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किसानों के हर खेत तक पहुंचेगा सिंचाई के लिये पानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव










 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शमशाबाद को दी 163 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
विदिशा जिले में प्रदेश की पहली जिला स्तरीय फिंगर प्रिंट लैब का हुआ शुभारंभ
प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम नव्या का विदिशा से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुआ शुभारंभ
राहवीर विदिशा नि:शुल्क ऐप विकसित करने वाले युवाओं को मिले प्रमाण-पत्र
विदिशा पुलिस को उत्कृष्ट कार्यों के लिये मिला आईएसओ सर्टिफिकेशन

   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। प्रत्येक खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। केन-बेतना नदी जोड़ो परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना सहित आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। गत 2 वर्ष में ही प्रदेश में सिंचाई का रकबा 10 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। अब प्रदेश की 55 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। हम अपनी नदियों से राजस्थान और उत्तरप्रदेश को भी पानी उपलब्ध कराते हैं। बिहार और गुजरात को भी पानी मिलता है। पूर्व सरकारों ने नदियों की जलराशि का उचित प्रबंधन करने पर कभी ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब हमारी सरकार के प्रयासों से विदिशा जिले को भी केन-बेतवा नदी परियोजना का पूरा लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश आज बिजली सरप्लस स्टेट है। अब किसानों को दिन में भी सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी। हमारे लिए खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों बराबर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाएं और अंदरूनी इलाके सुरक्षित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने विदिशा में प्रदेश की पहली जिला स्तरीय फिंगर प्रिंट लैब का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को शमशाबाद में कृषक हितग्राही सम्मेलन और विकास कार्यों के भूमि-पूजन एवं लोकर्पण कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों को हर साल 12 हजार रुपए किसान सम्मान निधि के रूप में दिए जा रहे हैं। विदिशा जिला कृषि उत्पादन के मामले में अग्रणी है। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना लागू कर सोयाबीन उत्पादक किसानों के खातों में लगभग 1500 करोड़ राशि अंतरित की है। अब सरसों की फसल भी भावांतर योजना के अंतर्गत खरीदी जाएगी। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। गेहूं खरीद के लिए पंजीयन कराने की तारीख भी बढ़ाई गई है। राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदेगी। इसमें 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि शामिल है। सरकार वर्ष 2028 तक किसानों को गेहूं की 2700 रुपए कीमत दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हितग्राहियों को किये गये हितलाभ वितरित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पारंपरिक साफा बांधकर एवं गजमाला से आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री नरवाई प्रबंधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन बीमा, मुद्रा योजना, कृषि यंत्र, पशुधन, खाद्य प्रसंस्करण योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए।

समग्र विकास के लिये किये भूमि-पूजन और लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विदिशा जिले के समग्र विकास के लिए 163 करोड़ रुपये की सौगात दी। उन्होंने लगभग 60 करोड़ लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण किए, जिसमें कुरवाई का सांदीपनि विद्यालय भी शामिल है। शनिवार 7 मार्च को 104.56 करोड़ की 56 नवीन विकास परियोजनाओं का भूमि-पूजन भी किया गया। इसमें 15 करोड़ रुपये लागत से विदिशा महाविद्यालय का उन्नयन कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बजट में विदिशा को 116 करोड़ की नई सड़कों की सौगात मिली है।

कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम "नव्या'' शुरू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में विदिशा से कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम 'नव्या' की शुरुआत की गई है। यह योजना देश के 9 राज्यों के 27 जिलों में लागू की गई है। विदिशा प्रदेश का इकलौता जिला है, जो योजना में शामिल है। इसके माध्यम से 10वीं पास बहनों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की सौगात दे रही है और यह राशि धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को सर्वगुण संपन्न बनाया जाएगा। शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को लैपटॉप, साइकिल, किताबें और ड्रेस उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गौमाता के संरक्षण और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ी गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। शमशाबाद में भी एक बड़ी आदर्श गौशाला बनाई जाएगी। राज्य सरकार ने शासकीय गौशालाओं के लिए प्रति गाय अनुदान राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दी है। राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है, इसके अंतर्गत 25 गाय पालने पर सरकार ने 10 लाख रुपए का अनुदान प्रदान करने का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शमशाबाद के लोगों के आत्मीय स्वागत से अभिभूत हूं। विदिशा जिला बुद्ध और बेतवा की धारा से समृद्ध है। यह नगरी भगवान सूर्य को समर्पित है। उज्जैन के समान ही विदिशा भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण घोषणाएं

  •  शमशाबाद नगर परिषद के विकास कार्यों के लिए 3 करोड़ राशि दी जाएगी।

  •  शमशाबाद में नवीन विद्युत सब स्टेशन बनाया जाएगा, जिससे कई गांवों को बिजली मिलेगी।

  •  संजय सागर और सगढ़ सिंचाई परियोजनाओं का परीक्षण कर विकास कार्य होंगे।

सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में विकास केवल योजनाओं की सूची नहीं है। यहां संवेदनशीलता शासन की पहचान बन चुकी है। प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के नए आयाम छू रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की राज्य के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें मध्यप्रदेश का असली जननायक बनाती है। सरकार गांव, गरीब और किसान के साथ खड़ी है। पशुपालन मंत्री एवं विदिशा जिले के प्रभारी श्री लखन पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हैक्टेयर से 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विधायक श्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के कल्याण के लिए वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा निरंतर बढ़ता जा रहा है। शमशाबाद क्षेत्र में संजय सागर बांध से 12 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। कार्यक्रम में विधायक श्री हरिसिंह रघुवंशी, विधायक श्री हरिसिंह सप्रे, विधायक श्री उमाकांत शर्मा, विधायक श्री मुकेश टंडन, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, जिलाध्यक्ष श्री महाराज सिंह दांगी, प्रदेश यादव महासभा के पदाधिकारी श्री जगदीश यादव, वरिष्ठ राजनेता डॉ. मेहताब सिंह, श्री कप्तान सिंह यादव, श्री भगवान सिंह धाकड़, श्री शैलेंद्र सिंह ठाकुर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

रोड-शो कर जनता का किया अभिवादन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम के पूर्व शमशाबाद में विभिन्न मार्गों पर नागरिकों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। रोड-शो में समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग मुख्यमंत्री डॉ यादव का आत्मीय स्वागत करने के लिए उत्साह के साथ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शमशाबाद में निवासियों का अभिवादन किया।

राजगढ़ में हाईटेक सुरक्षा का 'डिजिटल ताला': 42 एआई कैमरों से लैस हुआ शहर,एसपी मयंक अवस्थी ने किया शंखनाद






 



   राजगढ़ (धार) । नगर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने की दिशा में शनिवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। धार पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने राजगढ़ में जनसहयोग से स्थापित अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरा नेटवर्क का विधिवत शुभारंभ किया। एसपी ने पुलिस थाना राजगढ़ में नवनिर्मित कंट्रोल रूम का फीता काटकर उद्घाटन किया और नगर की डिजिटल निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया।





    लोकार्पण से पूर्व थाना प्रांगण में आयोजित सम्मान समारोह में मंचासीन अतिथि के रूप में एसपी मयंक अवस्थी, एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीओपी विश्वदीपसिंह परिहार और तहसीलदार मुकेश बामनिया उपस्थित रहे। इस दौरान प्रोजेक्ट के सूत्रधार अमर कमेड़िया ने पूरी कार्ययोजना का विवरण देते हुए तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की। इस अवसर पर सीसीटीवी प्रोजेक्ट में सहयोग करने वाले दानदाताओं, नागरिकों और संस्थाओं को पुलिस अधीक्षक द्वारा शील्ड व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। फिलहाल नगर के 13 प्रमुख स्थानों पर 42 कैमरे सक्रिय कर दिए गए हैं, जबकि तीन अन्य स्थानों पर कार्य प्रगति पर है।








   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाना पुलिस और जनता के आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि इन कैमरों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का समावेश किया गया है, जो संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने में पुलिस की 'खुफिया आई' का काम करेगी। उन्होंने समाज में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए युवाओं को इससे दूर रहने, महिला सुरक्षा के लिए 'अभिमन्यु अभियान' से जुड़ने और साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने की अपील की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारुल बेलापुरकर ने कहा कि वर्तमान समय में सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच हैं, जो अपराधों की जांच में सहायक सिद्ध होते हैं।

   कार्यक्रम के दौरान नगर की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने हेतु मोहनखेड़ा तीर्थ के श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे पेढ़ी ट्रस्ट मैनेजिंग ट्रस्टी सुजान मल सेठ, डॉ. एमएल जैन, ग्राम धुलेट के प्रमुख बाबूलाल चौधरी, भाजपा मंडल अध्यक्ष सोहन पटेल, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष आशीष जैन, सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष नीलेश सोनी, नया बस स्टैंड व्यापारी एसोसिएशन से मनोज माहेश्वरी, समाजसेविका सीमा जैन, मुस्लिम समुदाय से शौकत खान, भाजपा नेता नवीन बानिया और बोहरा समाज की ओर से हुसैन अली बोहरा ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। कार्यक्रम का कुशल संचालन नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल , पार्षदगण, जनप्रतिनिधि सहित नगर अनेक गणमान्य नागरिक पत्रकारण उपस्थित रहे । अंत में थाना प्रभारी समीर पाटीदार ने सभी अतिथियों और नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

  मीडिया से चर्चा करते हुए पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कहा कि—"अपराध नियंत्रण और शहर की बेहतर निगरानी के लिए तकनीक का होना अत्यंत आवश्यक है। जनसहयोग से लगे ये कैमरे पुलिस के लिए मददगार साबित होंगे और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने में सहायता करेंगे। मैं इस नेक कार्य में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और नागरिकों का आभार व्यक्त करता हूँ।"

 इस तकनीकी अपग्रेड को अंजाम देने वाले विशेषज्ञ अमर कमेड़िया और विनोद पाटीदार ने बताया कि ये कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हैं, जो इंसानों और जानवरों को अलग-अलग पहचानने के साथ ही वाहनों की नंबर प्लेट को ऑटो-फोकस कर नंबर स्कैन करने में सक्षम हैं। AI आधारित इन कैमरों के अलग-अलग एंगल्स और उन्नत फीचर्स से अब संदिग्ध गतिविधियों पर सटीक नजर रखी जा सकेगी।

GTDC की नई रिसर्च में AI, Cloud और Hyperscaler की बिक्री व अडॉप्शन पर डिस्ट्रीब्यूशन के प्रभाव का खुलासा

टाम्पा, फ्लोरिडा

IT डिस्ट्रीब्यूटर्स अब 'डिजिटल इकोसिस्टम ऑर्केस्ट्रेटर' बन गए हैं, जो क्लाउड, AI, हाइपरस्केलर और सब्सक्रिप्शन-आधारित बिजनेस मॉडल को एकीकृत करते हैं।

डिस्ट्रीब्यूशन जोखिम को कम करते हुए वेंडर की ग्रोथ को काफी तेज करता है, जिससे सप्लायर्स को कुशलता से स्केल करने, पार्टनर बेस का विस्तार करने, नए बाजारों में प्रवेश करने और वित्तीय व परिचालन देनदारियों (liabilities) को कम करने में मदद मिलती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म एक नया GTM (गो-टू-मार्केट) "ऑपरेटिंग सिस्टम" बना रहे हैं। ये सिस्टम प्रोक्योरमेंट, बिलिंग, लाइफसाइकिल और एनालिटिक्स को प्रबंधित करने के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल कॉमर्स और इंटेलिजेंस लेयर्स प्रदान करते हैं।
 

टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के दुनिया के सबसे बड़े कंसोर्टियम, ग्लोबल टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूशन काउंसिल (GTDC) ने एक नई रिसर्च रिपोर्ट, 'Distribution: The Digital Force Multiplier' जारी की है। CommCentric Solutions द्वारा विकसित यह अध्ययन इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे IT डिस्ट्रीब्यूशन बदल गया है और वैश्विक टेक्नोलॉजी चैनल में क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाइपरस्केलर और प्लेटफॉर्म-संचालित बिजनेस मॉडल के एक महत्वपूर्ण सूत्रधार (enabler) के रूप में लगातार विकसित हो रहा है।
 

इस नए डिजिटल क्षेत्र में सप्लायर्स और सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स को बढ़ती जटिलता, वित्तीय जोखिम और प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ता है। यह सर्वेक्षण और साक्षात्कार-आधारित रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स खंडित 'गो-टू-मार्केट' (go-to-market) गतिविधियों को एकीकृत करने, सब्सक्रिप्शन और खपत (consumption) मॉडल को सुव्यवस्थित करने, मल्टी-वेंडर समाधानों को एक साथ लाने और पार्टनर इनेबलमेंट, डिमांड जनरेशन और डेटा-संचालित निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम हैं। डिस्ट्रीब्यूशन और उद्योग के थॉट लीडर्स की विस्तृत जानकारी के साथ, इस रिपोर्ट में सप्लायर के अधिकारियों द्वारा इन लाभों को रैंक और विस्तार से बताया गया है।
 

GTDC के सीईओ, फ्रैंक विटाग्लियानो (Frank Vitagliano) ने कहा, "आज के डिस्ट्रीब्यूटर्स महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और क्रेडिट सेवाओं के अपने मिशन से कहीं आगे बढ़ चुके हैं। डिस्ट्रीब्यूशन अब एक प्रमुख 'फोर्स मल्टीप्लायर' (force multiplier) है—जो क्लाउड, AI और हाइपरस्केलर-केंद्रित सप्लायर्स को जोखिम कम करने, तेजी से स्केल करने, नए बाजारों में प्रवेश करने और जटिल होते डिजिटल इकोसिस्टम को प्रबंधित (orchestrate) करने में मदद कर रहा है। ये सेवाएं उन सभी पुरानी और भरोसेमंद मूल्यवान सेवाओं के ऊपर काम करती हैं, जिनकी उम्मीद वेंडर्स अपने विश्वसनीय डिस्ट्रीब्यूटर पार्टनर्स से करते हैं।"
 

क्लाउड, XaaS और AI-संचालित समाधान ऐसी परिचालन, वित्तीय और तकनीकी जटिलता पेश करते हैं कि अधिकांश उभरते और स्थापित सप्लायर्स के पास इन पेशकशों को स्वतंत्र रूप से स्केल करने के लिए संसाधन ही नहीं होते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन इन संगठनों को आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी IT इकोसिस्टम में सफल होने के लिए आवश्यक परिचालन दक्षता, वित्तीय लाभ और वैश्विक पहुंच प्रदान करता है।
 

डिस्ट्रीब्यूशन के नए प्रमुख वैल्यू प्रपोजिशन

वेंडर के अधिकारियों के वैश्विक सर्वेक्षण और उत्तरी अमेरिका, EMEA तथा APJ में चैनल लीडर्स के साथ गहन साक्षात्कारों में कई महत्वपूर्ण प्रवृत्तियों (trends) पर प्रकाश डाला गया। रिपोर्ट उन कई गतिविधियों को रेखांकित करती है जो IT इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत और अधिक मूल्यवान भविष्य का निर्माण कर रही हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ काम करने से सप्लायर्स को मिलने वाले कुछ लाभ इस प्रकार हैं:

पार्टनर इकोसिस्टम का विकास एक प्राथमिकता है: 80% वेंडर अधिकारी इस डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू-ऐड को अपनी गो-टू-मार्केट सफलता में सबसे महत्वपूर्ण योगदान मानते हैं, जिसमें 57% उत्तरदाताओं ने 'सेल्स इनेबलमेंट' संसाधनों का हवाला दिया है। यह क्लाउड और AI-संचालित समाधानों को बेचने और समर्थन करने के लिए शिक्षा, उपकरण और मार्गदर्शन की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का अडॉप्शन मजबूत है: 86% सप्लायर्स आज या तो कम से कम एक प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं या ऑनलाइन लेनदेन, लाइफसाइकिल प्रबंधन और एनालिटिक्स का समर्थन करने के लिए विकल्पों का सक्रिय रूप से मूल्यांकन कर रहे हैं।

हाइपरस्केलर संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं: 60% वेंडर्स के इन इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लायर्स के साथ सीधे संबंध हैं, जिनमें से 40% डायरेक्ट और डिस्ट्रीब्यूटर-समर्थित दोनों मॉडलों का लाभ उठा रहे हैं। यह इन संगठनों और व्यापक चैनल इकोसिस्टम के बीच एक सेतु के रूप में डिस्ट्रीब्यूशन के बढ़ते महत्व को स्पष्ट करता है।

अतिरिक्त सर्वेक्षण निष्कर्ष इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि डिस्ट्रीब्यूटर्स जोखिम कम करने, रिन्यूअल ऑर्केस्ट्रेशन (renewal orchestration), मार्केटप्लेस ऑनबोर्डिंग और AI-संचालित एनालिटिक्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं—जो कि प्रौद्योगिकी के सब्सक्रिप्शन, खपत और परिणाम-आधारित (outcome-based) मॉडलों की ओर स्थानांतरित होने के कारण बेहद आवश्यक क्षमताएं हैं।
 

पूरी रिपोर्ट, 'Distribution: The Digital Force Multiplier', साथ ही अन्य मूल्यवान उद्योग अनुसंधान और संसाधन, GTDC नॉलेज हब पर निःशुल्क उपलब्ध हैं।
 

GTDC के बारे में

ग्लोबल टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूशन काउंसिल (GTDC) दुनिया के प्रमुख टेक डिस्ट्रीब्यूटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला उद्योग संघ (industry consortium) है। GTDC सदस्य विविध व्यावसायिक चैनलों के माध्यम से उत्पादों, सेवाओं और समाधानों की अनुमानित $180 बिलियन की वार्षिक विश्वव्यापी बिक्री को गति देते हैं। GTDC सम्मेलन रणनीतिक आपूर्ति-श्रृंखला (supply-chain) साझेदारी के विकास और विस्तार का समर्थन करते हैं जो वेंडर्स, अंतिम ग्राहकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की तेजी से बदलती बाजार जरूरतों को लगातार पूरा करते हैं। GTDC के सदस्यों में AB S.A, Arrow Electronics, CMS Distribution, Computer Gross Italia S.p.A., D&H Distributing, ELKO Group, Esprinet S.p.A., Exclusive Networks, Exertis, Infinigate, Ingram Micro, Intcomex, Logicom Public Limited, Mindware, Nexora, Redington Limited, SiS Technologies, Tarsus Distribution, TD SYNNEX, TIM AG, VSTECS Holdings Limited और Westcon-Comstor शामिल हैं।
 

अष्टमी पर लिए जाएंगे वर्षीतप के संकल्प,इस वर्ष 14 महीने से अधिक चलेगी तप साधना,अगले वर्ष अक्षय तृतीया तक रहेगा उपवास-आहार का कठोर क्रम

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  धर्म।  जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (बुधवार, 11 मार्च 2026) को लिए जाएंगे। यह पावन दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
   इस अवसर पर जैन समाज के साधु-साध्वियाँ तथा श्रावक-श्राविकाएँ वर्षीतप का संकल्प लेकर कठिन तप साधना का आरंभ करेंगे। संकल्प लेने के बाद साधक अगले वर्ष अक्षय तृतीया तक उपवास और संयम का कठोर नियम निभाते हैं।
जैन समाज में वर्षीतप को सबसे कठिन और पुण्यदायी तपों में गिना जाता है। श्रद्धालु इसे केवल उपवास नहीं, बल्कि म आत्मसंयम, त्याग और आत्मशुद्धि की महान साधना मानते हैं। इस दौरान साधक संयमित जीवन, ध्यान, स्वाध्याय और धार्मिक साधना में समय व्यतीत करते हैं।

दो वर्षों तक चलता है तप का कठिन क्रम -

इस तप का नियम अत्यंत कठोर होता है। इसमें साधक पूरे तेरह महीने एक विशेष क्रम का पालन करते हैं—एक दिन पूर्ण उपवास,दूसरे दिन आहार। यह क्रम लगातार लंबे समय तक चलता रहता है। उपवास और आहार का यह क्रम लगभग एक वर्ष से अधिक अवधि तक चलता है, जिसके कारण इसे अत्यंत कठिन तप साधना माना जाता है।
  साधक इस दौरान अपने दैनिक जीवन को पूरी तरह अनुशासन में ढाल लेते हैं। भोजन, व्यवहार, वाणी, विचार और आचरण—सभी में संयम का पालन किया जाता है। तप का उद्देश्य केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, मन की स्थिरता और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।

23 प्रकार के आहारों का त्याग करेंगे साधक -

  वर्षीतप का संकल्प लेने वाले साधक कई प्रकार के आहारों का त्याग करते हैं। जैन धर्म की परंपरा के अनुसार इस तप में लगभग 23 प्रकार के खाद्य पदार्थों का त्याग किया जाता है।
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
  बासी भोजन,जमीकंद, बहुबीज वाले पदार्थ, अधिक मसालेदार भोजन, तामसिक आहार। इसके साथ ही साधक अनेक अन्य धार्मिक नियमों का भी पालन करते हैं—रात्रि में जल ग्रहण नहीं करना, प्रतिदिन सुबह और शाम प्रतिक्रमण करना, दोनों समय गुरुवंदन करना,स्वाध्याय और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन।

ध्यान और आत्मचिंतन
   इस प्रकार वर्षीतप केवल उपवास की साधना नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संयम और आध्यात्मिक अनुशासन का अभ्यास है।

दीर्घकालीन तप के प्रेरणास्रोत -

   जैन समाज में कई संत और साधक वर्षीतप जैसी कठिन साधनाओं के माध्यम से समाज को प्रेरणा देते रहे हैं।
स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के चतुर्थ आचार्य डॉ. शिव मुनि इस वर्ष 20 अप्रैल को अपना 41वाँ वर्षीतप पूर्ण कर 42वें वर्षीतप में प्रवेश करेंगे।
  इतने लंबे समय तक निरंतर तप साधना करने वाले आचार्य शिव मुनि जैन समाज के एकमात्र आचार्य हैं जो यह तपस्या कर रहे हैं, इसके अलावा हज़ारों की संख्या में साधु - साध्वी, श्रावक- श्राविकाएं यह तप साधना कर रहे है।
   उनकी तपस्या, त्याग और अनुशासन जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और अनेक श्रद्धालु उनसे प्रेरित होकर तप और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।

तेरह महीने तक नहीं मिला पारणा-

   जैन परंपरा के अनुसार जब भगवान आदिनाथ ने दीक्षा ग्रहण की, तब उन्होंने संकल्प लिया कि वे गन्ने के रस से ही अपना पारणा करेंगे।
   उस समय किसी को इस विधि की जानकारी नहीं थी, इसलिए कोई भी उन्हें गन्ने का रस अर्पित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप उन्हें लगभग तेरह महीने तक पारणा नहीं मिला और वे निरंतर तपस्या करते रहे।
   अंततः उनका पहला पारणा हस्तिनापुर में हुआ। जैन परंपरा के अनुसार राजा श्रेयांस कुमार ने उन्हें गन्ने का रस अर्पित कर उनका पारणा कराया।
   इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आज भी जैन समाज अक्षय तृतीया के दिन वर्षीतप का पारणा “इक्षुरस” से अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ करते है।


अधिकमास के कारण इस वर्ष बढ़ेगी तप की अवधि-

  धार्मिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अधिकमास पड़ने के कारण इस बार वर्षीतप की अवधि सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रहेगी।

इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा-

  एक सामान्य ज्येष्ठ और एक अधिक ज्येष्ठ। अधिकमास 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इसके कारण वर्षीतप साधकों को लगभग 14 महीनों से अधिक समय तक तप साधना करनी होगी।

आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व -
      
     श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने बताया कि वर्षीतप जैन धर्म में केवल तपस्या नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व माना जाता है। यह तप मनुष्य को त्याग, धैर्य, अनुशासन और आत्मसंयम का पाठ पढ़ाता है।
आज के भौतिकवादी और भागदौड़ भरे जीवन में भी अनेक श्रद्धालु इस कठिन तप साधना को अपनाकर यह संदेश देते हैं कि आध्यात्मिक शक्ति, आत्मसंयम और आस्था के बल पर मनुष्य किसी भी कठिन साधना को पूर्ण कर सकता है।

महेश कुमार वर्मा को प्रदेश समन्वयक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा






 





  राजगढ़/धार।भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इंदौर संभाग अध्यक्ष महेश कुमार वर्मा को प्रदेश समन्वयक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। यह निर्णय संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की हालिया बैठक में लिया गया, जिसमें श्री वर्मा के नेतृत्व गुणों, समन्वय कौशल और संगठन के प्रति समर्पण को सराहा गया।
 महेश कुमार वर्मा लंबे समय से इंदौर संभाग में मानव अधिकारों, सामाजिक न्याय और सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। प्रदेश समन्वयक के रूप में वे अब पूरे मध्य प्रदेश स्तर पर शासन-प्रशासन से समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे। ट्रस्ट की गतिविधियों का समन्वय करेंगे, जिसमें जिला एवं संभाग स्तरीय समितियों का संचालन, जन-जागरूकता अभियान, कार्यक्रम आयोजन और नीतिगत निर्णय शामिल हैं।
    ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने इस नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "वर्मा का अनुभव और प्रतिबद्धता प्रदेश स्तर पर ट्रस्ट की गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। राष्ट्रीय संयोजक प्रेम कुमार वैद्य ने कहा कि महेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की समितियां एकजुट होकर मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करेंगे। 
    राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष संतोष सिंह पंवार, डॉ  बलबहादुरसिंह राठौड़, बी जे उपाध्याय, डॉ श्री आशीष वैद्य, ऐश्वर्य शास्त्री, प्रवीण कुमार शर्मा,योगेन्द्र तिवारी धार जिला अध्यक्ष,कैलाश चंद्र बघेल एवं समस्त जिला एवं संभागीय कार्यकारिणी द्वारा श्री वर्मा के नेतृत्व कौशल की सराहना करते हुए बधाईयां प्रेषित की गई।

वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई अपना दल (एस) की संगठन समीक्षा बैठक, मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार पर जोर






 



  भोपाल : होली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए अपना दल (एस) की नियमित संगठन समीक्षा बैठक इस बार वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व, वर्तमान एवं निवर्तमान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल भी जुड़े। इसके अतिरिक्त पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी श्री आर. बी. सिंह पटेल की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। वहीं मध्य प्रदेश से पार्टी के कुछ पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रदेश में संगठन की स्थिति और संभावनाओं को रेखांकित किया।

  बैठक के दौरान संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने और बूथ स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पार्टी की ताकत उसके कार्यकर्ताओं में है और यदि बूथ स्तर तक संगठन मजबूत होगा तो पार्टी का विस्तार और प्रभाव स्वतः बढ़ेगा। उन्होंने प्रदेशों के पदाधिकारियों से समन्वय बनाकर संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने का आह्वान किया।

 बैठक में उपस्थित प्रदेश पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों की जानकारी साझा की। साथ ही आगामी समय में सदस्यता अभियान को और तेज करने तथा समाज के सभी वर्गों तक पार्टी की नीतियों और विचारों को पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा की गई। विशेष रूप से मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार और मजबूत राजनीतिक छवि बनाने को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए।

जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव





 


 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के संबंध में दिए निर्देश

 नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से किया जाए विकसित

 सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्व हो

  भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण नहीं, विकास का आधार भी है। यह भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का भी एक प्रयास है। अभियान अंतर्गत संचालित हर गतिविधि में राज्य से ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। भू-जल स्त्रोतों के दोहन से गिरते भू-जल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए भी सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। प्रदेश में पिछले जल गंगा संवर्धन अभियान के सुखद परिणाम प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2026 के अभियान में भी हमें जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को प्रभावी और परिणामूलक बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में गुरूवार को आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में वर्ष 2025 के जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष-2026 की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर सतत् रूप से निगरानी रखने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा और उनके आस-पास सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यक्तिगत पहल तथा सामुदायिक सहभागिता से प्याऊ लगाने की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्लास्टिक की बोतल के उपयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ शीतल पेयजल उपलब्ध कराने को सामाजिक दायित्व के रूप में समाज में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिन जिलों में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने यह प्रयास अन्य जिलों से साझा करें तथा जिले परस्पर इस तरह के नवाचारों का आदान-प्रदान करें।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को नेतृत्व प्रदान करें। सांसद, विधायक, पंचायत, नगरीय‍निकाय के सभी प्रतिनिधि सक्रियता से अभियान में सहभागिता करें। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी जनसहभागिता संबंधी गतिविधियों में जोड़ा जाए। जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्यों के क्रियान्वयन की प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नोडल और नगरीय प्रशासन एवं विकास सह नोडल विभाग होगा। राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नर्मदा घाटी विकास, वन, जन अभियान परिषद, उद्योग एवं एमएसएमई, पर्यावरण, संस्कृत, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग सहभागिता करेंगे। बैठक में अभियान के अंतर्गत वर्ष-2025 की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।

19 मार्च से प्रारंभ होगा राज्य स्तरीय अभियान

  बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से एक साथ आरंभ किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों में विक्रम संवत् और पर्यावरण, जलीय संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन पर गतिविधियां संचालित होंगी। अभियान के अंतर्गत 23 से 24 मई तक भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन होगा, 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा, 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर शिप्रा तट उज्जैन में महादेव नदी कथा, 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम होगा। इसमें प्रदेश की कृषि भूमि के सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत कार्य प्रस्तावित किये गये।

  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 170 करोड़ रूपए लागत के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। वर्ष 2025 में आरंभ 2500 करोड़ रूपए की लागत के 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। विभाग जल जीवन मिशन की सिंगल विलेज स्कीम के कार्य क्षेत्रों में भू-जल संवर्धन के कार्य और प्राचीन परम्परागत जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा।

  अभियान के अंतर्गत मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना तथा एक बगिया माँ के नाम परियोजना के अंतर्गत गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

  बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों की पुर्नउत्थान की योजना तैयार होगी।

  नगरीय विकास विभाग नगरीय‍निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। युवाओं की भागीदारी के लिए उन्हें अमृत मित्र बनाकर 'माय भारत पोर्टल' पर पंजीयन किया जाएगा। अभियान में 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। नदियों में मिलने वाले 20 नालों की शोधन प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया जाएगा।

    नगरीय‍निकायों द्वारा नदी, तालाब, बावड़ी का संवर्धन, नालों की सफाई, बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी किया जाएगा। वातावरण निर्माण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैली और शालाओं में आईईसी गतिविधियां संचालित होंगी।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के भूजल स्त्रोतों के रिचार्ज, पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और रख-रखाव के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

   वन विभाग द्वारा अविरल निर्मल नर्मदा अंतर्गत भूजल संवर्धन के कार्य तथा वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधों के रोपण की योजना है।

   वन्य जीवों को पानी की उपलब्धता के लिए 25 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा।

  महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केन्द्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्थापित करने, जल संरक्षण के ग्राम स्तर पर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने और आंगनवाड़ी केन्द्रों को जल एवं पोषण मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित कर समुदाय को प्रेरित करने जैसी गतिविधियां संचालित करेगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रूपए और पोषण वाटिका के लिए 10 हजार रूपए स्वीकृत हैं।