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नवगुंजरा’ का पहला पोस्टर जारी,मेकर्स ने दिखाई एक रहस्यमयी सिनेमाई दुनिया की झलक

Navgunjara movie first poster showing a mysterious PSYCON world theme with dark cinematic visuals and fantasy elements






 



   मनोरंजन । फिल्म नवगुंजरा के निर्माताओं ने इसका पहला आधिकारिक पोस्टर जारी कर दिया है, जिसने एक दिलचस्प और रहस्यमयी कहानी की ओर इशारा किया है। पोस्टर पर लिखी लाइन—“Welcome to the world of PSYCON… we live in a world shared with them”—एक अनदेखी दुनिया का संकेत देती है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता तुरंत बढ़ा दी है।

  फिल्म का निर्देशन और निर्माण अमित दीक्षित ने किया है, जबकि रोहित यादव ने कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स लिखे हैं। First Film Studios LLP के बैनर तले, Low Agers Production और Cine Arts के सहयोग से बन रही यह फिल्म भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य में एक अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। फिल्म के निर्माता अमित दीक्षित, अंकिता गोयल और आयुष जैन हैं, जबकि अजीत पडवलकर सह-निर्माता हैं।

   फिल्म में जितेंद्र बोहरा, तुषार कवाले, क्षितिज पवार, प्रतीक्षा सिंह, संध्या गेमावत, जेसिका यादव, कैलाश चौधरी और संदीप रावल जैसे कलाकार नजर आएंगे। खास बात यह है कि फिल्म को एक Shubhro B musical के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें संगीत कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। सिनेमैटोग्राफी जय नंदन ने संभाली है, वहीं अभिषेक दुबे एसोसिएट प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े हैं।

  हालांकि मेकर्स ने कहानी के अहम पहलुओं को अभी गुप्त रखा है, लेकिन पहला पोस्टर एक रहस्य और परतदार कहानी की झलक देता है, जो दर्शकों को एक नई दुनिया में ले जाने का वादा करता है।

  नवगुंजारा 15 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। पोस्टर के साथ बनी शुरुआती चर्चा के बाद अब दर्शकों को ट्रेलर का इंतजार है, जिससे फिल्म के विजन और स्केल की और स्पष्ट झलक मिल सकेगी।

कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा 'इंडियन पीकॉक'

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत

पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहर किया जा रहा था। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े या तो संग्रहालयों तक सीमित रह गए या उन पर केवल "एथनिक वियर" (ethnic wear) का ठप्पा लगा दिया गया। इस बीच उनकी आजीविका अनिश्चित होती गई और उनका ज्ञान धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया।

 ऐसा इसलिए नहीं है कि इस शिल्प (craft) का कोई मूल्य नहीं बचा, बल्कि इसलिए है क्योंकि करघे (loom) से लेकर रोज़मर्रा के जीवन तक के सफर में बहुत सी बाधाएं हैं।

 इंडियन पीकॉक' सीधी साझेदारी के माध्यम से इन दूरियों को मिटाने का प्रयास कर रहा है।

आर्किटेक्ट प्रीति पथिरेड्डी द्वारा स्थापित, 'द इंडियन पीकॉक' वह जगह है जहाँ वास्तुकला में उनका एक दशक लंबा सफर टेक्सचर, रूप और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके गहरे प्रेम से मिलता है। आइवी लीग (Ivy League) की पूर्व छात्रा रहीं प्रीति हमेशा से अपने डिजाइन दृष्टिकोण में सहज रही हैं, जो संरचना (structure) और कोमलता, शिल्प और उपयोगिता के बीच एक संबंध स्थापित करती हैं। भारत की कपड़ा विरासत की एक व्यक्तिगत खोज के रूप में जो शुरू हुआ था, वह जल्द ही 'स्लो फैशन' और 'कॉन्शियस लिविंग' (conscious living) के प्रति प्रतिबद्ध एक ब्रांड के रूप में विकसित हो गया।

 हम पूरे भारत में हैंडलूम कारीगरों के साथ मिलकर काम करते हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के जामदानी (Jamdani) बुनकर, तेलंगाना के इकत (Ikat) बुनकर, राजस्थान के हैंडब्लॉक प्रिंट (handblock print) कारीगर और आंध्र प्रदेश के मंगलगिरी (Mangalgiri) बुनकर शामिल हैं। वे हमारे लिए केवल वेंडर नहीं बल्कि भागीदार हैं। हम उनके शिल्प, उनकी प्रक्रियाओं और उनकी कहानियों को समझते हैं। हम उन्हें केवल मौसमी मांग नहीं बल्कि उचित पारिश्रमिक और निरंतर काम के साथ समर्थन देते हैं।

 यह पारंपरिक शिल्प के "आधुनिकीकरण" (modernizing) के बारे में नहीं है। हम कुछ बहुत ही सरल करते हैं: हम उनके काम को रोज़मर्रा के जीवन में पहनने योग्य (wearable) बनाते हैं।

 हम रोज़ पहनने के लिए स्ट्रक्चर्ड शर्ट, विभिन्न किस्म के कुर्ते और सोच-समझकर तैयार किए गए को-ऑर्ड सेट डिज़ाइन करते हैं। हम शिल्प को 'फ्यूज़न' या केवल 'अवसर विशेष' (occasionwear) के परिधान के रूप में नहीं देखते हैं। हमारा उद्देश्य हथकरघा वस्त्रों को जीवन की लय में लाना है, ताकि उन्हें बार-बार पहना जा सके, उन्हें जिया जा सके और उन पर भरोसा किया जा सके। क्योंकि कोई भी शिल्प केवल कभी-कभार की जाने वाली प्रशंसा से जीवित नहीं रहता बल्कि अपनी प्रासंगिकता और निरंतर उपयोग से जीवित रहता है।

एक हाथ से बुना हुआ परिधान ऐसा बन जाता है जिसे आप हफ्ते दर हफ्ते पहनना पसंद करते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादित विकल्पों (mass-produced alternatives) के बजाय, यह एक शांत निरंतरता पैदा करता है। यह करघों को सक्रिय रखता है, कौशल को प्रासंगिक बनाता है और आजीविका को स्थिर रखता है। हैंडलूम केवल प्रशंसा या कभी-कभार पहनने से जीवित नहीं रहता, बल्कि उन रोज़मर्रा के विकल्पों से जीवित रहता है जो इस शिल्प को प्रासंगिक और गतिमान बनाए रखते हैं।

इस तरह हम अपनी कहानी को वापस हासिल करते हैं: कारीगरों के शिल्प को वापस उसी जगह रखकर जहाँ का वह हमेशा से हकदार रहा है।

'इंडियन पीकॉक' कारीगरों को 'बचा' नहीं रहा है; उन्हें बाज़ार, सम्मान और उचित अनुदान की आवश्यकता है, और हम वही प्रदान कर रहे हैं। हम परंपरा को किसी संग्रहालय में सहेज कर नहीं रख रहे हैं, बल्कि हम यह साबित कर रहे हैं कि यह कला जीवित है और आवश्यक है।

 हर परिधान में उसे बनाने वाले की उपस्थिति झलकती है। हर कलेक्शन की शुरुआत कपड़े से होती है, न कि किसी ट्रेंड से। हमारा हर फैसला यह पूछता है: क्या यह शिल्प और शिल्पकार के हित में है? क्योंकि जब भारतीय परिधान विरासत वाले करघों से निकलकर आधुनिक सड़कों तक पहुंचते हैं, तो वे अपनी बुनाई के साथ कारीगर की गरिमा को भी पहनते हैं, और तब यह कहानी फिर से उनकी हो जाती है।

 यह काम करघे से कहीं आगे तक फैला हुआ है। हमारे हैदराबाद स्थित स्टूडियो में हर परिधान एक ऐसी टीम के हाथों से होकर गुजरता है जो कपड़े को उसी बारीकी से काटती, सिलती और फिनिश करती है, जिस बारीकी के साथ उसे बुना गया था। शिल्प कभी भी अलगाव में मौजूद नहीं होता और न ही हम। उचित पारिश्रमिक, निरंतर काम और एक सहायक वातावरण वे सिद्धांत हैं जिन्हें हम इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों पर लागू करते हैं। न केवल विचारों में, बल्कि व्यवहार में भी।

हम यहां सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि यह कहानी सोची-समझी रणनीति, निरंतरता और उस पर विश्वास करने वाली एक टीम के साथ दुनिया को बताई जाए।

गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग : सरदारपुर में उमड़ा गौ भक्तों का जनसैलाब

गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग : सरदारपुर में उमड़ा गौ भक्तों का जनसैलाब







   सरदारपुर (धार): आज देशभर के गौ भक्तों और सनातन धर्मावलंबियों ने एकजुट होकर एक स्वर में गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए हुंकार भरी। 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के तहत मध्यप्रदेश के सरदारपुर सहित देश की लगभग 5400 तहसीलों में एक साथ प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग की गई।

विशाल रैली और 'जय गौमाता' का उदघोष 

   सरदारपुर के खेर परिसर मैदान से प्रारंभ हुई यह विशाल रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची। रैली में हजारों की संख्या में गौ भक्त, साधु-संत, महिलाएं और युवा शामिल हुए। हाथों में भगवा ध्वज लिए भक्तों ने 'जय गौमाता, जय गोपाल' के नारों से पूरे आकाश को गुंजायमान कर दिया।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा 5 सूत्रीय ज्ञापन

    तहसील मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • संवैधानिक दर्जा: गौमाता को तत्काल 'राष्ट्रमाता' के रूप में संवैधानिक मान्यता दी जाए।

  • पृथक गौ मंत्रालय: केंद्र और राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र 'गौ मंत्रालय' बनाया जाए, जो केवल गौवंश की सेवा और विकास पर केंद्रित हो।

  • गौ-वध पर पूर्ण प्रतिबंध: देशभर में गौ-वध की घटनाओं को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

  • नंदी महाराज का संरक्षण: सड़कों पर बेसहारा घूम रहे नंदी और गौवंश के लिए सुरक्षित स्थान और चारे की व्यवस्था की जाए।

"आस्था का सैलाब,न कि राजनीतिक प्रदर्शन"

   मीडिया से चर्चा करते हुए गौ सेवकों ने कहा कि यह कोई राजनीतिक रैली नहीं बल्कि सनातन धर्म की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1967 से चली आ रही इस मांग को लेकर अब पूरा हिंदू समाज जागरूक हो चुका है। "गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का आधार हैं। जब तक उन्हें राष्ट्रमाता का सम्मान नहीं मिल जाता और गौ-हत्या पूरी तरह बंद नहीं होती, यह वैचारिक और सामाजिक संघर्ष जारी रहेगा।" — स्थानीय गौ सेवक 

मातृशक्ति और युवाओं का अभूतपूर्व समर्थन

   आंदोलन में महिलाओं (मातृशक्ति) ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ग्रामीण अंचलों से आए युवाओं ने भी गौ सेवा का संकल्प लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए इसे उचित माध्यम से शासन तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है।


Kuno National Park: 57 चीतों के साथ Project Cheetah की बड़ी सफलता,भारत बना ग्लोबल ब्रीडिंग हब

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 भोपाल: कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ चीतों का आश्रय स्थल नहीं,बल्कि दुनिया के उभरते Cheetah Breeding Center के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु में पूरी तरह ढल चुके हैं और लगातार नई पीढ़ी को जन्म दे रहे हैं।

57 चीतों के साथ नई ऊंचाई पर कूनो

  कूनो में चीतों की कुल संख्या अप्रैल 2026 तक बढ़कर 57 हो चुकी है। इनमें से 27 से ज्यादा शावक भारत में जन्मे हैं, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। हाल ही में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जबकि इससे पहले ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

चुनौती से सफलता तक का सफर

  शुरुआती दौर में इस परियोजना को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन कूनो का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त शिकार और विशेषज्ञों की निगरानी ने इन चुनौतियों को पार कर लिया। अब मादा चीतों का लगातार प्रजनन इस बात का संकेत है कि वे यहां सुरक्षित और सहज महसूस कर रही हैं।

 इस महत्वाकांक्षी योजना को नरेंद्र मोदी के विजन और मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया, जिससे वन्यजीव संरक्षण में एक नया इतिहास बन रहा है।

वाइल्डलाइफ टूरिज्म और रोजगार में बढ़ोतरी

 कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या का सीधा असर पर्यटन (Wildlife Tourism) पर पड़ा है। श्योपुर और आसपास के इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, जिससे:

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है

  • होटल, गाइड और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ग्रोथ हो रही है

  • क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है

प्रोजेक्ट चीता: अब तक की टाइमलाइन

2022: ऐतिहासिक शुरुआत

17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों को कूनो में छोड़ा गया। यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े शिकारी का ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट था।

2023: पहली बड़ी सफलता

दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।
मार्च 2023 में ज्वाला ने 70 साल बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।

2024: प्रजनन में तेजी

गामिनी ने 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया। चीतों को खुले जंगल में छोड़कर उनके प्राकृतिक व्यवहार को पुनर्स्थापित किया गया।

2025–26: विस्तार और नई पीढ़ी

  भारत में जन्मी मादा मुखी ने भी शावकों को जन्म दिया, जो जेनेटिक ब्रीडिंग की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नए चीते लाए गए।

वैज्ञानिक ट्रैकिंग और नई पहचान प्रणाली

 अब वन विभाग चीतों की पहचान नाम के बजाय कोड सिस्टम (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है। इससे उनकी वंशावली (Genetic Lineage) को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।

गांधी सागर बनेगा दूसरा घर

 कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे आवास के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे प्रोजेक्ट को और विस्तार मिलेगा और चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। 

 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रहा प्रजनन साफ दिखाता है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब जमीन पर सफल होता नजर आ रहा है। जिन चीतों को कभी भारत से पूरी तरह खत्म माना गया था, वही अब यहां नई पीढ़ी के साथ बसते दिखाई दे रहे हैं। अगर इसी तरह व्यवस्थाएं मजबूत रहीं, तो आने वाले समय में कूनो देश ही नहीं, दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

 

 


डॉ.प्रीति अदाणी का स्वाभिमान विज़न मध्य प्रदेश पहुंचा, 1,500 महिलाओं को मिलेगा सहयोग












  बदरवास, मध्य प्रदेश : बदरवास, मध्य प्रदेश (एमपी) में अब स्थायी आय की तलाश कर रही महिलाओं को कमाई और आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिलेगी। इसी दिशा में, अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और विकास इकाई, अदाणी फाउंडेशन ने शिवपुरी जिले के बदरवास में अदाणी विकास केंद्र शुरू किया है, जिससे महिलाओं के लिए घर के पास ही व्यवस्थित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

   अदाणी फाउंडेशन के स्वाभिमान कार्यक्रम का अखिल भारत में 10 लाख महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। इसका फोकस महिलाओं को असंगठित और अनियमित काम से निकालकर बाजार से जुड़े स्थायी आय के अवसरों तक पहुँचाने पर है।

   करीब 48,000 वर्ग फुट में फैला यह केंद्र अपनी पूरी क्षमता पर 600 आधुनिक सिलाई मशीनों के साथ काम करेगा और इसे ट्रेनिंग और प्रोडक्शन दोनों के लिए तैयार किया गया है। यहाँ महिलाओं को व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएँगे और नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। जैसे-जैसे यह केंद्र अपना विस्तार करेगा, लगभग 1,500 महिलाओं को स्थायी आय मिलने की उम्मीद है, जिससे वे अपने परिवारों को अधिक आत्मविश्वास के साथ सहयोग कर सकेंगी।

   इस केंद्र का उद्घाटन संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) के केंद्रीय मंत्री और गुना लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। इस कार्यक्रम में आसपास के गाँवों की 5,000 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया, जो स्थानीय भागीदारी और आजीविका के अवसरों की मजबूत माँग को दर्शाता है।
  
   इस मौके पर श्री सिंधिया ने कहा, “बदरवास में जो हम देख रहे हैं, वह सपनों को साकार होते देखने की ताकत है। मैं अदाणी ग्रुप के चेयरमैन श्री गौतम अदाणी और अदाणी फाउंडेशन को बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसा मंच बनाया है, जहाँ कौशल वैश्विक बाजारों तक पहुँच सकता है। मेरी प्यारी दीदियों की आखों में उनका संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी उम्मीदें और सपने अब सार्थक आजीविका के जरिए साकार हो रहे हैं। यह केंद्र सशक्तिकरण का एक सच्चा इंजन है और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले पाँच वर्षों में बदरवास के उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाएँगे।”

  अदाणी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अभिषेक लख्ताकिया ने कहा, “हमारी चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी के इस विश्वास से प्रेरित होकर कि महिलाओं का सशक्तिकरण सम्मानजनक आय से शुरू होता है, स्वाभिमान कार्यक्रम कौशल को स्थायी आय में बदलने पर काम करता है। महिलाओं को वास्तविक काम और बाजार से जोड़कर हम उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार व समाज में मजबूत भूमिका निभाने के लिए सक्षम बना रहे हैं।”

  बदरवास में इस पहल से परिवारों की आय बढ़ने, अनौपचारिक काम पर निर्भरता घटने और पलायन की जरूरत कम होने की उम्मीद है, साथ ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।
    इन्फ्रास्ट्रक्चर, कौशल और बाजार तक पहुँच में निवेश करके अदाणी फाउंडेशन यह सुनिश्चित कर रहा है कि महिलाएँ नियमित आय कमा सकें और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकें।

   अदाणी फाउंडेशन इस वर्ष 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा, जो भारत के कोने-कोने में समावेशी विकास के प्रति तीन दशकों की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अदाणी फाउंडेशन के बारे में जानकारी

   सन् 1996 से अदाणी फाउंडेशन, अदाणी ग्रुप की सामाजिक कल्याण और विकास इकाई के रूप में, अखिल भारत में स्थायी परिणामों के लिए रणनीतिक सामाजिक निवेश करता आ रहा है और लगातार सक्रिय व प्रतिबद्ध रहा है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, स्थायी आजीविका, जलवायु कार्रवाई और सामुदायिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों के जीवन को सशक्त और समृद्ध बना रहा है। फाउंडेशन की रणनीतियाँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,247 गाँवों और शहरी वार्ड्स में काम कर रहा है और 1.33 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
ज्यादा जानकारी के लॉगिन करें : www.adanifoundation.org
मीडिया संपर्क -roy.paul@adani.com

मन की बात 133वीं कड़ी (26 अप्रैल 2026) : Nuclear Energy,Wind Power,Digital India और बेटियों की सफलता पर PM मोदी का फोकस

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   नई दिल्ली/देशभर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए विज्ञान, ऊर्जा, पर्यावरण, युवा शक्ति और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। इस संबोधन में उन्होंने भारत की बड़ी उपलब्धियों को सरल भाषा में साझा किया और नागरिकों से विकास यात्रा में भागीदारी की अपील की।

Nuclear Energy में बड़ी उपलब्धि, Fast Breeder Reactor बना milestone


   प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के Civil Nuclear Programme से की। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम में Fast Breeder Reactor ने “criticality” हासिल कर ली है, जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रिएक्टर है, जो ऊर्जा उत्पादन के साथ भविष्य के लिए नया fuel भी तैयार करता है। इसे भारत की energy security के लिए अहम बताया गया।

Wind Energy Growth: भारत दुनिया में चौथे स्थान पर


  PM मोदी ने कहा कि भारत की wind energy capacity 56 gigawatt से ज्यादा हो चुकी है और देश अब दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़े renewable energy projects तेजी से विकसित हो रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर और skill development को भी बढ़ावा मिल रहा है।

Clean Energy और Environment Protection पर जोर


  प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे बिजली बचाएं और clean energy को अपनाएं। उन्होंने कहा कि solar और wind energy केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैं। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।

Buddha Purnima 2026: शांति और करुणा का संदेश


  मई में आने वाली बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक है। उन्होंने शांति, संतुलन और compassion को जीवन में अपनाने की बात कही और दुनिया में भारतीय संस्कृति के प्रभाव को रेखांकित किया।

Beating Retreat Ceremony अब Digital Platform पर


   प्रधानमंत्री ने बताया कि अब Beating Retreat Ceremony का संगीत WAVES OTT platform पर भी उपलब्ध है। इससे आम लोग भारतीय सशस्त्र बलों की परंपराओं और संगीत को करीब से अनुभव कर सकते हैं। यह digital initiative नई पीढ़ी को heritage से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

Wildlife Conservation: Flamingo से Blackbuck तक positive stories


  पर्यावरण संरक्षण के उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कच्छ में Flamingo birds, उत्तर प्रदेश में ‘गज मित्र’ पहल और छत्तीसगढ़ में Blackbuck की वापसी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब इंसान और प्रकृति साथ मिलकर चलते हैं, तो सकारात्मक बदलाव दिखता है।

North East Bamboo Industry बना Growth Engine


   PM मोदी ने North East में bamboo sector की सफलता की चर्चा करते हुए बताया कि 2017 के बाद कानून में बदलाव से इस क्षेत्र में तेजी आई है। आज bamboo products से रोजगार, innovation और women empowerment को बढ़ावा मिल रहा है।

Digital India: 20 करोड़ Documents Online, History अब आसान Access में


  National Archives of India द्वारा 20 करोड़ से ज्यादा ऐतिहासिक दस्तावेजों को digitize करने की पहल को प्रधानमंत्री ने बड़ी उपलब्धि बताया। इससे लोग अपने इतिहास और heritage को आसानी से online देख सकते हैं।

Indian Girls Shine in International Maths Olympiad
    

  प्रधानमंत्री ने European Girls Mathematical Olympiad में भारतीय बेटियों के शानदार प्रदर्शन पर गर्व जताया। भारत की टीम ने world ranking में छठा स्थान हासिल किया, जिसमें एक gold, एक silver और एक bronze medal शामिल रहा। उन्होंने इसे “नारी शक्ति” का शानदार उदाहरण बताया।

Census 2027 होगा पूरी तरह Digital, Self Enumeration की सुविधा
    

   प्रधानमंत्री ने बताया कि जनगणना 2027 को पूरी तरह digital बनाया जा रहा है। लोग खुद भी online अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। उन्होंने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।

Indian Cheese की Global पहचान, Local to Global की मिसाल
   

  अपने संबोधन में PM मोदी ने भारतीय cheese varieties की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि अब भारतीय dairy products global market में अपनी पहचान बना रहे हैं। यह “local to global” की दिशा में एक मजबूत कदम है।

Tagore Jayanti और 1857 के वीरों को नमन
  

  प्रधानमंत्री ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को याद करते हुए देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

देशवासियों से अपील: भागीदारी से ही बनेगा विकसित भारत
  

  अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने की अपील की। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

27 अप्रैल को पूरे भारत में मनाया जाएगा शासन स्थापना दिवस,नवरत्न परिवार ने राजगढ़ सहित कई क्षेत्रों में किया किट का वितरण








 



  राजगढ़/धार। पूरे भारत में आगामी 27 अप्रैल 2026, सोमवार को प्रातः सुबह की वेला में शासन स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सभी समाजजनों से अपने-अपने निकटतम मंदिर एवं उपाश्रय में जाकर अनिवार्य रूप से जिन शासन ध्वज लहराने की अपील की गई है। इस आयोजन की जानकारी देते हुए नवरत्न परिवार के प्रदेश संगठन मंत्री नितिन जैन चिंटू चौहान ने बताया कि इस दिन सभी को मिलकर शासन की शोभा बढ़ानी है।

    इसी उपलक्ष्य में नवरत्न परिवार द्वारा धार जिले के कालीदेवी, सरदारपुर, अमीझरा तीर्थ,भोपावर तीर्थ,श्री आदेश्वर जी मंदिर,हेमकमल शत्रुंजय धाम,सारंगी,राणापुर और अन्य निकटतम मंदिरों एवं उपाश्रयों में विशेष किट का वितरण किया गया। राजगढ़ के राजेंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में नवरत्न परिवार द्वारा किट भेंट की गई,जहाँ वीरेन्द्र जैन,अशोक भंडारी, संदीप खजांची,राकेश राजावत,अनिक सराफ,रोहन जैन सेंडी MR,सोनू भंडारी,गौरव नाना सेठ,अक्षय भंडारी,नितेश कांग्रेसा,कल्पेश जैन,हर्षित जैन,नितेश जैन फर्शी वाला और अभिषेक पारख उपस्थित थे। 

 नवरत्न परिवार ने सभी से निवेदन किया है कि 27 अप्रैल को शासन का ध्वज लहरा कर इस गौरवशाली दिवस को गरिमापूर्ण तरीके से मनाएं।