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Kuno National Park में बढ़ा चीतों का कुनबा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 मादा चीतों को खुले जंगल में किया विमुक्त

Chief Minister Dr Mohan Yadav releasing cheetahs in Kuno National Park






 


  श्योपुर | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। मध्यप्रदेश ने चीतों को अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट (Cheetah Project) की शुरुआत की थी। आज देश में चीता पुनर्स्थापना (Cheetah Reintroduction) का यह प्रोजेक्ट सफलता के साथ नए आयामों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान (New Milestones) रच रहा है।

  यह बात उन्होंने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में 2 मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त करते हुए कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित चीता रिलीज साइट (Cheetah Release Site) पर सीसीवी-2 और सीसीवी-3 चीतों को खुले जंगल (Wild Habitat) में छोड़ा।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म,निवेश (Investment) एवं जैव विविधता (Biodiversity) के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही है। आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट (Cheetah State) के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) में हैं। यह वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन (Wildlife Conservation) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

  इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत,सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गुड्डी बाई आदिवासी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके साथ ही पीसीसीएफ श्रीमती समिता राजौरा, डीआईजी संजय कुमार जैन, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल, डीएफओ कूनो आर थिरूकुराल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस सफल रिलीज मिशन (Successful Release Mission) ने मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म (Eco-tourism) और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती दी है।

PM Modi News: प्रधानमंत्री मोदी ने दी देशभक्ति की नई परिभाषा, वैश्विक संकट के बीच देशवासियों से किए ये बड़े संकल्प

Narendra Modi speech on global supply chain crisis and Atmanirbhar Bharat.






 

 


  नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आ रही चुनौतियों के बीच देशवासियों से एकजुट होकर 'कर्तव्य पथ' पर चलने की पुरजोर अपील की है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि कोरोना महामारी और मौजूदा वैश्विक युद्ध के प्रभाव के कारण दुनिया भर में खाद (Fertilizer), ईंधन (Fuel) और खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका गंभीर असर भारत पर भी हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और आम नागरिकों को महंगाई से बचाने के लिए खाद और तेल की कीमतों का अतिरिक्त बोझ खुद उठा रही है, लेकिन इस लंबे संकट से निपटने के लिए अब जनता को भी अपनी नागरिक जिम्मेदारी निभानी होगी।

​    देशभक्ति का मतलब सिर्फ मरना नहीं, देश के लिए जीना भी है 

   सच्ची देशभक्ति की एक नई और व्यावहारिक परिभाषा देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केवल देश के लिए मरना ही देशभक्ति नहीं है, बल्कि संकट के समय में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश के लिए जीना भी सबसे बड़ी राष्ट्रसेवा है। उन्होंने नागरिकों से विशेष आग्रह किया कि इस कठिन समय में पेट्रोल और डीजल का संयम से इस्तेमाल करें। इसके समाधान के रूप में उन्होंने सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो का उपयोग करने, निजी वाहनों के लिए कार-पूलिंग अपनाने, माल ढुलाई के लिए इलेक्ट्रिक रेलवे को प्राथमिकता देने और ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का प्रयोग करने का सुझाव दिया।

​विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 'वोकल फॉर लोकल' पर जोर

  देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा (Foreign Reserve) बचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति के जज्बे को अपनाते हुए नागरिक कम से कम एक साल तक विदेशों में छुट्टियां मनाने या विदेशों में शादी करने (Destination Wedding Abroad) के कार्यक्रमों को टाल दें और इसके बजाय भारत के ही पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, ऊर्जा की बचत और ईंधन की खपत कम करने के लिए पीएम मोदी ने 'वर्क फ्रॉम होम' और 'वर्चुअल मीटिंग्स' जैसी आदतों को दोबारा दिनचर्या में शामिल करने की आवश्यकता जताई है, ताकि वैश्विक संकट के इस दौर में भारत आत्मनिर्भरता के साथ मजबूती से खड़ा रह सके।

राजगढ़ में गूंजी श्रीराम कथा: भगवान ने धनुष नहीं,बल्कि राजाओं के अहंकार को तोड़ा है - ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज

Jyotishacharya Purshottam Bhardwaj Shri Ram Katha Rajgarh Dhar Madhya Pradesh





 
 राजगढ़ (धार) : नगर के सोसाइटी ग्राउंड पर आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन रविवार को श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज के मुखारविंद से बह रही श्रीराम कथा की अमृत धारा में हर कोई सराबोर नजर आया। व्यासपीठ से कथा का वाचन करते हुए श्री भारद्वाज जी ने शिव धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद के प्रसंग को बड़ी ही गहनता और रोचकता के साथ समझाया।
  
  अहंकार और नम्रता का संदेश देते हुए कथावाचक ने कहा कि जनकपुरी की सभा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने केवल शिव धनुष को ही नहीं तोड़ा, बल्कि वहां उपस्थित अभिमानी राजाओं के अहंकार और घमंड को भी चकनाचूर किया। उन्होंने शेर और हाथी का प्रेरक उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार जंगल का राजा शेर अपने किसी अभिषेक या वोट से नहीं, बल्कि अपनी सामर्थ्य, साहस और व्यक्तिगत बल से राजा कहलाता है, उसी प्रकार ईश्वर भी समर्थ हैं। भगवान राम की महानता यह थी कि इतना बड़ा कार्य करने के बाद भी उनमें लेशमात्र भी घमंड नहीं था और वे माता सीता के समक्ष विनम्र भाव से मस्तक झुकाए खड़े रहे। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सामर्थ्य प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण और सेवा के लिए होती है।

   कथा के अगले चरण में परशुराम जी के आगमन और लक्ष्मण जी के साथ हुए उनके ओजस्वी संवाद का सजीव चित्रण किया गया। श्री भारद्वाज जी ने बताया कि जब परशुराम जी शिव धनुष टूटने पर क्रोधित हुए, तो लक्ष्मण जी ने अपनी तार्किक बातों से उन्हें प्रत्युत्तर दिया। लक्ष्मण जी ने स्पष्ट किया कि रघुकुल की यह परंपरा रही है कि ब्राह्मण, देवता, भगवान के भक्त और गौ माता पर कभी शस्त्र नहीं उठाया जाता। जहां लक्ष्मण जी का क्रोध अग्नि के समान प्रज्वलित था, वहीं भगवान राम की वाणी शीतल जल के समान थी, जिसने अंततः परशुराम जी के क्रोध को शांत किया। ज्योतिषाचार्य जी ने जोर देकर कहा कि जीवन में असंभव दिखने वाले कार्यों को भी विनम्रता और मधुर स्वभाव से सिद्ध किया जा सकता है।
   
  नगर में पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। आयोजन समिति ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पूरे कथा पंडाल को आधुनिक तकनीक से वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे श्रद्धालु भीषण ताप में भी सुकून और शांति के साथ बैठकर प्रभु भक्ति का आनंद ले रहे हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर शीतल पेयजल की सुचारू व्यवस्था की गई है। कथा के साथ-साथ परिसर में राम-नाम महायज्ञ भी अनवरत जारी है, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आहुतियां देकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
   
  कथा की पूर्णाहुति को लेकर लक्ष्मण डामेचा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस भव्य श्रीराम कथा का समापन 12 मई को होगा। इसके पश्चात, 13 मई को सोसाइटी ग्राउंड पर एक विशाल और ऐतिहासिक आयोजन होगा, जिसमें निःशुल्क सामूहिक विवाह संपन्न कराए जाएंगे। इस विशेष अवसर पर 'नगर चौरासी' के रूप में भव्य महाप्रसादी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पूरे क्षेत्र का जनमानस एक साथ भोजन ग्रहण करेगा। आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त नागरिकों से इस धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बनने की भावपूर्ण अपील की है।

मोबाइल की रील नहीं,राम नाम की रील घुमाइए,चकला-बेलन चलाते हुए भी पाएँ परमात्मा का सान्निध्य -






 


  आत्मा और मन के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय: ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज


    राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पांडाल में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के छठवें दिन ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान के मार्ग से परिचित कराया। कथा के प्रारंभ में यजमानों द्वारा मंच पूजन किया गया, जिसके बाद मधुर भजनों की प्रस्तुति पर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।

   व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य का स्वभाव उसकी संगत पर निर्भर करता है। उन्होंने संसार की तुलना एक गंदे नाले से और कथा की तुलना मां गंगा से करते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा का सान्निध्य पतित को भी पावन कर देता है, उसी प्रकार कथा और सत्संग हमारे दूषित विचारों को शुद्ध कर देते हैं। उन्होंने जीवन में 'प्रतिस्पर्धा' (कंपटीशन) के बढ़ते चलन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भौतिक वस्तुओं की होड़ हमें दुख देती है, जबकि भक्ति के मार्ग में की गई प्रतिस्पर्धा आनंद प्रदान करती है।

     ज्योतिषाचार्य जी ने परिवार और संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि बेटा अगर अहंकार का रूप है, तो बेटी प्रेम और दया का स्वरूप है। उन्होंने वर्तमान समय में मोबाइल के बढ़ते प्रभाव के बीच गृहणियों को एक अनोखा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि रसोई में भोजन बनाते समय चकला-बेलन चलाने के साथ-साथ भगवान का नाम लेना चाहिए। जिस प्रकार झूला आगे-पीछे होने पर आनंद आता है, उसी प्रकार बेलन की गति के साथ 'हरे राम-हरे कृष्ण' का जाप करने से भोजन भी प्रसाद बन जाता है।कथा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शरीर के रोगों के लिए अस्पताल जाना जरूरी है,लेकिन आत्मा, मन और बुद्धि के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय है। यहाँ मिलने वाली 'राम नाम' की टेबलेट मनुष्य के जीवन को तनावमुक्त और निर्मल बनाती है। कथा के अंत में भगवान की महाआरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
   
   स्थानीय सोसायटी ग्राउंड में भक्ति की बयार के बीच शनिवार से 'मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम नाम जप महायज्ञ' का भव्य शुभारंभ हुआ, जो 12 मई तक अनवरत चलेगा। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक राम नाम जप किया जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है।
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   आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने बताया कि 12 मई को कथा के समापन के पश्चात, 13 मई बुधवार को विशाल 'नगर चौरासी' और सर्व समाज के 'निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन' का ऐतिहासिक आयोजन होगा। इस सम्मेलन में 108 जोड़ों के विवाह का पावन लक्ष्य रखा गया है, जिसकी तैयारियाँ युद्ध स्तर पर जारी हैं। दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक चलने वाली इस कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु वातानुकूलित पांडाल में महाप्रसादी का लाभ ले रहे हैं।

मध्यप्रदेश बना गिद्ध संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र,हलाली डैम से उज्बेकिस्तान तक 3000 किलोमीटर से अधिक की भरी उड़ान




 

  
  Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश  (Madhya Pradesh) वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश एक अंतर्राष्ट्रीय हब के रूप में उभर रहा है। हाल ही में मध्यप्रदेश से जुड़े एक सिनेरियस गिद्ध की प्रेरणादायी यात्रा ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

  दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध का रेस्क्यू 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से किया गया था। घायल एवं कमजोर अवस्था में मिले इस गिद्ध का उपचार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल एवं बीएनएचएस के संयुक्त तत्वावधान में संचालित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर, केरवा में विशेषज्ञों द्वारा किया गया। स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे रायसेन जिले के हलाली डैम स्थित प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। मुक्त किए जाने के बाद यह गिद्ध लगभग एक माह तक हलाली डैम क्षेत्र में रहा और प्राकृतिक वातावरण में स्वयं को पुनः अनुकूलित करता रहा।

  WWF-India एवं BNHS के सहयोग से वन विहार द्वारा इसकी जीपीएस ट्रैकिंग प्रारंभ की गई। इससे गिद्ध की गतिविधियों एवं प्रवास की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है। ट्रैकिंग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस गिद्ध ने 10 अप्रैल 2026 को हलाली डैम से अपनी लंबी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रारंभ की। राजस्थान से होते हुए यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाएं पार कर 4 मई 2026 को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान इसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

  यह अद्भुत यात्रा गिद्धों की असाधारण नेविगेशन क्षमता, सहनशीलता एवं जीवटता का जीवंत उदाहरण है। साथ ही यह मध्यप्रदेश सरकार की वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे सतत प्रयासों, आधुनिक उपचार सुविधाओं, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से मध्यप्रदेश आज देश के साथ ही वैश्विक वन एवं वन्यजीव संरक्षण समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। प्रदेश गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।

विशेष लेख - मध्यप्रदेश में आम उत्पादन की बढ़ती संभावनाएँ और “मैंगो फेस्टिवल 2026 - अनिल वशिष्ठ







 

    भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान रखता है। फलों, फूलों और सब्जियों के उत्पादन के माध्यम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। विशेष रूप से फल उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। भारतवर्ष में कुल लगभग 1176 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन उत्पादन मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत, अनुकूल जलवायु और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रतिफल है।

   फल उत्पादन की दृष्टि से यदि किसी एक फल की लोकप्रियता और आर्थिक महत्व की चर्चा की जाए तो आम का नाम सबसे पहले आता है। आम को 'फलों का राजा' कहा जाता है, मध्यप्रदेश में इसका उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन करें तो प्रदेश में आम उत्पादन में लगभग 72 हजार मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों, विशेषकर आम उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

   मध्यप्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियाँ आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल सिद्ध हो रही हैं। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अलग-अलग किस्मों के आम का उत्पादन किसानों को बेहतर आय उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि राज्य सरकार द्वारा आम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।

   इसी दिशा में 13 जून 2026 को प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'मैंगो फेस्टिवल 2026' अर्थात 'आम महोत्सव' आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी या उत्सव नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के आम उत्पादक किसानों, उद्यानिकी विशेषज्ञों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच संवाद और विपणन का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। महोत्सव के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न किस्मों के आमों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

   इस वर्ष प्रदेश के प्रमुख जिलों — अलीराजपुर, रीवा, शहडोल, सीधी, सतना, नर्मदापुरम, अनूपपुर और नरसिंहपुर में लगभग 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में आम उत्पादन विस्तार की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह योजना किसानों को उद्यानिकी आधारित खेती की ओर प्रेरित करेगी और प्रदेश में आम उत्पादन का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।

   प्रदेश के लिए गौरव का विषय यह भी है कि सुंदरजा आम को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है। रीवा जिले के प्रसिद्ध सुंदरजा आम को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने से न केवल इसकी विशिष्टता को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि इससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। सुंदरजा आम अपनी मिठास, सुगंध और विशिष्ट स्वाद के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय हो रहा है।

   भारत सरकार की प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर नकदी फसलों, फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन की ओर प्रोत्साहित करना है। उद्यानिकी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि इनकी बाजार में मांग निरंतर बनी रहती है और उत्पादन से अपेक्षाकृत अधिक लाभ प्राप्त होता है। आम जैसी फसलें किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकती हैं।

   राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय भी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम है। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे, तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधाएँ और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों का विश्वास और उत्साह बढ़ा है।

   आज आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आम उत्पादन को और अधिक बढ़ावा दिया जाए। यदि किसानों को प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यात सुविधाओं और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आम उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

   'मैंगो फेस्टिवल' 2026” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। यह आयोजन न केवल प्रदेश की उद्यानिकी क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी मील का पत्थर साबित होगा। मध्यप्रदेश में आम उत्पादन के प्रति बढ़ता रुझान यह दर्शाता है कि आने वाले समय में प्रदेश उद्यानिकी क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा और 'फलों के राजा' आम के माध्यम से किसानों की समृद्धि का नया अध्याय लिखा जाएगा।


   (लेखक जनसंपर्क विभाग में सहायक जनसंपर्क अधिकारी है।)

बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन: शुभेंदु अधिकारी ने संभाली राज्य की कमान,ब्रिगेड मैदान में उमड़ा जनसैलाब








 



 

  कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में आज एक नए सूर्य का उदय हुआ है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य और विशाल समारोह में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मंच पर मौजूद रहे। यह समारोह न केवल एक शपथ ग्रहण था, बल्कि बंगाल में 15 साल के टीएमसी शासन के अंत और भाजपा की पहली सरकार के आगमन का महापर्व बन गया।

भवानीपुर के विजेता बने बंगाल के नए सारथी

शुभेंदु अधिकारी की यह जीत ऐतिहासिक रही है। उन्होंने भवानीपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर अपनी राजनीतिक शक्ति का परिचय दिया था। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। 8 मई को गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु ने राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया जनता का अभिवादन

  जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिगेड मैदान के विशाल मंच पर पहुंचे, वहां मौजूद लाखों लोगों ने नारों के साथ उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर और अत्यंत विनम्रता के साथ जनता के इस अपार प्रेम और उत्साह का अभिवादन स्वीकार किया। हालांकि प्रधानमंत्री ने इस औपचारिक कार्यक्रम में कोई भाषण नहीं दिया, लेकिन उनकी मौजूदगी ने राज्य में 'डबल इंजन' सरकार के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत कर दिया।

अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा

  इस समारोह ने देश के राजनीतिक मानचित्र की एकजुटता को भी प्रदर्शित किया। मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ देश के अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय गौरव का स्वरूप दे दिया। इसके अलावा, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथी का विशेष सम्मान

  कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत गरिमामयी और भावुक क्षण तब दिखा जब 97 वर्षीय माखनलाल सरकार को मंच पर विशेष स्थान दिया गया। माखनलाल जी जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस ऐतिहासिक कश्मीर दौरे के साथी रहे थे। प्रधानमंत्री द्वारा उनका अभिनंदन किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत था कि नई सरकार अपनी विचारधारा की जड़ों और संघर्षों को सर्वोच्च सम्मान देती है।

नई कैबिनेट में दिखा विविधता का रंग

राज्यपाल आर.एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी के साथ-साथ दिलीप घोष,अग्निमित्रा पॉल,निसिथ प्रामाणिक और अशोक कीर्तनिया को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई। वहीं, खुदीराम टुडू ने अपनी पारंपरिक क्षेत्रीय भाषा में शपथ लेकर बंगाल की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।

लोक संस्कृति और उत्सव का माहौल

  चूँकि आज 25 वैशाख यानी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है, इसलिए पूरा आयोजन एक सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया। मैदान में रायबेशे नृत्य, छाऊ नाच और बाऊल संगीत की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम स्थल को बंगाल के प्रसिद्ध मदन मोहन मंदिर और ऐतिहासिक पलाशी गेट जैसी कलाकृतियों से सजाया गया था। उपस्थित लोगों के लिए पारंपरिक बंगाली मिठाइयों और झालमुड़ी के विशेष स्टॉल लगाए गए थे, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और आत्मीय बन गया।
  इस शपथ ग्रहण के साथ ही पश्चिम बंगाल में शांति,सुरक्षा और विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है।