने न सिर्फ़ अपना ब्रांड पेश किया; बल्कि हमने भविष्य के सहयोग की नींव रखी और दुनिया के सबसे बढ़ते बाज़ारों में से एक में प्रवेश भी किया,"  Hatsibana की डिज़ाइनर और संस्थापक Fatima Shogenova, ने कहा।

 Moscow Fashion Week अब पूरे ज़ोर पर है, कई उल्लेखनीय शो और रोमांचक कलेक्शन अभी आगे और भी आने वाले हैं।  यह इवेंट एक ऐसी जगह के तौर पर काम करती है जहां स्थानीय परंपराएं फ़ैशन इंडस्ट्री की ग्लोबल डिमांड से मिलती हैं, और डिज़ाइनर्स को दुनिया भर की ऑडियंस से जुड़ने में मदद करती है।

राजगढ़ में गूंजेगा महावीर का जयकारा: महावीर जी हाथी वाला मंदिर की वर्षगांठ और जन्मकल्याणक महोत्सव 31 मार्च को,शिखर पर लहराएगी 24 ध्वजा





 

  

  
  राजगढ़ (धार)। नगर के हृदय स्थल पर स्थित हाथी वाला महावीर मंदिर में आगामी 31 मार्च, मंगलवार को भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। वर्ष 2019 में प्रतिष्ठित हुए इस भव्य जिनालय की वर्षगांठ और भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव इस बार ऐतिहासिक रूप से मनाया जाएगा। सोमवार, 16 मार्च की रात्रि को सकल जैन श्रीसंघ की बैठक में इस महापर्व की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।

शिखर पर लहराएगी 24 ध्वजा
  
  हाथी वाला महावीर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पावन स्मृति दिवस (वर्षगांठ) के उपलक्ष्य में इस वर्ष मंदिर के शिखर पर 24 ध्वजा चढ़ाई जाएगी, जो नगर की सुख-समृद्धि और अटूट श्रद्धा का प्रतीक होगी। 31 मार्च को प्रातः 8:00 बजे मंत्रोच्चार के साथ ध्वजा रोहण और विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन होगा। इसके पश्चात ओसवाल धर्मशाला (शनि गली) में भव्य स्वामीवात्सल्य (भोज) का आयोजन रखा गया है।

नगर में निकलेगा भव्य वरघोड़ा

  जन्मकल्याणक महोत्सव के अवसर पर दोपहर 1:00 बजे नगर के प्रमुख मार्गों से प्रभु का भव्य वरघोड़ा (जुलूस) निकाला जाएगा। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और भक्ति भजनों के साथ निकलने वाले इस वरघोड़े में समाजजन बड़ी संख्या में शामिल होकर प्रभु की भक्ति का लाभ लेंगे।

साधु-संतों की निश्रा हेतु विशेष समिति
  
  आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करने के लिए सकल जैन श्रीसंघ द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति राजगढ़ के आसपास विराजित पूज्य आचार्य भगवंतों, मुनिराजों एवं साधु साध्वी मंडल के दर्शन-वंदन कर उन्हें इस महोत्सव में मंगल निश्रा प्रदान करने हेतु विनम्र विनती करेगी। समिति के सदस्य 23 मार्च से मुनि भगवंतों को निश्रा प्रदान हेतु विनती करने का कार्य प्रारंभ करेंगे।
 
   हाथी वाला महावीर मंदिर की वर्षगांठ और जन्मकल्याणक के इस संयुक्त उत्सव को लेकर संपूर्ण जैन समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है। श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने सभी समाजजनों से इन आयोजनों में सहभागी बनने की अपील की है।



    

पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा की मौजूदगी में कुरुक्षेत्र में ड्रीम टेनिस क्रिकेट लीग सीजन-1 नॉर्थ ज़ोन का भव्य शुभारंभ

 

नॉर्थ ज़ोन की बड़ी टेनिस क्रिकेट प्रतियोगिता के रूप में उभरने की तैयारी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी लेंगे भाग।

कुरुक्षेत्र। क्रिकेट प्रेमियों के लिए कुरुक्षेत्र में एक विशेष खेल आयोजन की शुरुआत होने जा रही है। ड्रीम टेनिस क्रिकेट लीग सीजन-1 नॉर्थ ज़ोन का ग्रैंड लॉन्च समारोह 12 मार्च 2026 को वेटा होटल, जी.टी. रोड, उमरी, कुरुक्षेत्र में आयोजित किया गया। इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर और पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस लीग के आयोजकों में सोमनाथ गाबा चेयरमैन, रवि कुमार गाबा फाउंडर, विनय कम्बोज और हरिपुर यमुनानगर के प्रतिनिधि शामिल हैं।

इस अवसर पर लीग के पोस्टर और जर्सी का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान आकाश चोपड़ा ने खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और लीग के शुभारंभ की घोषणा की। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम का उत्साह और भी बढ़ गया तथा युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली। ड्रीम टेनिस क्रिकेट लीग का आयोजन 16 जून से 21 जून के बीच समाना बाहु, कुरुक्षेत्र में किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी भाग लेंगे। लीग में कुल 12 टीमें शामिल होंगी और प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होंगे। एक खिलाड़ी की आयु 35 वर्ष से अधिक भी हो सकती है।

मुख्य अतिथि आकाश चोपड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि यदि किसी खिलाड़ी में प्रतिभा है तो उसे मंच अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में टेनिस क्रिकेट को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह और जुनून देखने को मिल रहा है। ऐसे में ड्रीम टेनिस क्रिकेट लीग कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि क्रिकेट देश के दिलों में बसता है और इस तरह की लीग ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने का बेहतरीन मंच देती है। साथ ही उन्होंने युवाओं से खेल के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक भावना बनाए रखने की अपील की। लीग के चेयरमैन सोमनाथ गाबा ने बताया कि यह लीग टेनिस क्रिकेट स्पोर्ट्स फेडरेशन से मान्यता प्राप्त है और इसका आयोजन टेनिस क्रिकेट स्पोर्ट्स एसोसिएशन हरियाणा के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि इसका संचालन अल्टीमेट इवेंट मेकर्स एलएलपी द्वारा किया जाएगा।

लीग के फाउंडर रवि कुमार गाबा ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करना और युवाओं में खेल के प्रति उत्साह बढ़ाना है। इसके लिए खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया 15 अप्रैल से राजस्थान में शुरू की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान आकाश चोपड़ा ने क्रिकेटरों रोहित चंडीगढ़िया, आशु यमुनानगर, अमन मांझी, डैनी मांडी और प्रिंस कंबोज को मोमेंटो देकर सम्मानित भी किया। इस आयोजन ने क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और क्रिकेट प्रेमियों में नए उत्साह का संचार किया।

गांधी नगर में ‘बिजनेस आइकॉन अवॉर्ड 2026’ का भव्य आयोजन, बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री ने किया सम्मानित

 

गांधी नगर के व्यापारिक समाज की एकता और शक्ति का भव्य आयोजन में हुआ शानदार प्रदर्शन।


दिल्ली। दिल्ली के प्रसिद्ध व्यापारिक क्षेत्र गांधी नगर स्थित द ओरिएंट यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में गांधी नगर रेडिमेड व्यापारी एसोसिएशन द्वारा ‘बिजनेस आइकॉन अवॉर्ड 2026’ का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिष्ठित व्यापारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और गांधी नगर के प्रमुख व्यवसायी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री रहीं, जिन्होंने गांधी नगर रेडिमेड व्यापारी एसोसिएशन के प्रेस्टिज मेंबरों को मंच पर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गांधी नगर का रेडिमेड व्यापार देश के वस्त्र उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह व्यापारिक समुदाय ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। साथ ही उन्होंने यहां के व्यापारियों की मेहनत, दूरदर्शिता और संगठित कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि गांधी नगर के व्यापारी न केवल देश के बाजार को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि भारतीय उत्पादों को नई पहचान भी दिला रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत संगीत की मनमोहक प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से उपस्थित अतिथियों और व्यापारियों का भरपूर मनोरंजन किया। कवि सम्मेलन ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक गरिमा और मनोरंजन का सुंदर समावेश किया।

इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए बड़े व्यापारियों का गांधी नगर रेडिमेड व्यापारी एसोसिएशन की ओर से हार्दिक स्वागत और सम्मान किया गया। इस दौरान व्यापारियों के बीच आपसी सहयोग, व्यापारिक विकास और भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

कार्यक्रम के संरक्षक पंकज जैन भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने व्यापारिक समाज की एकजुटता की सराहना करते हुए गांधी नगर के व्यापारिक विकास के लिए एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में एसोसिएशन के पदाधिकारियों, प्रेस्टिज मेंबरों और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आलोक गोयल (Hello Brother), अमित जैन (Sangita Hosiery), सौरभ जैन (Airwise), राजेश सरावगी (SSS), सुनील कुमार जैन (Honesty), पियूष इजारू (Shirt), अमित गोयल (Full Toss), मयंक चमाडिया (Marwari Textile) और किशन अग्रवाल (राधे-राधे) सहित अनेक प्रतिष्ठित सदस्यों ने अपने पूर्ण सहयोग से कार्यक्रम को सफल बनाया।

गांधी नगर रेडिमेड व्यापारी एसोसिएशन के सभी प्रेस्टिज मेंबरों और सदस्यों के सामूहिक सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने गांधी नगर के व्यापारिक समाज की एकता और शक्ति को प्रदर्शित करते हुए यह संदेश दिया कि संगठित प्रयासों से व्यापार और उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। साथ ही एसोसिएशन ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और उद्योग जगत को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया।

फेमिनिज्म के नाम पर अश्लीलता? Nora Fatehi के गाने पर उठे सवाल, समाज में बढ़ती फूहड़ता पर बहस

 
‘सरके चुनर’ गाने पर विवाद, वायरल वीडियो में अमित कुमार किलहोर ने जताई नाराजगी
एंटरटेनमेंट डेस्क। फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों मनोरंजन के नाम पर जिस तरह का कंटेंट परोसा जा रहा है, उसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में अभिनेत्री और डांसर Nora Fatehi और अभिनेता Sanjay Dutt के गाने “Sarke Chunar Teri Sarke” को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। फिल्म KD – The Devil के इस गाने में इस्तेमाल किए गए बोल और डांस स्टेप्स को लेकर कई लोग इसे अश्लील और भद्दा बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि गाने में जिस तरह की भाषा और इशारों का इस्तेमाल किया गया है, वह मनोरंजन से ज्यादा फूहड़ता को बढ़ावा देता दिखाई देता है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या फेमिनिज्म या आधुनिकता के नाम पर इस तरह का कंटेंट सही ठहराया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि आजकल कुछ कलाकार और कंटेंट क्रिएटर लोकप्रियता और व्यूज़ पाने के लिए सीमाएं लांघते नजर आते हैं। केवल फिल्मों तक ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे वीडियो और रील्स देखने को मिलते हैं जिनमें अश्लीलता और गैर-जिम्मेदाराना कंटेंट खुले तौर पर फैलाया जा रहा है। इससे समाज, खासकर युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

वीडियो: वायरल वीडियो में अमित कुमार किलहोर की बड़ी प्रतिक्रिया

कई लोगों का मानना है कि मनोरंजन के नाम पर समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि कलाकारों और निर्माताओं को यह समझना चाहिए कि उनका प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ता है, इसलिए उन्हें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से मांग की है कि इस तरह के कंटेंट पर सख्त नियम बनाए जाएं और अगर कहीं मर्यादा का उल्लंघन होता है तो उस पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो मनोरंजन की आड़ में समाज में फूहड़ता और अश्लीलता का चलन और तेजी से बढ़ सकता है।