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अष्टमी पर लिए जाएंगे वर्षीतप के संकल्प,इस वर्ष 14 महीने से अधिक चलेगी तप साधना,अगले वर्ष अक्षय तृतीया तक रहेगा उपवास-आहार का कठोर क्रम

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  धर्म।  जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (बुधवार, 11 मार्च 2026) को लिए जाएंगे। यह पावन दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
   इस अवसर पर जैन समाज के साधु-साध्वियाँ तथा श्रावक-श्राविकाएँ वर्षीतप का संकल्प लेकर कठिन तप साधना का आरंभ करेंगे। संकल्प लेने के बाद साधक अगले वर्ष अक्षय तृतीया तक उपवास और संयम का कठोर नियम निभाते हैं।
जैन समाज में वर्षीतप को सबसे कठिन और पुण्यदायी तपों में गिना जाता है। श्रद्धालु इसे केवल उपवास नहीं, बल्कि म आत्मसंयम, त्याग और आत्मशुद्धि की महान साधना मानते हैं। इस दौरान साधक संयमित जीवन, ध्यान, स्वाध्याय और धार्मिक साधना में समय व्यतीत करते हैं।

दो वर्षों तक चलता है तप का कठिन क्रम -

इस तप का नियम अत्यंत कठोर होता है। इसमें साधक पूरे तेरह महीने एक विशेष क्रम का पालन करते हैं—एक दिन पूर्ण उपवास,दूसरे दिन आहार। यह क्रम लगातार लंबे समय तक चलता रहता है। उपवास और आहार का यह क्रम लगभग एक वर्ष से अधिक अवधि तक चलता है, जिसके कारण इसे अत्यंत कठिन तप साधना माना जाता है।
  साधक इस दौरान अपने दैनिक जीवन को पूरी तरह अनुशासन में ढाल लेते हैं। भोजन, व्यवहार, वाणी, विचार और आचरण—सभी में संयम का पालन किया जाता है। तप का उद्देश्य केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, मन की स्थिरता और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।

23 प्रकार के आहारों का त्याग करेंगे साधक -

  वर्षीतप का संकल्प लेने वाले साधक कई प्रकार के आहारों का त्याग करते हैं। जैन धर्म की परंपरा के अनुसार इस तप में लगभग 23 प्रकार के खाद्य पदार्थों का त्याग किया जाता है।
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
  बासी भोजन,जमीकंद, बहुबीज वाले पदार्थ, अधिक मसालेदार भोजन, तामसिक आहार। इसके साथ ही साधक अनेक अन्य धार्मिक नियमों का भी पालन करते हैं—रात्रि में जल ग्रहण नहीं करना, प्रतिदिन सुबह और शाम प्रतिक्रमण करना, दोनों समय गुरुवंदन करना,स्वाध्याय और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन।

ध्यान और आत्मचिंतन
   इस प्रकार वर्षीतप केवल उपवास की साधना नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संयम और आध्यात्मिक अनुशासन का अभ्यास है।

दीर्घकालीन तप के प्रेरणास्रोत -

   जैन समाज में कई संत और साधक वर्षीतप जैसी कठिन साधनाओं के माध्यम से समाज को प्रेरणा देते रहे हैं।
स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के चतुर्थ आचार्य डॉ. शिव मुनि इस वर्ष 20 अप्रैल को अपना 41वाँ वर्षीतप पूर्ण कर 42वें वर्षीतप में प्रवेश करेंगे।
  इतने लंबे समय तक निरंतर तप साधना करने वाले आचार्य शिव मुनि जैन समाज के एकमात्र आचार्य हैं जो यह तपस्या कर रहे हैं, इसके अलावा हज़ारों की संख्या में साधु - साध्वी, श्रावक- श्राविकाएं यह तप साधना कर रहे है।
   उनकी तपस्या, त्याग और अनुशासन जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और अनेक श्रद्धालु उनसे प्रेरित होकर तप और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।

तेरह महीने तक नहीं मिला पारणा-

   जैन परंपरा के अनुसार जब भगवान आदिनाथ ने दीक्षा ग्रहण की, तब उन्होंने संकल्प लिया कि वे गन्ने के रस से ही अपना पारणा करेंगे।
   उस समय किसी को इस विधि की जानकारी नहीं थी, इसलिए कोई भी उन्हें गन्ने का रस अर्पित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप उन्हें लगभग तेरह महीने तक पारणा नहीं मिला और वे निरंतर तपस्या करते रहे।
   अंततः उनका पहला पारणा हस्तिनापुर में हुआ। जैन परंपरा के अनुसार राजा श्रेयांस कुमार ने उन्हें गन्ने का रस अर्पित कर उनका पारणा कराया।
   इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आज भी जैन समाज अक्षय तृतीया के दिन वर्षीतप का पारणा “इक्षुरस” से अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ करते है।


अधिकमास के कारण इस वर्ष बढ़ेगी तप की अवधि-

  धार्मिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अधिकमास पड़ने के कारण इस बार वर्षीतप की अवधि सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रहेगी।

इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा-

  एक सामान्य ज्येष्ठ और एक अधिक ज्येष्ठ। अधिकमास 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इसके कारण वर्षीतप साधकों को लगभग 14 महीनों से अधिक समय तक तप साधना करनी होगी।

आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व -
      
     श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने बताया कि वर्षीतप जैन धर्म में केवल तपस्या नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व माना जाता है। यह तप मनुष्य को त्याग, धैर्य, अनुशासन और आत्मसंयम का पाठ पढ़ाता है।
आज के भौतिकवादी और भागदौड़ भरे जीवन में भी अनेक श्रद्धालु इस कठिन तप साधना को अपनाकर यह संदेश देते हैं कि आध्यात्मिक शक्ति, आत्मसंयम और आस्था के बल पर मनुष्य किसी भी कठिन साधना को पूर्ण कर सकता है।

महेश कुमार वर्मा को प्रदेश समन्वयक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा






 





  राजगढ़/धार।भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इंदौर संभाग अध्यक्ष महेश कुमार वर्मा को प्रदेश समन्वयक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। यह निर्णय संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की हालिया बैठक में लिया गया, जिसमें श्री वर्मा के नेतृत्व गुणों, समन्वय कौशल और संगठन के प्रति समर्पण को सराहा गया।
 महेश कुमार वर्मा लंबे समय से इंदौर संभाग में मानव अधिकारों, सामाजिक न्याय और सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। प्रदेश समन्वयक के रूप में वे अब पूरे मध्य प्रदेश स्तर पर शासन-प्रशासन से समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे। ट्रस्ट की गतिविधियों का समन्वय करेंगे, जिसमें जिला एवं संभाग स्तरीय समितियों का संचालन, जन-जागरूकता अभियान, कार्यक्रम आयोजन और नीतिगत निर्णय शामिल हैं।
    ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने इस नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "वर्मा का अनुभव और प्रतिबद्धता प्रदेश स्तर पर ट्रस्ट की गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। राष्ट्रीय संयोजक प्रेम कुमार वैद्य ने कहा कि महेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की समितियां एकजुट होकर मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करेंगे। 
    राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष संतोष सिंह पंवार, डॉ  बलबहादुरसिंह राठौड़, बी जे उपाध्याय, डॉ श्री आशीष वैद्य, ऐश्वर्य शास्त्री, प्रवीण कुमार शर्मा,योगेन्द्र तिवारी धार जिला अध्यक्ष,कैलाश चंद्र बघेल एवं समस्त जिला एवं संभागीय कार्यकारिणी द्वारा श्री वर्मा के नेतृत्व कौशल की सराहना करते हुए बधाईयां प्रेषित की गई।

वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई अपना दल (एस) की संगठन समीक्षा बैठक, मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार पर जोर






 



  भोपाल : होली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए अपना दल (एस) की नियमित संगठन समीक्षा बैठक इस बार वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व, वर्तमान एवं निवर्तमान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल भी जुड़े। इसके अतिरिक्त पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी श्री आर. बी. सिंह पटेल की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। वहीं मध्य प्रदेश से पार्टी के कुछ पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रदेश में संगठन की स्थिति और संभावनाओं को रेखांकित किया।

  बैठक के दौरान संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने और बूथ स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पार्टी की ताकत उसके कार्यकर्ताओं में है और यदि बूथ स्तर तक संगठन मजबूत होगा तो पार्टी का विस्तार और प्रभाव स्वतः बढ़ेगा। उन्होंने प्रदेशों के पदाधिकारियों से समन्वय बनाकर संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने का आह्वान किया।

 बैठक में उपस्थित प्रदेश पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों की जानकारी साझा की। साथ ही आगामी समय में सदस्यता अभियान को और तेज करने तथा समाज के सभी वर्गों तक पार्टी की नीतियों और विचारों को पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा की गई। विशेष रूप से मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार और मजबूत राजनीतिक छवि बनाने को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए।

जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव





 


 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के संबंध में दिए निर्देश

 नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से किया जाए विकसित

 सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्व हो

  भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण नहीं, विकास का आधार भी है। यह भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का भी एक प्रयास है। अभियान अंतर्गत संचालित हर गतिविधि में राज्य से ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। भू-जल स्त्रोतों के दोहन से गिरते भू-जल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए भी सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। प्रदेश में पिछले जल गंगा संवर्धन अभियान के सुखद परिणाम प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2026 के अभियान में भी हमें जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को प्रभावी और परिणामूलक बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में गुरूवार को आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में वर्ष 2025 के जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष-2026 की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर सतत् रूप से निगरानी रखने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा और उनके आस-पास सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यक्तिगत पहल तथा सामुदायिक सहभागिता से प्याऊ लगाने की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्लास्टिक की बोतल के उपयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ शीतल पेयजल उपलब्ध कराने को सामाजिक दायित्व के रूप में समाज में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिन जिलों में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने यह प्रयास अन्य जिलों से साझा करें तथा जिले परस्पर इस तरह के नवाचारों का आदान-प्रदान करें।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को नेतृत्व प्रदान करें। सांसद, विधायक, पंचायत, नगरीय‍निकाय के सभी प्रतिनिधि सक्रियता से अभियान में सहभागिता करें। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी जनसहभागिता संबंधी गतिविधियों में जोड़ा जाए। जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्यों के क्रियान्वयन की प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नोडल और नगरीय प्रशासन एवं विकास सह नोडल विभाग होगा। राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नर्मदा घाटी विकास, वन, जन अभियान परिषद, उद्योग एवं एमएसएमई, पर्यावरण, संस्कृत, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग सहभागिता करेंगे। बैठक में अभियान के अंतर्गत वर्ष-2025 की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।

19 मार्च से प्रारंभ होगा राज्य स्तरीय अभियान

  बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से एक साथ आरंभ किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों में विक्रम संवत् और पर्यावरण, जलीय संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन पर गतिविधियां संचालित होंगी। अभियान के अंतर्गत 23 से 24 मई तक भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन होगा, 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा, 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर शिप्रा तट उज्जैन में महादेव नदी कथा, 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम होगा। इसमें प्रदेश की कृषि भूमि के सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत कार्य प्रस्तावित किये गये।

  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 170 करोड़ रूपए लागत के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। वर्ष 2025 में आरंभ 2500 करोड़ रूपए की लागत के 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। विभाग जल जीवन मिशन की सिंगल विलेज स्कीम के कार्य क्षेत्रों में भू-जल संवर्धन के कार्य और प्राचीन परम्परागत जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा।

  अभियान के अंतर्गत मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना तथा एक बगिया माँ के नाम परियोजना के अंतर्गत गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

  बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों की पुर्नउत्थान की योजना तैयार होगी।

  नगरीय विकास विभाग नगरीय‍निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। युवाओं की भागीदारी के लिए उन्हें अमृत मित्र बनाकर 'माय भारत पोर्टल' पर पंजीयन किया जाएगा। अभियान में 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। नदियों में मिलने वाले 20 नालों की शोधन प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया जाएगा।

    नगरीय‍निकायों द्वारा नदी, तालाब, बावड़ी का संवर्धन, नालों की सफाई, बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी किया जाएगा। वातावरण निर्माण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैली और शालाओं में आईईसी गतिविधियां संचालित होंगी।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के भूजल स्त्रोतों के रिचार्ज, पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और रख-रखाव के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

   वन विभाग द्वारा अविरल निर्मल नर्मदा अंतर्गत भूजल संवर्धन के कार्य तथा वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधों के रोपण की योजना है।

   वन्य जीवों को पानी की उपलब्धता के लिए 25 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा।

  महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केन्द्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्थापित करने, जल संरक्षण के ग्राम स्तर पर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने और आंगनवाड़ी केन्द्रों को जल एवं पोषण मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित कर समुदाय को प्रेरित करने जैसी गतिविधियां संचालित करेगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रूपए और पोषण वाटिका के लिए 10 हजार रूपए स्वीकृत हैं।

नशे और समय की बर्बादी से दूर रहकर तय करें जीवन की दिशा: एसडीओपी श्री परिहार,राजगढ़ में युवाओं ने मनाया होली मिलन,लक्ष्य और अनुशासन पर जोर






 




  राजगढ़ (धार)। धुलेंडी के अवसर पर श्री राजपूत युवा विकास मंच द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह उत्साह, अनुशासन और संगठन भावना के साथ संपन्न हुआ। राजेंद्र कॉलोनी स्थित उदय पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में समाज के युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
    मुख्य अतिथि एसडीओपी विश्वदीपसिंह परिहार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में स्पष्ट लक्ष्य तय करना ही सफलता का मूल मंत्र है। बिना लक्ष्य के किया गया परिश्रम अक्सर भटकाव की ओर ले जाता है। उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन अपने उद्देश्य तय कर उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया और नशे जैसी प्रवृत्तियों में उलझकर अपनी ऊर्जा और समय नष्ट कर रहा है। यदि वही ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाई जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों सशक्त बन सकते हैं।

कार्यकारिणी का हुआ गठन 

   कार्यक्रम के दौरान नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। सर्वसम्मति से विजेंद्र बारोड़ को अध्यक्ष चुना गया। उपाध्यक्ष पद पर जगदीश सिसोदिया, दारासिंह बारोड़ एवं राजेश बारोड़ को जिम्मेदारी दी गई। कोषाध्यक्ष प्रदीप पंवार व गोकुल पंवार, महासचिव पवन बारोड़, सह संगठन मंत्री चेतन चौहान, आयोजन प्रभारी लखन बारोड़, आयोजन मंत्री विशाल बारोड़ व लोकेंद्र पंवार, मीडिया प्रभारी हिम्मतसिंह बारोड़, सोशल मीडिया प्रभारी यशराज सिसोदिया, कार्यालय प्रभारी लोकेंद्रसिंह बारोड़ तथा सचिव अल्पेश बारोड़ मनोनीत किए गए।

  स्वागत भाषण में राधेश्याम बारोड़ ने संगठन द्वारा किए जा रहे सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानकर चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा की राह पर चलने का आह्वान किया। समारोह में युवाओं ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन प्रभुसिंह राजपूत ने किया तथा आभार मंच संयोजक विक्रम बारोड़ ने माना। आयोजन के माध्यम से युवाओं ने संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने का संकल्प लिया।

गौरव कुमार 'नाना सेठ' नियुक्त हुए चारथूई श्री संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष




 



 श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट पेढ़ी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय,समाजजनों ने जताई खुशी

  राजगढ़ (धार) | श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट पेढ़ी के तत्वावधान में बुधवार को एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक संपन्न हुई,जिसमें समाज की भावी गतिविधियों और नेतृत्व को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों और ट्रस्टियों की सर्वसम्मति से गौरव कुमार विमलचंद (नाना सेठ) को चारथूई श्री संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  उल्लेखनीय है कि बुधवार, 04 मार्च को आयोजित इस विशेष बैठक में श्री संघ की मजबूती और आगामी धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसी दौरान गौरव कुमार 'नाना सेठ' के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सदन ने हर्षध्वनि के साथ स्वीकार कर लिया। उनकी नियुक्ति को समाज के युवाओं और वरिष्ठों के बीच एक बेहतर समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।
   
   अपनी नियुक्ति के पश्चात नवनियुक्त कार्यवाहक अध्यक्ष गौरव कुमार ने कहा कि ट्रस्ट और श्री संघ ने उन पर जो विश्वास जताया है, वे उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि श्री संघ की गौरवशाली परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए समाज को एकजुट करना और सेवा कार्यों को गति देना उनकी प्राथमिकता रहेगी। इस घोषणा के बाद राजगढ़ सहित संपूर्ण चारथूई क्षेत्र के समाजजनों ने उन्हें बधाई देकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

श्री केसरियाजी पैदल यात्रा संघ की 29वीं भव्य पदयात्रा 11 मार्च को







 



   राजगढ़ (धार)। जैन मित्र मण्डल, राजगढ़ के तत्वावधान में इस वर्ष भी आराध्य देव भगवान श्री आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन प्रसंग पर श्री केसरियाजी (झकनावदा) पैदल यात्रा संघ की 29वीं भव्य पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर यह यात्रा आगामी 11 मार्च 2026, बुधवार को प्रातः 5:30 बजे स्थानीय हाथीवाला जैन मंदिर से जयकारों के साथ प्रस्थान करेगी।

  जैन मित्र मण्डल के अनुसार इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह है। मण्डल ने समाज के सभी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। पदयात्रियों के लिए वापसी हेतु वाहन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

  इस आयोजन की तैयारियों में सुनील चतर, पुखराज मेहता, प्रदीप मेहता, दिलीप मेहता, राकेश बाफना, राकेश मुणत, जितेन्द्र मुणत, कनक भण्डारी, सुनील लोढ़ा, रतन जैन, प्रमोदराज जैन ‘पप्पू’, त्रिलोक छाजेड़, अजीत मेहता एवं दीपक नखरा सहित जैन मित्र मण्डल परिवार के सभी सदस्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।