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Kuno National Park: 57 चीतों के साथ Project Cheetah की बड़ी सफलता,भारत बना ग्लोबल ब्रीडिंग हब

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 भोपाल: कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ चीतों का आश्रय स्थल नहीं,बल्कि दुनिया के उभरते Cheetah Breeding Center के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु में पूरी तरह ढल चुके हैं और लगातार नई पीढ़ी को जन्म दे रहे हैं।

57 चीतों के साथ नई ऊंचाई पर कूनो

  कूनो में चीतों की कुल संख्या अप्रैल 2026 तक बढ़कर 57 हो चुकी है। इनमें से 27 से ज्यादा शावक भारत में जन्मे हैं, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। हाल ही में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जबकि इससे पहले ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

चुनौती से सफलता तक का सफर

  शुरुआती दौर में इस परियोजना को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन कूनो का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त शिकार और विशेषज्ञों की निगरानी ने इन चुनौतियों को पार कर लिया। अब मादा चीतों का लगातार प्रजनन इस बात का संकेत है कि वे यहां सुरक्षित और सहज महसूस कर रही हैं।

 इस महत्वाकांक्षी योजना को नरेंद्र मोदी के विजन और मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया, जिससे वन्यजीव संरक्षण में एक नया इतिहास बन रहा है।

वाइल्डलाइफ टूरिज्म और रोजगार में बढ़ोतरी

 कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या का सीधा असर पर्यटन (Wildlife Tourism) पर पड़ा है। श्योपुर और आसपास के इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, जिससे:

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है

  • होटल, गाइड और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ग्रोथ हो रही है

  • क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है

प्रोजेक्ट चीता: अब तक की टाइमलाइन

2022: ऐतिहासिक शुरुआत

17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों को कूनो में छोड़ा गया। यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े शिकारी का ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट था।

2023: पहली बड़ी सफलता

दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।
मार्च 2023 में ज्वाला ने 70 साल बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।

2024: प्रजनन में तेजी

गामिनी ने 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया। चीतों को खुले जंगल में छोड़कर उनके प्राकृतिक व्यवहार को पुनर्स्थापित किया गया।

2025–26: विस्तार और नई पीढ़ी

  भारत में जन्मी मादा मुखी ने भी शावकों को जन्म दिया, जो जेनेटिक ब्रीडिंग की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नए चीते लाए गए।

वैज्ञानिक ट्रैकिंग और नई पहचान प्रणाली

 अब वन विभाग चीतों की पहचान नाम के बजाय कोड सिस्टम (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है। इससे उनकी वंशावली (Genetic Lineage) को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।

गांधी सागर बनेगा दूसरा घर

 कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे आवास के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे प्रोजेक्ट को और विस्तार मिलेगा और चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। 

 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रहा प्रजनन साफ दिखाता है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब जमीन पर सफल होता नजर आ रहा है। जिन चीतों को कभी भारत से पूरी तरह खत्म माना गया था, वही अब यहां नई पीढ़ी के साथ बसते दिखाई दे रहे हैं। अगर इसी तरह व्यवस्थाएं मजबूत रहीं, तो आने वाले समय में कूनो देश ही नहीं, दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

 

 


डॉ.प्रीति अदाणी का स्वाभिमान विज़न मध्य प्रदेश पहुंचा, 1,500 महिलाओं को मिलेगा सहयोग












  बदरवास, मध्य प्रदेश : बदरवास, मध्य प्रदेश (एमपी) में अब स्थायी आय की तलाश कर रही महिलाओं को कमाई और आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिलेगी। इसी दिशा में, अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और विकास इकाई, अदाणी फाउंडेशन ने शिवपुरी जिले के बदरवास में अदाणी विकास केंद्र शुरू किया है, जिससे महिलाओं के लिए घर के पास ही व्यवस्थित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

   अदाणी फाउंडेशन के स्वाभिमान कार्यक्रम का अखिल भारत में 10 लाख महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। इसका फोकस महिलाओं को असंगठित और अनियमित काम से निकालकर बाजार से जुड़े स्थायी आय के अवसरों तक पहुँचाने पर है।

   करीब 48,000 वर्ग फुट में फैला यह केंद्र अपनी पूरी क्षमता पर 600 आधुनिक सिलाई मशीनों के साथ काम करेगा और इसे ट्रेनिंग और प्रोडक्शन दोनों के लिए तैयार किया गया है। यहाँ महिलाओं को व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएँगे और नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। जैसे-जैसे यह केंद्र अपना विस्तार करेगा, लगभग 1,500 महिलाओं को स्थायी आय मिलने की उम्मीद है, जिससे वे अपने परिवारों को अधिक आत्मविश्वास के साथ सहयोग कर सकेंगी।

   इस केंद्र का उद्घाटन संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) के केंद्रीय मंत्री और गुना लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। इस कार्यक्रम में आसपास के गाँवों की 5,000 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया, जो स्थानीय भागीदारी और आजीविका के अवसरों की मजबूत माँग को दर्शाता है।
  
   इस मौके पर श्री सिंधिया ने कहा, “बदरवास में जो हम देख रहे हैं, वह सपनों को साकार होते देखने की ताकत है। मैं अदाणी ग्रुप के चेयरमैन श्री गौतम अदाणी और अदाणी फाउंडेशन को बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसा मंच बनाया है, जहाँ कौशल वैश्विक बाजारों तक पहुँच सकता है। मेरी प्यारी दीदियों की आखों में उनका संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी उम्मीदें और सपने अब सार्थक आजीविका के जरिए साकार हो रहे हैं। यह केंद्र सशक्तिकरण का एक सच्चा इंजन है और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले पाँच वर्षों में बदरवास के उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाएँगे।”

  अदाणी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अभिषेक लख्ताकिया ने कहा, “हमारी चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी के इस विश्वास से प्रेरित होकर कि महिलाओं का सशक्तिकरण सम्मानजनक आय से शुरू होता है, स्वाभिमान कार्यक्रम कौशल को स्थायी आय में बदलने पर काम करता है। महिलाओं को वास्तविक काम और बाजार से जोड़कर हम उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार व समाज में मजबूत भूमिका निभाने के लिए सक्षम बना रहे हैं।”

  बदरवास में इस पहल से परिवारों की आय बढ़ने, अनौपचारिक काम पर निर्भरता घटने और पलायन की जरूरत कम होने की उम्मीद है, साथ ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।
    इन्फ्रास्ट्रक्चर, कौशल और बाजार तक पहुँच में निवेश करके अदाणी फाउंडेशन यह सुनिश्चित कर रहा है कि महिलाएँ नियमित आय कमा सकें और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकें।

   अदाणी फाउंडेशन इस वर्ष 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा, जो भारत के कोने-कोने में समावेशी विकास के प्रति तीन दशकों की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अदाणी फाउंडेशन के बारे में जानकारी

   सन् 1996 से अदाणी फाउंडेशन, अदाणी ग्रुप की सामाजिक कल्याण और विकास इकाई के रूप में, अखिल भारत में स्थायी परिणामों के लिए रणनीतिक सामाजिक निवेश करता आ रहा है और लगातार सक्रिय व प्रतिबद्ध रहा है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, स्थायी आजीविका, जलवायु कार्रवाई और सामुदायिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों के जीवन को सशक्त और समृद्ध बना रहा है। फाउंडेशन की रणनीतियाँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,247 गाँवों और शहरी वार्ड्स में काम कर रहा है और 1.33 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
ज्यादा जानकारी के लॉगिन करें : www.adanifoundation.org
मीडिया संपर्क -roy.paul@adani.com

मन की बात 133वीं कड़ी (26 अप्रैल 2026) : Nuclear Energy,Wind Power,Digital India और बेटियों की सफलता पर PM मोदी का फोकस

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   नई दिल्ली/देशभर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए विज्ञान, ऊर्जा, पर्यावरण, युवा शक्ति और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। इस संबोधन में उन्होंने भारत की बड़ी उपलब्धियों को सरल भाषा में साझा किया और नागरिकों से विकास यात्रा में भागीदारी की अपील की।

Nuclear Energy में बड़ी उपलब्धि, Fast Breeder Reactor बना milestone


   प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के Civil Nuclear Programme से की। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम में Fast Breeder Reactor ने “criticality” हासिल कर ली है, जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रिएक्टर है, जो ऊर्जा उत्पादन के साथ भविष्य के लिए नया fuel भी तैयार करता है। इसे भारत की energy security के लिए अहम बताया गया।

Wind Energy Growth: भारत दुनिया में चौथे स्थान पर


  PM मोदी ने कहा कि भारत की wind energy capacity 56 gigawatt से ज्यादा हो चुकी है और देश अब दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़े renewable energy projects तेजी से विकसित हो रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर और skill development को भी बढ़ावा मिल रहा है।

Clean Energy और Environment Protection पर जोर


  प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे बिजली बचाएं और clean energy को अपनाएं। उन्होंने कहा कि solar और wind energy केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैं। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।

Buddha Purnima 2026: शांति और करुणा का संदेश


  मई में आने वाली बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक है। उन्होंने शांति, संतुलन और compassion को जीवन में अपनाने की बात कही और दुनिया में भारतीय संस्कृति के प्रभाव को रेखांकित किया।

Beating Retreat Ceremony अब Digital Platform पर


   प्रधानमंत्री ने बताया कि अब Beating Retreat Ceremony का संगीत WAVES OTT platform पर भी उपलब्ध है। इससे आम लोग भारतीय सशस्त्र बलों की परंपराओं और संगीत को करीब से अनुभव कर सकते हैं। यह digital initiative नई पीढ़ी को heritage से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

Wildlife Conservation: Flamingo से Blackbuck तक positive stories


  पर्यावरण संरक्षण के उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कच्छ में Flamingo birds, उत्तर प्रदेश में ‘गज मित्र’ पहल और छत्तीसगढ़ में Blackbuck की वापसी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब इंसान और प्रकृति साथ मिलकर चलते हैं, तो सकारात्मक बदलाव दिखता है।

North East Bamboo Industry बना Growth Engine


   PM मोदी ने North East में bamboo sector की सफलता की चर्चा करते हुए बताया कि 2017 के बाद कानून में बदलाव से इस क्षेत्र में तेजी आई है। आज bamboo products से रोजगार, innovation और women empowerment को बढ़ावा मिल रहा है।

Digital India: 20 करोड़ Documents Online, History अब आसान Access में


  National Archives of India द्वारा 20 करोड़ से ज्यादा ऐतिहासिक दस्तावेजों को digitize करने की पहल को प्रधानमंत्री ने बड़ी उपलब्धि बताया। इससे लोग अपने इतिहास और heritage को आसानी से online देख सकते हैं।

Indian Girls Shine in International Maths Olympiad
    

  प्रधानमंत्री ने European Girls Mathematical Olympiad में भारतीय बेटियों के शानदार प्रदर्शन पर गर्व जताया। भारत की टीम ने world ranking में छठा स्थान हासिल किया, जिसमें एक gold, एक silver और एक bronze medal शामिल रहा। उन्होंने इसे “नारी शक्ति” का शानदार उदाहरण बताया।

Census 2027 होगा पूरी तरह Digital, Self Enumeration की सुविधा
    

   प्रधानमंत्री ने बताया कि जनगणना 2027 को पूरी तरह digital बनाया जा रहा है। लोग खुद भी online अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। उन्होंने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।

Indian Cheese की Global पहचान, Local to Global की मिसाल
   

  अपने संबोधन में PM मोदी ने भारतीय cheese varieties की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि अब भारतीय dairy products global market में अपनी पहचान बना रहे हैं। यह “local to global” की दिशा में एक मजबूत कदम है।

Tagore Jayanti और 1857 के वीरों को नमन
  

  प्रधानमंत्री ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को याद करते हुए देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

देशवासियों से अपील: भागीदारी से ही बनेगा विकसित भारत
  

  अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने की अपील की। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

27 अप्रैल को पूरे भारत में मनाया जाएगा शासन स्थापना दिवस,नवरत्न परिवार ने राजगढ़ सहित कई क्षेत्रों में किया किट का वितरण








 



  राजगढ़/धार। पूरे भारत में आगामी 27 अप्रैल 2026, सोमवार को प्रातः सुबह की वेला में शासन स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सभी समाजजनों से अपने-अपने निकटतम मंदिर एवं उपाश्रय में जाकर अनिवार्य रूप से जिन शासन ध्वज लहराने की अपील की गई है। इस आयोजन की जानकारी देते हुए नवरत्न परिवार के प्रदेश संगठन मंत्री नितिन जैन चिंटू चौहान ने बताया कि इस दिन सभी को मिलकर शासन की शोभा बढ़ानी है।

    इसी उपलक्ष्य में नवरत्न परिवार द्वारा धार जिले के कालीदेवी, सरदारपुर, अमीझरा तीर्थ,भोपावर तीर्थ,श्री आदेश्वर जी मंदिर,हेमकमल शत्रुंजय धाम,सारंगी,राणापुर और अन्य निकटतम मंदिरों एवं उपाश्रयों में विशेष किट का वितरण किया गया। राजगढ़ के राजेंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में नवरत्न परिवार द्वारा किट भेंट की गई,जहाँ वीरेन्द्र जैन,अशोक भंडारी, संदीप खजांची,राकेश राजावत,अनिक सराफ,रोहन जैन सेंडी MR,सोनू भंडारी,गौरव नाना सेठ,अक्षय भंडारी,नितेश कांग्रेसा,कल्पेश जैन,हर्षित जैन,नितेश जैन फर्शी वाला और अभिषेक पारख उपस्थित थे। 

 नवरत्न परिवार ने सभी से निवेदन किया है कि 27 अप्रैल को शासन का ध्वज लहरा कर इस गौरवशाली दिवस को गरिमापूर्ण तरीके से मनाएं।

खुशखबरी: सरदारपुर की सूखी धरती पर कल-कल बही नर्मदा, कमल यादव बोले- लगभग 30 हजार हेक्टेयर में आएगी अब खुशहाली

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  धार जिले की सरदारपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मिंडा में आज खुशियों का नया सवेरा हुआ है। नर्मदा माही लिंक परियोजना का पावन जल माही नदी के उद्गम स्थल पर पहुँचने से पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिछले कई दशकों से इस ऐतिहासिक दिन की प्रतीक्षा कर रहे किसानों और ग्रामीणों के लिए यह पल एक बड़ी उपलब्धि की तरह है। जैसे ही मां नर्मदा की पावन जलधारा ने मिंडा की धरती को छुआ, पूरा क्षेत्र भक्ति के भाव में सराबोर हो गया। इस परियोजना के सफल होने से अब क्षेत्र के हज़ारों किसानों का वर्षों पुराना सपना धरातल पर साकार हो गया है।

  इस विशेष अवसर पर ग्राम मिंडा में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। परम पूज्य गुरुदेव सुभाष त्रिवेदी के सानिध्य में पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ मां नर्मदा का पूजन अर्चन संपन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने जल की आरती उतारी और पुष्प अर्पित कर इस सौगात के लिए कृतज्ञता प्रकट की। किसानों का मानना है कि इस जल के आगमन से अब उनके खेतों की प्यास बुझेगी और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

  कार्यक्रम के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य व भाजपा जिला महामंत्री कमल यादव ने इस सफलता को क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का नया अध्याय बताया। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि सरदारपुर विधानसभा के करीब 66 गाँवों की 25 से 30 हज़ार हेक्टेयर कृषि भूमि को इस परियोजना से सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध होगा। श्री यादव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2014 से लगातार प्रयास और मांग की जा रही थी, जिसे 2017 में सरकार द्वारा औपचारिक मंजूरी दी गई थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में यह बड़ा संकल्प सिद्ध हुआ है।

  पूर्व जिला पंचायत सदस्य व जिला महामंत्री कमल यादव ने परियोजना को सफल बनाने में जुटे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और पूरी तकनीकी टीम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाग के यशराज, चंद्रकांत और आनंद जैसे अधिकारियों की कार्यकुशलता का ही नतीजा है कि आज पानी सफलतापूर्वक यहाँ तक पहुँच सका है। नर्मदा जल के पहुँचने से अब सरदारपुर क्षेत्र के किसानों की फसलों को नई संजीवनी मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। क्षेत्र के लोगों ने इस ऐतिहासिक सौगात के लिए प्रदेश सरकार और प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

नए स्टार्टअप्स की डिजिटल पहचान मजबूत करने में जुटे युवा उद्यमी Pradum Shukla

भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा उद्यमी नए विचारों और नवाचारों के साथ सामने आ रहे हैं। लेकिन किसी भी नए स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल एक अच्छा आइडिया बनाना नहीं होती, बल्कि अपनी पहचान बनाना और लोगों तक पहुँचना भी होता है। शुरुआती दौर में कई स्टार्टअप्स को अपनी कंपनी के बारे में जानकारी फैलाने और सही दर्शकों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
Pradum Shukla Founder of Desh Crux


इसी चुनौती को समझते हुए युवा उद्यमी Pradum Shukla ने एक डिजिटल पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य नए स्टार्टअप्स और कंपनियों को ऑनलाइन दुनिया में बेहतर पहचान दिलाने में मदद करना है।

Desh Crux के पीछे की सोच

Pradum Shukla ने Desh Crux नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है, जो स्टार्टअप्स और कंपनियों को अपनी जानकारी साझा करने और डिजिटल पहचान बनाने का अवसर देता है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर कंपनियाँ अपनी प्रोफ़ाइल बनाकर अपने फाउंडर्स, सेवाओं, उद्देश्य और अपने काम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लोगों तक पहुँचा सकती हैं।

आज के समय में जब इंटरनेट किसी भी व्यवसाय की पहचान बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म स्टार्टअप्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। Desh Crux का उद्देश्य यही है कि नए और उभरते स्टार्टअप्स को एक ऐसा डिजिटल
मंच मिले जहाँ वे अपने विचार और काम को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

पढ़ाई के साथ उद्यमिता की यात्रा

Pradum Shukla का जन्म 24 जून 2006 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। कम उम्र में ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स और उद्यमिता से जुड़े विचारों पर काम करना शुरू कर दिया।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा Chandraprabha Public School से पूरी की और बाद में Divine Sainik School से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वे Greater Noida स्थित IIMT Group of Colleges में B.Tech की पढ़ाई कर रहे हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता पर काम करना आज कई युवाओं के बीच एक नई सोच बन चुकी है, और Pradum Shukla भी उन्हीं युवाओं में से एक हैं जो शिक्षा के साथ अपने विचारों को वास्तविक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

लेखन के माध्यम से प्रेरणा

उद्यमिता के अलावा Pradum Shukla ने लेखन के क्षेत्र में भी कदम रखा है। उन्होंने “The Power to Outgrow” नाम की एक मोटिवेशनल किताब लिखी है, जो व्यक्तिगत विकास, अनुशासन और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर आधारित है।

इस पुस्तक के माध्यम से वे लोगों को अपने जीवन में निरंतर सीखने, खुद को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

आगे की राह

भारत में स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही ऐसे प्लेटफ़ॉर्म्स की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है जो नए व्यवसायों को पहचान बनाने में मदद कर सकें।

Desh Crux जैसी पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। युवा उद्यमियों के ऐसे प्रयास यह दिखाते हैं कि नई पीढ़ी केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसर बनाने की कोशिश कर रही है।

डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा—समृद्ध किसान ही विकसित भारत की नींव, ‘किसान कल्याण वर्ष’ में अन्नदाताओं को बड़ी सौगातें

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  भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। राज्य सरकार ने इस वर्ष को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और किसानों के जीवन में खुशहाली लाना है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में "सच्चा वादा और पक्का काम" के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से किया हर वादा प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

गेहूं उपार्जन के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि और नई व्यवस्थाएं

  किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि प्रदेश में गेहूं उत्पादन के रिकॉर्ड को देखते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की बड़ी बढ़ोत्तरी किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए अब गेहूं की खरीदी सप्ताह में 6 दिन की जाएगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा। स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर अब 9 मई तक कर दिया गया है, जिससे अंतिम छोर का किसान भी अपनी फसल आसानी से बेच सके।

भू-अर्जन पर 4 गुना मुआवजा और फसलों पर विशेष बोनस

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक और ऐतिहासिक कदम की जानकारी दी। अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, जो उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा फैसला है। केवल इतना ही नहीं, सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीदी पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। सरसों के उत्पादन में भी भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन से किसानों को बाजार में एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं।

सिंचाई के लिए दिन में बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर

  प्रदेश के अन्नदाताओं को रात की परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार अब रात के बजाय दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिए जा रहे हैं। साथ ही, कृषक मित्र योजना के माध्यम से किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश का किसान बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और खेती की लागत में भी कमी आएगी।

मध्यप्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' बनाने का लक्ष्य

  खेती के साथ-साथ पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई 1752 दुग्ध समितियों के गठन के बाद प्रतिदिन का दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम के पार पहुंच गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अब प्रति किलो 8 से 10 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके फलस्वरूप अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह क्रांति न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और आधुनिक वितरण प्रणाली

  वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए खाद और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसानों को बिना लंबी कतारों में लगे, उनके मनचाहे स्थान से खाद मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनका परिवार है और वे हर परिस्थिति में आखिरी दम तक किसानों के साथ खड़े रहेंगे।