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आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय संगम: राजगढ़ के श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर को मिली वैश्विक पहचान











 मुख्यमंत्री मोहन यादव का भँवर मृत्युंजय सिंह दत्तीगांव के नेतृत्व में भव्य स्वागत,राजगढ़ के शनि मंदिर को मिले वर्ल्ड रिकॉर्ड्स संस्थाओं के सम्मान पत्रों का किया विमोचन

 राजगढ़ (धार,मध्यप्रदेश)। धार जिले के राजगढ़ नगर स्थित अति प्राचीन श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर ने आस्था, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक विशाल वटवृक्ष (बरगद) के संरक्षण तथा धार्मिक एवं पर्यावरणीय चेतना के उत्कृष्ट प्रयासों को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित एवं मान्यता प्रदान की है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के भाबरा प्रवास के दौरान दत्तीगांव बंगले पर भँवर मृत्युंजयसिंह दत्तीगांव के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया।

 इस दौरान मुख्यमंत्री को श्री शनि शीतला माता मंदिर का चित्र भेंट किया गया। 51 किलो की पुष्पमाला द्वारा स्वागत किया गया। जान्हवीसिंह दत्तीगांव द्वारा गुलदस्ता भेंटकर अभिनंदन किया गया। अति प्राचीन श्री शनि मंदिर को सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय भंडारी के प्रयासों से विश्व की 11 संस्थाओं द्वारा वर्ड रिकॉर्ड्स प्रमाण पत्र का विमोचन मुख्यमंत्रीजी द्वारा किया गया। भँवर मृत्युंजयसिंह समिति सदस्य निलेश सोनी व अक्षय भंडारी द्वारा मुख्यमंत्री को मंदिर की प्राचीनता व विशेषताओं से अवगत करवाया गया।

लगभग तीन माह तक चले मूल्यांकन, दस्तावेजी अध्ययन एवं परीक्षण के उपरांत मंदिर को देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित रिकॉर्ड एवं सम्मान प्रदान करने वाली संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल राजगढ़ नगर, बल्कि पूरे धार जिले एवं मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

श्री शनि-शीतला माता मंदिर समिति के सदस्य श्री निलेश सोनी ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन विशाल वटवृक्ष और स्वयंभू शनिदेव महाराज की प्रतिमा सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है। अब इस धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर मिली पहचान हम सभी के लिए अत्यंत गौरव एवं प्रसन्नता का विषय है।

उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित अक्षय भंडारी के सतत प्रयासों, दस्तावेजीकरण एवं समन्वय के परिणामस्वरूप मंदिर की इस विशिष्ट पहचान को विश्व स्तर तक पहुँचाने में सफलता मिली।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ

- प्राकृतिक चमत्कार:
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ विराजमान शनिदेव की प्रतिमा मानव-निर्मित नहीं है। यह एक जीवित एवं प्राचीन बरगद वृक्ष की जड़ों के भीतर स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुई मानी जाती है। आस्था और प्रकृति का यह अद्भुत संगम इसे विश्व के विशिष्ट धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाता है।

- दुर्लभ सिंदूरी स्वरूप:
विश्व के अधिकांश शनिदेव मंदिरों में प्रतिमाएँ काले पत्थर की होती हैं, जबकि राजगढ़ स्थित इस मंदिर में शनिदेव का स्वरूप सिंदूरी रंग में पूजित है। यह विशेषता इसे अत्यंत दुर्लभ एवं विशिष्ट बनाती है।

- शनि–सूर्य का अद्वितीय संयोग:
मंदिर में विराजमान स्वयंभू प्रतिमा पूर्व दिशा अर्थात सूर्योदय की ओर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं एवं ज्योतिषीय दृष्टि से यह शनि और सूर्य के अद्वितीय संयोग का प्रतीक माना जाता है, जो इस मंदिर की विशिष्ट पहचान है।

- प्रकृति-सम्मिलित वास्तुकला:
मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि प्राचीन बरगद वृक्ष को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँची। संपूर्ण मंदिर वृक्ष के संरक्षण को केंद्र में रखकर विकसित किया गया है। यह भारतीय संस्कृति के "प्रकृति देवो भवः" के सनातन संदेश का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

मंदिर को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, अमेजिंग वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, आईईए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, एशिया कालिंग एक्सीलेंस बुक ऑफ रिकार्ड्स, लिंकन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, कर्नाटक अचीवर्स बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, आंध्र बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा भारत टैलेंट्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सहित अनेक प्रतिष्ठित रिकॉर्ड संस्थाओं द्वारा सम्मान एवं मान्यता प्रदान की गई है।

इसके अतिरिक्त मंदिर की यह उपलब्धि केवल रिकॉर्ड संस्थाओं तक सीमित नहीं है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्था एप्लाइड एनवायरनमेंटल रिसर्च फाउंडेशन (AERF) ने श्री शनि-शीतला माता मंदिर समिति को मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक विशाल बरगद (महावृक्ष) के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपने "सेव गायंट ट्रीज़" कार्यक्रम के अंतर्गत "सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर" प्रदान कर सम्मानित किया है।

एप्लाइड एनवायरनमेंटल रिसर्च फाउंडेशन (AERF) की स्थापना वर्ष 1995 में पुणे (महाराष्ट्र) में हुई थी। यह संस्था भारत में विशाल एवं ऐतिहासिक वृक्षों तथा निजी वनों के संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। अब तक संस्था 1,200 से अधिक विशाल वृक्षों को संरक्षण समझौतों के अंतर्गत शामिल कर चुकी है तथा 15,000 एकड़ से अधिक निजी वन क्षेत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे चुकी है।

AERF का कार्य राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जाता है। संस्था Conservation International (Japan) तथा IUCN (International Union for Conservation of Nature) जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संस्थाओं के साथ समन्वय एवं सहयोग के माध्यम से जैव विविधता, प्राकृतिक धरोहरों और विशाल वृक्षों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर को मिला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का समन्वय न केवल स्थानीय समाज, बल्कि वैश्विक संरक्षण संस्थाओं द्वारा भी सराहा जा रहा है। मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक बरगद का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।

मंदिर द्वारा "एक मंदिर – एक संदेश" की अवधारणा को अपनाते हुए धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश समाज तक पहुँचाया जा रहा है। यह पहल यह सिद्ध करती है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

इस अवसर पर अक्षय भंडारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वटवृक्ष जीवन, आस्था और पर्यावरण का प्रतीक है। यदि समाज अपनी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प ले, तो स्थानीय विरासत भी वैश्विक पहचान प्राप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल मंदिर समिति का नहीं, बल्कि पूरे राजगढ़ नगर, धार जिले एवं मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का सम्मान है।

आज श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के अद्वितीय समन्वय का प्रेरणास्रोत बन चुका है। यह स्थल भविष्य में आध्यात्मिक पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा सांस्कृतिक धरोहर के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।


मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राजगढ़ में चाय पिलाकर बढ़ाया कार्यकर्ताओं का उत्साह,कई मांगों के पत्र सौंपे







 




  राजगढ़ (मप्र)। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के राजगढ़ प्रवास के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। पूर्व मंडल अध्यक्ष मुकेश कावड़िया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को चाय पीने का आग्रह किया, जिस पर सीएम ने खुद वाहन से उतरकर चारभुजा होटल पर चाय बनाई और सभी को वितरित की।

  इस दौरान मुकेश कावड़िया ने सीएम को जिला कार्यसमिति सदस्य के तौर पर एक ज्ञापन सौंपा,जिसमें राजेंद्र कोठारी को मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक सहायता देने और राजेंद्र सूरी शासकीय महाविद्यालय में एम.कॉम विषय शुरू करने की मांग की गई।

  इस अवसर पर भाजपा नेता गोपाल सोनी,महेश शर्मा, मुन्ना कुमावत,आबुली बोहरा,सुनील गामड़,मोतीसिंह ठाकुर,डॉ. तरुण जोशी,धार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजगढ़ में गच्छाधिपति आचार्य श्री हितेशचंद सुरिश्वरजी का भव्य मंगल प्रवेश,कल मोहनखेड़ा तीर्थ में चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश






 



   राजगढ़। आज राजगढ़ नगर में गच्छाधिपति आचार्य श्री हितेशचंद सुरिश्वरजी महाराज साहब सहित मुनि मंडल एवं साध्वी मंडल का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्म यात्रा लाल दरवाजा से प्रारंभ होकर जैन चौक, चबूतरा चौक, मेन चौपाटी एवं शांतिनाथ जी मंदिर होती हुई राजेंद्र भवन पहुंची, जहां स्वागत गीत व उद्बोधन के बाद प्रवचन आयोजित किए गए।

  इस अवसर पर आचार्य श्री के साथ वरिष्ठ मुनिराज श्री पीयूषचंद्र विजयजी, मुनिराज श्री दिव्यचंद्र विजयजी, मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी, मुनिराज श्री पुष्पेंद्र विजयजी, मुनिराज श्री वैराग्ययश विजयजी, मुनिराज श्री रूपेंद्र विजयजी एवं साध्वी मंडल उपस्थित रहे। सकल जैन श्री संघ राजगढ़ की ओर से सभी गुरुभक्तों के लिए नवकारसी की व्यवस्था भी की गई।

कल मोहनखेड़ा तीर्थ में चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश

  गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को गच्छाधिपति एवं समस्त मुनि-साध्वी मंडल का चातुर्मास हेतु मोहनखेड़ा तीर्थ में भव्य मंगल प्रवेश होगा। ट्रस्ट मंडल ने सभी गुरुभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में पधारने का सादर निवेदन किया है।

Nikita Rawal ने Shilpa Shetty के साथ 'Maa Hai Na' में बिखेरा अपना जलवा


मुंबई: अभिनेत्री Nikita Rawal इन दिनों अपने खास टेलीविजन अपीयरेंस को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने ZEE5 के फैमिली एंटरटेनमेंट शो 'Maa Hai Na' में बॉलीवुड अभिनेत्री Shilpa Shetty के साथ अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराई। शो में उनकी ग्रेस, आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का खूब ध्यान आकर्षित किया।

Nikita Rawal का यह विशेष एपिसोड सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। शो से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो क्लिप्स तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें Nikita और Shilpa Shetty की शानदार केमिस्ट्री देखने को मिल रही है।

शो में Nikita Rawal ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,

"Maa Hai Na का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खूबसूरत अनुभव रहा। यह शो परिवार, प्यार और रिश्तों की खूबसूरती को बहुत ही सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत करता है। Shilpa Shetty के साथ स्क्रीन शेयर करना मेरे लिए सम्मान की बात रही। उनकी सादगी और सकारात्मक ऊर्जा ने पूरे शूट को यादगार बना दिया।"

अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और सहज व्यक्तित्व के लिए पहचानी जाने वाली Nikita Rawal ने एक बार फिर साबित किया कि वह सिर्फ फिल्मों या म्यूजिक वीडियोज़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर मंच पर दर्शकों से जुड़ने की क्षमता रखती हैं।


Maa Hai Na अपने पारिवारिक कंटेंट और सेलिब्रिटी गेस्ट्स की वजह से दर्शकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। ऐसे में Nikita Rawal की उपस्थिति ने शो को और भी खास बना दिया। दर्शकों ने सोशल मीडिया पर उनकी सादगी, स्टाइल और आत्मविश्वास की जमकर सराहना की।

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मनोरंजन जगत के जानकारों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की मौजूदगी कलाकारों को अपने दर्शकों के और करीब लाने का बेहतरीन माध्यम बन चुकी है। Nikita Rawal ने भी इस मंच का भरपूर लाभ उठाते हुए अपनी एक अलग और प्रभावशाली पहचान दर्शकों के सामने पेश की।

गौरतलब है कि Nikita Rawal लगातार फिल्मों, म्यूजिक वीडियोज़, लाइव इवेंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर वह मनोरंजन जगत में लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

Shilpa Shetty के साथ Maa Hai Na में उनकी यह खास मौजूदगी निश्चित रूप से उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। आने वाले समय में दर्शकों को Nikita Rawal के कई नए और दिलचस्प प्रोजेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं।

राजगढ़ में धर्मध्वजा के साथ हुआ साध्वी-संघ का भव्य चातुर्मास प्रवेश,नगर में रोज बहेगी प्रवचन-गंगा






 



  राजगढ़ (धार) | पूज्य दादा गुरुदेव श्री की जन्म द्वि-शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर राजगढ़ नगर में साध्वी-संघ के चातुर्मास प्रवेश का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरा नगर आस्था में डूबा नजर आया।

  पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सुरिश्वरजी महाराज साहब के पटधर, पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरिश्वरजी महाराज साहब एवं आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्न सुरिश्वरजी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती परम पूज्य गुरुणी साध्वी श्री शशिकलाश्रीजी महाराज साहब की सुशिष्या, सरल स्वभावी साध्वीजी श्री अनंतदृष्टाश्रीजी महाराज साहब एवं प्रवचन प्रभावी साध्वीजी श्री मयूरकलाश्रीजी महाराज साहब सहित 23 श्रमणी भगवंतों ने राजगढ़ नगर में चातुर्मास हेतु प्रवेश किया।

  प्रवेश शोभायात्रा से पूर्व सकल श्री संघ की नवकारसी का आयोजन किया गया, जिसका लाभ जीवन लाल जी रतन लाल जी मुठरिया परिवार (राजगढ़) ने लिया। इसके पश्चात मुठरिया परिवार के निवास से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। जुलूस के आगे-आगे धर्म ध्वजा और बैंड वाले चल रहे थे।

 शोभायात्रा में विभिन्न पुण्यार्थी परिवारों द्वारा आध्यात्मिक लाभ लिया गया। मंगल कलश का लाभ श्री कांतिलाल जी कनकमल जी जैन परिवार ने, प्रथम गहुली का लाभ श्री सौभागमल जी हीराचंद जी भंडारी परिवार ने लिया। वहीं, बग्गी (रथ) में श्री महावीर स्वामी भगवान का फोटो स्थापित करने का लाभ श्री केसरचंद जी वर्दीचंद जी तातेंड परिवार ने तथा दादा गुरुदेव एवं पुण्य सम्राट का फोटो लेकर बग्गी में बैठने का पुण्य श्री अमृतलाल जी प्यारचंद जी मोदी परिवार (राजगढ़) ने प्राप्त किया।

  यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई राजेंद्र भवन पहुंची,जहाँ मंगलाचरण के पश्चात स्वागत गीत प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में भंवर जी कोठारी, बाबू भाई भगत एवं  नवीन भाई बल्लू के साथ ही सभी लाभार्थी परिवारों का बहुमान किया गया। तत्पश्चात पूज्य साध्वी जी भगवंतों को कामली ओढ़ाई गई।

  इस अवसर पर साध्वी जी भगवंतों के प्रेरक प्रवचन हुए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रवचन के पश्चात श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा सभी साध्वी जी भगवंतों के माता-पिता का भी सम्मान किया गया।

  कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन मध्य प्रदेश त्रिस्तुतिक श्री संघ के अध्यक्ष सुरेश तातेंड ने दिया। इस भव्य आयोजन में अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़, तरुण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदित्य धोका, परिषद के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रमेश धाड़ीवाल एवं प्रदेश अध्यक्ष मोहित तातेंड विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 कार्यक्रम का संचालन कीर्ति भंडारी एवं हर्ष बाफना द्वारा किया गया, जबकि चातुर्मास समिति अध्यक्ष कांतिलाल जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ राजगढ़, गुरु राजेंद्र द्वि-शताब्दी वर्षावास समिति,अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद, महिला परिषद,तरुण परिषद एवं बहू परिषद का विशेष सहयोग रहा। सभी ने मिलकर सुव्यवस्थित प्रबंध किए।

 धर्मसभा के पश्चात श्री त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ राजगढ़ एवं बाहर से पधारे अतिथियों का स्वामी वात्सल्य ओसवाल धर्मशाला में आतिथ्य रखा गया, जिसका पुण्यलाभ श्रीमती शांताबाई केसरचंद  तातेंड परिवार ने लिया।

 गौरतलब है कि चातुर्मास काल के दौरान राजगढ़ नगर में रोजाना प्रवचनों की गंगा बहेगी। इस चार माह की अवधि में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए समिति द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

 यह जानकारी चातुर्मास समिति के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र भंडारी ने दी।

चातुर्मास 29 जुलाई से,संयम और संस्कारों से जुड़ेगा समाज,चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर जनजागरण करेंगे जैन साधु-साध्वी






 




 धर्म । जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधना काल चातुर्मास इस वर्ष 29 जुलाई से प्रारंभ होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों में जैन साधु-साध्वियाँ एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना, स्वाध्याय, प्रवचन, तप, त्याग एवं धर्मप्रभावना के माध्यम से समाज को संयम, सदाचार और नैतिक जीवन का संदेश देंगे। इस अवधि में जैन मंदिरों, स्थानकों एवं उपाश्रयों में धार्मिक आराधनाओं, संस्कारमय कार्यक्रमों तथा आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष वातावरण रहेगा।

  श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि जैन आगमों में चातुर्मास का विशेष महत्व बताया गया है। वर्षा ऋतु में असंख्य सूक्ष्म जीव-जंतुओं की उत्पत्ति होती है, इसलिए अहिंसा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए जैन साधु-साध्वियाँ इस काल में निरंतर विहार नहीं करते, बल्कि एक ही स्थान पर निवास करते हैं। आगमिक परंपरा के अनुसार वे चातुर्मास के दौरान शहर सीमा से चार कोस (लगभग 10 किलोमीटर) की निर्धारित सीमा से बाहर नहीं जाते। इस वर्ष पक्खी पर्व होने के कारण चातुर्मास का शुभारंभ 29 जुलाई से होगा।

  उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल संतों का स्थिर निवास नहीं, बल्कि समाज के आध्यात्मिक जागरण का चार माह का विशेष अभियान है। इस दौरान प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, जप, तप, ध्यान, आयंबिल, उपवास, एकासन, पौषध, नवकारसी, भक्ति एवं विभिन्न आराधनाएँ कराई जाती हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्याग, व्रत एवं आत्मसंयम का संकल्प लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं।

वर्तमान समय में चातुर्मास का महत्व

  श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने बताया कि आज का समाज भौतिक सुख-सुविधाओं, तनाव, प्रतिस्पर्धा, उपभोक्तावाद और मानसिक अशांति से जूझ रहा है। ऐसे समय में चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित और मूल्यनिष्ठ बनाने का अवसर प्रदान करता है।

  उन्होंने कहा कि चातुर्मास व्यक्ति को संयम, आत्मनिरीक्षण, अनुशासन, सादगी, पर्यावरण संरक्षण, जीवदया, नैतिकता और पारिवारिक संस्कारों से जोड़ता है। यह पर्व लोगों को अपनी दिनचर्या सुधारने, क्रोध, लोभ, अहंकार और आसक्ति पर नियंत्रण रखने तथा आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वर्तमान समय में जब मानसिक तनाव और सामाजिक विघटन बढ़ रहा है, तब चातुर्मास का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और आवश्यक बन गया है।

सात्विक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा

  चातुर्मास के दौरान सात्विक एवं संतुलित भोजन पर विशेष बल दिया जाता है। गरिष्ठ भोजन का त्याग किया जाता है तथा जमीकंद (आलू, प्याज, लहसुन, अदरक आदि) का उपयोग नहीं किया जाता। अनेक श्रद्धालु बीज, पंचमी, अष्टमी, एकादशी तथा चतुर्दशी जैसे विशेष दिनों में हरी सब्जियों एवं फलों का भी त्याग करते हैं। बाजार में बने खाद्य पदार्थों से भी यथासंभव परहेज किया जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु एकासन, उपवास, आयंबिल, पौषध, सामायिक और प्रतिक्रमण जैसी आराधनाएँ करते हैं। आयंबिल में नमक, घी, तेल, मिर्च, मसाले एवं स्वादवर्धक पदार्थों का त्याग कर अत्यंत सादा भोजन ग्रहण किया जाता है, जबकि उपवास के दौरान केवल उबला हुआ जल सूर्य अस्त से पहले ग्रहण किया जाता है।

चातुर्मास के प्रमुख पर्व

 चातुर्मास के चार माह धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान प्रमुख पर्व इस प्रकार हैं—

* 29 जुलाई – चातुर्मास प्रारंभ
* 8 सितंबर – पर्यूषण महापर्व प्रारंभ (श्वेतांबर)
* 15 सितंबर – संवत्सरी महापर्व एवं दशलक्षण पर्व प्रारंभ (दिगंबर)
* 25 सितंबर – अनंत चतुर्दशी
* ⁠18 अक्टूबर – नवपद आयंबिल ओली प्रारंभ
* 9 नवंबर – भगवान महावीर का 2553वाँ निर्वाण कल्याणक
* 10 नवंबर – गौतम प्रतिपदा एवं वीर निर्वाण संवत् 2553 का शुभारंभ
* 14 नवंबर – ज्ञान पंचमी
* 24 नवंबर – चातुर्मास पूर्णाहुति

 इन पर्वों के अतिरिक्त चार माह के दौरान संतों की जन्म जयंती, पुण्यतिथि, धार्मिक संगोष्ठियाँ, संस्कार शिविर, युवा एवं महिला सम्मेलन, सामूहिक आराधनाएँ तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

देशभर में 19 हजार से अधिक साधु-साध्वियाँ

  श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ द्वारा वर्ष 2026 में जारी सूची के अनुसार इस वर्ष श्रमण संघ के आचार्य डॉ शिवमुनि की आज्ञा में 78 साधु चातुर्मास तथा 284 साध्वी चातुर्मास, कुल 362 चातुर्मास निर्धारित हैं। श्रमण संघ में वर्तमान में 214 साधु एवं 961 साध्वियाँ धर्मप्रभावना में सक्रिय हैं।

  देश की चारों प्रमुख जैन परंपराओं—स्थानकवासी, मूर्तिपूजक (मंदिरमार्गी), तेरापंथ एवं दिगंबर—को मिलाकर वर्तमान में लगभग 19 हजार से अधिक साधु-साध्वियाँ देशभर में धर्म, शिक्षा, संस्कार, नैतिकता, अहिंसा एवं सामाजिक जागरण का कार्य कर रहे हैं।


थाना राजगढ़ में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन







 




 राजगढ़ (धार)। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार प्रदेशभर में संचालित "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान के अंतर्गत आज थाना राजगढ़ क्षेत्र के मेला मैदान एवं बस स्टैंड राजगढ़ में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को नशा मुक्ति का संदेश दिया गया।

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नशा मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान के तहत मध्यप्रदेश में 15 जुलाई से "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान संचालित किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन में प्रदेशभर में विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

  इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक धार सचिन शर्मा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारुल बेलापुरकर के मार्गदर्शन में, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सरदारपुर विश्वदीप सिंह परिहार तथा थाना प्रभारी राजगढ़ समीर पाटीदार की उपस्थिति में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने नशे के दुष्परिणामों का प्रभावी मंचन करते हुए आमजन को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवन अपनाने तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने भी नशे के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान में सहयोग देने का संकल्प लिया।

 राजगढ़ पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशा मुक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाएं।